Class 11 Chemistry Chapter 2 – NCERT Solutions (Structure of Atom) | परमाणु की संरचना (हिंदी माध्यम)
NCERT Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 2 में आपको Structure of Atom (परमाणु की संरचना) के सभी प्रश्नों के स्टेप-बाय-स्टेप उत्तर मिलेंगे। यहाँ Bohr Model, Quantum Numbers, Electronic Configuration, de Broglie, Heisenberg जैसे टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाया गया है। यह पेज CBSE/NCERT तैयारी, स्कूल टेस्ट और बोर्ड एग्जाम के लिए बहुत उपयोगी है।
Keywords: Class 11 Chemistry Chapter 2 NCERT Solutions, Structure of Atom, परमाणु की संरचना, NCERT हल, CBSE Class 11 Chemistry, Hindi Medium
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Q.1: (i) एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) एक मोल इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
(ii) एक मोल इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
उत्तर
✅ (i) 1 g इलेक्ट्रॉनों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ≈ 1.10 × 1027 इलेक्ट्रॉन✅ (ii) 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान ≈ 5.49 × 10−4 g (या 5.49 × 10−7 kg)
✅ 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश ≈ −9.65 × 104 C (लगभग −96485 C)
व्याख्या – Step by Step
दिया है:👉 1 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (me) = 9.11 × 10−31 kg = 9.11 × 10−28 g
(i) 1 g में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
सूत्र: इलेक्ट्रॉनों की संख्या = (कुल द्रव्यमान) / (1 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान)
N = 1 g / (9.11 × 10−28 g) ≈ 1.10 × 1027 इलेक्ट्रॉन
(ii) 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान और आवेश
(A) 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान
दिया है:
👉 NA (अवोगाद्रो संख्या) = 6.022 × 1023 mol−1
👉 1 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.11 × 10−31 kg
1 मोल इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान = (1 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान) × (NA)
= 9.11 × 10−31 kg × 6.022 × 1023
≈ 5.49 × 10−7 kg
= 5.49 × 10−4 g
(B) 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश
दिया है:
👉 1 इलेक्ट्रॉन का आवेश (e) = 1.602 × 10−19 C
👉 1 मोल इलेक्ट्रॉन = NA इलेक्ट्रॉन
कुल आवेश = −e × NA
= −(1.602 × 10−19) × (6.022 × 1023)
≈ −9.65 × 104 C
≈ −96485 C
क्या आप जानते हैं?
👉 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत छोटा होता है, इसलिए 1 ग्राम में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत बड़ी (1027 के आसपास) आती है।👉 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश 1 फैराडे (Faraday) के बराबर होता है। इसी का मान लगभग 96485 C mol−1 होता है और इलेक्ट्रोलिसिस (विद्युत-अपघटन) के सवालों में बहुत काम आता है।
Q.2: (i) मीथेन (CH₄) के 1 मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए।
(ii) 7 mg 14C में न्यूट्रॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 × 10−27 kg)
(iii) मानक ताप और दाब (STP) पर 34 mg NH₃ में प्रोटॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित होगा?
(ii) 7 mg 14C में न्यूट्रॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 × 10−27 kg)
(iii) मानक ताप और दाब (STP) पर 34 mg NH₃ में प्रोटॉनों की (क) कुल संख्या तथा (ख) कुल द्रव्यमान बताइए। दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर परिवर्तित होगा?
उत्तर
✅ (i) 1 मोल CH4 में इलेक्ट्रॉन = 6.022 × 1024✅ (ii) 7 mg 14C में
👉 (क) न्यूट्रॉन = 2.4088 × 1021
👉 (ख) न्यूट्रॉनों का कुल द्रव्यमान = 4.03474 × 10−6 kg (≈ 4.03 mg)
✅ (iii) 34 mg NH3 में
👉 (क) प्रोटॉन = 1.2044 × 1022
👉 (ख) प्रोटॉनों का कुल द्रव्यमान ≈ 2.015 × 10−5 kg (≈ 20.15 mg)
👉 ताप/दाब बदलने पर: उत्तर नहीं बदलेगा (क्योंकि यहाँ द्रव्यमान दिया है)
व्याख्या – Step by Step
(i) 1 मोल CH4 में इलेक्ट्रॉनों की संख्या👉 C में इलेक्ट्रॉन = 6
👉 H में इलेक्ट्रॉन = 1, और 4 H हैं ⇒ 4 × 1 = 4
⇒ 1 अणु CH4 में कुल इलेक्ट्रॉन = 6 + 4 = 10
अब 1 मोल CH4 में अणु = NA = 6.022 × 1023
⇒ कुल इलेक्ट्रॉन = 10 × NA
= 10 × 6.022 × 1023 = 6.022 × 1024
________________________________________
(ii) 7 mg 14C में न्यूट्रॉन (संख्या और द्रव्यमान)
Step 1: 14C के 1 परमाणु में न्यूट्रॉन
14C का परमाणु क्रमांक (Z) = 6
न्यूट्रॉन = A − Z = 14 − 6 = 8
Step 2: 7 mg 14C में परमाणुओं की संख्या
14C का द्रव्यमान = 7 mg = 0.007 g
14C का मोलर द्रव्यमान = 14 g mol−1
मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान
मोल = 0.007 / 14 = 5.0 × 10−4 mol
परमाणु = (5.0 × 10−4) × (6.022 × 1023)
= 3.011 × 1020 परमाणु
Step 3: कुल न्यूट्रॉन
1 परमाणु में न्यूट्रॉन = 8
कुल न्यूट्रॉन = 8 × 3.011 × 1020
= 2.4088 × 1021
Step 4: न्यूट्रॉनों का कुल द्रव्यमान
1 न्यूट्रॉन का द्रव्यमान = 1.675 × 10−27 kg
कुल द्रव्यमान = (2.4088 × 1021) × (1.675 × 10−27)
= 4.03474 × 10−6 kg
= 4.03 × 10−3 g ≈ 4.03 mg
________________________________________
(iii) 34 mg NH3 में प्रोटॉन (संख्या और द्रव्यमान)
Step 1: 1 अणु NH3 में प्रोटॉन
N का परमाणु क्रमांक = 7 ⇒ 7 प्रोटॉन
H का परमाणु क्रमांक = 1 और 3 H हैं ⇒ 3 प्रोटॉन
⇒ कुल प्रोटॉन/अणु = 7 + 3 = 10
Step 2: 34 mg NH3 में अणुओं की संख्या
NH3 का द्रव्यमान = 34 mg = 0.034 g
NH3 का मोलर द्रव्यमान = 17 g mol−1
मोल = द्रव्यमान ÷ मोलर द्रव्यमान
मोल = 0.034 / 17 = 2.0 × 10−3 mol
अणु = (2.0 × 10−3) × (6.022 × 1023)
= 1.2044 × 1021 अणु
Step 3: कुल प्रोटॉन
कुल प्रोटॉन = 10 × 1.2044 × 1021
= 1.2044 × 1022
Step 4: प्रोटॉनों का कुल द्रव्यमान
(मानक मान) 1 प्रोटॉन का द्रव्यमान ≈ 1.673 × 10−27 kg
कुल द्रव्यमान = (1.2044 × 1022) × (1.673 × 10−27)
≈ 2.015 × 10−5 kg
= 2.015 × 10−2 g ≈ 20.15 mg
दाब और ताप में परिवर्तन से क्या उत्तर बदलेगा?
यहाँ नमूना 34 mg (द्रव्यमान) दिया है, इसलिए मोल और कणों की संख्या वही रहेगी।
✅ इसलिए प्रोटॉनों की संख्या और द्रव्यमान नहीं बदलेगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 “इलेक्ट्रॉन/प्रोटॉन/न्यूट्रॉन की कुल संख्या” निकालने का सबसे आसान तरीका:1) पहले 1 अणु/1 परमाणु में कितने कण हैं, यह निकालो
2) फिर नमूने के मोल निकालो
3) मोल × अवोगाद्रो संख्या (6.022 × 1023) से कुल कण निकालो
Q.3: निम्नलिखित नाभिकों में उपस्थित न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या बताइए:
⁸⁸Sr₃₈, ⁵⁶Fe₂₆, ²⁴Mg₁₂, ¹⁶O₈, ¹³C₆
⁸⁸Sr₃₈, ⁵⁶Fe₂₆, ²⁴Mg₁₂, ¹⁶O₈, ¹³C₆
उत्तर
✅ ⁸⁸Sr₃₈ में: प्रोटॉन = 38, न्यूट्रॉन = 50✅ ⁵⁶Fe₂₆ में: प्रोटॉन = 26, न्यूट्रॉन = 30
✅ ²⁴Mg₁₂ में: प्रोटॉन = 12, न्यूट्रॉन = 12
✅ ¹⁶O₈ में: प्रोटॉन = 8, न्यूट्रॉन = 8
✅ ¹³C₆ में: प्रोटॉन = 6, न्यूट्रॉन = 7
व्याख्या – Step by Step
नियम:👉 परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉन की संख्या
👉 द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन
👉 इसलिए न्यूट्रॉन की संख्या = A − Z
| नाभिक | द्रव्यमान संख्या (A) | परमाणु क्रमांक (Z) | प्रोटॉन (Z) | न्यूट्रॉन (A − Z) | गणना |
|---|---|---|---|---|---|
| ⁸⁸Sr₃₈ | 88 | 38 | 38 | 50 | 88 − 38 = 50 |
| ⁵⁶Fe₂₆ | 56 | 26 | 26 | 30 | 56 − 26 = 30 |
| ²⁴Mg₁₂ | 24 | 12 | 12 | 12 | 24 − 12 = 12 |
| ¹⁶O₈ | 16 | 8 | 8 | 8 | 16 − 8 = 8 |
| ¹³C₆ | 13 | 6 | 6 | 7 | 13 − 6 = 7 |
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी भी नाभिक के लिए एक लाइन में याद रखो: Z = प्रोटॉन, और A − Z = न्यूट्रॉन।👉 समस्थानिक (जैसे ¹²C और ¹³C) में प्रोटॉन समान रहते हैं, फर्क केवल न्यूट्रॉन में होता है।
Q.4: नीचे दिए गए परमाणु द्रव्यमान (A) और परमाणु क्रमांक (Z) वाले परमाणुओं का पूर्ण प्रतीक लिखिए:
(i) Z = 17, A = 35
(ii) Z = 92, A = 233
(iii) Z = 4, A = 9
(i) Z = 17, A = 35
(ii) Z = 92, A = 233
(iii) Z = 4, A = 9
उत्तर
✅ (i) 35Cl17✅ (ii) 233U92
✅ (iii) 9Be4
व्याख्या – Step by Step
पूर्ण प्रतीक लिखने का नियम:परमाणु का पूर्ण प्रतीक = A ZA
जहाँ
👉 A = द्रव्यमान संख्या
👉 Z = परमाणु क्रमांक
👉 X = तत्व का प्रतीक
(i) Z = 17, A = 35
Z = 17 वाला तत्व = Cl (क्लोरीन)
तो पूर्ण प्रतीक = 35Cl17
(ii) Z = 92, A = 233
Z = 92 वाला तत्व = U (यूरेनियम)
तो पूर्ण प्रतीक = 233U92
(iii) Z = 4, A = 9
Z = 4 वाला तत्व = Be (बेरिलियम)
तो पूर्ण प्रतीक = 9Be4
क्या आप जानते हैं?
👉 परमाणु क्रमांक (Z) से तत्व की पहचान होती है, क्योंकि Z = प्रोटॉनों की संख्या होती है।👉 द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन होती है।
Q.5: सोडियम लैम्प द्वारा उत्सर्जित पीले प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (λ) = 580 nm है। इसकी आवृत्ति (ν) और तरंग संख्या (ν̄) का परिकलन कीजिए।
उत्तर
✅ आवृत्ति (ν) = 5.17 × 1014 s−1✅ तरंग संख्या (ν̄) = 1.72 × 106 m−1
व्याख्या – Step by Step
दिया है:λ = 580 nm = 580 × 10−9 m
प्रकाश का वेग (c) = 3.0 × 108 m s−1
(1) आवृत्ति (ν)
सूत्र: ν = c / λ
ν = (3.0 × 108) / (580 × 10−9)
ν = (3.0/580) × 1017
ν ≈ 0.00517 × 1017
ν = 5.17 × 1014 s−1
✅ इसलिए आवृत्ति (ν) = 5.17 × 1014 s−1
(2) तरंग संख्या (ν̄)
तरंग संख्या का सूत्र: ν̄ = 1 / λ
ν̄ = 1 / (580 × 10−9) m−1
ν̄ = (1/580) × 109 m−1
ν̄ ≈ 0.001724 × 109 m−1
ν̄ = 1.72 × 106 m−1
✅ इसलिए तरंग संख्या (ν̄) = 1.72 × 106 m−1
क्या आप जानते हैं?
👉 तरंगदैर्घ्य बढ़ने पर आवृत्ति घटती है, क्योंकि ν = c/λ।👉 तरंग संख्या (ν̄) भी λ के व्युत्क्रमानुपाती होती है, यानी λ कम होगी तो ν̄ ज्यादा होगी।
Q.6: प्रत्येक ऐसे फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए—
(i) जिसकी आवृत्ति (ν) = 3 × 1015 Hz हो।
(ii) जिसकी तरंगदैर्घ्य (λ) = 0.50 Å हो।
(i) जिसकी आवृत्ति (ν) = 3 × 1015 Hz हो।
(ii) जिसकी तरंगदैर्घ्य (λ) = 0.50 Å हो।
उत्तर
✅ (i) ऊर्जा = 1.99 × 10−18 J (लगभग)✅ (ii) ऊर्जा = 3.98 × 10−15 J (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
स्थिरांक (Constants):h = 6.626 × 10−34 J s
c = 3.0 × 108 m s−1
(i) जब आवृत्ति (ν) दी हो
सूत्र: E = hν
ν = 3 × 1015 s−1
E = (6.626 × 10−34) × (3 × 1015)
E = 19.878 × 10−19 J
E = 1.9878 × 10−18 J
E ≈ 1.99 × 10−18 J
✅ इसलिए ऊर्जा = 1.99 × 10−18 J (लगभग)
(ii) जब तरंगदैर्घ्य (λ) दी हो
सूत्र: E = hc/λ
पहले λ को मीटर (m) में बदलें:
1 Å = 10−10 m
λ = 0.50 Å = 0.50 × 10−10 m = 5.0 × 10−11 m
अब ऊर्जा:
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (5.0 × 10−11)
E = (19.878 × 10−26) / (5.0 × 10−11)
E = 3.9756 × 10−15 J
E ≈ 3.98 × 10−15 J
✅ इसलिए ऊर्जा = 3.98 × 10−15 J (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 आवृत्ति जितनी अधिक होगी, फोटॉन की ऊर्जा उतनी अधिक होगी।👉 बहुत छोटी तरंगदैर्घ्य (जैसे Å) वाली किरणें (X-rays) बहुत अधिक ऊर्जा वाली होती हैं।
Q.7: 2.0 × 10−10 s काल वाली प्रकाश तरंग की तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति और तरंग संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ आवृत्ति (ν) = 5.0 × 109 s−1✅ तरंगदैर्घ्य (λ) = 6.0 × 10−2 m
✅ तरंग संख्या (ν̄) = 16.67 m−1
व्याख्या – Step by Step
दिया है:आवर्तकाल (T) = 2.0 × 10−10 s
प्रकाश का वेग (c) = 3.0 × 108 m s−1
(1) आवृत्ति (ν)
सूत्र: ν = 1/T
ν = 1 / (2.0 × 10−10)
ν = (1/2.0) × 1010
ν = 0.5 × 1010
ν = 5.0 × 109 s−1
________________________________________
(2) तरंगदैर्घ्य (λ)
सूत्र: λ = c/ν
λ = (3.0 × 108) / (5.0 × 109)
λ = (3.0/5.0) × 10−1
λ = 0.6 × 10−1
λ = 6.0 × 10−2 m
________________________________________
(3) तरंग संख्या (ν̄)
सूत्र: ν̄ = 1/λ
ν̄ = 1 / (6.0 × 10−2)
ν̄ = (1/6.0) × 102
ν̄ = 0.1667 × 102
ν̄ = 16.67 m−1
क्या आप जानते हैं?
👉 आवर्तकाल (T) और आवृत्ति (ν) एक-दूसरे के व्युत्क्रम होते हैं: ν = 1/T।👉 प्रकाश तरंग के लिए हमेशा संबंध रहता है: c = νλ।
Q.8: ऐसा प्रकाश, जिसकी तरंगदैर्घ्य 4000 pm हो और जो 1 J ऊर्जा दे, उसके फोटॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर
✅ 1 J ऊर्जा देने के लिए फोटॉनों की संख्या ≈ 2.01 × 1016 फोटॉन
व्याख्या – Step by Step
दिया है:👉 तरंगदैर्घ्य (λ) = 4000 pm
👉 प्रकाश का वेग (c) = 3.0 × 108 m s−1
👉 प्लैंक स्थिरांक (h) = 6.626 × 10−34 J s
👉 कुल ऊर्जा = 1 J
Step 1: λ को मीटर (m) में बदलें
1 pm = 10−12 m
λ = 4000 × 10−12 m = 4.0 × 10−9 m
________________________________________
Step 2: आवृत्ति (ν) निकालें
सूत्र: ν = c/λ
ν = (3.0 × 108) / (4.0 × 10−9)
ν = (3.0/4.0) × 1017
ν = 0.75 × 1017
ν = 7.5 × 1016 s−1
________________________________________
Step 3: 1 फोटॉन की ऊर्जा (E) निकालें
सूत्र: E = hν
E = (6.626 × 10−34) × (7.5 × 1016) J
E = 49.695 × 10−18 J
E = 4.97 × 10−17 J (प्रति फोटॉन)
________________________________________
Step 4: 1 J ऊर्जा के लिए फोटॉनों की संख्या (N)
सूत्र: N = (कुल ऊर्जा) / (1 फोटॉन की ऊर्जा)
N = 1 / (4.97 × 10−17)
N ≈ 2.01 × 1016
✅ इसलिए फोटॉनों की संख्या ≈ 2.01 × 1016
क्या आप जानते हैं?
👉 तरंगदैर्घ्य (λ) जितनी कम होगी, एक फोटॉन की ऊर्जा उतनी ज्यादा होगी।👉 इसलिए छोटी तरंगदैर्घ्य वाली किरणों (जैसे UV, X-ray) में कम फोटॉनों से भी बड़ी ऊर्जा मिल सकती है।
Q.9: यदि 4 × 10−7 m तरंगदैर्घ्य वाला एक फोटॉन 2.13 eV कार्यफलन वाली धातु की सतह से टकराता है, तो
(i) फोटॉन की ऊर्जा (eV में)
(ii) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
(iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग
ज्ञात कीजिए। (1 eV = 1.6020 × 10−19 J)
(i) फोटॉन की ऊर्जा (eV में)
(ii) उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
(iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग
ज्ञात कीजिए। (1 eV = 1.6020 × 10−19 J)
उत्तर
✅ (i) फोटॉन की ऊर्जा = 3.10 eV✅ (ii) इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = 0.97 eV (या 1.56 × 10−19 J)
✅ (iii) प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग = 5.85 × 105 m s−1
व्याख्या – Step by Step
दिया है:👉 λ = 4 × 10−7 m, c = 3.0 × 108 m s−1
👉 h = 6.626 × 10−34 J s
👉 कार्यफलन (W) = 2.13 eV
👉 1 eV = 1.6020 × 10−19 J
👉 इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (m) = 9.109 × 10−31 kg
Step 1: आवृत्ति (ν) निकालें
सूत्र: ν = c/λ
ν = (3.0 × 108) / (4 × 10−7)
ν = (3.0/4) × 1015
ν = 7.5 × 1014 s−1
Step 2: फोटॉन की ऊर्जा (J में), फिर eV में
सूत्र: E = hν
E = (6.626 × 10−34) × (7.5 × 1014)
E = 49.695 × 10−20 J
E = 4.97 × 10−19 J
अब ऊर्जा को eV में बदलें:
E(eV) = E(J) / (1.6020 × 10−19)
E(eV) = (4.97 × 10−19) / (1.6020 × 10−19)
E(eV) = 4.97/1.6020 = 3.10 eV
✅ इसलिए फोटॉन की ऊर्जा = 3.10 eV
Step 3: उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (KE)
आइंस्टीन का समीकरण:
फोटॉन ऊर्जा (E) = कार्यफलन (W) + गतिज ऊर्जा (KE)
KE = E − W
KE = 3.10 eV − 2.13 eV = 0.97 eV
KE को J में:
KE(J) = 0.97 × (1.6020 × 10−19)
KE(J) = 1.56 × 10−19 J
✅ इसलिए KE = 0.97 eV (या 1.56 × 10−19 J)
Step 4: प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग (v)
सूत्र: KE = (1/2)mv2
इसलिए v = √(2KE/m)
v = √( (2 × 1.56 × 10−19) / (9.109 × 10−31) )
v = √(3.12/9.109 × 1012)
v = √(0.3426 × 1012)
v = √(3.426 × 1011)
v = 5.85 × 105 m s−1
✅ इसलिए प्रकाशीय इलेक्ट्रॉन का वेग = 5.85 × 105 m s−1
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर फोटॉन की ऊर्जा (E) कार्यफलन (W) से कम हो, तो इलेक्ट्रॉन निकलता ही नहीं (photoelectric effect नहीं होगा)।👉 E जितनी ज्यादा होगी, उतनी ही ज्यादा गतिज ऊर्जा और वेग मिलेगा।
Q.10: सोडियम परमाणु के आयनन के लिए 242 nm तरंगदैर्घ्य की विद्युतचुम्बकीय विकिरण पर्याप्त होती है। सोडियम की आयनन ऊर्जा kJ mol−1 में ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ सोडियम की आयनन ऊर्जा = 494.6 kJ mol−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
दिया है:👉 λ = 242 nm = 242 × 10−9 m
👉 h = 6.626 × 10−34 J s
👉 c = 3.0 × 108 m s−1
👉 NA = 6.022 × 1023 mol−1
________________________________________
Step 1: 1 फोटॉन (या 1 परमाणु) के लिए ऊर्जा
सूत्र: E = hc/λ
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (242 × 10−9)
E = (19.878 × 10−26) / (242 × 10−9)
E = (19.878/242) × 10−17
E = 0.08214 × 10−17
E = 8.214 × 10−19 J (प्रति परमाणु)
________________________________________
Step 2: 1 मोल के लिए आयनन ऊर्जा
1 मोल में परमाणु = NA
आयनन ऊर्जा (J mol−1)
= (8.214 × 10−19) × (6.022 × 1023)
= (8.214 × 6.022) × 104
= 49.46 × 104 J mol−1
= 4.946 × 105 J mol−1
अब kJ mol−1 में:
4.946 × 105 J mol−1 = 494.6 kJ mol−1
✅ इसलिए सोडियम की आयनन ऊर्जा = 494.6 kJ mol−1 (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 आयनन ऊर्जा निकालने में 2 स्टेप याद रखें:1) पहले एक फोटॉन/एक परमाणु की ऊर्जा (J) निकालो।
2) फिर उसे अवोगाद्रो संख्या से गुणा करके 1 मोल की ऊर्जा निकाल लो।
Q.11: 25 वॉट का एक बल्ब 0.57 µm तरंगदैर्घ्य वाले पीले रंग का एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। प्रति सेकण्ड क्वांटा (फोटॉन) के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ प्रति सेकण्ड उत्सर्जित क्वांटा (फोटॉन) की संख्या = 7.17 × 1019 s−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
दिया है:👉 शक्ति (P) = 25 W = 25 J s−1
👉 तरंगदैर्घ्य (λ) = 0.57 µm = 0.57 × 10−6 m
👉 h = 6.626 × 10−34 J s
👉 c = 3.0 × 108 m s−1
Step 1: 1 फोटॉन की ऊर्जा (E)
सूत्र: E = hc/λ
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (0.57 × 10−6)
E = (19.878 × 10−26) / (0.57 × 10−6)
E = (19.878/0.57) × 10−20
E = 34.87 × 10−20 J
E = 3.49 × 10−19 J (प्रति फोटॉन)
Step 2: प्रति सेकण्ड फोटॉनों की संख्या (N)
शक्ति (P) = प्रति सेकण्ड ऊर्जा
इसलिए N = P/E
N = 25 / (3.49 × 10−19)
N = (25/3.49) × 1019
N ≈ 7.17 × 1019 s−1
✅ इसलिए, प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉन ≈ 7.17 × 1019 s−1
क्या आप जानते हैं?
👉 1 वॉट = 1 जूल/सेकण्ड होता है। यानी 25 W का मतलब हर सेकण्ड 25 J ऊर्जा निकल रही है।👉 एक फोटॉन की ऊर्जा जितनी कम होगी, उतने ही ज्यादा फोटॉन उसी शक्ति पर प्रति सेकण्ड निकलेंगे।
Q.12: किसी धातु की सतह पर 6800 Å तरंगदैर्घ्य वाली विकिरण डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति (ν0) और कार्यफलन (W0) ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ देहली आवृत्ति (ν0) = 4.41 × 1014 s−1✅ कार्यफलन (W0) = 2.92 × 10−19 J ≈ 1.82 eV
व्याख्या – Step by Step
दिया है:λ0 = 6800 Å
1 Å = 10−10 m
λ0 = 6800 × 10−10 m = 6.8 × 10−7 m
c = 3.0 × 108 m s−1
h = 6.626 × 10−34 J s
1 eV = 1.602 × 10−19 J
👉 यहाँ “शून्य वेग” का मतलब है देहली (threshold) स्थिति, इसलिए यही λ0 देहली तरंगदैर्घ्य है।
________________________________________
(1) देहली आवृत्ति (ν0)
सूत्र: ν0 = c / λ0
ν0 = (3.0 × 108) / (6.8 × 10−7)
ν0 = (3.0/6.8) × 1015
ν0 = 0.441 × 1015
ν0 = 4.41 × 1014 s−1
________________________________________
(2) कार्यफलन (W0)
देहली पर: W0 = hν0
W0 = (6.626 × 10−34) × (4.41 × 1014) J
W0 = (6.626 × 4.41) × 10−20 J
W0 = 29.22 × 10−20 J
W0 = 2.92 × 10−19 J
अब eV में बदलें:
W0(eV) = W0(J) / (1.602 × 10−19)
W0(eV) = (2.92 × 10−19) / (1.602 × 10−19)
W0(eV) = 2.92/1.602 = 1.82 eV
✅ इसलिए W0 = 2.92 × 10−19 J ≈ 1.82 eV
क्या आप जानते हैं?
👉 देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) पर इलेक्ट्रॉन बस निकलना शुरू करता है, इसलिए उसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती है।👉 λ < λ0 (कम तरंगदैर्घ्य) देने पर इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है क्योंकि फोटॉन की ऊर्जा ज्यादा होती है।
Q.13: जब हाइड्रोजन परमाणु के n = 4 ऊर्जा स्तर से n = 2 ऊर्जा स्तर में इलेक्ट्रॉन जाता है, तो किस तरंगदैर्घ्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
उत्तर
✅ उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (λ) = 4.87 × 10−7 m = 487 nm (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
हाइड्रोजन के nवें कक्ष की ऊर्जा:En = −(2.178 × 10−18) / n2 J atom−1
दिया है:
👉 n1 = 4, n2 = 2
👉 h = 6.626 × 10−34 J s
👉 c = 3.0 × 108 m s−1
________________________________________
Step 1: E2 और E4 निकालें
E2 = −(2.178 × 10−18) / (22)
E2 = −(2.178 × 10−18) / 4
E2 = −5.445 × 10−19 J atom−1
E4 = −(2.178 × 10−18) / (42)
E4 = −(2.178 × 10−18) / 16
E4 = −1.361 × 10−19 J atom−1
________________________________________
Step 2: ऊर्जा अंतर (ΔE)
उत्सर्जित ऊर्जा = |E2 − E4|
ΔE = |(−5.445 × 10−19) − (−1.361 × 10−19)|
ΔE = |−4.084 × 10−19|
ΔE = 4.08 × 10−19 J atom−1
(यह उसी के बराबर है: 2.178 × 10−18 × (1/4 − 1/16) = 2.178 × 10−18 × (3/16))
________________________________________
Step 3: तरंगदैर्घ्य (λ)
ΔE = hc/λ ⇒ λ = hc/ΔE
λ = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (4.08 × 10−19)
λ = (19.878 × 10−26) / (4.08 × 10−19)
λ = (19.878/4.08) × 10−7
λ = 4.87 × 10−7 m
nm में:
4.87 × 10−7 m = 4.87 × 102 nm = 487 nm
✅ इसलिए उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = 4.87 × 10−7 m = 487 nm
क्या आप जानते हैं?
👉 n = 4 से n = 2 में गिरने पर जो रेखा आती है, वह Balmer series में आती है।👉 Balmer series की रेखाएँ मुख्यतः दृश्य (visible) क्षेत्र में होती हैं, इसलिए 487 nm वाली रेखा आँखों से देखी जा सकती है।
Q.14: यदि इलेक्ट्रॉन n = 5 कक्षक में उपस्थित हो, तो H परमाणु के आयनन के लिए कितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी? अपने उत्तर की तुलना हाइड्रोजन परमाणु की आयनन एन्थैल्पी से कीजिए। (आयनन एन्थैल्पी n = 1 कक्षक से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा होती है।)
उत्तर
✅ n = 5 कक्षक से H परमाणु का आयनन करने के लिए आवश्यक ऊर्जा = 8.712 × 10−20 J atom−1✅ हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी (n = 1 से) = 2.178 × 10−18 J atom−1
✅ तुलना: n = 1 वाली आयनन एन्थैल्पी, n = 5 से आयनन ऊर्जा की 25 गुना है।
व्याख्या – Step by Step
हाइड्रोजन के nवें कक्षक की ऊर्जा:En = −(2.178 × 10−18) / n2 J atom−1
आयनन का अर्थ: इलेक्ट्रॉन को n कक्षक से निकालकर n = ∞ पर ले जाना।
n = ∞ पर ऊर्जा: E∞ = 0 J atom−1
________________________________________
(1) n = 5 से आयनन के लिए ऊर्जा
E5 = −(2.178 × 10−18) / 52
E5 = −(2.178 × 10−18) / 25
E5 = −8.712 × 10−20 J atom−1
आयनन ऊर्जा (ΔE) = E∞ − E5
ΔE = 0 − (−8.712 × 10−20)
ΔE = 8.712 × 10−20 J atom−1
________________________________________
(2) हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी (n = 1 से)
E1 = −(2.178 × 10−18) / 12
E1 = −2.178 × 10−18 J atom−1
आयनन एन्थैल्पी (ΔE') = E∞ − E1
ΔE' = 0 − (−2.178 × 10−18)
ΔE' = 2.178 × 10−18 J atom−1
________________________________________
(3) तुलना
तुलना = ΔE' / ΔE
ΔE' / ΔE = (2.178 × 10−18) / (8.712 × 10−20)
= (2.178/8.712) × 102
= 0.25 × 102
= 25
✅ इसलिए n = 1 से आयनन एन्थैल्पी, n = 5 से आयनन ऊर्जा की 25 गुना है।
क्या आप जानते हैं?
👉 जैसे-जैसे n बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता जाता है, इसलिए उसे निकालने के लिए कम ऊर्जा लगती है।👉 n = ∞ का मतलब इलेक्ट्रॉन “पूरी तरह मुक्त” (free electron) हो गया।
Q.15: जब हाइड्रोजन परमाणु में उत्तेजित इलेक्ट्रॉन n = 6 से मूल अवस्था (n = 1) में जाता है, तो प्राप्त उत्सर्जित रेखाओं की अधिकतम संख्या क्या होगी?
उत्तर
✅ अधिकतम उत्सर्जित रेखाओं की संख्या = 15
व्याख्या – Step by Step
Concept:यदि इलेक्ट्रॉन n = 6 से नीचे जाते हुए अलग-अलग ऊर्जा स्तरों के बीच हर संभव संक्रमण करे, तो जितने अलग-अलग संक्रमण होंगे, उतनी ही अधिकतम रेखाएँ बनेंगी।
सूत्र (Maximum number of spectral lines):
n स्तर से अधिकतम रेखाएँ = n(n − 1)/2
यहाँ n = 6
रेखाओं की संख्या = (6 × (6 − 1)) / 2
रेखाओं की संख्या = (6 × 5) / 2
रेखाओं की संख्या = 30 / 2
रेखाओं की संख्या = 15
✅ इसलिए अधिकतम रेखाएँ = 15
Why 15 lines?
n = 6 से इलेक्ट्रॉन ऐसे संक्रमण कर सकता है:
👉 6 → 5, 6 → 4, 6 → 3, 6 → 2, 6 → 1 (5 रेखाएँ)
👉 5 → 4, 5 → 3, 5 → 2, 5 → 1 (4 रेखाएँ)
👉 4 → 3, 4 → 2, 4 → 1 (3 रेखाएँ)
👉 3 → 2, 3 → 1 (2 रेखाएँ)
👉 2 → 1 (1 रेखा)
कुल = 5 + 4 + 3 + 2 + 1 = 15 रेखाएँ
क्या आप जानते हैं?
👉 यह “अधिकतम रेखाएँ” तभी मिलती हैं जब इलेक्ट्रॉन हर संभव रास्ते से गिरता है (जैसे 6→4→2→1 या 6→3→1 आदि)।👉 अगर इलेक्ट्रॉन सीधे 6→1 चला जाए, तो केवल 1 ही रेखा मिलेगी।
Q.16: (i) हाइड्रोजन के प्रथम कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा −2.18 × 10−18 J atom−1 है। पाँचवें कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा बताइए।
(ii) हाइड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणना कीजिए।
(ii) हाइड्रोजन परमाणु के पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ (i) पाँचवें कक्षक की ऊर्जा, E5 = −8.72 × 10−20 J atom−1✅ (ii) पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या, r5 = 13.225 Å = 1.3225 nm
व्याख्या – Step by Step
(i) पाँचवें कक्षक की ऊर्जासूत्र:
En = E1 / n2
दिया है:
E1 = −2.18 × 10−18 J atom−1
n = 5
E5 = (−2.18 × 10−18) / 52
E5 = (−2.18 × 10−18) / 25
E5 = −8.72 × 10−20 J atom−1
________________________________________
(ii) पाँचवें बोर कक्षक की त्रिज्या
सूत्र (बोर त्रिज्या):
rn = 0.529 × n2 Å
दिया है:
n = 5
r5 = 0.529 × 52 Å
r5 = 0.529 × 25 Å
r5 = 13.225 Å
अब nm में बदलें:
1 Å = 0.1 nm
13.225 Å = 13.225 × 0.1 nm
13.225 Å = 1.3225 nm
✅ इसलिए r5 = 13.225 Å = 1.3225 nm
क्या आप जानते हैं?
📌 जैसे-जैसे n बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर जाता है, इसलिए👉 ऊर्जा का मान (ऋणात्मक) कम ऋणात्मक होता जाता है (यानी 0 के पास आता है)।
👉 त्रिज्या n2 के अनुपात में तेज़ी से बढ़ती है।
Q.17: हाइड्रोजन परमाणु की बामर श्रेणी में अधिकतम तरंगदैर्घ्य वाले संक्रमण की तरंग-संख्या (ṽ) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ अधिकतम तरंगदैर्घ्य वाले संक्रमण की तरंग-संख्या (ṽ) = 1.525 × 106 m−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
बामर श्रेणी (Balmer series) में:अंतिम कक्षक n1 = 2 होता है, और इलेक्ट्रॉन n2 = 3, 4, 5… से n = 2 पर आता है।
अधिकतम तरंगदैर्घ्य का मतलब:
ऊर्जा अंतर सबसे कम होगा, इसलिए n2 का सबसे छोटा मान लिया जाता है।
इसलिए संक्रमण: n2 = 3 → n1 = 2
________________________________________
Step 1: राइडबर्ग सूत्र (तरंग-संख्या के लिए)
ṽ = R ( 1/n12 − 1/n22 )
दिया है:
R = 1.09679 × 107 m−1
n1 = 2, n2 = 3
________________________________________
Step 2: मान रखकर गणना
ṽ = 1.09679 × 107 ( 1/22 − 1/32 )
ṽ = 1.09679 × 107 ( 1/4 − 1/9 )
ṽ = 1.09679 × 107 ( (9 − 4)/36 )
ṽ = 1.09679 × 107 ( 5/36 )
ṽ = 1.09679 × 107 × 0.1389
ṽ ≈ 1.525 × 106 m−1
✅ इसलिए तरंग-संख्या (ṽ) ≈ 1.525 × 106 m−1
क्या आप जानते हैं?
👉 बामर श्रेणी की पहली रेखा (3 → 2) को Hα रेखा कहते हैं, और यही बामर श्रेणी की सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य वाली रेखा होती है।
Q.18: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन को पहली कक्षा (n = 1) से पाँचवीं कक्षा (n = 5) तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा (जूल में) ज्ञात कीजिए। जब यह इलेक्ट्रॉन पुनः मूल अवस्था में लौटता है, तो किस तरंगदैर्घ्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
(इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा -2.18 x 10-11 erg है)।
(इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा -2.18 x 10-11 erg है)।
उत्तर
✅ (1) n = 1 → n = 5 ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा = 2.091 × 10−18 J (प्रति परमाणु)✅ (2) वापस n = 5 → n = 1 आने पर उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = 9.51 × 10−8 m = 951 Å (≈ 95.1 nm)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: हाइड्रोजन के nवें कक्ष की ऊर्जा का सूत्रEn = −(2.18 × 10−18) / n2 J atom−1
दिया है:
इलेक्ट्रॉन की तलस्थ अवस्था ऊर्जा = −2.18 × 10−11 erg
1 erg = 10−7 J
इसलिए E1 = −2.18 × 10−11 × 10−7 J = −2.18 × 10−18 J atom−1
________________________________________
Step 2: पाँचवीं कक्षा की ऊर्जा (E5)
E5 = −(2.18 × 10−18) / 52
E5 = −(2.18 × 10−18) / 25
E5 = −8.72 × 10−20 J atom−1
________________________________________
Step 3: 1 से 5 तक ले जाने के लिए आवश्यक ऊर्जा (ΔE)
ΔE = E5 − E1
ΔE = (−8.72 × 10−20) − (−2.18 × 10−18)
ΔE = 2.18 × 10−18 − 8.72 × 10−20
ΔE = 2.091 × 10−18 J (प्रति परमाणु)
________________________________________
Step 4: वापस लौटने पर उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य (λ)
वापस n = 5 → n = 1 आने पर उतनी ही ऊर्जा का फोटॉन उत्सर्जित होगा।
सूत्र:
ΔE = (h c) / λ ⇒ λ = (h c) / ΔE
मान:
h = 6.626 × 10−34 J s
c = 3.0 × 108 m s−1
ΔE = 2.091 × 10−18 J
λ = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (2.091 × 10−18)
λ = 9.51 × 10−8 m
Å में:
1 Å = 10−10 m
9.51 × 10−8 m = 9.51 × 102 Å = 951 Å
✅ इसलिए उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = 9.51 × 10−8 m = 951 Å
क्या आप जानते हैं?
👉 n जितना बड़ा होता है, इलेक्ट्रॉन नाभिक से उतना दूर होता है, इसलिए ऊर्जा स्तर 0 के “क़रीब” आ जाते हैं।👉 n = 5 → n = 1 वाला प्रकाश पराबैंगनी (UV) क्षेत्र में आता है, इसलिए यह आमतौर पर आँखों से नहीं दिखता।
Q.19: हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा En = (−2.18 × 10−18)/n2 J द्वारा दी जाती है। n = 2 कक्षा से इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए। प्रकाश की सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य (cm में) क्या होगी, जिसका उपयोग इस संक्रमण में किया जा सकता है?
उत्तर
✅ आवश्यक ऊर्जा (n = 2 से आयनन) = 5.45 × 10−19 J (प्रति परमाणु)✅ सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य (λmax) = 3.647 × 10−5 cm (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: n = 2 कक्षा की ऊर्जा (E2)En = (−2.18 × 10−18)/n2 J atom−1
n = 2 रखने पर:
E2 = (−2.18 × 10−18)/22
E2 = (−2.18 × 10−18)/4
E2 = −5.45 × 10−19 J atom−1
________________________________________
Step 2: आयनन के लिए आवश्यक ऊर्जा (ΔE)
पूरी तरह निकालना मतलब n = ∞ तक ले जाना, जहाँ E∞ = 0
ΔE = E∞ − E2
ΔE = 0 − (−5.45 × 10−19)
ΔE = 5.45 × 10−19 J atom−1
________________________________________
Step 3: सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य (λmax)
आयनन के लिए कम से कम इतनी ऊर्जा चाहिए, इसलिए सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य वही होगी जिसकी ऊर्जा = ΔE
सूत्र:
ΔE = (h c) / λ ⇒ λ = (h c) / ΔE
मान:
h = 6.626 × 10−34 J s
c = 3.0 × 108 m s−1
ΔE = 5.45 × 10−19 J
λ = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (5.45 × 10−19)
λ = 3.647 × 10−7 m
अब cm में:
1 m = 100 cm
λ = 3.647 × 10−7 m × 100 = 3.647 × 10−5 cm
________________________________________
✅ इसलिए सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य (λmax) = 3.647 × 10−5 cm
क्या आप जानते हैं?
👉 “सबसे लम्बी तरंगदैर्घ्य” का मतलब “सबसे कम ऊर्जा वाला” फोटॉन होता है।👉 इससे छोटी तरंगदैर्घ्य (अधिक ऊर्जा) वाला प्रकाश भी इलेक्ट्रॉन को निकाल सकता है, लेकिन λmax वह सीमा है जिसके बाद आयनन संभव नहीं रहता।
Q.20: 2.05 × 107 m s−1 वेग से गतिशील किसी इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्घ्य क्या होगा?
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन का तरंगदैर्घ्य (de Broglie) λ = 3.55 × 10−11 mयानी 0.0355 nm = 35.5 pm = 0.355 Å
व्याख्या – Step by Step
सूत्र (de Broglie):किसी कण का तरंगदैर्घ्य, λ = h/(m v)
दिया है:
👉 h = 6.626 × 10−34 J s
👉 m (इलेक्ट्रॉन) = 9.109 × 10−31 kg
👉 v = 2.05 × 107 m s−1
मान रखेंगे:
λ = (6.626 × 10−34) / ((9.109 × 10−31) × (2.05 × 107))
λ = 3.55 × 10−11 m
Unit conversion:
👉 3.55 × 10−11 m = 0.0355 nm
👉 = 35.5 pm
👉 = 0.355 Å
क्या आप जानते हैं?
👉 वेग बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन का λ (तरंगदैर्घ्य) कम हो जाता है।👉 इसी वजह से तेज इलेक्ट्रॉन की मदद से Electron Microscope में बहुत छोटे कण भी दिख जाते हैं।
Q.21: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 9.1 × 10−31 kg है। यदि इसकी गतिज ऊर्जा 3.0 × 10−25 J हो, तो इसकी तरंगदैर्घ्य (λ) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्घ्य, λ = 8.97 × 10−7 m= 8.97 × 103 Å (लगभग 8967 Å)
= 897 nm (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: पहले वेग (v) निकालते हैंगतिज ऊर्जा का सूत्र:
गतिज ऊर्जा = (1/2) m v2
दिया है:
👉 m = 9.1 × 10−31 kg
👉 गतिज ऊर्जा = 3.0 × 10−25 J
v = √(2 × 3.0 × 10−25 / 9.1 × 10−31)
v = 8.12 × 102 m s−1
Step 2: अब de Broglie तरंगदैर्घ्य (λ) निकालते हैं
सूत्र: λ = h/(m v)
h = 6.626 × 10−34 J s
λ = (6.626 × 10−34) / ((9.1 × 10−31) × (8.12 × 102))
λ = 8.97 × 10−7 m
Step 3: यूनिट बदलना
👉 1 Å = 10−10 m
⇒ λ = 8.97 × 10−7 m = 8.97 × 103 Å = 8967 Å
👉 1 nm = 10−9 m
⇒ λ = 8.97 × 10−7 m = 897 nm
क्या आप जानते हैं?
👉 इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा कम होने पर उसका वेग कम होता है और de Broglie तरंगदैर्घ्य बढ़ जाता है।👉 इसी वजह से धीमे इलेक्ट्रॉन में “wave nature” ज्यादा स्पष्ट दिखता है।
Q.22: निम्नलिखित में से कौन-कौन सम-आयनी स्पीशीज हैं (अर्थात जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है)?
Na+, K+, Mg2+, Ca2+, S2−, Ar
Na+, K+, Mg2+, Ca2+, S2−, Ar
उत्तर
✅ सम-आयनी (Isoelectronic) समूह1) 10 इलेक्ट्रॉन वाले (Ne के समान)
👉 Na+ : 11 − 1 = 10
👉 Mg2+ : 12 − 2 = 10
2) 18 इलेक्ट्रॉन वाले (Ar के समान)
👉 K+ : 19 − 1 = 18
👉 Ca2+ : 20 − 2 = 18
👉 S2− : 16 + 2 = 18
👉 Ar : 18 = 18
| स्पीशीज | परमाणु क्रमांक (Z) | आवेश | कुल इलेक्ट्रॉन | सम-आयनी समूह |
|---|---|---|---|---|
| Na+ | 11 | +1 | 10 | 10 इलेक्ट्रॉन |
| Mg2+ | 12 | +2 | 10 | 10 इलेक्ट्रॉन |
| K+ | 19 | +1 | 18 | 18 इलेक्ट्रॉन |
| Ca2+ | 20 | +2 | 18 | 18 इलेक्ट्रॉन |
| S2− | 16 | −2 | 18 | 18 इलेक्ट्रॉन |
| Ar | 18 | 0 | 18 | 18 इलेक्ट्रॉन |
व्याख्या – Step by Step
नियम👉 धनायन (positive ion) में इलेक्ट्रॉन घटते हैं
👉 ऋणायन (negative ion) में इलेक्ट्रॉन बढ़ते हैं
👉 कुल इलेक्ट्रॉन = परमाणु क्रमांक (Z) ± आवेश
अब एक-एक करके
👉 Na (Z = 11) ⇒ Na+ में इलेक्ट्रॉन = 11 − 1 = 10
👉 Mg (Z = 12) ⇒ Mg2+ में इलेक्ट्रॉन = 12 − 2 = 10
👉 K (Z = 19) ⇒ K+ में इलेक्ट्रॉन = 19 − 1 = 18
👉 Ca (Z = 20) ⇒ Ca2+ में इलेक्ट्रॉन = 20 − 2 = 18
👉 S (Z = 16) ⇒ S2− में इलेक्ट्रॉन = 16 + 2 = 18
👉 Ar (Z = 18) ⇒ इलेक्ट्रॉन = 18
✅ इसलिए 10 इलेक्ट्रॉन वाली स्पीशीज एक समूह में, और 18 इलेक्ट्रॉन वाली स्पीशीज दूसरे समूह में सम-आयनी हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 सम-आयनी स्पीशीज में इलेक्ट्रॉन संख्या समान होती है, लेकिन उनका नाभिकीय आवेश (Z) अलग होता है।👉 इसी कारण उनके आकार (त्रिज्या) समान नहीं होते:
✅ Z जितना ज्यादा, आयन उतना छोटा (एक ही इलेक्ट्रॉन संख्या होने पर)।
Q.23:
(i) निम्नलिखित आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए: (क) H− (ख) Na+ (ग) O2− (घ) F−
(ii) उन तत्वों की परमाणु संख्या (Z) बताइए जिनके बाह्यतम इलेक्ट्रॉन: (क) 3s1 (ख) 2p3 (ग) 3p5
(iii) निम्नलिखित विन्यास वाले परमाणुओं के नाम बताइए: (क) [He] 2s1 (ख) [Ne] 3s2 3p3 (ग) [Ar] 4s2 3d1
(i) निम्नलिखित आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए: (क) H− (ख) Na+ (ग) O2− (घ) F−
(ii) उन तत्वों की परमाणु संख्या (Z) बताइए जिनके बाह्यतम इलेक्ट्रॉन: (क) 3s1 (ख) 2p3 (ग) 3p5
(iii) निम्नलिखित विन्यास वाले परमाणुओं के नाम बताइए: (क) [He] 2s1 (ख) [Ne] 3s2 3p3 (ग) [Ar] 4s2 3d1
उत्तर
(i) आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास👉 H− (Z = 1, e− = 2) : 1s2
👉 Na+ (Z = 11, e− = 10) : 1s2 2s2 2p6
👉 O2− (Z = 8, e− = 10) : 1s2 2s2 2p6
👉 F− (Z = 9, e− = 10) : 1s2 2s2 2p6
(ii) बाह्यतम इलेक्ट्रॉन से परमाणु संख्या (Z)
👉 3s1 ⇒ Na (सोडियम) ⇒ Z = 11
👉 2p3 ⇒ N (नाइट्रोजन) ⇒ Z = 7
👉 3p5 ⇒ Cl (क्लोरीन) ⇒ Z = 17
(iii) दिए गए विन्यास से तत्व का नाम
👉 [He] 2s1 ⇒ Li (लिथियम)
👉 [Ne] 3s2 3p3 ⇒ P (फॉस्फोरस)
👉 [Ar] 4s2 3d1 ⇒ Sc (स्कैन्डियम)
व्याख्या – Step by Step
(i) आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कैसे लिखें?✅ नियम:
👉 परमाणु में इलेक्ट्रॉन = परमाणु संख्या (Z)
👉 ऋणायन (−) बनने पर इलेक्ट्रॉन जुड़ते हैं
👉 धनायन (+) बनने पर इलेक्ट्रॉन घटते हैं
उदाहरण:
👉 Na का Z = 11, तो Na में 11 e−
👉 Na+ बनने पर 1 e− निकल गया ⇒ 10 e−
✅ इसलिए Na+ का विन्यास Ne जैसा हो जाता है: 1s2 2s2 2p6
(ii) बाह्यतम इलेक्ट्रॉन से Z कैसे पहचानें?
👉 3s1 का मतलब: तीसरा आवर्त + s में 1 इलेक्ट्रॉन ⇒ Na
👉 2p3 का मतलब: दूसरा आवर्त + p में 3 इलेक्ट्रॉन ⇒ N
👉 3p5 का मतलब: तीसरा आवर्त + p में 5 इलेक्ट्रॉन ⇒ Cl
(iii) शॉर्ट-हैंड (Noble gas) विन्यास से पहचान
👉 [He] = 2 इलेक्ट्रॉन, + 2s1 ⇒ कुल 3 ⇒ Li
👉 [Ne] = 10 इलेक्ट्रॉन, + (3s2 3p3 = 5) ⇒ कुल 15 ⇒ P
👉 [Ar] = 18 इलेक्ट्रॉन, + (4s2 3d1 = 3) ⇒ कुल 21 ⇒ Sc
क्या आप जानते हैं?
👉 कई आयन सम-आयनी (isoelectronic) होते हैं, यानी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।✅ Na+, O2−, F− — तीनों में 10 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इनका विन्यास Ne जैसा होता है।
👉 लेकिन Z अलग होने से इनके आकार (त्रिज्या) समान नहीं होते।
Q.24: किस निम्नतम n मान द्वारा g-कक्षक का अस्तित्व अनुमत होगा?
उत्तर
✅ g-कक्षक के लिए न्यूनतम n = 5
व्याख्या – Step by Step
Step 1: g-कक्षक किससे पहचाना जाता है?कक्षक (subshell) को आजिमुथल क्वांटम संख्या (l) से पहचाना जाता है:
👉 s ⇒ l = 0
👉 p ⇒ l = 1
👉 d ⇒ l = 2
👉 f ⇒ l = 3
👉 g ⇒ l = 4
Step 2: g-कक्षक कब संभव होगा?
नियम: किसी भी n के लिए l के मान होते हैं:
✅ l = 0 से (n − 1) तक
g-कक्षक के लिए l = 4 चाहिए, इसलिए:
\[ (n-1)\ge 4 \] \[ n\ge 5 \] ✅ इसलिए g-कक्षक पहली बार n = 5 पर संभव होता है।
Step 3: g-कक्षक में कितने ऑर्बिटल होंगे?
किसी भी subshell में ऑर्बिटल की संख्या:
\[ \text{ऑर्बिटल} = (2l+1) \] g के लिए l = 4:
\[ \text{ऑर्बिटल} = 2(4)+1=9 \] और हर ऑर्बिटल में 2 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, इसलिए अधिकतम इलेक्ट्रॉन:
\[ \text{अधिकतम इलेक्ट्रॉन} = 9\times 2 = 18 \]
क्या आप जानते हैं?
👉 g-कक्षक (l = 4) को कभी-कभी “high-order orbital” भी कहते हैं।👉 स्कूल-लेवल पर आमतौर पर s, p, d, f तक पढ़ते हैं, लेकिन क्वांटम नियमों के अनुसार g, h जैसे कक्षक भी सैद्धांतिक रूप से संभव हैं।
Q.25: एक इलेक्ट्रॉन किसी 3d-कक्षक में है। इसके लिए n, l और ml के सम्भव मान दीजिए।
उत्तर
✅ मुख्य क्वांटम संख्या (n) = 3✅ कक्षीय/ऑर्बिटल क्वांटम संख्या (l) = 2 (क्योंकि d के लिए l = 2)
✅ चुंबकीय क्वांटम संख्या (ml) = −2, −1, 0, +1, +2
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मुख्य क्वांटम संख्या (n) निकालनाकक्षक दिया है 3d
➡️ यहाँ 3 ही मुख्य क्वांटम संख्या बताता है।
✅ इसलिए n = 3
Step 2: कक्षीय/ऑर्बिटल क्वांटम संख्या (l) निकालना
Subshell के अनुसार l का मान तय होता है:
👉 s ⇒ l = 0
👉 p ⇒ l = 1
👉 d ⇒ l = 2
👉 f ⇒ l = 3
क्योंकि कक्षक d है,
✅ इसलिए l = 2
Step 3: चुंबकीय क्वांटम संख्या (ml) निकालना
नियम:
✅ ml = −l से +l तक सभी पूर्णांक मान लेता है।
यहाँ l = 2, इसलिए:
\( m_l = -2,\,-1,\,0,\,+1,\,+2 \) ✅ अतः ml = −2, −1, 0, +1, +2
क्या आप जानते हैं?
👉 d-subshell में कुल 5 ऑर्बिटल होते हैं, इसलिए ml के भी 5 मान आते हैं।👉 हर ऑर्बिटल में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन जा सकते हैं, इसलिए d-subshell में अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
Q.26: किसी तत्व के परमाणु में 29 इलेक्ट्रॉन तथा 35 न्यूट्रॉन हैं।
(i) इसमें प्रोटॉनों की संख्या बताइए।
(ii) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
(i) इसमें प्रोटॉनों की संख्या बताइए।
(ii) तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
✅ (i) प्रोटॉनों की संख्या = 29✅ (ii) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास = 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹
या ✅ [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
(ऊर्जास्तर के अनुसार: ✅ 2, 8, 18, 1)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रोटॉनों की संख्या निकालनानियम: उदासीन परमाणु (neutral atom) में
✅ इलेक्ट्रॉन संख्या = प्रोटॉन संख्या
दिया है: इलेक्ट्रॉन = 29
➡️ इसलिए प्रोटॉन = 29
✅ प्रोटॉनों की संख्या = 29
Step 2: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखना
क्योंकि परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉन संख्या = 29
➡️ Z = 29 वाले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:
✅ 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 3d¹⁰ 4s¹
संक्षिप्त रूप: ✅ [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
ऊर्जास्तर (Shell-wise) वितरण:
K = 2, L = 8, M = 18, N = 1
✅ 2, 8, 18, 1
क्या आप जानते हैं?
👉 Z = 29 वाला तत्व ताँबा (Copper) होता है।👉 इसका विन्यास सामान्य नियम से थोड़ा अलग होता है: 3d¹⁰ 4s¹ क्योंकि 3d का fully filled (पूरा भरा) होना ज्यादा स्थिर होता है।
Q.27: H2+, H2 और O2+ स्पीशीज में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
उत्तर
✅ H2+ में इलेक्ट्रॉन = 1✅ H2 में इलेक्ट्रॉन = 2
✅ O2+ में इलेक्ट्रॉन = 15
व्याख्या – Step by Step
Rule (नियम)👉 उदासीन (neutral) में: कुल इलेक्ट्रॉन = कुल परमाणु क्रमांक (Z) का योग
👉 धनायन (+) में: इलेक्ट्रॉन 1 कम (जितना + charge)
(i) H2+
Hydrogen का Z = 1
H2 में इलेक्ट्रॉन = 2 × 1 = 2
लेकिन H2+ में +1 charge है ⇒ 1 इलेक्ट्रॉन कम
✅ 2 − 1 = 1
(ii) H2
Hydrogen का Z = 1
✅ इलेक्ट्रॉन = 2 × 1 = 2
(iii) O2+
Oxygen का Z = 8
O2 में इलेक्ट्रॉन = 2 × 8 = 16
लेकिन O2+ में +1 charge ⇒ 1 इलेक्ट्रॉन कम
✅ 16 − 1 = 15
क्या आप जानते हैं?
👉 H+ के पास कोई इलेक्ट्रॉन नहीं होता, इसलिए इसे कई बार “प्रोटॉन” भी कहा जाता है।
Q.28:
(i) किसी परमाणु कक्षक के लिए n = 3 है। इसके लिए l तथा ml के संभावित मान क्या होंगे?
(ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए ml तथा ms (स्पिन क्वांटम संख्या) के मान बताइए।
(iii) निम्नलिखित में से कौन-कौन से कक्षक संभव हैं: 1p, 2s, 2p तथा 3f?
(ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए ml तथा ms (स्पिन क्वांटम संख्या) के मान बताइए।
(iii) निम्नलिखित में से कौन-कौन से कक्षक संभव हैं: 1p, 2s, 2p तथा 3f?
उत्तर
(i) n = 3 के लिए✅ l के मान = 0, 1, 2
✅ ml के मान:
👉 जब l = 0 → ml = 0
👉 जब l = 1 → ml = −1, 0, +1
👉 जब l = 2 → ml = −2, −1, 0, +1, +2
(ii) 3d कक्षक के इलेक्ट्रॉनों के लिए
✅ n = 3
✅ l = 2 (क्योंकि d के लिए l = 2)
✅ ml = −2, −1, 0, +1, +2
✅ ms = +1/2 या −1/2
(iii) संभव कक्षक
✅ 2s संभव है
✅ 2p संभव है
❌ 1p संभव नहीं है
❌ 3f संभव नहीं है
व्याख्या – Step by Step
(i) n = 3 के लिए l और mlStep 1: कक्षीय/ऑर्बिटल क्वांटम संख्या (l)
नियम: ✅ l = 0 से (n − 1) तक होता है
यहाँ n = 3, इसलिए:
✅ l = 0, 1, 2
Step 2: चुंबकीय क्वांटम संख्या (ml)
नियम: ✅ ml = −l से +l तक सभी पूर्णांक मान लेता है
इसलिए:
👉 l = 0 ⇒ ml = 0
👉 l = 1 ⇒ ml = −1, 0, +1
👉 l = 2 ⇒ ml = −2, −1, 0, +1, +2
(ii) 3d कक्षक के लिए ml और ms
3d में “3” से n = 3 मिलता है और “d” से l = 2
👉 d के लिए ✅ l = 2
इसलिए चुंबकीय क्वांटम संख्या:
✅ ml = −2 से +2 (यानि −2, −1, 0, +1, +2)
और स्पिन के लिए हमेशा:
✅ ms = +1/2 या −1/2
(iii) कौन-कौन से कक्षक संभव हैं?
नियम: ✅ किसी भी n के लिए l की अधिकतम मान (n − 1) होती है। यानी l का मान n से कम होना चाहिए।
उपकोश की अवधारणा:
👉 s → l = 0
👉 p → l = 1
👉 d → l = 2
👉 f → l = 3
अब जाँच:
👉 1p: n = 1 के लिए l सिर्फ 0 हो सकता है, लेकिन p के लिए l = 1 चाहिए
❌ इसलिए 1p असंभव
👉 2s: n = 2, s के लिए l = 0 (allowed)
✅ इसलिए 2s संभव
👉 2p: n = 2, p के लिए l = 1 (allowed क्योंकि n − 1 = 1)
✅ इसलिए 2p संभव
👉 3f: f के लिए l = 3 चाहिए, लेकिन n = 3 के लिए max l = 2
❌ इसलिए 3f असंभव
क्या आप जानते हैं?
👉 n = 1 वाले स्तर में केवल 1s कक्षक ही संभव होता है, क्योंकि वहाँ l = 0 ही allowed होता है।
Q.29: s, p, d, f संकेतनों (notations) द्वारा निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कक्षकों को बताइए:
(क) n = 1, l = 0
(ख) n = 3, l = 1
(ग) n = 4, l = 2
(घ) n = 4, l = 3
(क) n = 1, l = 0
(ख) n = 3, l = 1
(ग) n = 4, l = 2
(घ) n = 4, l = 3
उत्तर
✅ (क) n = 1, l = 0 → 1s✅ (ख) n = 3, l = 1 → 3p
✅ (ग) n = 4, l = 2 → 4d
✅ (घ) n = 4, l = 3 → 4f
व्याख्या – Step by Step
Step 1: l से subshell पहचानते हैं👉 l = 0 → s
👉 l = 1 → p
👉 l = 2 → d
👉 l = 3 → f
Step 2: कक्षक संकेतन लिखते हैं
नियम: ✅ कक्षक का संकेतन = nl (जैसे 2p, 3d)
अब एक-एक करके:
👉 (क) n = 1, l = 0 ⇒ 1s
👉 (ख) n = 3, l = 1 ⇒ 3p
👉 (ग) n = 4, l = 2 ⇒ 4d
👉 (घ) n = 4, l = 3 ⇒ 4f
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी भी shell में l का अधिकतम मान = (n − 1) होता है।इसलिए n = 1 में केवल 1s ही संभव होता है (क्योंकि वहाँ l सिर्फ 0 हो सकता है)।
Q.30: कारण देते हुए बताइए कि निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं के कौन-से मान संभव नहीं हैं:
(क) n = 0, l = 0, ml = 0, ms = +½
(ख) n = 1, l = 0, ml = 0, ms = −½
(ग) n = 1, l = 1, ml = 0, ms = +½
(घ) n = 2, l = 1, ml = 0, ms = −½
(ङ) n = 3, l = 3, ml = −3, ms = +½
(च) n = 3, l = 1, ml = 0, ms = +½
(क) n = 0, l = 0, ml = 0, ms = +½
(ख) n = 1, l = 0, ml = 0, ms = −½
(ग) n = 1, l = 1, ml = 0, ms = +½
(घ) n = 2, l = 1, ml = 0, ms = −½
(ङ) n = 3, l = 3, ml = −3, ms = +½
(च) n = 3, l = 1, ml = 0, ms = +½
उत्तर
❌ असंभव (Not possible): (क), (ग), (ङ)✅ संभव (Possible): (ख), (घ), (च)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Rules (नियम)✅ n = 1, 2, 3, … (0 या negative नहीं)
✅ l = 0 से (n − 1) तक
✅ ml = −l से +l तक (पूर्णांक)
✅ ms = +½ या −½
(क) n = 0, l = 0, ml = 0, ms = +½
यहाँ n = 0 दिया है, जबकि n कभी 0 नहीं होता।
❌ इसलिए असंभव
(ख) n = 1, l = 0, ml = 0, ms = −½
n = 1 के लिए l केवल 0 हो सकता है ✅
ml = 0 सही ✅
ms = −½ सही ✅
✅ इसलिए संभव
(ग) n = 1, l = 1, ml = 0, ms = +½
n = 1 के लिए l की max value (n − 1) = 0 होती है, लेकिन यहाँ l = 1 दिया है।
❌ इसलिए असंभव
(घ) n = 2, l = 1, ml = 0, ms = −½
n = 2 के लिए l = 0 या 1 हो सकता है ✅
l = 1 ठीक ✅
ml = 0 (−1 से +1 के बीच) ✅
ms = −½ ✅
✅ इसलिए संभव
(ङ) n = 3, l = 3, ml = −3, ms = +½
n = 3 के लिए l की max value (n − 1) = 2 होती है, लेकिन यहाँ l = 3 दिया है।
❌ इसलिए असंभव
(ml = −3 तभी possible होता जब l = 3 valid होता)
(च) n = 3, l = 1, ml = 0, ms = +½
n = 3 के लिए l = 0, 1, 2 possible ✅
l = 1 ठीक ✅
ml = 0 (−1 से +1 के बीच) ✅
ms = +½ ✅
✅ इसलिए संभव
क्या आप जानते हैं?
👉 सबसे ज्यादा गलती l में होती है: हमेशा याद रखें ✅l की अधिकतम मान = (n − 1)
जैसे n = 3 में l कभी 3 नहीं हो सकता, केवल 0, 1, 2 ही होगा।
Q.31: किसी परमाणु में निम्नलिखित क्वांटम संख्याओं वाले कितने इलेक्ट्रॉन होंगे?
(क) n = 4, ms = −½
(ख) n = 3, l = 0
(क) n = 4, ms = −½
(ख) n = 3, l = 0
उत्तर
✅ (क) 16 इलेक्ट्रॉन✅ (ख) 2 इलेक्ट्रॉन
व्याख्या – Step by Step
(क) n = 4, ms = −½Step 1: n = 4 कक्षक (shell) की अधिकतम इलेक्ट्रॉन की संख्या
नियम:
✅ किसी भी कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n2
2n2 = 2 × (4)2 = 2 × 16 = 32
अर्थात n = 4 कोश में कुल 32 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
Step 2: ms के अनुसार किसी भी कक्षक में इलेक्ट्रॉन के लिए:
✅ ms = +1/2 या ms = −1/2
कुल 32 इलेक्ट्रॉनों में:
👉 आधे इलेक्ट्रॉन का ms = +1/2 होगा
👉 शेष आधे का ms = −1/2 होगा
📌 ms = −1/2 वाले इलेक्ट्रॉन = 32/2 = 16
✅ इसलिए n = 4 और ms = −½ वाले इलेक्ट्रॉन = 16
(ख) n = 3, l = 0
Step 1: l = 0 का अर्थ
l = 0 ⇒ s-कक्षक (s-orbital)
इसलिए यह 3s कक्षक होगा।
Step 2: ml और ms के मान
s के लिए:
✅ ml = 0 (केवल एक ही मान)
और स्पिन के लिए:
✅ ms = +1/2 तथा −1/2
इसलिए 3s कक्षक में इलेक्ट्रॉन होंगे:
ml = 0, ms = +1/2 या −1/2
✅ अतः कुल 2 इलेक्ट्रॉन संभव हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 s-कक्षक में सिर्फ 1 orbital होता है, इसलिए उसमें हमेशा अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन ही आ सकते हैं।👉 किसी भी कोश में कुल इलेक्ट्रॉन क्षमता: ✅ 2n2 होती है।
उदाहरण: n = 4 ⇒ 2(42) = 32 इलेक्ट्रॉन (दोनों spins मिलाकर)।
Q.32: यह दर्शाइए कि हाइड्रोजन परमाणु की बोहर कक्षा की परिधि (circumference) उस कक्षा में घूम रहे इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (λ) का पूर्ण गुणक (integral multiple) होती है।
उत्तर
✅ हाइड्रोजन की nवीं बोहर कक्षा के लिए:2π rn = nλ
अर्थात कक्षा की परिधि = n × (डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (λ))
व्याख्या – Step by Step
Step 1: नील्स बोहर के सिद्धान्त के अनुसारबोहर का कोणीय संवेग (Angular momentum) quantization नियम:
mvr = (nh)/(2π)
जहाँ
👉 m = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
👉 v = वेग
👉 r = कक्षा की त्रिज्या
👉 n = 1,2,3,…
👉 h = प्लैंक स्थिरांक
Step 2: लुई डी-ब्रॉग्ली समीकरण
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य:
λ = h/(mv)
Step 3: बोहर वाले समीकरण से:
mvr = (nh)/(2π)
2πr = (nh)/(mv)
अब h/(mv) = λ रख दें:
2πr = nλ
✅ इसलिए सिद्ध हुआ कि कक्षा की परिधि (2πr) = nλ, यानी परिधि तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणक होती है।
क्या आप जानते हैं?
👉 इसका मतलब इलेक्ट्रॉन की तरंग कक्षा में standing wave बनाती है।अगर 2πr = nλ पूरा न हो, तो तरंग “सही से फिट” नहीं होगी और कक्षा स्थिर नहीं मानी जाएगी।
Q.33: He+ स्पेक्ट्रम में n = 4 से n = 2 (बाल्मर संक्रमण) से प्राप्त तरंगदैर्घ्य के बराबर वाला संक्रमण हाइड्रोजन (H) स्पेक्ट्रम में क्या होगा?
उत्तर
✅ हाइड्रोजन (H) स्पेक्ट्रम में समान तरंगदैर्घ्य के लिए संक्रमण:n = 2 से n = 1 (Lyman-α)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Rydberg (Wave number) का सूत्र\( \bar{\nu}=RZ^2\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right) \)
जहाँ \(n_2>n_1\)
Step 2: He+ के लिए Z = 2
He+ में \(Z=2\)
\( \bar{\nu}=R(2)^2\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right) =4R\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right) \)
दिया है: \(n_2=4,\; n_1=2\)
\( \bar{\nu}=4R\left(\frac{1}{2^2}-\frac{1}{4^2}\right) =4R\left(\frac{1}{4}-\frac{1}{16}\right) =4R\left(\frac{3}{16}\right) =\frac{3}{4}R \)
Step 3: H (Hydrogen) में समान तरंगदैर्घ्य के लिए
समान तरंगदैर्घ्य ⇒ समान \(\bar{\nu}\)
Hydrogen के लिए \(Z=1\)
\( \bar{\nu}=R\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right) \)
इसे \(\frac{3}{4}R\) के बराबर रखेंगे:
\( R\left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)=\frac{3}{4}R \Rightarrow \left(\frac{1}{n_1^2}-\frac{1}{n_2^2}\right)=\frac{3}{4} \)
अब \(n_1=1\) लेने पर:
\( 1-\frac{1}{n_2^2}=\frac{3}{4} \Rightarrow \frac{1}{n_2^2}=\frac{1}{4} \Rightarrow n_2=2 \)
✅ इसलिए H में संक्रमण होगा: \(n = 2 \rightarrow n = 1\)
क्या आप जानते हैं?
👉 He+ एक hydrogen-like (एक-इलेक्ट्रॉन) आयन है, इसलिए इसका स्पेक्ट्रम भी Rydberg सूत्र से ही निकलता है, बस \(Z^2\) factor की वजह से lines अलग जगह पर आती हैं।
Q.34: He+(g) → He2+(g) + e− प्रक्रिया के लिए आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिए।
हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा = 2.18 × 10−18 J atom−1 है।
हाइड्रोजन परमाणु की तलस्थ अवस्था में आयनन ऊर्जा = 2.18 × 10−18 J atom−1 है।
उत्तर
✅ आवश्यक ऊर्जा (Ionization Energy of He+)= 8.72 × 10−18 J ion−1
(लगभग 54.4 eV)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: हाइड्रोजन-like species का नियमHe+ एक हाइड्रोजन जैसा (एक-इलेक्ट्रॉन) आयन है।
ऐसे आयनों के लिए आयनन ऊर्जा ∝ Z2 होती है।
यानी,
E(He+) = E(H) × Z2
Step 2: मान रखकर गणना
हाइड्रोजन (Z = 1) की आयनन ऊर्जा:
E(H) = 2.18 × 10−18 J atom−1
He+ के लिए Z = 2
तो,
E(He+)
= 2.18 × 10−18 × (2)2
= 2.18 × 10−18 × 4
= 8.72 × 10−18 J ion−1
✅ यही ऊर्जा He+ से इलेक्ट्रॉन हटाकर He2+ बनाने में लगेगी।
क्या आप जानते हैं?
👉 He+ में इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण हाइड्रोजन से 4 गुना ज्यादा होता है (क्योंकि Z2 = 4), इसलिए इसकी आयनन ऊर्जा भी 4 गुना हो जाती है।
Q.35: यदि कार्बन परमाणु का व्यास 0.15 nm है, तो उन कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना कीजिए, जिन्हें 20 cm स्केल की लंबाई में एक-एक करके व्यवस्थित किया जा सकता है।
उत्तर
✅ कार्बन परमाणुओं की संख्या = 1.33 × 109 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: व्यास को cm में बदलनादिया है:
कार्बन परमाणु का व्यास = 0.15 nm
हम जानते हैं:
1 nm = 10−7 cm
इसलिए,
0.15 nm = 0.15 × 10−7 cm
= 1.5 × 10−8 cm
✅ कार्बन परमाणु का व्यास = 1.5 × 10−8 cm
Step 2: स्केल की लंबाई दी है
स्केल की लंबाई = 20 cm
Step 3: परमाणुओं की संख्या निकालना
एक-एक करके रखने का मतलब:
✅ संख्या = (कुल लंबाई) ÷ (एक परमाणु का व्यास)
परमाणुओं की संख्या = 20 / (1.5 × 10−8)
अब गणना:
20 ÷ 1.5 = 13.333...
और 10−8 नीचे है, तो ऊपर जाएगा 108
= 13.33 × 108 = 1.33 × 109
✅ इसलिए, कार्बन परमाणुओं की संख्या = 1.33 × 109
क्या आप जानते हैं?
👉 1 नैनोमीटर (nm) इतना छोटा होता है कि 1 cm में लगभग 107 nm होते हैं। इसलिए परमाणुओं की संख्या बहुत बड़ी आती है।
Q.36: कार्बन के 2 × 108 परमाणु एक कतार में व्यवस्थित हैं। यदि इस व्यवस्था की लंबाई 2.4 cm है, तो कार्बन परमाणु के व्यास की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ कार्बन परमाणु का व्यास = 1.2 × 10−8 cm✅ = 1.2 × 10−10 m
✅ = 0.12 nm
व्याख्या – Step by Step
Step 1: दिया गया डेटा लिखें👉 परमाणुओं की संख्या, N = 2 × 108
👉 कुल लंबाई, L = 2.4 cm
Step 2: व्यास का सूत्र
एक कतार में एक-एक परमाणु रखे हों तो:
✅ कुल लंबाई = परमाणुओं की संख्या × एक परमाणु का व्यास
L = N × d ⇒ d = L / N
Step 3: मान रखकर गणना
d = 2.4 / (2 × 108)
पहले 2.4 ÷ 2 = 1.2
d = 1.2 × 10−8 cm
✅ इसलिए व्यास = 1.2 × 10−8 cm
Step 4: इकाई बदलना (cm → m → nm)
1 cm = 10−2 m
1.2 × 10−8 cm = 1.2 × 10−8 × 10−2 = 1.2 × 10−10 m
और 1 nm = 10−9 m
1.2 × 10−10 m = 0.12 nm
✅ इसलिए व्यास = 0.12 nm
क्या आप जानते हैं?
👉 परमाणु का आकार सामान्यतः 0.1 nm के आसपास होता है, इसलिए यहाँ निकला हुआ मान (0.12 nm) सही है।
Q.37: जिंक परमाणु का व्यास 2.6 Å है।
(क) जिंक परमाणु की त्रिज्या pm में ज्ञात कीजिए।
(ख) 1.6 cm लंबाई की एक कतार में लगातार रखे गए जिंक परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
(क) जिंक परमाणु की त्रिज्या pm में ज्ञात कीजिए।
(ख) 1.6 cm लंबाई की एक कतार में लगातार रखे गए जिंक परमाणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ (क) जिंक परमाणु की त्रिज्या = 130 pm✅ (ख) 1.6 cm लंबाई में परमाणुओं की संख्या = 6.154 × 107 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
(क) त्रिज्या (Radius) निकालनाStep 1: व्यास को pm में बदलना
दिया है: व्यास = 2.6 Å
हम जानते हैं:
1 Å = 10−10 m = 100 pm
तो,
2.6 Å = 2.6 × 100 pm = 260 pm
✅ जिंक परमाणु का व्यास = 260 pm
Step 2: त्रिज्या = व्यास/2
r = d/2 = 260/2 = 130 pm
✅ जिंक परमाणु की त्रिज्या = 130 pm
(ख) 1.6 cm लंबाई में परमाणुओं की संख्या
Step 1: लंबाई को meter में बदलना
दिया है: L = 1.6 cm
1.6 cm = 1.6 × 10−2 m
Step 2: परमाणु का व्यास meter में
2.6 Å = 2.6 × 10−10 m
Step 3: संख्या = कुल लंबाई / व्यास
N = L/d = (1.6 × 10−2) / (2.6 × 10−10)
अब गणना:
1.6 ÷ 2.6 = 0.6154
और 10−2 / 10−10 = 108
N = 0.6154 × 108 = 6.154 × 107
✅ परमाणुओं की संख्या = 6.154 × 107
क्या आप जानते हैं?
📌 Å (Angstrom) और pm (picometer) दोनों बहुत छोटी इकाइयाँ हैं।👉 1 Å = 10−10 m
👉 1 pm = 10−12 m
👉 इसलिए 1 Å = 100 pm होता है।
Q.38: किसी कण का स्थिर विद्युत आवेश 2.5 × 10−16 C है। इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ≈ 1560
व्याख्या – Step by Step
Step 1: इलेक्ट्रॉन के आवेश का मानएक इलेक्ट्रॉन का आवेश (magnitude) होता है:
✅ e = 1.6022 × 10−19 C
Step 2: इलेक्ट्रॉनों की संख्या का सूत्र
यदि कुल आवेश Q दिया है, तो:
इलेक्ट्रॉनों की संख्या ,n = Q/e
Step 3: मान रखकर गणना
दिया है:
Q = 2.5 × 10−16 C
e = 1.6022 × 10−19 C
n = (2.5 × 10−16 C) / (1.6022 × 10−19 C)
n = (2.5 / 1.6022) × 103 ≈ 1.56035 × 103 ≈ 1560
✅ इसलिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या ≈ 1560
क्या आप जानते हैं?
👉 विद्युत आवेश क्वांटाइज़्ड होता है, यानी कोई भी आवेश हमेशा e (1.6022×10−19 C) के पूर्ण गुणज में ही मिलता है। इसलिए अंतिम उत्तर को सामान्यतः निकटतम पूर्णांक में लिखा जाता है।
Q.39: मिलिकन के प्रयोग में तेल की बूंद पर चमकती X-किरणों द्वारा स्थिर विद्युत आवेश प्राप्त किया जाता है। तेल की बूंद पर यदि स्थिर विद्युत आवेश −1.282 × 10−18 C है, तो इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 8
व्याख्या – Step by Step
Step 1: एक इलेक्ट्रॉन का आवेश (Charge of one electron)इलेक्ट्रॉन का आवेश:
e = −1.6022 × 10−19 C
Step 2: इलेक्ट्रॉनों की संख्या का सूत्र
यदि कुल आवेश Q हो, तो:
n = Q / e
Step 3: मान रखकर गणना
दिया है:
Q = −1.282 × 10−18 C
e = −1.6022 × 10−19 C
n = (−1.282 × 10−18) / (−1.6022 × 10−19)
= (1.282 / 1.6022) × 10
≈ 0.8 × 10
≈ 8
✅ इसलिए तेल की बूंद पर 8 इलेक्ट्रॉन उपस्थित हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 आवेश हमेशा e (1.6022 × 10−19 C) के पूर्ण गुणज में ही मिलता है। इसी वजह से ऐसे सवालों में उत्तर अक्सर पूरा अंक आता है (जैसे 8)।
Q.40: रदरफोर्ड के प्रयोग में सोने, प्लैटिनम आदि भारी परमाणुओं की पतली पत्ती पर α-कणों की बमबारी की जाती है। यदि एलुमिनियम जैसे हल्के परमाणु की पतली पन्नी ली जाए, तो ऊपर बताए परिणामों में क्या अंतर होगा?
उत्तर
✅ यदि सोने/प्लैटिनम की जगह एलुमिनियम (हल्का तत्व) की पतली पन्नी ली जाए, तो:👉 अधिकांश α-कण बिना विचलित हुए सीधे निकल जाएंगे (straight pass)
👉 विचलन (deflection) बहुत कम होगा
👉 बहुत बड़े कोण पर मुड़ना (large angle scattering) और वापस लौटना (back scattering) बहुत ही कम/लगभग नहीं होगा
व्याख्या – Step by Step
Step 1: हल्के परमाणुओं का नाभिक कैसा होता है?हल्के तत्व जैसे एलुमिनियम में:
👉 नाभिक का आकार (nuclear size) अपेक्षाकृत छोटा होता है
👉 नाभिकीय धन आवेश (nuclear charge, Z) कम होता है
Step 2: α-कणों पर प्रभाव क्यों कम होगा?
α-कण धन आवेशित होते हैं, इसलिए वे नाभिक से कूलॉम्ब बल (Coulomb repulsion) के कारण विचलित होते हैं।
लेकिन एलुमिनियम में Z कम है, इसलिए:
✅ प्रतिकर्षण कम ⇒ विचलन कम
Step 3: Rutherford प्रयोग के परिणामों में क्या बदलाव आएगा?
(1) सीधा निकलने वाले कण बढ़ जाएंगे
नाभिक छोटा होने के कारण, α-कणों का नाभिक से “करीब टकराना” कम होगा।
✅ इसलिए ज्यादातर α-कण बिना टकराए निकलेंगे।
(2) बड़े कोण का विचलन बहुत घट जाएगा
बड़ा विचलन तब होता है जब α-कण नाभिक के बहुत पास जाए।
लेकिन यहाँ Z भी कम है और नाभिक छोटा भी है:
✅ इसलिए बड़े कोण का प्रकीर्णन बहुत कम होगी।
(3) वापस लौटने वाले कण लगभग नहीं होंगे
सोने में कभी-कभी α-कण वापस लौट जाते हैं, क्योंकि नाभिक का Z बहुत ज्यादा होता है।
एलुमिनियम में Z कम ⇒ बल कम
✅ इसलिए वापस लौटना बहुत ही कम/लगभग नहीं होगी।
क्या आप जानते हैं?
👉 α-कणों का विचलन नाभिक के धन आवेश Z पर बहुत निर्भर करता है।Z जितना अधिक (जैसे Au, Pt), उतना अधिक विचलन और back scattering देखने को मिलता है।
Q.41: 7935Br तथा 79Br प्रतीक मान्य हैं, जबकि 3579Br तथा 35Br मान्य नहीं हैं। संक्षेप में कारण बताइए।
उत्तर
✅ किसी तत्व के प्रतीक में ऊपर बाईं ओर द्रव्यमान संख्या (A) और नीचे बाईं ओर परमाणु संख्या (Z) लिखने की मानक विधि है।इसलिए 7935Br तथा केवल 79Br (जहाँ Z समझा जाता है) मान्य हैं, लेकिन 3579Br या 35Br मान्य नहीं माने जाते।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: A और Z का अर्थ👉 द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन
👉 परमाणु संख्या (Z) = केवल प्रोटॉन
✅ किसी तत्व के लिए Z हमेशा स्थिर होता है (तत्व की पहचान यही करता है)।
✅ लेकिन A बदल सकता है क्योंकि अलग-अलग समस्थानिक (isotopes) में न्यूट्रॉन बदलते हैं।
Step 2: मानक (Standard) न्यूक्लाइड संकेत (Nuclide notation)
मानक (Standard) के अनुसार लिखते हैं:
AZX
जहाँ
👉 A ऊपर बाएँ
👉 Z नीचे बाएँ
👉 X तत्व का प्रतीक
इसलिए:
✅ 7935Br सही है।
Step 3: बाकी क्यों गलत हैं?
👉 3579Br में A और Z की position उलटी हो गई, जो मानक नहीं है। ❌
👉 35Br में सिर्फ Z लिखा है, जबकि मानक रूप में अकेला लिखना हो तो सिर्फ Br (या isotopes दिखाने हों तो A के साथ) लिखा जाता है। ❌
👉 79Br मान्य है क्योंकि कई बार Z (35) को समझा हुआ माना जाता है और isotope बताने के लिए केवल A ऊपर लिख देते हैं। ✅
क्या आप जानते हैं?
👉 Isotope notation में A लिखना जरूरी होता है क्योंकि उसी से पता चलता है कि यह Br का कौन-सा समस्थानिक है (जैसे ⁷⁹Br या ⁸¹Br)। Z लिखने से element पहचान तो हो जाती है, लेकिन isotope अलग नहीं पता चलता।
Q.42: एक 81 द्रव्यमान संख्या वाले तत्व में प्रोटॉनों की तुलना में 31.7% न्यूट्रॉन अधिक हैं। इसका परमाणु प्रतीक लिखिए।
उत्तर
✅ तत्व का परमाणु प्रतीक: 8135Br(अर्थात तत्व = ब्रोमीन, Z = 35)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मान लें प्रोटॉनों की संख्या = pतो, परमाणु क्रमांक Z = p
दिया है: न्यूट्रॉन, प्रोटॉन से 31.7% अधिक हैं
इसलिए न्यूट्रॉनों की संख्या:
n = p + (31.7/100)p = 1.317p
Step 2: द्रव्यमान संख्या (A) का उपयोग
द्रव्यमान संख्या: A = p + n
दिया है A = 81
तो,
p + n = 81
p + 1.317p = 81
2.317p = 81
अब,
p = 81 / 2.317 = 34.96 ≈ 35
✅ इसलिए Z = 35
Step 3: न्यूट्रॉन निकालें और प्रतीक लिखें
n = A − Z = 81 − 35 = 46
परमाणु प्रतीक का मानक रूप: AZX
✅ इसलिए परमाणु प्रतीक: 8135Br
क्या आप जानते हैं?
👉 Z (परमाणु क्रमांक) हमेशा पूर्णांक होता है, इसलिए 34.96 को निकटतम पूर्णांक 35 लिया जाता है। प्रतिशत (31.7%) आमतौर पर rounded/approximate दिया होता है, इसलिए ऐसा rounding acceptable है।
Q.43: 37 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर ऋण आवेश की एक इकाई (−1) है। यदि आयन में इलेक्ट्रॉनों की तुलना में न्यूट्रॉन 11.1% अधिक हैं, तो आयन का प्रतीक लिखिए।
उत्तर
✅ आयन का प्रतीक: 3717Cl−(यानी क्लोराइड आयन)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मान लें आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = xदिया है: न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉनों से 11.1% अधिक हैं
n = x + (11.1/100)x = 1.111x
Step 2: −1 आवेश का मतलब क्या है?
−1 आयन में एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होता है।
इसलिए:
👉 आयन में इलेक्ट्रॉन = Z + 1
👉 तो परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन)
p = Z = x − 1
Step 3: द्रव्यमान संख्या (A) लगाएँ
दिया है: A = 37 और
A = p + n
37 = (x − 1) + 1.111x
37 = 2.111x − 1 ⇒ 2.111x = 38 ⇒ x = 38/2.111 ≈ 18
✅ इलेक्ट्रॉन (ion) = 18
✅ प्रोटॉन (Z) = x − 1 = 17
Step 4: आयन का प्रतीक लिखें
Z = 17 ⇒ तत्व Cl
A = 37
✅ इसलिए आयन का प्रतीक:
3717Cl−
क्या आप जानते हैं?
👉 Z = 17 हमेशा क्लोरीन (Cl) को ही दर्शाता है।👉 Cl− में इलेक्ट्रॉन 18 होते हैं, इसलिए इसका विन्यास Ar जैसा (18 e−) हो जाता है।
Q.44: 56 द्रव्यमान संख्या वाले एक आयन पर धन आवेश की 3 इकाई (+3) है, और इसमें इलेक्ट्रॉनों की तुलना में न्यूट्रॉन 30.4% अधिक हैं। इस आयन का प्रतीक लिखिए।
उत्तर
✅ आयन का प्रतीक: 5626Fe3+(अर्थात Fe³⁺ आयन)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मान लें आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = xदिया है: न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉनों से 30.4% अधिक हैं
n = x + (30.4/100)x = 1.304x
Step 2: +3 आवेश का मतलब
+3 आयन में 3 इलेक्ट्रॉन कम होते हैं।
इसलिए:
👉 आयन में इलेक्ट्रॉन = Z − 3
👉 x = Z − 3 ⇒ Z = x + 3
और प्रोटॉन (Z) = x + 3
Step 3: द्रव्यमान संख्या (A) लगाएँ
दिया है: A = 56
और
A = p + n
56 = (x + 3) + 1.304x
56 = 2.304x + 3
⇒ 2.304x = 53
⇒ x = 53/2.304 ≈ 23
✅ आयन में इलेक्ट्रॉन = 23
✅ परमाणु क्रमांक Z = x + 3 = 23 + 3 = 26
Step 4: आयन का प्रतीक
Z = 26 ⇒ तत्व Fe
A = 56
Charge = +3
✅ इसलिए आयन का प्रतीक: 5626Fe3+
क्या आप जानते हैं?
👉 Fe (Z=26) का Fe³⁺ आयन बहुत common है, जैसे FeCl₃, rusting process और कई coordination compounds में।
Q.45: निम्नलिखित विकिरणों के प्रकारों को आवृत्ति (frequency) के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(क) माइक्रोवेव ओवन से विकिरण
(ख) यातायात संकेत से एम्बर (amber) प्रकाश
(ग) FM रेडियो से प्राप्त विकिरण
(घ) बाहरी अंतरिक्ष से कॉस्मिक किरणें
(ङ) X-किरणें
(क) माइक्रोवेव ओवन से विकिरण
(ख) यातायात संकेत से एम्बर (amber) प्रकाश
(ग) FM रेडियो से प्राप्त विकिरण
(घ) बाहरी अंतरिक्ष से कॉस्मिक किरणें
(ङ) X-किरणें
उत्तर
✅ आवृत्ति का बढ़ता क्रम (Increasing frequency):FM रेडियो विकिरण < माइक्रोवेव ओवन विकिरण < एम्बर प्रकाश < X-किरणें < कॉस्मिक किरणें
व्याख्या – Step by Step
Step 1: EM spectrum का बेसिक क्रम याद रखेंआवृत्ति (ν) बढ़ने पर तरंगदैर्घ्य (λ) घटता है।
EM spectrum में तरंगदैर्घ्य का सामान्य क्रम:
✅ Radio < Microwave < Infrared < Visible < UV < X-ray < Gamma/Cosmic
Step 2: दिए गए विकल्पों को इसी क्रम में रखें
👉 FM रेडियो ⇒ Radio waves (सबसे कम frequency)
👉 Microwave oven ⇒ Microwaves (radio से अधिक)
👉 Amber light ⇒ Visible light (microwave से अधिक)
👉 X-rays ⇒ Visible से बहुत अधिक frequency
👉 Cosmic rays ⇒ Very high energy radiation (सबसे अधिक frequency)
क्या आप जानते हैं?
👉 माइक्रोवेव ओवन आमतौर पर 2.45 GHz frequency की microwaves उपयोग करता है, जो पानी के अणुओं को तेज़ी से कंपन कराकर खाना गरम करती हैं।
Q.46: नाइट्रोजन लेज़र 337.1 nm की तरंगदैर्घ्य पर एक विकिरण उत्पन्न करता है। यदि उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या 5.6 × 1024 (प्रति सेकंड) हो, तो इस लेज़र की क्षमता (Power) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ लेज़र की क्षमता (Power)P = 3.30 × 106 W
(लगभग 3.3 MW)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: तरंगदैर्घ्य को मीटर में बदलेंλ = 337.1 nm
1 nm = 10−9 m
⇒ λ = 337.1 × 10−9 m
Step 2: एक फोटॉन की ऊर्जा निकालें
सूत्र: E = hν = (hc/λ)
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s
c = 3.0 × 108 m/s
अब मान रखेंगे:
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (337.1 × 10−9)
E ≈ 5.89 × 10−19 J प्रति फोटॉन
Step 3: लेज़र की क्षमता (Power) निकालें
Power = प्रति सेकंड निकली कुल ऊर्जा
दिया है: फोटॉन/सेकंड = 5.6 × 1024 s−1
P = E × (फोटॉन/सेकंड)
P = (5.89 × 10−19) × (5.6 × 1024)
P = 32.98 × 105 J s−1
⇒ P = 3.30 × 106 W
✅ यही लेज़र की क्षमता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 1 W = 1 J/s होता है। इसलिए जब हम “प्रति सेकंड” फोटॉनों की संख्या से ऊर्जा गुणा करते हैं, तो उत्तर सीधे वाट (W) में आ जाता है।
Q.47: नियॉन गैस को सामान्यतः संकेत बोर्डों (sign boards) में प्रयोग किया जाता है। यदि यह 616 nm पर प्रबलता से विकिरण-उत्सर्जन करती है, तो
(क) उत्सर्जन की आवृत्ति (ν)
(ख) 30 सेकंड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी
(ग) एक क्वांटम (फोटॉन) की ऊर्जा (E)
(घ) उपस्थित क्वांटम (फोटॉनों) की संख्या ज्ञात कीजिए (यदि यह 2 J ऊर्जा उत्पन्न करती है)।
(क) उत्सर्जन की आवृत्ति (ν)
(ख) 30 सेकंड में इस विकिरण द्वारा तय की गई दूरी
(ग) एक क्वांटम (फोटॉन) की ऊर्जा (E)
(घ) उपस्थित क्वांटम (फोटॉनों) की संख्या ज्ञात कीजिए (यदि यह 2 J ऊर्जा उत्पन्न करती है)।
उत्तर
✅ (क) आवृत्ति, ν = 4.87 × 1014 s−1✅ (ख) 30 s में दूरी, d = 9.0 × 109 m
✅ (ग) एक क्वांटम की ऊर्जा, E = 3.227 × 10−19 J
✅ (घ) क्वांटमों की संख्या, N = 6.2 × 1018 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: दिए गए मान👉 तरंगदैर्घ्य, λ = 616 nm = 616 × 10−9 m
👉 प्रकाश का वेग, c = 3.0 × 108 m s−1
👉 प्लैंक स्थिरांक, h = 6.626 × 10−34 J s
👉 समय, t = 30 s
👉 कुल ऊर्जा, Etotal = 2 J
(क) आवृत्ति (ν)
सूत्र: ν = c / λ
ν = (3.0 × 108) / (616 × 10−9)
= (3.0 / 616) × 1017
= 0.00487 × 1017
= 4.87 × 1014 s−1
✅ ν = 4.87 × 1014 s−1
(ख) 30 सेकंड में तय की गई दूरी
सूत्र: d = c × t
d = (3.0 × 108) × 30
= 90 × 108
= 9.0 × 109 m
✅ d = 9.0 × 109 m
(ग) एक क्वांटम (फोटॉन) की ऊर्जा
सूत्र: E = hν
E = (6.626 × 10−34) × (4.87 × 1014)
= (6.626 × 4.87) × 10−20
= 32.27 × 10−20
= 3.227 × 10−19 J
✅ E = 3.227 × 10−19 J
(घ) क्वांटमों (फोटॉनों) की संख्या
सूत्र: N = Etotal / E
N = 2 / (3.227 × 10−19)
= (2 / 3.227) × 1019
≈ 0.62 × 1019
= 6.2 × 1018
✅ N = 6.2 × 1018 (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 616 nm दृश्यमान प्रकाश (Visible region) में आता है, इसलिए नियॉन साइन का प्रकाश हमें साफ दिखाई देता है।👉 जितनी ऊर्जा ज्यादा, उतने ही ज्यादा फोटॉन (क्वांटम) निकलते हैं (अगर wavelength/frequency fixed हो)।
Q.48: खगोलिया प्रेक्षणों में दूरस्थ तारों से मिलने वाले संकेत बहुत कमजोर होते हैं। यदि फोटॉन संसूचक 600 nm के विकिरण से कुल 3.15 × 10−18 J ऊर्जा प्राप्त करता है, तो संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ संसूचक द्वारा प्राप्त फोटॉनों की संख्या ≈ 10 फोटॉन
व्याख्या – Step by Step
Step 1: एक फोटॉन की ऊर्जा निकालेंसूत्र: E = hν = (hc/λ)
दिया है:
👉 λ = 600 nm = 600 × 10−9 m
👉 h = 6.626 × 10−34 J·s
👉 c = 3.0 × 108 m/s
अब,
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (600 × 10−9)
E = 3.313 × 10−19 J (प्रति फोटॉन)
Step 2: फोटॉनों की संख्या निकालें
कुल ऊर्जा: Etotal = 3.15 × 10−18 J
फोटॉनों की संख्या:
N = Etotal / E
N = (3.15 × 10−18) / (3.313 × 10−19)
N = 9.51 ≈ 10
✅ इसलिए फोटॉनों की संख्या ≈ 10
क्या आप जानते हैं?
👉 इतने कम फोटॉन भी detect हो सकते हैं, इसलिए astronomy में photon detectors (जैसे CCD) बहुत संवेदनशील बनाए जाते हैं।
Q.49: उत्तेजित अवस्थाओं में अणुओं के जीवनकाल (lifetime) का मान प्रायः नैनोसेकंड के आसपास होता है। यदि किसी विकिरण स्रोत का जीवनकाल = 2 ns है और उत्सर्जन के दौरान निकले फोटॉनों की संख्या 2.5 × 1015 है, तो स्रोत की ऊर्जा की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ स्रोत की ऊर्जा = 8.28 × 10−10 J (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: आवृत्ति (ν) निकालनायहाँ जीवनकाल (τ) = 2 ns = 2 × 10−9 s
आवृत्ति:
ν = 1/τ
ν = 1 / (2 × 10−9)
= 5.0 × 108 s−1
Step 2: एक फोटॉन की ऊर्जा (E)
सूत्र: E = hν
h = 6.626 × 10−34 J s
ν = 5.0 × 108 s−1
E = (6.626 × 10−34) × (5.0 × 108)
= 3.313 × 10−25 J (प्रति फोटॉन)
Step 3: स्रोत की कुल ऊर्जा
कुल ऊर्जा = (फोटॉनों की संख्या) × (एक फोटॉन की ऊर्जा)
N = 2.5 × 1015
Energy = (2.5 × 1015) × (3.313 × 10−25)
= 8.2825 × 10−10 J
≈ 8.28 × 10−10 J
✅ यही स्रोत की ऊर्जा है।
क्या आप जानते हैं?
👉 नैनोसेकंड (ns) बहुत छोटा समय है: 1 ns = 10−9 s।👉 जीवनकाल बहुत छोटा हो, फिर भी अगर फोटॉन बहुत ज़्यादा हों, तो कुल ऊर्जा मापी जा सकती है।
Q.50: सबसे लम्बी द्विगुणित तरंगदैर्घ्य जिंक अवशोषण संक्रमण 589 और 589.6 nm पर देखा ‘. जाता है। प्रत्येक संक्रमण की आवृत्ति और दो उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा के अन्तर की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ (1) 589 nm के लिए आवृत्ति: ν1 = 5.093 × 1014 s−1✅ (2) 589.6 nm के लिए आवृत्ति: ν2 = 5.088 × 1014 s−1
✅ (3) दोनों उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा-अंतर:
ΔE = 3.31 × 10−22 J (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
दिए गए स्थिरांक (Constants):c = 3.0 × 108 m s−1
h = 6.626 × 10−34 J s
Step 1: पहले संक्रमण (λ1 = 589 nm)
λ1 = 589 nm = 589 × 10−9 m
आवृत्ति:
ν1 = c/λ1
ν1 = (3.0 × 108) / (589 × 10−9)
ν1 = 5.093 × 1014 s−1
ऊर्जा (एक फोटॉन):
E1 = hν1
E1 = (6.626 × 10−34) × (5.093 × 1014)
E1 = 3.3746 × 10−19 J
Step 2: दूसरा संक्रमण (λ2 = 589.6 nm)
λ2 = 589.6 nm = 589.6 × 10−9 m
आवृत्ति:
ν2 = c/λ2
ν2 = (3.0 × 108) / (589.6 × 10−9)
ν2 = 5.088 × 1014 s−1
ऊर्जा (एक फोटॉन):
E2 = hν2
E2 = (6.626 × 10−34) × (5.088 × 1014)
E2 = 3.3713 × 10−19 J
Step 3: दोनों उत्तेजित अवस्थाओं के बीच ऊर्जा-अंतर
ΔE = E1 − E2
ΔE = (3.3746 × 10−19) − (3.3713 × 10−19)
ΔE = 3.31 × 10−22 J (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 सोडियम की पीली डबल लाइन (589 nm के आस-पास) दो बहुत नज़दीकी ऊर्जा स्तरों के कारण आती है, इसलिए एक ही रंग की “दो पास-पास” रेखाएँ दिखाई देती हैं।
Q.51: सीजियम (Cs) धातु का कार्यफलन (Work Function) 1.9 eV है।
(क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) ज्ञात कीजिए।
(ख) देहली आवृत्ति (ν0) ज्ञात कीजिए।
यदि सीजियम तत्व को 500 nm की तरंगदैर्घ्य के प्रकाश से विकीर्णित किया जाए, तो निकले हुए फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (K.E.) तथा वेग (v) की गणना कीजिए।
(क) उत्सर्जित विकिरण की देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) ज्ञात कीजिए।
(ख) देहली आवृत्ति (ν0) ज्ञात कीजिए।
यदि सीजियम तत्व को 500 nm की तरंगदैर्घ्य के प्रकाश से विकीर्णित किया जाए, तो निकले हुए फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (K.E.) तथा वेग (v) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ (क) देहली तरंगदैर्घ्य, λ0 = 653 nm (लगभग)✅ (ख) देहली आवृत्ति, ν0 = 4.59 × 1014 Hz
500 nm के लिए:
✅ फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = 9.3 × 10−20 J (लगभग)
= 0.58 eV (लगभग)
✅ फोटोइलेक्ट्रॉन का वेग = 4.52 × 105 m s−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
दिए गए स्थिरांक (Constants)👉 h = 6.626 × 10−34 J·s
👉 c = 3.0 × 108 m s−1
👉 1 eV = 1.602 × 10−19 J
👉 m (electron) = 9.11 × 10−31 kg
कार्यफलन:
W0 = 1.9 eV
⇒ W0 = 1.9 × 1.602 × 10−19
⇒ W0 = 3.04 × 10−19 J
(ख) Step 1: देहली आवृत्ति (ν0)
नियम:
W0 = h ν0
ν0 = W0 / h
ν0 = (3.04 × 10−19) / (6.626 × 10−34)
= 4.59 × 1014 Hz
✅ इसलिए ν0 = 4.59 × 1014 Hz
(क) Step 2: देहली तरंगदैर्घ्य (λ0)
सूत्र:
λ0 = c/ν0 = (h c)/W0
λ0 = c/ν0
λ0 = (3.0 × 108) / (4.59 × 1014)
= 6.53 × 10−7 m
= 653 nm
✅ इसलिए λ0 = 653 nm
500 nm प्रकाश के लिए फोटोइलेक्ट्रॉन की K.E. और वेग
Step 3: 500 nm के प्रकाश की ऊर्जा (E)
λ = 500 nm = 500 × 10−9 m = 5.0 × 10−7 m
E = (h c)/λ
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (5.0 × 10−7)
= 3.98 × 10−19 J
Step 4: फोटोइलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (K.E.)
आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण:
K.E. = E − W0
K.E. = (3.98 × 10−19) − (3.04 × 10−19)
= 0.93 × 10−19 J
= 9.3 × 10−20 J
eV में:
K.E. = (9.3 × 10−20) / (1.602 × 10−19)
≈ 0.58 eV
✅ इसलिए K.E. ≈ 9.3 × 10−20 J (≈ 0.58 eV)
Step 5: फोटोइलेक्ट्रॉन का वेग (v)
K.E. = (1/2)mv2 ⇒ v = √(2K.E./m)
v = √(2 × 9.3 × 10−20 / 9.11 × 10−31)
≈ 4.52 × 105 m s−1
✅ इसलिए v ≈ 4.52 × 105 m s−1
क्या आप जानते हैं?
👉 यदि आप λ > λ0 (653 nm से अधिक) वाली रोशनी डालेंगे, तो Cs से फोटोइलेक्ट्रॉन नहीं निकलेंगे, क्योंकि उस रोशनी की ऊर्जा कार्यफलन से कम होगी।
Q.52: जब सोडियम धातु को विभिन्न तरंगदैर्घ्यों के साथ विकीर्णित किया जाता है, तो निम्न परिणाम मिलते हैं:
λ (nm): 500, 450, 400
v × 10−5 (m s−1): 2.55, 4.35, 5.35
देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) तथा प्लांक स्थिरांक (h) की गणना कीजिए।
λ (nm): 500, 450, 400
v × 10−5 (m s−1): 2.55, 4.35, 5.35
देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) तथा प्लांक स्थिरांक (h) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ देहली तरंगदैर्घ्य (λ0) ≈ 531 nm✅ प्लांक स्थिरांक (h) ≈ 8.49 × 10−34 J s (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रकाश-विद्युत समीकरण लिखें(1/2)mv2 = h(ν − ν0)
और ν = c/λ, ν0 = c/λ0 लगाने पर:
(1/2)mv2 = hc(1/λ − 1/λ0)
(यही मुख्य समीकरण है)
Step 2: दिए गए वेग (v) निकालें
v × 10−5 (m s−1) दिया है, इसलिए
👉 500 nm के लिए: v = 2.55 × 105 m/s
👉 450 nm के लिए: v = 4.35 × 105 m/s
👉 400 nm के लिए: v = 5.35 × 105 m/s
Step 3: λ0 निकालना (दो समीकरणों को भाग देकर)
तीनों केस में:
hc(1/λ − 1/λ0) = (1/2)mv2
500 nm और 450 nm वाले समीकरणों का अनुपात लेने पर (h, c, m हट जाते हैं) एक relation बनता है:
(λ0 − 450) / (λ0 − 500) = ( (4.35/2.55)2 ) × (450/500)
अब मान निकालें:
( (4.35/2.55)2 ) × (450/500) = 2.619
तो,
λ0 − 450 = 2.619(λ0 − 500)
λ0 − 450 = 2.619λ0 − 1309.5
1.619λ0 = 859.5 ⇒ λ0 ≈ 530.88 ≈ 531 nm
✅ देहली तरंगदैर्घ्य λ0 ≈ 531 nm
Step 4: प्लांक स्थिरांक (h) निकालना
मुख्य समीकरण में λ0 रखकर h निकालते हैं (500 nm वाली reading से):
(1/2)mv2 = hc(1/λ − 1/λ0)
⇒ h = [(1/2)mv2] / [c(1/λ − 1/λ0)]
मान:
👉 m = 9.11 × 10−31 kg
👉 c = 3.0 × 108 m/s
👉 v = 2.55 × 105 m/s
👉 λ = 500 nm = 500 × 10−9 m
👉 λ0 = 531 nm = 531 × 10−9 m
गणना करने पर:
✅ h ≈ 8.49 × 10−34 J s
क्या आप जानते हैं?
👉 देहली तरंगदैर्घ्य λ0 वह maximum wavelength है, जिसके बाद (उससे बड़ी λ पर) फोटोइलेक्ट्रॉन निकलना बंद हो जाता है, क्योंकि तब फोटॉन की ऊर्जा कार्यफलन से कम हो जाती है।
Q.53: प्रकाश-विद्युत प्रभाव के प्रयोग में चाँदी (Silver) से फोटोइलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन 0.35 V के stopping potential द्वारा रोका जा सकता है। यदि 256.7 nm विकिरण का उपयोग किया जाए, तो चाँदी धातु के लिए कार्यफलन (Work Function, W0) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ चाँदी का कार्यफलन (W0) = 4.48 eV (लगभग)✅ = 7.18 × 10−19 J (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: फोटॉन की ऊर्जा (E) निकालेंदिया है: λ = 256.7 nm = 256.7 × 10−9 m
सूत्र: E = hc/λ
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s, c = 3.0 × 108 m/s
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (256.7 × 10−9)
E = 7.74 × 10−19 J
अब eV में: (1 eV = 1.6021 × 10−19 J)
E = (7.74 × 10−19) / (1.6021 × 10−19)
E = 4.83 eV (लगभग)
Step 2: फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा (K.E.max)
Stopping potential Vs = 0.35 V
नियम: K.E.max = eVs
इसलिए eV में सीधे:
K.E.max = 0.35 eV
Step 3: कार्यफलन (W0)
Einstein समीकरण: E = W0 + K.E.max
W0 = E − K.E.max
W0 = 4.83 − 0.35
W0 = 4.48 eV (लगभग)
J में:
W0 = 4.48 × 1.6021 × 10−19
W0 = 7.18 × 10−19 J (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 Stopping potential वही न्यूनतम वोल्टेज है जो सबसे तेज़ फोटोइलेक्ट्रॉन को भी रोक देता है, इसलिए इससे हमें K.E.max सीधे मिल जाती है।
Q.54: यदि 150 pm तरंगदैर्घ्य का एक फोटॉन किसी परमाणु से टकराता है और उसमें अंदर बँधा हुआ इलेक्ट्रॉन 1.5 × 107 m s−1 वेग से बाहर निकलता है, तो उस ऊर्जा की गणना कीजिए जिससे यह इलेक्ट्रॉन नाभिक से बँधा हुआ था।
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन की बंधन ऊर्जा (Binding energy)= 1.22 × 10−15 J (लगभग)
= 7.63 × 103 eV (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: फोटॉन की ऊर्जा निकालेंदिया है:
λ = 150 pm = 150 × 10−12 m
सूत्र:
E = hc/λ
h = 6.626 × 10−34 J·s
c = 3.0 × 108 m/s
E = (6.626 × 10−34 × 3.0 × 108) / (150 × 10−12)
E = 1.325 × 10−15 J
Step 2: उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा (K.E.) निकालें
दिया है: v = 1.5 × 107 m s−1
electron mass, m = 9.11 × 10−31 kg
सूत्र:
K.E. = (1/2)mv2
K.E. = (1/2) × (9.11 × 10−31) × (1.5 × 107)2
K.E. = 1.025 × 10−16 J (लगभग)
Step 3: बंधन ऊर्जा निकालें
फोटॉन की ऊर्जा = बंधन ऊर्जा + गतिज ऊर्जा
⇒ बंधन ऊर्जा = E − K.E.
बंधन ऊर्जा
= (1.325 × 10−15) − (1.025 × 10−16)
= 1.223 × 10−15 J
≈ 1.22 × 10−15 J
Step 4: J से eV में बदलना
1 eV = 1.602 × 10−19 J
बंधन ऊर्जा (eV)
= (1.22 × 10−15) / (1.602 × 10−19)
≈ 7.63 × 103 eV
✅ अंतिम उत्तर: 7.63 × 103 eV
क्या आप जानते हैं?
👉 150 pm बहुत छोटी तरंगदैर्घ्य है (X-ray क्षेत्र के करीब), इसलिए फोटॉन की ऊर्जा काफी अधिक होती है और वह परमाणु के अंदर के बँधे इलेक्ट्रॉन को भी बाहर निकाल सकता है।
Q.55: पाश्चन श्रेणी का उत्सर्जन संक्रमण n कक्ष से आरम्भ होता है, n = 3 कक्ष में समाप्त होता है तथा इसे
ν = 3.29 × 1015 (Hz) [ 1/32 − 1/n2 ]
से दर्शाया जा सकता है। यदि संक्रमण 1285 nm पर प्रेक्षित होता है, तो n का मान ज्ञात कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
ν = 3.29 × 1015 (Hz) [ 1/32 − 1/n2 ]
से दर्शाया जा सकता है। यदि संक्रमण 1285 nm पर प्रेक्षित होता है, तो n का मान ज्ञात कीजिए तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए।
उत्तर
✅ n = 5✅ संक्रमण: 5 → 3 (Paschen line)
✅ स्पेक्ट्रम का क्षेत्र: अवरक्त (Infrared)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: तरंगदैर्घ्य से आवृत्ति निकालेंदिया है:
λ = 1285 nm = 1285 × 10−9 m
c = 3.0 × 108 m s−1
\nu=\frac{c}{\lambda}
ν = (3.0 × 108) / (1285 × 10−9)
= 2.3346 × 1014 Hz
Step 2: पास्चेन सूत्र में मान रखें
दिया है:
\nu=3.29\times{10}^{15}\left[\frac{1}{3^2}-\frac{1}{n^2}\right]
2.3346 × 1014 = 3.29 × 1015 (1/9 − 1/n2)
दोनों तरफ 3.29 × 1015 से भाग:
(1/9 − 1/n2) = (2.3346 × 1014) / (3.29 × 1015)
= 7.096 × 10−2
Step 3: n निकालें
1/n2 = 1/9 − 7.096 × 10−2
1/9 = 0.11111
1/n2 = 0.11111 − 0.07096 = 0.04015
n2 = 1/0.04015 = 24.9 ≈ 25 ⇒ n = 5
✅ इसलिए n = 5 और संक्रमण 5 → 3 होगा।
Step 4: स्पेक्ट्रम का क्षेत्र बताइए
λ = 1285 nm (यानि 1.285 μm)
यह 700 nm से बड़ा है, इसलिए यह दृश्य प्रकाश में नहीं आता।
✅ यह अवरक्त (Infrared) क्षेत्र में आता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 Paschen series की सभी रेखाएँ n = 3 पर समाप्त होती हैं और सामान्यतः ये Infrared region में पाई जाती हैं।
Q.56: उस उत्सर्जन संक्रमण की तरंगदैर्घ्य की गणना कीजिए, जो 1.3225 nm त्रिज्या वाली कक्षा से प्रारम्भ होकर 211.6 pm त्रिज्या वाली कक्षा पर समाप्त होता है। इस संक्रमण की श्रेणी का नाम तथा स्पेक्ट्रम का क्षेत्र भी बताइए।
उत्तर
✅ प्रारम्भिक कक्षा: n2 = 5✅ अंतिम कक्षा: n1 = 2
✅ संक्रमण: 5 → 2
✅ तरंगदैर्घ्य: λ = 434 nm (लगभग)
✅ श्रेणी: बाल्मर श्रेणी (Balmer series)
✅ क्षेत्र: दृश्य (Visible region)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: बोहर त्रिज्या का सूत्र लगाएँहाइड्रोजन के लिए:
rn = 0.529 n2 Å = 52.9 n2 pm
Step 2: प्रारम्भिक कक्षा (r = 1.3225 nm) से n निकालें
1.3225 nm = 1322.5 pm
1322.5 = 52.9 n22
⇒ n22 = 1322.5/52.9 = 25
⇒ n2 = 5
✅ प्रारम्भिक कक्षा: n2 = 5
Step 3: अंतिम कक्षा (r = 211.6 pm) से n निकालें
211.6 = 52.9 n12
⇒ n12 = 211.6/52.9 = 4
⇒ n1 = 2
✅ अंतिम कक्षा: n1 = 2
Step 4: Rydberg सूत्र से तरंग संख्या (ṽ) निकालें
ν = R(1/n12 − 1/n22)
जहाँ R = 1.09679 × 107 m−1
ν = 1.09679 × 107 (1/22 − 1/52)
= 1.09679 × 107 (1/4 − 1/25)
= 1.09679 × 107 (21/100)
= 2.303 × 106 m−1
Step 5: तरंगदैर्घ्य (λ) निकालें
λ = 1/ν
λ = 1/(2.303 × 106)
= 4.34 × 10−7 m
= 434 nm
✅ λ = 434 nm
Step 6: श्रेणी और क्षेत्र बताइए
क्योंकि अंतिम कक्षा n1 = 2 है, इसलिए यह बाल्मर श्रेणी है।
434 nm दृश्य क्षेत्र में आता है।
✅ श्रेणी: Balmer series
✅ क्षेत्र: Visible
क्या आप जानते हैं?
👉 Balmer series की रेखाएँ H-atom के visible spectrum में होती हैं, और 434 nm वाली रेखा को Hγ (H-gamma) भी कहा जाता है।
Q.57: डी-ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित पदार्थ (द्रव्य) के दोहरे व्यवहार (तरंग–कण द्वैतता) से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope) की खोज हुई, जिसका उपयोग जैव-अणुओं तथा अन्य पदार्थों की अति आवर्धित प्रतिच्छवि प्राप्त करने में किया जाता है। इस सूक्ष्मदर्शी में यदि इलेक्ट्रॉन का वेग 1.6 × 106 m s−1 है, तो इस इलेक्ट्रॉन से संबंधित डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य (λ) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्यλ = 4.55 × 10−10 m
= 455 pm (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य का सूत्रλ = h / (mv)
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s
m (electron) = 9.11 × 10−31 kg
v = 1.6 × 106 m s−1
Step 2: मान रखकर गणना
λ = (6.626 × 10−34) / [(9.11 × 10−31)(1.6 × 106)]
पहले नीचे वाला गुणन:
(9.11 × 10−31) × (1.6 × 106)
= 14.576 × 10−25
= 1.4576 × 10−24
अब,
λ = (6.626 × 10−34) / (1.4576 × 10−24)
= 4.55 × 10−10 m
✅ इसलिए λ = 4.55 × 10−10 m
Step 3: मीटर से pm में बदलना
1 pm = 10−12 m
4.55 × 10−10 m = 455 × 10−12 m = 455 pm
✅ इसलिए λ = 455 pm
क्या आप जानते हैं?
👉 इलेक्ट्रॉनों की तरंगदैर्घ्य बहुत छोटी होती है, इसलिए Electron Microscope की resolving power बहुत अधिक होती है और यह बहुत सूक्ष्म संरचनाएँ भी दिखा सकता है।
Q.58: इलेक्ट्रॉन विवर्तन (Electron Diffraction) के समान न्यूट्रॉन विवर्तन को भी अणुओं/क्रिस्टलों की संरचना के निर्धारण में प्रयोग किया जाता है। यदि न्यूट्रॉन की de Broglie तरंगदैर्घ्य λ = 800 pm हो, तो न्यूट्रॉन से संबंधित अभिलाक्षणिक वेग (v) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ न्यूट्रॉन का वेगv = 4.94 × 102 m s−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: de Broglie सूत्रλ = h/(mv)
इससे,
v = h/(mλ)
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s
m (न्यूट्रॉन का द्रव्यमान) = 1.675 × 10−27 kg
λ = 800 pm = 800 × 10−12 m
Step 2: मान रखकर गणना
v = (6.626 × 10−34) / [(1.675 × 10−27) (800 × 10−12)]
नीचे वाला गुणन:
(1.675 × 800) × 10−39 = 1340 × 10−39 = 1.34 × 10−36
अब,
v = (6.626 × 10−34) / (1.34 × 10−36)
= (6.626/1.34) × 102
≈ 4.94 × 102 m s−1
✅ इसलिए v ≈ 4.94 × 102 m s−1
क्या आप जानते हैं?
👉 न्यूट्रॉन का आवेश 0 होता है, इसलिए वह पदार्थ के अंदर गहराई तक जाकर संरचना की जानकारी देता है। इसी वजह से neutron diffraction बहुत उपयोगी माना जाता है।
Q.59: यदि बोर के प्रथम कक्ष (n = 1) में इलेक्ट्रॉन का वेग 2.19 × 106 m s−1 है, तो इससे संबंधित de Broglie तरंगदैर्घ्य (λ) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन की de Broglie तरंगदैर्घ्यλ = 3.32 × 10−10 m
= 332 pm (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: de Broglie सूत्र\lambda=\frac{h}{mv}
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s
m (electron) = 9.11 × 10−31 kg
v = 2.19 × 106 m s−1
Step 2: मान रखकर गणना
\lambda=\frac{6.626\times{10}^{-34}}{\left(9.11\times{10}^{-31})(2.19\times{10}^6\right)}
नीचे वाला गुणन:
9.11 × 2.19 = 19.95 (लगभग)
और 10−31 × 106 = 10−25
⇒ हर = 19.95 × 10−25 = 1.995 × 10−24
अब,
\lambda=\frac{6.626\times{10}^{-34}}{1.995\times{10}^{-24}}=3.32\times{10}^{-10}\mathrm{\ m}
✅ इसलिए λ = 3.32 × 10−10 m
Step 3: m से pm में बदलना
1 pm = 10−12 m
3.32\times{10}^{-10}\mathrm{\ m}=332\times{10}^{-12}\mathrm{\ m}=332\mathrm{\ pm}
✅ इसलिए λ = 332 pm
क्या आप जानते हैं?
👉 बोर मॉडल में इलेक्ट्रॉन की कक्षा की परिधि de Broglie तरंगदैर्घ्य का पूर्ण गुणज होती है:2πr = nλ (standing wave condition).
Q.60: एक प्रोटॉन जो 1000 V के विभवांतर में त्वरित हो रहा है, उससे संबंधित वेग 4.37 × 105 m s−1 है। यदि 0.1 kg द्रव्यमान की हॉकी की गेंद इसी वेग से चल रही हो, तो उससे संबंधित de Broglie तरंगदैर्घ्य (λ) की गणना कीजिए।
उत्तर
✅ हॉकी गेंद की de Broglie तरंगदैर्घ्यλ = 1.52 × 10−38 m (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: de Broglie सूत्रλ = h / (mv)
जहाँ
h = 6.626 × 10−34 J·s
m = 0.1 kg
v = 4.37 × 105 m s−1
Step 2: मान रखकर गणना
λ = (6.626 × 10−34) / [0.1 × (4.37 × 105)]
पहले हर (denominator) निकालें:
0.1 × 4.37 × 105 = 4.37 × 104
अब,
λ = (6.626 × 10−34) / (4.37 × 104)
= (6.626/4.37) × 10−38
≈ 1.516 × 10−38 m
≈ 1.52 × 10−38 m
क्या आप जानते हैं?
👉 हॉकी गेंद जैसी बड़ी वस्तु की de Broglie तरंगदैर्घ्य बहुत ही छोटी होती है, इसलिए उसकी तरंग- प्रकृति practically दिखाई नहीं देता। इसी वजह से बड़ी वस्तुओं पर de Broglie नियम लागू नही होता है।
Q.61: यदि एक इलेक्ट्रॉन की स्थिति को ± 0.002 nm की शुद्धता से मापा जाता है, तो इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता (Δp) की गणना कीजिए। यदि इलेक्ट्रॉन का संवेग p = h / (4π × 0.05 nm) है, तो क्या इस मान को निकालने में कोई कठिनाई होगी?
उत्तर
✅ संवेग की अनिश्चितता (Δp) = 2.64 × 10−23 kg m s−1✅ दिया गया संवेग p = 1.055 × 10−24 kg m s−1
✅ हाँ, कठिनाई होगी, क्योंकि Δp > p (लगभग 25 गुना), इसलिए संवेग का सटीक मान निर्धारित नहीं किया जा सकता।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Heisenberg Uncertainty PrincipleΔx × Δp ≥ h / (4π)
इससे,
Δp = h / (4π × Δx)
Step 2: Δx को meter में बदलें
Δx = 0.002 nm
= 0.002 × 10−9 m
= 2 × 10−12 m
Step 3: Δp निकालें
h = 6.626 × 10−34 J·s
\(\Delta p=\frac{6.626\times{10}^{-34}}{4\pi\times2\times{10}^{-12}}\)
\(\Delta p\approx2.64\times{10}^{-23}\ {\mathrm{kg\ m\ \operatorname{s}}}^{-1}\)
✅ Δp = 2.64 × 10−23 kg m s−1
Step 4: दिया गया संवेग (p) निकालें
p = h / (4π × 0.05 nm)
0.05 nm = 0.05 × 10−9 m = 5 × 10−11 m
\(p=\frac{6.626\times{10}^{-34}}{4\pi\times5\times{10}^{-11}}\)
\(p\approx1.055\times{10}^{-24}\ {\mathrm{kg\ m\ \operatorname{s}}}^{-1}\)
✅ p = 1.055 × 10−24 kg m s−1
Step 5: कठिनाई का कारण (Comparison)
\(\frac{\Delta p}{p}=\frac{2.64\times{10}^{-23}}{1.055\times{10}^{-24}}\approx25\)
✅ Δp, p से लगभग 25 गुना बड़ा है।
इसलिए इलेक्ट्रॉन का वास्तविक संवेग सटीक रूप से निर्धारित नहीं हो पाएगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 जितनी अधिक सटीकता से (छोटा Δx) आप इलेक्ट्रॉन की स्थिति मापेंगे, उतनी ही ज्यादा अनिश्चितता (Δp) उसके संवेग में आ जाएगी।
Q.62: N इलेक्ट्रॉन की क्वांटम संख्याएँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ऊर्जा के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए। क्या इनमें से किसी की ऊर्जा समान है?
n = 4, l = 2, ml = −2, ms = −1/2
n = 3, l = 2, ml = 1, ms = +1/2
n = 4, l = 1, ml = 0, ms = +1/2
n = 3, l = 2, ml = −2, ms = −1/2
n = 3, l = 1, ml = −1, ms = +1/2
n = 4, l = 1, ml = 0, ms = +1/2
n = 4, l = 2, ml = −2, ms = −1/2
n = 3, l = 2, ml = 1, ms = +1/2
n = 4, l = 1, ml = 0, ms = +1/2
n = 3, l = 2, ml = −2, ms = −1/2
n = 3, l = 1, ml = −1, ms = +1/2
n = 4, l = 1, ml = 0, ms = +1/2
उत्तर
✅ ऊर्जा का बढ़ता क्रम (Increasing energy):5 < 2 = 4 < 6 = 3 < 1
✅ समान ऊर्जा वाले:
👉 2 और 4 (दोनों 3d)
👉 3 और 6 (दोनों 4p)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: हर सेट को कक्षक (orbital) में बदलेंl का अर्थ:
👉 l = 0 ⇒ s
👉 l = 1 ⇒ p
👉 l = 2 ⇒ d
अब:
n=4, l=2 ⇒ 4d
n=3, l=2 ⇒ 3d
n=4, l=1 ⇒ 4p
n=3, l=2 ⇒ 3d
n=3, l=1 ⇒ 3p
n=4, l=1 ⇒ 4p
Step 2: (n + l) नियम से ऊर्जा तुलना
ऊर्जा का नियम (बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में):
👉 जिसका (n+l) कम ⇒ ऊर्जा कम
👉 यदि (n+l) समान हो ⇒ जिसका n छोटा ⇒ ऊर्जा कम
अब (n+l):
👉 3p: n+l = 3+1 = 4 → (सबसे कम)
👉 3d: n+l = 3+2 = 5
👉 4p: n+l = 4+1 = 5
👉 4d: n+l = 4+2 = 6 → (सबसे ज्यादा)
अब (n+l) = 5 में तुलना:
3d (n=3) की ऊर्जा 4p (n=4) से कम होगी।
Step 3: क्रम बनाएं
3p (5) सबसे कम
फिर 3d (2 और 4)
फिर 4p (3 और 6)
फिर 4d (1) सबसे ज्यादा
✅ इसलिए क्रम: 5 < 2 = 4 < 6 = 3 < 1
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही उपखण्ड (जैसे 3d या 4p) में ml और ms बदलने से ऊर्जा सामान्यतः नहीं बदलती, इसलिए 2 और 4 की ऊर्जा समान है, और 3 और 6 की ऊर्जा भी समान है।
Q.63: ब्रोमीन (Br) परमाणु में 35 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसमें 2p कक्षक में 6 इलेक्ट्रॉन, 3p कक्षक में 6 इलेक्ट्रॉन तथा 4p कक्षक में 5 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इनमें से कौन-सा इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) अनुभव करता है?
उत्तर
✅ 4p कक्षक का इलेक्ट्रॉन न्यूनतम प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) अनुभव करेगा।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) क्या होता है?\(Z_{eff}=Z-\sigma\)
जहाँ
👉 Z = वास्तविक नाभिकीय आवेश (परमाणु क्रमांक)
👉 σ = शील्डिंग/परिरक्षण (भीतरी इलेक्ट्रॉनों द्वारा)
Step 2: किसे सबसे ज्यादा shielding मिलेगी?
👉 2p इलेक्ट्रॉन नाभिक के बहुत पास होता है ⇒ परिरक्षण प्रभाव कम ⇒ Zeff ज्यादा
👉 3p इलेक्ट्रॉन उससे बाहर है ⇒ परिरक्षण प्रभाव ज्यादा ⇒ Zeff कम
👉 4p इलेक्ट्रॉन सबसे बाहरी है ⇒ परिरक्षण प्रभाव सबसे ज्यादा ⇒ Zeff सबसे कम
Step 3: निष्कर्ष
सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन पर अंदर के सभी इलेक्ट्रॉन सबसे ज्यादा shielding करते हैं, इसलिए वह नाभिक का आकर्षण सबसे कम महसूस करता है।
✅ इसलिए 4p इलेक्ट्रॉन न्यूनतम Zeff अनुभव करता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही परमाणु में ऊर्जा स्तर (n) बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन की औसत दूरी बढ़ती है और परिरक्षण प्रभाव भी बढ़ती है, इसलिए बाहरी इलेक्ट्रॉन का Zeff घट जाता है।
Q.64: निम्नलिखित में से कौन-सा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश (High Zeff) अनुभव करेगा?
(i) 2s और 3s
(ii) 4d और 4f
(iii) 3d और 3p
(i) 2s और 3s
(ii) 4d और 4f
(iii) 3d और 3p
उत्तर
✅ (i) 2s✅ (ii) 4d
✅ (iii) 3p
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम)👉 जिस कक्षक का penetration (भेदन) ज्यादा होता है, वह नाभिक के ज्यादा पास आता है और Zeff ज्यादा अनुभव करता है।
भेदन क्रम (एक ही n के लिए): s > p > d > f
(i) 2s vs 3s
👉 2s का n छोटा है, इसलिए यह नाभिक के ज्यादा निकट रहेगा।
✅ इसलिए 2s अधिक Zeff अनुभव करेगा।
(ii) 4d vs 4f
👉 एक ही n = 4 में penetration: d > f
✅ इसलिए 4d अधिक Zeff अनुभव करेगा।
(iii) 3d vs 3p
👉 एक ही n = 3 में penetration: p > d
✅ इसलिए 3p अधिक Zeff अनुभव करेगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 इसी भेदन नियम की वजह से बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में ऊर्जा क्रम अक्सर ns < np < nd < nf जैसा हो जाता है।
Q.65: Al तथा Si में 3p कक्षक में अयुग्मित (unpaired) इलेक्ट्रॉन होते हैं। कौन-सा इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) अनुभव करेगा?
उत्तर
✅ Si (सिलिकॉन) का 3p इलेक्ट्रॉन अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) अनुभव करेगा।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: परमाणु क्रमांक (Z) की तुलना👉 Al का Z = 13
👉 Si का Z = 14
✅ यानी Si में नाभिकीय आवेश Al से ज्यादा है।
Step 2: दोनों में कक्षक (orbital) वही है
दोनों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन 3p में है, इसलिए:
👉 shielding (भीतरी इलेक्ट्रॉनों का परिरक्षण) लगभग एक समान रहेगा|
👉 लेकिन Si में Z अधिक होने से बाहरी 3p इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण ज्यादा होगा
Step 3: निष्कर्ष
\(Z_{eff}=Z-\sigma\)
Si में Z बड़ा है और σ लगभग समान, इसलिए Zeff Si में अधिक होगा।
✅ इसलिए Si का 3p इलेक्ट्रॉन नाभिक से अधिक Zeff अनुभव करेगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही period में बाएँ से दाएँ जाने पर (Al → Si) Z बढ़ता है, जबकि shielding बहुत ज्यादा नहीं बढ़ती, इसलिए Zeff बढ़ता जाता है और परमाणु आकार घटता है।
Q.66: निम्नलिखित तत्वों में अयुग्मित (unpaired) इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए:
(क) P
(ख) Si
(ग) Cr
(घ) Fe
(ङ) Kr
(क) P
(ख) Si
(ग) Cr
(घ) Fe
(ङ) Kr
उत्तर
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या(क) P = 3
(ख) Si = 2
(ग) Cr = 6
(घ) Fe = 4
(ङ) Kr = 0
व्याख्या – Step by Step
(क) P (Z = 15)इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 1s2 2s2 2p6 3s2 3p3
3p में 3 इलेक्ट्रॉन अलग-अलग कक्षकों में जाते हैं (Hund’s rule)
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 3
(ख) Si (Z = 14)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 1s2 2s2 2p6 3s2 3p2
3p में 2 इलेक्ट्रॉन अलग-अलग कक्षकों में
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 2
(ग) Cr (Z = 24)
Cr का असाधारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d5 4s1
3d5 में 5 unpaired + 4s1 में 1 unpaired
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 6
(घ) Fe (Z = 26)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d6 4s2
3d6 में: 5 में पहले 5 unpaired, 6वाँ एक जोड़ी बनाता है
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 4
(ङ) Kr (Z = 36)
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d10 4s2 4p6
सब कक्षक पूर्ण भरे हैं
✅ अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 0
क्या आप जानते हैं?
👉 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन जितने ज्यादा होते हैं, तत्व उतना अधिक परामैग्नेटिक (paramagnetic) होता है।
Q.67: (क) n = 4 से संबंधित कितने उपकोश (subshells) होंगे?
(ख) n = 4 वाले कोश में ऐसे कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो सकते हैं जिनके लिए ms = −1/2 हो?
(ख) n = 4 वाले कोश में ऐसे कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो सकते हैं जिनके लिए ms = −1/2 हो?
उत्तर
✅ (क) 4 उपकोश होंगे: 4s, 4p, 4d, 4f✅ (ख) ms = −1/2 वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 16
व्याख्या – Step by Step
(क) Step 1: n = 4 के लिए l के मानकिसी भी n के लिए:
l = 0 से (n − 1) तक
n = 4 ⇒ l = 0, 1, 2, 3
इनके नाम:
👉 l = 0 ⇒ s
👉 l = 1 ⇒ p
👉 l = 2 ⇒ d
👉 l = 3 ⇒ f
✅ इसलिए n = 4 के लिए उपकोश: 4s, 4p, 4d, 4f (कुल 4)
(ख) Step 2: n = 4 में कुल कक्षक (orbitals) कितने?
n-th shell में कुल orbitals = n2
n = 4 ⇒ कुल orbitals = 42 = 16
Step 3: ms = −1/2 वाले इलेक्ट्रॉन कितने?
हर orbital में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं:
👉 एक का ms = +1/2
👉 दूसरे का ms = −1/2
यदि हर orbital में एक इलेक्ट्रॉन ऐसा हो जिसका ms = −1/2, तो
✅ ms = −1/2 वाले इलेक्ट्रॉन = orbitals की संख्या = 16
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी भी shell में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 2n2 होते हैं। इसमें आधे का spin +1/2 और आधे का spin −1/2 माना जा सकता है।
❓ Chapter 2 FAQ – Structure of Atom (NCERT Solutions)
📌 यह Chapter 2 (Structure of Atom / परमाणु की संरचना) में सबसे important topics कौन से हैं?
इस chapter में ये topics सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं: Bohr Model, de Broglie wavelength,
Heisenberg Uncertainty Principle, Quantum Numbers (n, l, ml, ms),
Electronic Configuration, Photoelectric Effect और Hydrogen spectrum (Lyman, Balmer, Paschen).
🧠 Quantum numbers में जल्दी mistake कहाँ होती है?
सबसे common गलती: l की maximum value याद रखना। नियम: l = 0 से (n − 1) तक ही possible है।
और ml = −l से +l तक integer values लेता है, जबकि ms केवल +1/2 या −1/2 होता है।
और ml = −l से +l तक integer values लेता है, जबकि ms केवल +1/2 या −1/2 होता है।
⚡ Photoelectric Effect में K.E. कैसे निकालते हैं?
फोटोइलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा के लिए Einstein equation use होता है:
K.E.max = hν − W0
और अगर stopping potential दिया हो, तो: K.E.max = eVs (eV में सीधे Vs = eV).
K.E.max = hν − W0
और अगर stopping potential दिया हो, तो: K.E.max = eVs (eV में सीधे Vs = eV).
🌈 Hydrogen spectrum series (Lyman, Balmer, Paschen) कैसे पहचानें?
पहचान final level (n1) से होती है:
✅ Lyman series: n1 = 1 (UV region)
✅ Balmer series: n1 = 2 (Visible region)
✅ Paschen series: n1 = 3 (Infrared region)
✅ Lyman series: n1 = 1 (UV region)
✅ Balmer series: n1 = 2 (Visible region)
✅ Paschen series: n1 = 3 (Infrared region)
📏 de Broglie wavelength (λ) कब और कैसे use करें?
जब particle का mass (m) और velocity (v) दिया हो, तब:
λ = h / (mv)
Electron microscope जैसे applications में इलेक्ट्रॉन की λ छोटी होने से resolution बहुत अच्छा मिलता है।
λ = h / (mv)
Electron microscope जैसे applications में इलेक्ट्रॉन की λ छोटी होने से resolution बहुत अच्छा मिलता है।
🧾 Electronic configuration में Cu/Cr जैसा exception क्यों आता है?
कुछ cases में half-filled (d5) और fully-filled (d10) subshell ज्यादा stable होते हैं।
इसलिए Cr: [Ar] 3d5 4s1 और Cu: [Ar] 3d10 4s1 मिलता है।
इसलिए Cr: [Ar] 3d5 4s1 और Cu: [Ar] 3d10 4s1 मिलता है।
🧮 Numericals जल्दी solve करने की best strategy क्या है?
पहले units सही करें (nm → m, pm → m, eV → J), फिर formula apply करें।
Photons वाले sums में अक्सर: E = hc/λ और N = Etotal/E use होता है।
Photons वाले sums में अक्सर: E = hc/λ और N = Etotal/E use होता है।
✅ NCERT solutions से क्या benefit मिलेगा (Boards + Competitive)?
NCERT questions clear होने से CBSE exams के basics strong होते हैं और
NEET/JEE level numericals के लिए foundation बनता है, खासकर quantum numbers,
spectrum और photoelectric effect में।
