📘 NCERT Solutions • कक्षा 11 • हिंदी माध्यम
कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 1: रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ (NCERT Solutions) | मोल, मोलरता, द्रव्यमान प्रतिशत, सीमित अभिकारक
इस पोस्ट में Class 11 Chemistry Chapter 1 NCERT Solutions (Hindi Medium) को आसान भाषा में step-by-step समझाया गया है। यहाँ आपको मोल अवधारणा, मोलरता/मोललता, द्रव्यमान प्रतिशत, अनुभविक व आणविक सूत्र, सीमित अभिकारक, समस्थानिकों का औसत परमाणु द्रव्यमान, वैज्ञानिक संकेत और सार्थक अंक जैसे सभी जरूरी टॉपिक्स के NCERT आधारित solved questions मिलेंगे।
✅ मोल Concept
✅ मोलरता और मोललता
✅ द्रव्यमान प्रतिशत
✅ सीमित अभिकारक
✅ सार्थक अंक
✅ Empirical/Molecular Formula
Showing all questions
Q.1: निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए:
(i) H2O
(ii) CO2
(iii) CH4
(i) H2O
(ii) CO2
(iii) CH4
उत्तर
✅ (i) H2O का मोलर द्रव्यमान = 18 g mol−1✅ (ii) CO2 का मोलर द्रव्यमान = 44 g mol−1
✅ (iii) CH4 का मोलर द्रव्यमान = 16 g mol−1
| यौगिक | गणना | मोलर द्रव्यमान |
|---|---|---|
| H2O | 2×H + O | 18 g mol−1 |
| CO2 | C + 2×O | 44 g mol−1 |
| CH4 | C + 4×H | 16 g mol−1 |
व्याख्या – Step by Step
परमाणु द्रव्यमान (लगभग):H = 1, C = 12, O = 16
(i) H2O
H2O = 2×H + 1×O
= 2×1 + 16
= 18 g mol−1
(ii) CO2
CO2 = 1×C + 2×O
= 12 + 2×16
= 12 + 32
= 44 g mol−1
(iii) CH4
CH4 = 1×C + 4×H
= 12 + 4×1
= 16
= 16 g mol−1
क्या आप जानते हैं?
👉 मोलर द्रव्यमान निकालने की सबसे आसान ट्रिक:सूत्र में जितने परमाणु हों, उनके परमाणु द्रव्यमान को गुणा करके जोड़ दो।
Q.2: सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) में उपस्थित विभिन्न तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ Na (सोडियम) का द्रव्यमान प्रतिशत = 32.39%✅ S (सल्फर) का द्रव्यमान प्रतिशत = 22.54%
✅ O (ऑक्सीजन) का द्रव्यमान प्रतिशत = 45.07%
| Element | Total mass in Na₂SO₄ (g) | Mass % |
|---|---|---|
| Na | 46 | 32.39% |
| S | 32 | 22.54% |
| O | 64 | 45.07% |
व्याख्या – Step by Step
Step 1: परमाणु द्रव्यमान लेंNa = 23, S = 32, O = 16
Step 2: Na₂SO₄ का मोलर द्रव्यमान निकालें
\[
M(\text{Na}_2\text{SO}_4)=2\times23+32+4\times16
\]
\[
=46+32+64=142\ \text{g mol}^{-1}
\]
Step 3: द्रव्यमान प्रतिशत का सूत्र
\[
\%\ \text{Element}=\frac{\text{Element का कुल द्रव्यमान}}{\text{Compound का molar mass}}\times100
\]
(i) Na का %Na का कुल द्रव्यमान = 2×23 = 46
\[
\%\text{Na}=\frac{46}{142}\times100=32.39\%
\]
(ii) S का %S का द्रव्यमान = 32
\[
\%\text{S}=\frac{32}{142}\times100=22.54\%
\]
(iii) O का %O का कुल द्रव्यमान = 4×16 = 64
\[
\%\text{O}=\frac{64}{142}\times100=45.07\%
\]
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी भी यौगिक में सभी तत्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का योग हमेशा 100% होता है। ✅Quick Check:
\[
32.39+22.54+45.07=100.00\%
\]
👉 ये quick check आपके answer को confirm कर देता है।
Q.3: आयरन के उस ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula) ज्ञात कीजिए, जिसमें द्रव्यमान के अनुसार 69.9% आयरन और 30.1% ऑक्सीजन है।
उत्तर
✅ Empirical formula = Fe2O3
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मान लें 100 g यौगिक हैFe = 69.9 g
O = 30.1 g
Step 2: मोल निकालें
परमाणु द्रव्यमान: Fe = 55.85 g/mol, O = 16 g/mol
\[
\text{moles of Fe}=\frac{69.9}{55.85}\approx1.25
\]
\[
\text{moles of O}=\frac{30.1}{16}\approx1.88
\]
Step 3: सबसे छोटे मोल से भाग देंसबसे छोटा = 1.25
\[
\text{Fe}:\frac{1.25}{1.25}=1
\qquad
\text{O}:\frac{1.88}{1.25}\approx1.50
\]
अनुपात = Fe : O = 1 : 1.5
Step 4: दशमलव हटाने के लिए 2 से गुणा करें
\[
1\times2=2
\qquad
1.5\times2=3
\]
अनुपात = Fe2 : O3
✅ इसलिए empirical formula = Fe2O3
क्या आप जानते हैं?
👉 Empirical formula निकालने का shortcut ✅✅ % को 100 g मानकर ग्राम ले लो
✅ ग्राम को परमाणु द्रव्यमान से भाग देकर मोल निकालो
✅ सबसे छोटे मोल से भाग देकर ratio लो
✅ अगर 0.5 आए तो 2 से गुणा करके whole number बना लो
Q.4: प्राप्त कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा निकालिए, जब
(i) 1 मोल कार्बन (C) हवा में जलाया जाए
(ii) 1 मोल कार्बन (C) को 16 g ऑक्सीजन (O₂) में जलाया जाए
(i) 1 मोल कार्बन (C) हवा में जलाया जाए
(ii) 1 मोल कार्बन (C) को 16 g ऑक्सीजन (O₂) में जलाया जाए
उत्तर
✅ (i) CO₂ = 1 मोल = 44 g✅ (ii) CO₂ = 0.5 मोल = 22 g
| Case | दिया गया | CO₂ (मोल) | CO₂ (द्रव्यमान) |
|---|---|---|---|
| (i) | 1 mol C (हवा में O₂ अधिक मात्रा में) | 1 mol | 44 g |
| (ii) | 1 mol C + 16 g O₂ | 0.5 mol | 22 g |
व्याख्या – Step by Step
अभिक्रिया (Reaction)
C + O2 → CO2
1 मोल C + 1 मोल O2 → 1 मोल CO2
(i) 1 मोल C हवा में जलाया जाए1 मोल C + 1 मोल O2 → 1 मोल CO2
हवा में O₂ पर्याप्त (अधिक मात्रा में) होता है, इसलिए पूरा 1 मोल C जल जाएगा।
CO₂ के मोल = 1 मोल
द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान
CO2 का मोलर द्रव्यमान = 44 g/mol
CO2 का द्रव्यमान = 1 × 44 = 44 g
✅ इसलिए CO₂ = 1 मोल = 44 g
CO2 का मोलर द्रव्यमान = 44 g/mol
CO2 का द्रव्यमान = 1 × 44 = 44 g
(ii) 1 मोल C को 16 g O₂ में जलाया जाए
यहाँ O₂ कम है, इसलिए पहले O₂ के मोल निकालते हैं।
(O2 का मोलर द्रव्यमान = 32 g/mol)
O2 के मोल = 16 ÷ 32 = 0.5 मोल
अभिक्रिया के अनुसार 1 मोल O₂ से 1 मोल CO₂ बनती है, इसलिए0.5 मोल O₂ से 0.5 मोल CO₂ बनेगी।
CO2 का द्रव्यमान = 0.5 × 44 = 22 g
✅ इसलिए CO₂ = 0.5 मोल = 22 g
क्या आप जानते हैं?
👉 जहाँ कोई अभिकारक कम मात्रा में हो, वही सीमित अभिकारक (Limiting reagent) बन जाता है। ✅👉 (ii) में O₂ कम है, इसलिए CO₂ भी आधी मात्रा (0.5 मोल) बनेगी।
Q.5: सोडियम एसीटेट (CH₃COONa) का 500 mL, 0.375 मोलर जलीय विलयन बनाने के लिए कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी?
(दिया है: CH₃COONa का मोलर द्रव्यमान = 82.0245 g mol⁻¹)
(दिया है: CH₃COONa का मोलर द्रव्यमान = 82.0245 g mol⁻¹)
उत्तर
✅ आवश्यक सोडियम एसीटेट (CH₃COONa) = 15.38 gव्याख्या – Step by Step
Step 1: यहाँ उपयोग होने वाला सूत्र (mL के लिए)मोलरता (M) का सूत्र:
\(
M=\frac{w(g)\times1000\ (mL/L)}{M\ (g\ mol^{-1})\times V(mL)}
\)
जहाँ👉 M = मोलरता (mol L⁻¹)
👉 w = विलेय का द्रव्यमान (g)
👉 V = विलयन का आयतन (mL)
Step 2: मान रखें
👉 M = 0.375 mol L⁻¹
👉 मोलर द्रव्यमान = 82.0245 g mol⁻¹
👉 V = 500 mL
\(
0.375\ (mol\ L^{-1})=\frac{w(g)\times1000}{(82.0245\ g\ mol^{-1})\times(500\ mL)}
\)
अब w के लिए:
\(
w=\frac{0.375\ (mol\ L^{-1})\times 82.0245\ (g\ mol^{-1})\times 500\ (mL)}{1000\ (mL/L)}
\)
\(
w=15.38\ g
\)
✅ इसलिए आवश्यक द्रव्यमान w = 15.38 g
क्या आप जानते हैं?
👉 इस shortcut formula में ×1000 इसलिए आता है क्योंकि आयतन mL में है।👉 अगर आयतन L में हो, तो 1000 वाला factor लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
Q.6: सांद्र नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) के उस प्रतिदर्श की मोलरता (मोल प्रति लीटर में सान्द्रता) ज्ञात कीजिए, जिसमें
द्रव्यमान प्रतिशत = 69% तथा घनत्व = 1.41 g mL⁻¹ है।
द्रव्यमान प्रतिशत = 69% तथा घनत्व = 1.41 g mL⁻¹ है।
उत्तर
✅ HNO₃ विलयन की मोलरता = 15.44 mol L⁻¹ (लगभग 15.44 M)व्याख्या – Step by Step
Step 1: 100 g विलयन मान लेते हैं69% (द्रव्यमान प्रतिशत) का अर्थ:
• 100 g विलयन में HNO₃ = 69 g
Step 2: HNO₃ का मोलर द्रव्यमान
HNO₃ = 1 + 14 + (3 × 16) = 63 g mol⁻¹
Step 3: HNO₃ के मोल निकालें
👉 HNO₃ के मोल = HNO₃ का द्रव्यमान / HNO₃ का मोलर द्रव्यमान
👉 HNO₃ के मोल = 69 g / 63 g mol⁻¹ = 1.095 mol
Step 4: 100 g विलयन का आयतन निकालें (घनत्व से)
घनत्व = 1.41 g mL⁻¹
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
इसलिए, आयतन = द्रव्यमान / घनत्व
आयतन = 100 g / 1.41 g mL⁻¹ = 70.92 mL
Step 5: मोलरता (M) निकालें
मोलरता = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (L में)
70.92 mL = 0.07092 L
मोलरता (M) = 1.095 mol / 0.07092 L = 15.44 mol L⁻¹
✅ इसलिए HNO₃ विलयन की मोलरता 15.44 mol L⁻¹ (≈ 15.44 M) है।
क्या आप जानते हैं?
👉 द्रव्यमान प्रतिशत दिया हो तो सबसे आसान तरीका है: 100 g विलयन मान लो।👉 घनत्व (g mL⁻¹) से विलयन का आयतन mL में निकल जाता है, फिर उसे L में बदलकर मोलरता निकालते हैं।
Q.7: 100 g कॉपर सल्फेट (CuSO₄) से कितना कॉपर (Cu) प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर
✅ 100 g CuSO₄ से 39.81 g Cu प्राप्त किया जा सकता है।
व्याख्या – Unitary Method
Step 1: CuSO₄ का मोलर द्रव्यमान निकालेंCuSO₄ = Cu + S + 4O
= 63.5 + 32 + 4×16
= 63.5 + 32 + 64
= 159.5 g mol⁻¹
Step 2: Unitary method लगाएँ
159.5 g CuSO₄ में Cu = 63.5 g
तो 1 g CuSO₄ में Cu = 63.5 / 159.5 g
अब 100 g CuSO₄ में Cu = (63.5 / 159.5) × 100 g
Cu (g) = (63.5 × 100) / 159.5 = 39.81 g
✅ इसलिए 100 g CuSO₄ से 39.81 g Cu मिलेगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 Unitary method में बस याद रखें:“जितना दिया है → उतना मिलेगा”
यानी पहले 1 g के लिए निकालो, फिर 100 g से गुणा कर दो ✅
Q.8: आयरन के ऑक्साइड का आणविक सूत्र ज्ञात कीजिए, जिसमें आयरन तथा ऑक्सीजन का द्रव्यमान प्रतिशत क्रमशः 69.9% तथा 30.1% है। (यौगिक का मोलर द्रव्यमान 159.7 g mol-1)
उत्तर
✅ आणविक सूत्र = Fe2O3व्याख्या
मान लेते हैं 100 g यौगिक हैतो Fe = 69.9 g और O = 30.1 g
| S.No. | तत्व | ग्राम में मात्रा | परमाणु द्रव्यमान | मोल | सरल अनुपात | पूर्णांक अनुपात | मूलानुपाती सूत्र |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Fe | 69.9 | 55.85 (≈56) | 69.9 ÷ 55.85 = 1.25 | 1.25 ÷ 1.25 = 1 | 1 × 2 = 2 | Fe2 |
| 2 | O | 30.1 | 16 | 30.1 ÷ 16 = 1.88 | 1.88 ÷ 1.25 = 1.50 | 1.50 × 2 = 3 | O3 |
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = (2 × 55.85) + (3 × 16) = 159.7 g mol-1
n = यौगिक का मोलर द्रव्यमान / यौगिक का मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान
n = 159.7 / 159.7 = 1
✅ अतः दिये गये आक्साइड का आण्विक सूत्र:
आण्विक सूत्र = n × मूलानुपाती सूत्र
आण्विक सूत्र = 1 × Fe2O3= 1 आण्विक सूत्र = Fe2O3
क्या आप जानते हैं?
👉 जब सरल अनुपात में 1.5 आता है, तो उसे पूर्णांक बनाने के लिए पूरे अनुपात को 2 से गुणा कर देते हैं।👉 इसलिए 1 : 1.5 → 2 : 3 बन जाता है और सूत्र Fe2O3 मिल जाता है।
Q.9: निम्नलिखित आँकड़ों के आधार पर क्लोरीन (Cl) का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
| % तत्व | प्राकृतिक उपलब्धतता | मोलर द्रव्यमान |
|---|---|---|
| 35Cl | 75.77 | 34.9689 |
| 37Cl | 24.23 | 36.9659 |
उत्तर
✅ क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान = 35.4527 u (लगभग 35.45 u)
व्याख्या – Step by Step
औसत परमाणु द्रव्यमान = (प्रतिशत बहुलता × परमाणु द्रव्यमान) का योग ÷ 100
| समस्थानिक | प्राकृतिक उपलब्धता (%) | परमाणु द्रव्यमान (u) | गुणनफल |
|---|---|---|---|
| 35Cl | 75.77 | 34.9689 | 75.77 × 34.9689 = 2649.59 |
| 37Cl | 24.23 | 36.9659 | 24.23 × 36.9659 = 895.95 |
कुल = 2649.59 + 895.95 = 3545.54 (लगभग)
Step 3: 100 से भाग दें
👉 औसत परमाणु द्रव्यमान = 3545.27 / 100 = 35.4527 u
✅ इसलिए औसत परमाणु द्रव्यमान = 35.4527 u ≈ 35.45 u
क्या आप जानते हैं?
👉 क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान पूरी संख्या (35 या 37) नहीं आता क्योंकि प्रकृति में क्लोरीन दो समस्थानिकों (³⁵Cl और ³⁷Cl) के मिश्रण के रूप में मिलता है।👉 जिस समस्थानिक की बहुलता ज्यादा होती है, औसत परमाणु द्रव्यमान उसी के आसपास आता है (यहाँ ³⁵Cl ज्यादा है, इसलिए औसत 35 के करीब है)।
Q.10: एथेन (C₂H₆) के 3 मोल में निम्नलिखित की गणना कीजिए:
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या
(i) कार्बन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोलों की संख्या
(iii) एथेन के अणुओं की संख्या
उत्तर
✅ (i) कार्बन परमाणुओं के मोल = 6 मोल✅ (ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोल = 18 मोल
✅ (iii) एथेन के अणुओं की संख्या = 1.8066 × 1024 अणु (लगभग 1.81 × 1024)
व्याख्या – Step by Step
एथेन का सूत्र: C2H6मतलब 1 अणु में:
👉 कार्बन = 2 परमाणु
👉 हाइड्रोजन = 6 परमाणु
अब 3 मोल C2H6 के लिए:
📌 (i) कार्बन परमाणुओं के मोल
1 मोल C2H6 में कार्बन परमाणु = 2 मोल
तो 3 मोल में = 3 × 2 = 6 मोल
📌 (ii) हाइड्रोजन परमाणुओं के मोल
1 मोल C2H6 में हाइड्रोजन परमाणु = 6 मोल
तो 3 मोल में = 3 × 6 = 18 मोल
📌 (iii) एथेन के अणुओं की संख्या
एवोगाद्रो संख्या (Na) = 6.022 × 1023 अणु प्रति मोल
तो 3 मोल में अणु = 3 × 6.022 × 1023 = 1.8066 × 1024 अणु
क्या आप जानते हैं?
👉 “मोल” गिनती की सबसे आसान यूनिट है: 1 मोल = 6.022 × 1023 कण (अणु/परमाणु)।👉 किसी भी यौगिक में “परमाणुओं के मोल” निकालने के लिए बस सूत्र में लिखी संख्या से गुणा कर दो।
Q.11: यदि 20 g चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) को जल की पर्याप्त मात्रा में घोलने पर विलयन का आयतन 2 L हो जाए, तो इस विलयन की सान्द्रता क्या होगी?
उत्तर
✅ चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) विलयन की मोलरता = 0.0292 mol L-1 (लगभग 0.029 M)(अर्थात लगभग 0.03 M)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: चीनी का मोलर द्रव्यमान निकालेंC₁₂H₂₂O₁₁ का मोलर द्रव्यमान
= (12×12) + (22×1) + (11×16)
= 144 + 22 + 176
= 342 g mol-1
Step 2: चीनी के मोल निकालें
मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान
मोल = 20 g ÷ 342 g mol-1 = 0.0585 मोल
Step 3: मोलरता (मोलर सान्द्रता) निकालें
दिया गया आयतन = 2 L
मोलरता = मोल ÷ आयतन (L)
मोलरता = 0.0585 mol ÷ 2 L
मोलरता = 0.02925 mol L-1
✅ इसलिए मोलरता ≈ 0.0292 mol L-1 (≈ 0.029 M)
क्या आप जानते हैं?
👉 “सान्द्रता” कई तरह की हो सकती है।👉 अगर g L⁻¹ में पूछें, तो: 20 g / 2 L = 10 g L⁻¹
👉 लेकिन मोलरता में निकालने के लिए हमेशा मोलर द्रव्यमान से मोल निकालना जरूरी होता है।
Q.12: यदि मेथेनॉल (CH₃OH) का घनत्व 0.793 kg L⁻¹ हो, तो इसकी 0.25 M के 2.5 L विलयन को बनाने के लिए मेथेनॉल का कितना आयतन चाहिए?
उत्तर
✅ आवश्यक मेथेनॉल (CH₃OH) का आयतन = 0.025 L = 25 mL
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मेथेनॉल का मोलर द्रव्यमानCH₃OH का मोलर द्रव्यमान = 32 g mol⁻¹ = 0.032 kg mol⁻¹
Step 2: दिए गए मेथेनॉल (शुद्ध) की मोलरता निकालें
घनत्व (d) = 0.793 kg L⁻¹
मतलब 1 L मेथेनॉल का द्रव्यमान = 0.793 kg
मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान
मोल = 0.793 kg ÷ 0.032 kg mol⁻¹ = 24.78 mol
अर्थात शुद्ध मेथेनॉल की मोलरता = 24.78 mol L⁻¹
इसे M₁ मान लेते हैं:
M₁ = 24.78 M
Step 3: विलयन बनाने के लिए dilution का सूत्र
M₁ × V₁ = M₂ × V₂
जहाँ
👉 M₁ = 24.78 M (मेथेनॉल)
👉 M₂ = 0.25 M (बनाना है)
👉 V₂ = 2.5 L (बनाना है)
अब V₁ निकालें:
V₁ = (M₂ × V₂) ÷ M₁
V1 = (0.25 M × 2.5 L) ÷ 24.78 M = 0.025 L
0.025 L = 25 mL✅ इसलिए आवश्यक मेथेनॉल का आयतन = 0.025 L या 25 mL
क्या आप जानते हैं?
👉 घनत्व से हम “1 L में कितना द्रव्यमान है” निकाल लेते हैं, फिर मोलर द्रव्यमान से “1 L में कितने मोल हैं” पता चल जाता है।👉 इसके बाद dilution का सबसे आसान सूत्र: M₁V₁ = M₂V₂ ✅
Q.13: दाब को प्रति इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है।
SI मात्रक पास्कल है: 1 Pa = 1 N m⁻²
यदि समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm⁻² हो, तो पास्कल में दाब की गणना कीजिए।
SI मात्रक पास्कल है: 1 Pa = 1 N m⁻²
यदि समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान 1034 g cm⁻² हो, तो पास्कल में दाब की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ दाब = 1.01332 × 105 Pa (लगभग 1.01 × 105 Pa)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: दाब का सूत्रP = F / A
और F = mg
इसलिए P = mg / A
दिया है:
समुद्रतल पर हवा का द्रव्यमान = 1034 g cm⁻²
अर्थात 1 cm² क्षेत्रफल पर द्रव्यमान = 1034 g
अब इस द्रव्यमान को kg में बदलें:
1034 g = 1.034 kg
Step 2: क्षेत्रफल को m² में बदलें
1 m = 100 cm
तो 1 m² = 100 cm × 100 cm = 10,000 cm²
इसका मतलब:
1 cm² = 1 / 10,000 m²
Step 3: 1 cm² पर बल निकालें
F = mg
m = 1.034 kg
g = 9.8 m s⁻²
F = 1.034 × 9.8 N
Step 4: पास्कल में दाब
P = F / A
A = 1 cm² = 1/10000 m²
तो
P = (1.034 × 9.8) / (1/10000)
P = (1.034 × 9.8) × 10000
P = 101332 Pa
P = 1.01332 × 105 Pa
✅ इसलिए दाब = 1.01332 × 105 Pa
क्या आप जानते हैं?
👉 समुद्रतल पर वायुमंडलीय दाब लगभग 1.013 × 105 Pa (या 1 atm) होता है।👉 यही कारण है कि आपका उत्तर “standard atmospheric pressure” के बहुत करीब आता है।
Q.14: द्रव्यमान का SI मात्रक क्या है? इसे किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
उत्तर
✅ द्रव्यमान का SI मात्रक = किलोग्राम (kg)
व्याख्या – Step by Step
1) द्रव्यमान का SI मात्रकद्रव्यमान की SI इकाई किलोग्राम (kg) है।
2) किलोग्राम की परिभाषा (आपके दिए हुए idea के अनुसार)
पेरिस के निकट सैवरेस (Sèvres) में 0°C पर रखी प्लैटिनम–इरीडियम मिश्रधातु के एक विशेष मानक टुकड़े (या सिलिंडर/टुकड़ा) के द्रव्यमान को 1 मानक किलोग्राम माना गया है।
इसी मानक के आधार पर बाकी सभी द्रव्यमान मापे जाते हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 द्रव्यमान (mass) स्थान बदलने से नहीं बदलता, लेकिन भार (weight) बदल सकता है क्योंकिभार = m × g होता है और g अलग-अलग जगह अलग हो सकता है। ✅
Q.15: निम्नलिखित पूर्व-लग्नों (Prefixes) को उनके गुणांक (Powers of 10) के साथ मिलाइए।
उत्तर
✅ (i) माइक्रो (micro) → 10⁻⁶✅ (ii) डेका (deca) → 10¹ (यानी 10)
✅ (iii) मेगा (mega) → 10⁶
✅ (iv) गीगा (giga) → 10⁹
✅ (v) फेम्टो (femto) → 10⁻¹⁵
| पूर्व-लग्न (Prefix) | गुणांक (10 की घात) |
|---|---|
| माइक्रो (micro) | 10⁻⁶ |
| डेका (deca) | 10¹ |
| मेगा (mega) | 10⁶ |
| गीगा (giga) | 10⁹ |
| फेम्टो (femto) | 10⁻¹⁵ |
व्याख्या
👉 माइक्रो का अर्थ “दस लाखवाँ भाग” होता है, इसलिए 10⁻⁶।👉 डेका का अर्थ “दस गुना” होता है, इसलिए 10¹।
👉 मेगा का अर्थ “दस लाख” होता है, इसलिए 10⁶।
👉 गीगा का अर्थ “एक अरब” होता है, इसलिए 10⁹।
👉 फेम्टो बहुत ही छोटा मान दर्शाता है, इसलिए 10⁻¹⁵।
________________________________________
क्या आप जानते हैं?
📌 याद रखने की ट्रिक:👉 micro = “माइनस” में (10⁻⁶)
👉 mega, giga = “प्लस” में बड़े (10⁶, 10⁹)
👉 femto = बहुत ज्यादा छोटा (10⁻¹⁵)
Q.16: सार्थक अंकों (Significant Figures) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
✅ सार्थक अंक वे अंक होते हैं जो किसी मापन (measurement) की शुद्धता (accuracy) और विश्वसनीयता (certainty) को दर्शाते हैं।इनमें सभी निश्चित अंक (certain digits) और अंत का एक अनुमानित अंक (one uncertain/estimated digit) शामिल होता है।
व्याख्या – Step by Step
1) सार्थक अंक क्यों जरूरी हैं?जब हम किसी मात्रा को मापते हैं, तो उपकरण की सीमा के कारण मापन पूरी तरह exact नहीं होता।
इसलिए जो अंक हम लिखते हैं, वे बताते हैं कि मापन कितना सही है।
2) सार्थक अंकों में क्या-क्या आता है?
👉 निश्चित अंक: जो उपकरण से स्पष्ट रूप से पढ़े जा सकते हैं
👉 अनुमानित अंक: आखिरी अंक, जो अनुमान से लिखा जाता है
3) उदाहरण
👉 2.35 cm → इसमें 3 सार्थक अंक हैं (2, 3 और 5)
👉 0.00450 g → इसमें 3 सार्थक अंक हैं (4, 5 और 0)
👉 1200 (बिना दशमलव के) → इसमें सार्थक अंक स्पष्ट नहीं होते; लिखावट पर निर्भर करता है
________________________________________
क्या आप जानते हैं?
👉 मापन के आखिरी अंक में हमेशा थोड़ा-सा संदेह (uncertainty) होता है, और वही सार्थक अंकों का आधार बनता है।👉 वैज्ञानिक गणनाओं में उत्तर भी उतने ही सार्थक अंकों में लिखा जाता है जितने डेटा में होते हैं।
Q.17: किसी जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म (CHCl₃), जो कैंसरजन्य है, से अत्यधिक संदूषण पाया गया। संदूषण का स्तर 15 ppm (द्रव्यमान के रूप में) था।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता (molality) ज्ञात कीजिए।
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशतता में दर्शाइए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता (molality) ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ (i) 15 ppm = 0.0015% (द्रव्यमान प्रतिशत)✅ (ii) CHCl₃ की मोललता = 1.26 × 10-4 mol kg-1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
(i) 15 ppm को द्रव्यमान प्रतिशत में बदलना15 ppm (द्रव्यमान) का अर्थ है कि क्लोरोफॉर्म के 15 भाग (द्रव्यमान से) पानी के 106 भाग (द्रव्यमान से) में उपस्थित हैं।
द्रव्यमान प्रतिशत = (15 × 10-6) × 100 = 0.0015%
(ii) जल में CHCl₃ की मोललता (Molality)
CHCl₃ का मोलर द्रव्यमान:
C = 12.01, H = 1.008, Cl = 35.45
CHCl₃ = 12.01 + 1.008 + 3×35.45 = 119.37 g mol-1
106 g नमूने में क्लोरोफॉर्म की मात्रा = 15 g
103 g (1 kg) नमूने में क्लोरोफॉर्म की मात्रा = (15 g ÷ 106) × 103 = 1.5 × 10-2 g
103 g (1 kg) नमूने में क्लोरोफॉर्म के मोल:
क्लोरोफॉर्म के मोल = क्लोरोफॉर्म की मात्रा ÷ CHCl₃ का मोलर द्रव्यमान
= 1.5 × 10-2 g ÷ 119.37 g mol-1
= 1.255 × 10-4 mol
मोललता = (विलेय के मोल) / (विलायक का द्रव्यमान kg में)
✅ इसलिए मोललता = 1.26 × 10-4 mol kg-1
क्या आप जानते हैं?
👉 ppm (द्रव्यमान के रूप में) को जल्दी समझने की ट्रिक:x ppm (द्रव्यमान) का अर्थ है कि विलेय के x भाग (द्रव्यमान से) विलयन के 106 भाग (द्रव्यमान से) में उपस्थित हैं।
Q.18: निम्नलिखित को वैज्ञानिक संकेत (Scientific Notation) में लिखिए:
(i) 0.0048
(ii) 234,000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
(i) 0.0048
(ii) 234,000
(iii) 8008
(iv) 500.0
(v) 6.0012
उत्तर
✅ (i) 0.0048 = 4.8 × 10-3✅ (ii) 234,000 = 2.34 × 105
✅ (iii) 8008 = 8.008 × 103
✅ (iv) 500.0 = 5.000 × 102
✅ (v) 6.0012 = 6.0012 × 100
व्याख्या – Step by Step
वैज्ञानिक संकेत में लिखने का नियम:संख्या को ऐसा लिखते हैं कि दशमलव के बाईं तरफ केवल 1 गैर-शून्य अंक रहे, और फिर 10 की घात लगाते हैं।
👉 दशमलव बाएँ ले जाएँ → घात +
👉 दशमलव दाएँ ले जाएँ → घात −
(i) 0.0048 → दशमलव 3 स्थान दाएँ → 4.8, इसलिए 10-3
(ii) 234,000 → दशमलव 5 स्थान बाएँ → 2.34, इसलिए 105
(iii) 8008 → दशमलव 3 स्थान बाएँ → 8.008, इसलिए 103
(iv) 500.0 → दशमलव 2 स्थान बाएँ → 5.000, इसलिए 102
(v) 6.0012 → पहले से 1.10 के बीच → 100
क्या आप जानते हैं?
👉 500.0 को 5.000 × 102 लिखने से यह पता चलता है कि इसमें 4 सार्थक अंक हैं।👉 Scientific notation से संख्या छोटी/बड़ी होने पर भी गणना करना आसान हो जाता है।
Q.19: निम्नलिखित में सार्थक अंकों (Significant Figures) की संख्या बताइए:
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.00
(vi) 2.0034
(i) 0.0025
(ii) 208
(iii) 5005
(iv) 126,000
(v) 500.00
(vi) 2.0034
उत्तर
✅ (i) 0.0025 → 2 सार्थक अंक✅ (ii) 208 → 3 सार्थक अंक
✅ (iii) 5005 → 4 सार्थक अंक
✅ (iv) 126,000 → 3 सार्थक अंक
✅ (v) 500.00 → 5 सार्थक अंक
✅ (vi) 2.0034 → 5 सार्थक अंक
व्याख्या – Step by Step
नियम (Quick Rules)1) शुरू के शून्य (leading zeros) सार्थक नहीं होते।
2) दो गैर-शून्य अंकों के बीच के शून्य सार्थक होते हैं।
3) दशमलव के बाद के अंतिम शून्य (trailing zeros) सार्थक होते हैं।
4) बिना दशमलव के अंत के शून्य सामान्यतः सार्थक नहीं माने जाते (जब तक स्पष्ट न हो)।
अब लागू करें:
(i) 0.0025 → केवल 2 और 5 → 2
(ii) 208 → बीच का 0 सार्थक → 3
(iii) 5005 → बीच के दोनों 0 सार्थक → 4
(iv) 126,000 → दशमलव नहीं, अंत के 0 नहीं गिने → 3
(v) 500.00 → दशमलव है, सभी trailing 0 सार्थक → 5
(vi) 2.0034 → बीच के 0 सार्थक → 5
क्या आप जानते हैं?
👉 126,000 में सार्थक अंक 3 भी हो सकते हैं या 6 भी, यह इस पर निर्भर करता है कि मापन कितना precise है।📌 इसे स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिक संकेत लिखते हैं:
👉 1.26 × 105 → 3 सार्थक अंक
👉 1.26000 × 105 → 6 सार्थक अंक
Q.20: निम्नलिखित को तीन सार्थक अंकों तक निकटित कीजिए:
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
(i) 34.216
(ii) 10.4107
(iii) 0.04597
(iv) 2808
उत्तर
✅ (i) 34.216 → 34.2✅ (ii) 10.4107 → 10.4
✅ (iii) 0.04597 → 0.0460
✅ (iv) 2808 → 2.81 × 103 (अर्थात 2810)
व्याख्या – Step by Step
नियम: तीन सार्थक अंक रखने के बाद वाला (चौथा) अंक देखें👉 अगर चौथा अंक 5 या उससे बड़ा हो → तीसरा अंक 1 बढ़ा दें
👉 अगर 5 से छोटा हो → जैसा है वैसा रहने दें
(i) 34.216
पहले 3 सार्थक अंक: 3, 4, 2 → 34.2
अगला अंक 1 है (5 से छोटा) ⇒ 34.2
(ii) 10.4107
पहले 3 सार्थक अंक: 1, 0, 4 → 10.4
अगला अंक 1 है (5 से छोटा) ⇒ 10.4
(iii) 0.04597
सार्थक अंक 4 से शुरू होंगे: 4, 5, 9
अगला अंक 7 है (5 या बड़ा) ⇒ 9 बढ़कर 10 बन जाएगा, इसलिए 0.0460
(यहाँ आख़िरी 0 दिखाता है कि 3 सार्थक अंक हैं)
(iv) 2808
पहले 3 सार्थक अंक: 2, 8, 0
अगला अंक 8 है (5 या बड़ा) ⇒ 280 → 281
इसलिए 2.81 × 103 (यानी 2810)
क्या आप जानते हैं?
👉 2808 को 3 सार्थक अंकों में 2810 लिखने पर “अंत का 0” कभी-कभी confusing हो सकता है, इसलिए सही और clear लिखावट है: 2.81 × 103।
Q.21: (क) जब नाइट्रोजन और ऑक्सीजन अभिक्रिया करके विभिन्न यौगिक बनाते हैं, तो निम्न आँकड़े मिलते हैं:
ये आँकड़े रासायनिक संयोजन के किस नियम के अनुरूप हैं?
(ख) निम्नलिखित में रिक्त स्थान भरिए
(i) 1 km = ........... mm = ............ pm
(ii) 1 mg = ........... kg = ............ dg
(iii) 1 mL = ........... L = ............ dm³
| क्रम | नाइट्रोजन का द्रव्यमान | ऑक्सीजन का द्रव्यमान |
|---|---|---|
| (i) | 14 g | 16 g |
| (ii) | 14 g | 32 g |
| (iii) | 28 g | 32 g |
| (iv) | 28 g | 80 g |
(ख) निम्नलिखित में रिक्त स्थान भरिए
(i) 1 km = ........... mm = ............ pm
(ii) 1 mg = ........... kg = ............ dg
(iii) 1 mL = ........... L = ............ dm³
उत्तर
✅ (क) ये आँकड़े बहुगुणित अनुपात के नियम (Law of Multiple Proportions) के अनुरूप हैं।✅ (ख)
(i) ✅ 1 km = 106 mm = 1015 pm
(ii) ✅ 1 mg = 10-6 kg = 0.01 dg
(iii) ✅ 1 mL = 10-3 L = 10-3 dm³
व्याख्या – Step by Step
(क) बहुगुणित अनुपात का नियमबहुगुणित अनुपात का नियम कहता है:
जब दो तत्व एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान के साथ संयोजित होने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमान छोटे पूर्णांकों के अनुपात में होते हैं।
अब यहाँ नाइट्रोजन का द्रव्यमान समान करके देखें:
• (i) N = 14 g के साथ O = 16 g
• (ii) N = 14 g के साथ O = 32 g
यहाँ O का अनुपात = 16 : 32 = 1 : 2 (छोटे पूर्णांक)
अब (iii) में N = 28 g है, इसे 14 g के बराबर करें (आधा करें):
• (iii) N = 14 g के साथ O = 16 g (क्योंकि 32/2 = 16)
(iv) में N = 28 g है, इसे 14 g के बराबर करें (आधा करें):
• (iv) N = 14 g के साथ O = 40 g (क्योंकि 80/2 = 40)
अब N = 14 g के साथ O के मान: 16, 32, 40
इनका अनुपात = 16 : 32 : 40 = 2 : 4 : 5 (छोटे पूर्णांक)
✅ इसलिए यह बहुगुणित अनुपात के नियम को दर्शाता है।
(ख) इकाई रूपांतरण
(i) km to mm, pm
👉 1 km = 1000 m
👉 1 m = 1000 mm ⇒ 1 km = 103 × 103 = 106 mm
👉 1 m = 1012 pm ⇒ 1 km = 103 × 1012 = 1015 pm
(ii) mg to kg, dg
👉 1 mg = 10-3 g
👉 1 g = 10-3 kg ⇒ 1 mg = 10-3 × 10-3 = 10-6 kg
👉 1 dg = 0.1 g ⇒ 1 g = 10 dg ⇒ 1 mg = 0.001 g = 0.01 dg
(iii) mL to L, dm³
👉 1 mL = 10-3 L
👉 1 L = 1 dm³ ⇒ 10-3 L = 10-3 dm³
क्या आप जानते हैं?
👉 इसी नियम से समझ आता है कि N और O अलग-अलग अनुपात में मिलकर NO, NO₂, N₂O, N₂O₃ जैसे कई यौगिक बना सकते हैं।👉 याद रखने की ट्रिक: 1 L = 1 dm³ और 1 mL = 1 cm³ (ये बहुत काम आता है)।
Q.22: यदि प्रकाश का वेग 3.00 × 10⁸ m s⁻¹ हो, तो 2.00 s में प्रकाश कितनी दूरी तय करेगा?
उत्तर
✅ दूरी = 6.00 × 108 m
व्याख्या – Step by Step
सूत्र: दूरी = वेग × समयदूरी = (3.00 × 108 m s⁻¹) × (2.00 s)
दूरी = 6.00 × 108 m
क्या आप जानते हैं?
👉 प्रकाश 1 सेकंड में लगभग 3.00 × 108 m (यानी 3 लाख km) दूरी तय करता है।
Q.23: किसी अभिक्रिया A + B₂ → AB₂ में निम्नलिखित अभिक्रिया मिश्रणों में सीमित अभिकारक (यदि कोई हो) ज्ञात कीजिए:
(i) A के 300 परमाणु + B₂ के 200 अणु
(ii) 2 मोल A + 3 मोल B₂
(iii) A के 100 परमाणु + B₂ के 100 अणु
(iv) 5 मोल A + 2.5 मोल B₂
(v) 2.5 मोल A + 5 मोल B₂
(i) A के 300 परमाणु + B₂ के 200 अणु
(ii) 2 मोल A + 3 मोल B₂
(iii) A के 100 परमाणु + B₂ के 100 अणु
(iv) 5 मोल A + 2.5 मोल B₂
(v) 2.5 मोल A + 5 मोल B₂
उत्तर
✅ (i) B₂ सीमित अभिकारक✅ (ii) A सीमित अभिकारक
✅ (iii) कोई सीमित अभिकारक नहीं (दोनों पूरा उपयोग)
✅ (iv) B₂ सीमित अभिकारक
✅ (v) A सीमित अभिकारक
व्याख्या – Step by Step
Step 1: अभिक्रिया समझो: A + B₂ → AB₂इसका मतलब:
✅ 1 परमाणु A को पूरी तरह अभिक्रिया करने के लिए 1 अणु B₂ चाहिए।
यानी अनुपात: A : B₂ = 1 : 1
________________________________________
Step 2: नियम (Rule)
👉 अगर A कम है ⇒ A सीमित अभिकारक
👉 अगर B₂ कम है ⇒ B₂ सीमित अभिकारक
👉 अगर दोनों बराबर हैं ⇒ कोई सीमित अभिकारक नहीं (दोनों पूरा उपयोग)
________________________________________
(i) A के 300 परमाणु + B₂ के 200 अणु
👉 300 A को चाहिए 300 B₂
👉 लेकिन है सिर्फ 200 B₂
✅ इसलिए B₂ पहले खत्म होगा ⇒ B₂ सीमित अभिकारक
(और A में से 100 परमाणु बचेंगे)
________________________________________
(ii) 2 मोल A + 3 मोल B₂
👉 2 मोल A को चाहिए 2 मोल B₂
👉 B₂ है 3 मोल (ज्यादा है)
✅ इसलिए A पहले खत्म होगा ⇒ A सीमित अभिकारक
(B₂ में 1 मोल बच जाएगा)
________________________________________
(iii) A के 100 परमाणु + B₂ के 100 अणु
👉 100 A को चाहिए 100 B₂
👉 B₂ भी 100 है
✅ दोनों पूरा उपयोग हो जाएंगे ⇒ कोई सीमित अभिकारक नहीं
________________________________________
(iv) 5 मोल A + 2.5 मोल B₂
👉 5 मोल A को चाहिए 5 मोल B₂
👉 लेकिन B₂ है 2.5 मोल (कम है)
✅ इसलिए B₂ पहले खत्म होगा ⇒ B₂ सीमित अभिकारक
(A में 2.5 मोल बचेगा)
________________________________________
(v) 2.5 मोल A + 5 मोल B₂
👉 2.5 मोल A को चाहिए 2.5 मोल B₂
👉 B₂ है 5 मोल (ज्यादा है)
✅ इसलिए A पहले खत्म होगा ⇒ A सीमित अभिकारक
(B₂ में 2.5 मोल बच जाएगा)
________________________________________
Quick Trick (बहुत आसान ट्रिक)
👉 इस अभिक्रिया में अनुपात 1:1 है, इसलिए बस देखो कौन कम है वही सीमित अभिकारक!
क्या आप जानते हैं?
👉 Limiting reagent हमेशा वही होता है जो सबसे पहले खत्म होता है, और उत्पाद (AB₂) की अधिकतम मात्रा वही तय करता है।
Q.24: डाइनाइट्रोजन और डाइहाइड्रोजन निम्नलिखित समीकरण के अनुसार अमोनिया बनाती हैं:
N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g)
(i) यदि 2.00×10³ g N₂, 1.00×10³ g H₂ के साथ अभिक्रिया करती है, तो प्राप्त NH₃ के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिकर्मक शेष बचेगा?
(iii) यदि हाँ, तो कौन-सा और उसका द्रव्यमान क्या होगा?
N₂(g) + 3H₂(g) → 2NH₃(g)
(i) यदि 2.00×10³ g N₂, 1.00×10³ g H₂ के साथ अभिक्रिया करती है, तो प्राप्त NH₃ के द्रव्यमान का परिकलन कीजिए।
(ii) क्या दोनों में से कोई अभिकर्मक शेष बचेगा?
(iii) यदि हाँ, तो कौन-सा और उसका द्रव्यमान क्या होगा?
उत्तर
✅ (i) उत्पन्न अमोनिया (NH₃) का द्रव्यमान = 2428.57 g (≈ 2.43×10³ g)✅ (ii) हाँ, डाइहाइड्रोजन (H₂) शेष बचेगा
✅ (iii) शेष H₂ का द्रव्यमान = 571.43 g (≈ 571.4 g)
व्याख्या – Step by Step
समीकरण: N₂ + 3H₂ → 2NH₃1 मोल के अनुसार:
👉 1 मोल N₂ = 28 g
👉 3 मोल H₂ = 3×2 = 6 g
👉 2 मोल NH₃ = 2×17 = 34 g
(i) पहले जाँचें: 2.00×10³ g N₂ के लिए H₂ कितना चाहिए?
28 g N₂ अभिक्रिया करता है = 6 g H₂ से
तो 2.00×10³ g N₂ अभिक्रिया करेगा:
(6/28) × 2.00×10³ = 428.57 g H₂ से
दिया H₂ = 1000 g, जो 428.57 g से ज्यादा है।
✅ इसलिए H₂ अधिकता में है और N₂ सीमित अभिकर्मक है।
अब 28 g N₂ से उत्पन्न NH₃ = 34 g
तो 2.00×10³ g N₂ से उत्पन्न NH₃:
(34/28) × 2.00×10³ = 2428.57 g
(ii) कौन शेष बचेगा?
✅ डाइहाइड्रोजन (H₂) शेष बचेगा।
(iii) शेष H₂ का द्रव्यमान
उपयोग हुआ H₂ = 428.57 g
शेष H₂ = 1000 − 428.57 = 571.43 g (≈ 571.4 g)
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर किसी अभिक्रिया में एक अभिकर्मक “अधिकता” में हो, तो उत्पाद की मात्रा हमेशा सीमित अभिकर्मक से ही तय होती है।
Q.25: 0.5 mol Na₂CO₃ और 0.50 M Na₂CO₃ में क्या अंतर है?
उत्तर
✅ 0.5 mol Na₂CO₃ = Na₂CO₃ की मात्रा (मोल) है, यह आयतन पर निर्भर नहीं है।✅ 0.50 M Na₂CO₃ = विलयन की मोलरता है, यानी 1 L विलयन में 0.50 mol Na₂CO₃।
व्याख्या – Step by Step
👉 मोल (mol): केवल “कितनी मात्रा” बताता है।उदाहरण: 0.5 mol Na₂CO₃ को आप 100 mL पानी में भी घोल सकते हैं और 2 L में भी। मोल वही रहेगा।
👉 मोलरता (M): “प्रति लीटर में मोल” बताती है।
0.50 M का मतलब:
🤔 1 L विलयन में 0.50 mol Na₂CO₃
🤔 2 L विलयन में 1.00 mol Na₂CO₃
क्या आप जानते हैं?
👉 M (मोलरता) आयतन पर depend करती है, इसलिए तापमान बदलने पर (आयतन बदलने से) मोलरता भी बदल सकती है, लेकिन मोललता नहीं बदलती।
Q.26: यदि डाइहाइड्रोजन गैस के 10 आयतन, डाइऑक्सीजन गैस के 5 आयतनों के साथ अभिक्रिया करें, तो जलवाष्प के कितने आयतन प्राप्त होंगे?
उत्तर
✅ जलवाष्प (H₂O) के 10 आयतन प्राप्त होंगे।
व्याख्या – Step by Step
अभिक्रिया (जलवाष्प बनने की):2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(g)
Gay-Lussac के आयतन नियम के अनुसार (समान ताप व दाब पर):
गैसों के आयतन उनके गुणांक के अनुपात में अभिक्रिया करते हैं।
इस अभिक्रिया में अनुपात:
H₂ : O₂ : H₂O
2 : 1 : 2
अब दिया है:
H₂ = 10 आयतन, O₂ = 5 आयतन
10 : 5 = 2 : 1 ✅ (बिल्कुल सही अनुपात)
इसलिए दोनों पूरी तरह अभिक्रिया करेंगे।
2 आयतन H₂ से 2 आयतन H₂O बनता है,
तो 10 आयतन H₂ से 10 आयतन H₂O (जलवाष्प) बनेगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 गैसों के लिए “आयतन का नियम” बहुत आसान है:समान ताप और दाब पर आयतन सीधे गुणांकों के अनुपात में चलते हैं।
👉 इसलिए ऐसे सवालों में मोलर द्रव्यमान निकालने की जरूरत नहीं पड़ती।
Q.27: निम्नलिखित को मूल (SI) मात्रकों में परिवर्तित कीजिए:
(i) 28.7 pm
(ii) 15.15 pm
(iii) 25365 mg
(i) 28.7 pm
(ii) 15.15 pm
(iii) 25365 mg
उत्तर
✅ (i) 28.7 pm = 2.87 × 10-11 m✅ (ii) 15.15 pm = 1.515 × 10-11 m
✅ (iii) 25365 mg = 2.5365 × 10-2 kg
व्याख्या – Step by Step
(i) 28.7 pm को m में1 pm = 10-12 m
इसलिए 28.7 pm = 28.7 × 10-12 m = 2.87 × 10-11 m
(ii) 15.15 pm को m में
15.15 pm = 15.15 × 10-12 m = 1.515 × 10-11 m
(iii) 25365 mg को kg में
1 mg = 10-6 kg
इसलिए 25365 mg = 25365 × 10-6 kg = 2.5365 × 10-2 kg
क्या आप जानते हैं?
👉 pico (p) का मतलब 10-12 होता है, और milli (m) का मतलब 10-3 होता है।👉 mg से kg में जाने पर power बहुत बदलती है, इसलिए सबसे safe तरीका है:
mg → g (÷1000) और फिर g → kg (÷1000)।
Q.28: निम्नलिखित में से किसमें परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी?
(i) 1 g Au (s)
(ii) 1 g Na (s)
(iii) 1 g Li (s)
(iv) 1 g Cl₂ (g)
(i) 1 g Au (s)
(ii) 1 g Na (s)
(iii) 1 g Li (s)
(iv) 1 g Cl₂ (g)
उत्तर
✅ (iii) 1 g Li (s) में परमाणुओं की संख्या सबसे अधिक होगी।व्याख्या – Step by Step
📌 परमाणुओं की संख्या ∝ (मोल × प्रति कण परमाणु)📌 मोल = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान
अब हर option में “1 g” है, इसलिए जिसका (प्रभावी) मोलर द्रव्यमान सबसे कम होगा, उसमें कण ज्यादा होंगे, और अगर अणु में 2 परमाणु हों तो परमाणु और भी ज्यादा होंगे।
(i) 1 g Au
Au का मोलर द्रव्यमान ≈ 197 g mol⁻¹
परमाणु = 1/197 मोल
(ii) 1 g Na
Na का मोलर द्रव्यमान ≈ 23 g mol⁻¹
परमाणु = 1/23 मोल
(iii) 1 g Li
Li का मोलर द्रव्यमान ≈ 6.94 g mol⁻¹
परमाणु = 1/6.94 मोल (यह सबसे ज्यादा मोल देता है)
(iv) 1 g Cl₂
Cl₂ का मोलर द्रव्यमान ≈ 71 g mol⁻¹
अणु = 1/71 मोल
लेकिन हर अणु में 2 परमाणु होते हैं, इसलिए परमाणु = 2 × (1/71) = 2/71 मोल
अब तुलना करें (परमाणुओं के मोल के रूप में):
• Li: 1/6.94 ≈ 0.144
• Na: 1/23 ≈ 0.0435
• Au: 1/197 ≈ 0.0051
• Cl₂: 2/71 ≈ 0.0282
✅ सबसे बड़ा मान Li का है, इसलिए सबसे अधिक परमाणु 1 g Li में होंगे।
ध्यान दें: यहाँ “परमाणुओं” की संख्या पूछी गई है, इसलिए Cl₂ में 2 परमाणु/अणु का factor लगाया गया, फिर भी Li ज्यादा है।
क्या आप जानते हैं?
👉 समान द्रव्यमान (1 g) में हल्का तत्व ज्यादा कण देता है, इसलिए उसमें परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
Q.29: एथेनॉल (C₂H₅OH) के ऐसे जलीय विलयन की मोलरता ज्ञात कीजिए, जिसमें एथेनॉल का मोल-अंश 0.040 है। (मान लें कि जल का घनत्व 1 है।)
उत्तर
✅ एथेनॉल (C₂H₅OH) विलयन की मोलरता = 2.314 mol L-1 (लगभग 2.31 M)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मोल-अंश का सूत्रमोल-अंश = घटक के मोल ÷ घटकों के कुल मोल
एथेनॉल का मोल-अंश:
0.040 = (C₂H₅OH के मोल) ÷ (C₂H₅OH के मोल + H₂O के मोल)
मान लें: C₂H₅OH के मोल = n
तो समीकरण:
0.040 = n / (n + n(H₂O)) ……(i)
Step 2: 1 L जल के मोल निकालें
जल का घनत्व 1 g mL⁻¹ है, इसलिए
1 L जल का द्रव्यमान = 1000 g
जल का मोलर द्रव्यमान = 18 g mol⁻¹
H₂O के मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान
n(H₂O) = 1000 / 18 = 55.55 mol
अब (i) में n(H₂O) = 55.55 रख दें:
0.040 = n / (n + 55.55)
Step 3: n (एथेनॉल के मोल) निकालें
0.040(n + 55.55) = n
0.040n + 2.222 = n
n − 0.040n = 2.222
0.960n = 2.222
n = 2.222 / 0.960 = 2.314 mol (एथेनॉल के मोल)
Step 4: मोलरता
मोलरता = (विलेय के मोल) / (विलयन का आयतन L में)
मोलरता = 2.314 mol / 1 L = 2.314 mol L-1
क्या आप जानते हैं?
👉 जब मोल-अंश दिया हो और घनत्व/आधार दिया हो, तो सबसे आसान तरीका है 1 L (या 1000 g) विलायक मानकर मोल निकालना।👉 ऐसे सवालों में “विलयन का आयतन ≈ 1 L” की मान्यता dilute विलयन के लिए ली जाती है।
Q.30: एक 12C (कार्बन) परमाणु का द्रव्यमान ग्राम (g) में कितना होगा?
उत्तर
✅ एक 12C परमाणु का द्रव्यमान ≈ 1.99 × 10−23 g
व्याख्या – Step by Step
Step 1: तथ्य (Definition)12C का मोलर द्रव्यमान = 12 g mol−1
इसका मतलब:
1 मोल 12C (यानी 6.022×1023 परमाणु) का द्रव्यमान = 12 g
Step 2: एक परमाणु का द्रव्यमान (Unitary Method)
| द्रव्यमान (g) | परमाणुओं की संख्या |
|---|---|
| 12 | 6.022×1023 |
| x | 1 |
x = 12 g ÷ (6.022×1023 परमाणु x 1 g)
एक परमाणु का द्रव्यमान = 1.99 × 10−23 g (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 1 परमाणु का द्रव्यमान बहुत छोटा होता है, इसलिए इसे अक्सर amu (u) में बताते हैं।👉 12C का द्रव्यमान ठीक 12 u माना जाता है।
Q.31: निम्नलिखित परिकलनों के उत्तर में कितने सार्थक अंक (Significant Figures) होने चाहिए?
(i) (0.02856 × 298.15 × 0.112) / 0.5785
(ii) 5 × 5.364
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215
(i) (0.02856 × 298.15 × 0.112) / 0.5785
(ii) 5 × 5.364
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215
उत्तर
✅ (i) 3 सार्थक अंक✅ (ii) 4 सार्थक अंक
✅ (iii) 4 दशमलव स्थान (अर्थात उत्तर 4 decimal places तक)
व्याख्या – Step by Step
(i) (0.02856 × 298.15 × 0.112) / 0.5785यह गुणा/भाग का केस है।
नियम: उत्तर में उतने ही सार्थक अंक होंगे जितने सबसे कम सार्थक अंकों वाली संख्या में हैं।
सार्थक अंक गिनें:
| संख्या | सार्थक अंक |
|---|---|
| 0.02856 | 4 |
| 298.15 | 5 |
| 0.112 | 3 |
| 0.5785 | 4 |
✅ इसलिए उत्तर = 3 सार्थक अंक
(ii) 5 × 5.364
यह भी गुणा है।
👉 5 → सामान्यतः 1 सार्थक अंक होता है, लेकिन कई किताबों में ऐसे सवालों में “5” को exact/गणना संख्या मान लेते हैं (जैसे 5 बार, 5 items), तब यह limiting नहीं होता।
इस pattern के ऐसे प्रश्नों में expected rule: 5.364 के सार्थक अंक के अनुसार answer लिखा जाता है।
5.364 में सार्थक अंक = 4
✅ इसलिए उत्तर = 4 सार्थक अंक
अगर “5” मापन (measured) हो, तब उत्तर 1 सार्थक अंक होगा। लेकिन NCERT टाइप में यहाँ आम तौर पर 4 ही लिया जाता है।
________________________________________
(iii) 0.0125 + 0.7864 + 0.0215
यह जोड़ का केस है।
नियम: उत्तर में उतने ही दशमलव स्थान होंगे जितने सबसे कम दशमलव स्थान वाली संख्या में हैं।
दशमलव स्थान:
👉 0.0125 → 4 decimal places
👉 0.7864 → 4 decimal places
👉 0.0215 → 4 decimal places
सबका minimum = 4 decimal places
✅ इसलिए उत्तर = 4 दशमलव स्थान तक
क्या आप जानते हैं?
👉 गुणा/भाग में “सार्थक अंक” देखे जाते हैं, जबकि जोड़/घटाव में “दशमलव स्थान” देखे जाते हैं।
Q.32: प्रकृति में उपलब्ध आर्गन (Ar) के मोलर द्रव्यमान की गणना कीजिए (दिए गए आँकड़ों से)
दिए गए समस्थानिक (Isotopes):
दिए गए समस्थानिक (Isotopes):
| समस्थानिक | मोलर द्रव्यमान (g mol−1) | प्रचुरता (%) |
|---|---|---|
| 36Ar | 35.96755 | 0.337 |
| 38Ar | 37.96272 | 0.063 |
| 40Ar | 39.9624 | 99.600 |
उत्तर
✅ आर्गन का औसत मोलर द्रव्यमान ≈ 39.948 g mol−1
व्याख्या – Step by Step
औसत मोलर द्रव्यमान का सूत्र:औसत मोलर द्रव्यमान = (Σ (प्रचुरता × मोलर द्रव्यमान)) / 100
अब मान रखें:
M = [(0.337×35.96755) + (0.063×37.96272) + (99.600×39.9624)] / 100
गणना:
0.337 × 35.96755 = 12.12107
0.063 × 37.96272 = 2.39165
99.600 × 39.9624 = 3980.654 (लगभग)
योग ≈ 12.12107 + 2.39165 + 3980.654 = 3995.16672
अब /100:
M ≈ 3995.16672 ÷ 100 = 39.9516672 g mol−1 (लगभग)
राउंड करने पर (standard value के करीब):
✅ ≈ 39.948 g mol−1
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी तत्व का “औसत परमाणु/मोलर द्रव्यमान” हमेशा उसके समस्थानिकों की प्रचुरता (abundance) पर निर्भर करता है।👉 आर्गन में 40Ar की प्रचुरता बहुत ज्यादा (99.600%) है, इसलिए औसत मान लगभग 40 के बहुत पास आता है।
Q.33: निम्नलिखित में से प्रत्येक में परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए:
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52 u He
(iii) 52 g He
(i) 52 मोल Ar
(ii) 52 u He
(iii) 52 g He
उत्तर
✅ (i) 52 मोल Ar में परमाणु = 3.13144 × 1025✅ (ii) 52 u He में परमाणु = 13 परमाणु
✅ (iii) 52 g He में परमाणु = 7.8286 × 1024
व्याख्या – Step by Step
(i) 52 मोल Ar1 मोल में परमाणु = NA = 6.022 × 1023
तो 52 मोल में परमाणु = 52 × 6.022 × 1023
= 3.13144 × 1025 परमाणु
(ii) 52 u He
He का परमाणु द्रव्यमान = 4 u
तो 52 u में He परमाणुओं की संख्या:
52 / 4 = 13
✅ इसलिए 13 परमाणु
________________________________________
(iii) 52 g He
He का मोलर द्रव्यमान = 4 g mol−1
He के मोल = 52 / 4 = 13 मोल
अब परमाणु = मोल × NA
= 13 × 6.022 × 1023
= 7.8286 × 1024 परमाणु
क्या आप जानते हैं?
👉 “u” (amu) परमाणुओं के बहुत छोटे द्रव्यमान के लिए होता है।👉 “मोल” और “अवोगाद्रो संख्या” (6.022 × 1023) की मदद से कणों की संख्या बहुत जल्दी निकल जाती है।
Q.34: एक अज्ञात ईंधन गैस में केवल कार्बन और हाइड्रोजन उपस्थित हैं। इसकी थोड़ी मात्रा को ऑक्सीजन से जलाने पर 3.38 g कार्बन डाइऑक्साइड और 0.690 g जल प्राप्त होता है तथा कोई अन्य उत्पाद नहीं बनता। इस गैस के 10.0 L (STP पर) आयतन का भार 11.69 g है। ज्ञात कीजिए:
(i) मूलानुपाती सूत्र
(ii) मोलर द्रव्यमान
(iii) आणविक सूत्र
(i) मूलानुपाती सूत्र
(ii) मोलर द्रव्यमान
(iii) आणविक सूत्र
उत्तर
✅ (i) मूलानुपाती सूत्र = CH✅ (ii) मोलर द्रव्यमान ≈ 26 g mol−1
✅ (iii) आणविक सूत्र = C₂H₂
व्याख्या – Step by Step
Step 1: CO₂ से कार्बन (C) का द्रव्यमान निकालेंCO₂ में C का अंश = 12/44
C का द्रव्यमान = (12/44) × 3.38 g = 0.9218 g
Step 2: H₂O से हाइड्रोजन (H) का द्रव्यमान निकालें
H₂O में H का अंश = 2/18
H का द्रव्यमान = (2/18) × 0.690 g = 0.0767 g
अब ईंधन गैस में केवल C और H हैं, इसलिए
कुल द्रव्यमान = 0.9218 + 0.0767 = 0.9985 g
(i) मूलानुपाती सूत्र (Empirical formula) की गणना
अब मोल निकालें:
C के मोल = 0.9218/12 = 0.07682 mol
H के मोल = 0.0767/1 = 0.07670 mol
सरल अनुपात:
C : H = 0.07682 : 0.07670 ≈ 1 : 1
✅ इसलिए मूलानुपाती सूत्र = CH
(ii) मोलर द्रव्यमान (Molar mass)
STP पर 22.4 L गैस = 1 मोल
दिया: 10.0 L का द्रव्यमान = 11.69 g
तो 22.4 L का द्रव्यमान:
(11.69/10.0) × 22.4 = 26.18 g
✅ मोलर द्रव्यमान ≈ 26 g mol−1 (लगभग)
(iii) आणविक सूत्र (Molecular formula)
मूलानुपाती सूत्र CH का द्रव्यमान = 12 + 1 = 13 g mol−1
n = (मोलर द्रव्यमान) / (मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान)
n = 26/13 = 2
आणविक सूत्र = (CH) × 2 = C₂H₂
क्या आप जानते हैं?
👉 केवल C और H वाली गैसों को हाइड्रोकार्बन कहते हैं।👉 C₂H₂ का नाम एसीटिलीन (Acetylene) है और यह वेल्डिंग में उपयोग होता है।
Q.35: CaCO3 जलीय HCl के साथ निम्नलिखित अभिक्रिया करके CaCl2 और CO2 बनाता है:
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + CO2(g) + H2O(l)
0.75 M HCl के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की कितनी मात्रा चाहिए?
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + CO2(g) + H2O(l)
0.75 M HCl के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की कितनी मात्रा चाहिए?
उत्तर
✅ आवश्यक CaCO3 का द्रव्यमान = 0.938 g (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: 0.75 M HCl के 25 mL में HCl की मात्रा निकालें0.75 M HCl का अर्थ है कि 1 लीटर (1000 mL) विलयन में HCl के 0.75 मोल उपस्थित है।
हम जानते हैं:
द्रव्यमान = मोल × मोलर द्रव्यमान
1000 mL में HCl की मात्रा:
= 0.75 मोल × 36.5 g/mol = 27.37 g
अब 25 mL विलयन में HCl की मात्रा (Unitary method):
| आयतन (mL में) | मात्रा (g में) |
|---|---|
| 1000 | 27.37 |
| 25 | x |
x = (27.37 g × 25 mL) ÷ 1000 mL
x = 0.6845 g
Step 2: अभिक्रिया के अनुसार अनुपात
CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + CO2(g) + H2O(l)
2 मोल HCl (73 g) अभिक्रिया करता है 1 मोल CaCO3 (100 g) से।
Step 3: CaCO3 का द्रव्यमान निकालें
73 g HCl के लिए CaCO3 = 100 g
तो 0.6845 g HCl के लिए CaCO3 = (100/73) × 0.6845
= 0.938 g (लगभग)
✅ अतः 0.75 M HCl के 25 mL के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की 0.938 g मात्रा की आवश्यकता होगी।
क्या आप जानते हैं?
👉 ऐसे सवालों में सबसे पहले मोलरता से मोल निकालो, फिर संतुलित समीकरण के अनुपात से दूसरी चीज़ के मोल और अंत में द्रव्यमान निकालो।
Q.36: प्रयोगशाला में क्लोरीन का निर्माण मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂) को जलीय HCl विलयन के साथ अभिक्रिया द्वारा निम्न समीकरण के अनुसार किया जाता है:
4HCl(aq) + MnO₂(s) → 2H₂O(l) + MnCl₂(aq) + Cl₂(g)
यदि 5.0 g MnO₂ लिया जाए, तो HCl के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
4HCl(aq) + MnO₂(s) → 2H₂O(l) + MnCl₂(aq) + Cl₂(g)
यदि 5.0 g MnO₂ लिया जाए, तो HCl के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे?
उत्तर
✅ HCl का द्रव्यमान = 8.39 g
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मोलर द्रव्यमान निकालेंHCl का मोलर द्रव्यमान = (1 + 35.5) = 36.5 g mol-1
4 मोल HCl की मात्रा = 4 × 36.5 = 146 g
MnO₂ का मोलर द्रव्यमान = 55 + (2 × 16) = 55 + 32 = 87 g mol-1
1 मोल MnO₂ की मात्रा = 87 g
Step 2: समीकरण से द्रव्यमान अनुपात
संतुलित समीकरण में:
4 मोल HCl अभिक्रिया करता है 1 मोल MnO₂ से
इसलिए:
✅ 87 g MnO₂ के लिए HCl = 146 g
Step 3: 5.0 g MnO₂ के लिए HCl निकालें (Unitary method)
| MnO₂ (g में) | HCl (g में) |
|---|---|
| 87 | 146 |
| 5 | x |
x = (146 g × 5 g) ÷ 87 g
x = 8.39 g
✅ इसलिए 5.0 g MnO₂ के साथ अभिक्रिया करने वाला HCl = 8.39 g
क्या आप जानते हैं?
👉 ऐसे सवालों में सबसे आसान तरीका है संतुलित समीकरण से “द्रव्यमान अनुपात” निकालकर unitary method लगाना।
