NCERT Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 3 – Classification of Elements and Periodicity in Properties (तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता)
📘 यहां आपको Class 11 Chemistry Chapter 3 NCERT Solutions (English + Hindi Medium) Question-Answer, Step-by-Step Explanation और NCERT आधारित MCQs मिलेंगे। इस chapter में Periodic Table, Modern Periodic Law, Periodic Trends जैसे topics (atomic radius, ionization enthalpy, electron gain enthalpy, electronegativity) को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपका board exam, NEET और JEE preparation मजबूत हो सके। ✅
🔎 Question Search कैसे करें?
👉 किसी भी question को जल्दी ढूंढने के लिए निचे दिए गए Search Box में Q. नंबर (जैसे Q.12, Q.37) या question का कोई keyword (जैसे ionization enthalpy, atomic radius, periodic trends) टाइप करें। ✅
- Example: Search में लिखें: Q.20 या electron gain enthalpy
- Tip: एक ही keyword के 2–3 words लिखेंगे तो result और fast मिलेगा।
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Q.1: आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
उत्तर
✅ आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार यह है कि
समान भौतिक व रासायनिक गुणधर्म वाले तत्वों को
एक ही वर्ग/समूह में एक साथ रखा जाए।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: आवर्त सारणी बनाने का मुख्य उद्देश्य🧩 जिन तत्वों के गुणधर्म (properties) मिलते-जुलते हों, उन्हें एक ही समूह (Group) में रखा जाता है।
Step 2: गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
👉 क्योंकि तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म मुख्य रूप से उनके संयोजी कोश (Valence shell) के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं।
Step 3: एक ही समूह के तत्वों में क्या समान होता है?
✅ संयोजी इलेक्ट्रॉनों (valence electrons) की संख्या समान
✅ संयोजी कोश का विन्यास (valence shell configuration) समान
Step 4: निष्कर्ष
🔥 इसी कारण उसी समूह के तत्वों के गुणधर्म भी काफी हद तक समान होते हैं (जैसे समान प्रकार के ऑक्साइड बनाना, समान संयोजकता, और मिलती-जुलती रासायनिक अभिक्रियाएँ)।
क्या आप जानते हैं?
👉 Group number देखकर अक्सर अंदाज़ा लग जाता है कि किसी तत्व के
valence electrons कितने हैं।Example (उदाहरण):
✅ Group 1 (Li, Na, K) → सभी के पास 1 valence electron होता है, इसलिए ये जल्दी +1 आयन बनाते हैं:
• Na → Na+
• K → K+
✅ Group 17 (F, Cl, Br) → सभी के पास 7 valence electrons होते हैं, इसलिए ये 1 इलेक्ट्रॉन लेकर −1 आयन बनाते हैं:
• Cl → Cl−
✨ इसी कारण एक ही group के तत्वों की reactivity और compound बनाने का तरीका काफी मिलता-जुलता होता है।
Q.2: मेंडलीव ने किस महत्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?
उत्तर
✅ मेंडलीव ने परमाणु भार (Atomic Mass/Atomic Weight) को
तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया।✅ हाँ, वे अपने आधार पर काफी हद तक दृढ़ रहे, और जहाँ जरूरत पड़ी वहाँ उन्होंने गुणधर्मों (properties) को प्राथमिकता दी।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मेंडलीव का आधार📌 मेंडलीव ने तत्त्वों को बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया।
Step 2: उनका उद्देश्य
🎯 मकसद यह था कि समान गुणधर्म वाले तत्त्व एक ही समूह (group) में आ जाएँ।
Step 3: रिक्त स्थान (Blank spaces)
👉 जिन तत्त्वों की उस समय खोज नहीं हुई थी, उनके लिए मेंडलीव ने रिक्त स्थान छोड़े।
Step 4: भविष्यवाणी (Prediction)
✅ उन्होंने केवल जगह ही नहीं छोड़ी, बल्कि उन “अज्ञात” तत्त्वों के परमाणु भार और गुणधर्मों की भविष्यवाणी भी की।
Step 5: बाद में क्या हुआ?
🔍 जब बाद में वे तत्त्व खोजे गए, तो उनकी भविष्यवाणियाँ काफी हद तक सही निकलीं।
✅ इसी कारण मेंडलीव की आवर्त सारणी को बहुत महत्व मिला।
क्या आप जानते हैं?
👉 मेंडलीव को अपने नियम पर इतना भरोसा था कि उन्होंने कुछ तत्त्वों को
परमाणु भार के सख्त क्रम से थोड़ा आगे-पीछे रखा,
ताकि गुणधर्म सही group में आ जाएँ।✨ यही उनकी आवर्त सारणी की सबसे smart सोच मानी जाती है।
Q.3: मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?
उत्तर
✅ मौलिक (सबसे बड़ा) अंतर “आधार” का है।👉 मेंडलीव का आवर्त नियम: तत्त्वों के परमाणु भार (Atomic Mass) पर आधारित है।
👉 आधुनिक आवर्त नियम: तत्त्वों के परमाणु क्रमांक (Atomic Number, Z) पर आधारित है।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: मेंडलीव का नियम क्या कहता है?👉 मेंडलीव के अनुसार तत्त्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भार के साथ आवर्ती (periodic) रूप से बदलते हैं।
मतलब: Atomic Mass बढ़ाओ → गुणधर्म एक पैटर्न में दोहराते हैं।
Step 2: आधुनिक नियम क्या कहता है?
👉 आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्त्वों के गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांक (Z) के साथ आवर्ती रूप से बदलते हैं।
मतलब: Atomic Number बढ़ाओ → गुणधर्म सही तरीके से दोहराते हैं।
Step 3: आधुनिक नियम ज़्यादा सही क्यों है?
✅ क्योंकि परमाणु क्रमांक (Z) सीधे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (electronic configuration) तय करता है,
और उसी से तत्त्वों के गुणधर्म निर्धारित होते हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 आधुनिक आवर्त नियम अपनाने से कई पुरानी समस्याएँ अपने आप ठीक हो गईं,जैसे Ar–K और Co–Ni वाला उल्टा क्रम।
Q.4: क्वाण्टम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होने चाहिए।
उत्तर
✅ छठवें आवर्त (6th period) में कुल 32 तत्त्व होते हैं, क्योंकि इस आवर्त में इलेक्ट्रॉन जिन उपकक्षाओं में भरते हैं उनकी कुल क्षमता:6s (2) + 4f (14) + 5d (10) + 6p (6) = 32
व्याख्या – Step by Step
Step 1: नया आवर्त नई कक्षा (shell) से शुरू होता है📌 दीर्घ रूप वाली आवर्त सारणी में हर आवर्त एक नई मुख्य क्वाण्टम संख्या (n) से शुरू होता है।
✅ छठवाँ आवर्त n = 6 से शुरू होता है।
Step 2: n = 6 के लिए संभव उपकक्षाएँ
n = 6 के लिए azimuthal quantum number (ℓ) के मान हो सकते हैं:
ℓ = 0, 1, 2, 3
इससे उपकक्षाएँ बनती हैं:
👉 ℓ = 0 → 6s
👉 ℓ = 1 → 6p
👉 ℓ = 2 → 6d
👉 ℓ = 3 → 6f
Step 3: वास्तव में छठवें आवर्त में कौन-कौन सी उपकक्षाएँ भरती हैं?
⚡ Aufbau नियम के अनुसार ऊर्जा क्रम को देखते हैं:
👉 6d और 6f की ऊर्जा 7s से भी अधिक होती है, इसलिए ये तुरंत नहीं भरतीं।
👉 छठवें आवर्त में 4f और 5d की ऊर्जा 6p से कम होती है, इसलिए पहले वही भरती हैं।
✅ इसलिए 6th period में filling क्रम मुख्यतः:
6s → 4f → 5d → 6p
Step 4: इन उपकक्षाओं की अधिकतम इलेक्ट्रॉन क्षमता
👉 s में 2 इलेक्ट्रॉन
👉 p में 6 इलेक्ट्रॉन
👉 d में 10 इलेक्ट्रॉन
👉 f में 14 इलेक्ट्रॉन
अब छठवें आवर्त के लिए:
👉 6s = 2
👉 4f = 14
👉 5d = 10
👉 6p = 6
Total = 2 + 14 + 10 + 6 = 32 ✅
👉 इसलिए छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होते हैं।
क्या आप जानते हैं?
💡 32 तत्त्व वाले आवर्त सिर्फ 6th और 7th होते हैं, क्योंकि इन्हीं में
f-block (लैंथेनाइड/एक्टिनाइड) का भरना शामिल होता है, जो आवर्त को “लंबा” बना देता है।
Q.5: आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?
उत्तर
✅ Z = 14 (Si) तीसरे आवर्त (3rd period) और
समूह 14 (Group 14) में स्थित होगा।✅ यह p-ब्लॉक का तत्त्व है।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Z = 14 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास1s2 2s2 2p6 3s2 3p2
या [Ne] 3s2 3p2
Step 2: आवर्त (Period) कैसे निकालें?
👉 जिस सबसे बड़े n (मुख्य क्वाण्टम संख्या) में इलेक्ट्रॉन हों, वही आवर्त होता है।
यहाँ सबसे बड़ा n = 3
✅ इसलिए तीसरा आवर्त (3rd period)।
Step 3: समूह (Group) कैसे निकालें?
Valence shell = 3s2 3p2
👉 कुल संयोजी (valence) इलेक्ट्रॉन = 2 + 2 = 4
यह p-ब्लॉक का तत्त्व है, इसलिए:
✅ समूह संख्या = 10 + (संयोजी इलेक्ट्रॉन) = 10 + 4 = 14
✅ इसलिए समूह 14 (Group 14)।
क्या आप जानते हैं?
👉 Group 14 को “Carbon family” भी कहते हैं।इसी group में C, Si, Ge, Sn, Pb आते हैं।
💻 मज़ेदार बात: Silicon (Si) ही कंप्यूटर चिप्स और semiconductor की दुनिया का सबसे famous element है।
Q.6: उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग (समूह) में स्थित होता है।
उत्तर
✅ उस तत्व का परमाणु क्रमांक = Z = 17
(क्लोरीन, Cl)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: तीसरे आवर्त में कौन-कौन सी उपकक्षाएँ भरती हैं?तीसरे आवर्त (3rd period) में इलेक्ट्रॉन सिर्फ 3s और 3p उपकक्षाओं में भरते हैं।
👉 इसलिए इसमें 2 s-block (3s) और 6 p-block (3p) के तत्त्व होते हैं।
Step 2: तीसरे आवर्त का Z-range
तीसरा आवर्त Z = 11 से शुरू होकर Z = 18 पर खत्म होता है।
👉 Z = 11 (Na) और Z = 12 (Mg) → s-block
👉 Z = 13 से Z = 18 → p-block (समूह 13 से 18 तक)
Step 3: 17वाँ समूह (Group 17)
17वाँ समूह p-block में आता है और तीसरे आवर्त में इसका तत्व Z = 17 होता है।
✅ इसलिए परमाणु क्रमांक 17 है।
क्या आप जानते हैं?
👉 17वाँ समूह को Halogens कहा जाता है।ये तत्त्व 1 इलेक्ट्रॉन लेकर जल्दी −1 आयन बनाते हैं, जैसे:
Cl + e− → Cl−
Q.7: कौन-से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सीबोर्ग समूह द्वारा
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सीबोर्ग समूह द्वारा
उत्तर
✅ (i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला से जुड़े नाम:• लॉरेन्सियम (Lawrencium), Z = 103
• बर्केलियम (Berkelium), Z = 97
✅ (ii) सीबोर्ग समूह द्वारा दिया गया नाम:
• सीबोर्गीयम (Seaborgium), Z = 106
व्याख्या – Step by Step
Step 1: नामकरण का आधार🧪 कुछ नए (synthetic / man-made) तत्वों का नाम उस जगह/संस्थान/वैज्ञानिक के नाम पर रखा जाता है जहाँ वे बनाए गए या जिनसे वे जुड़े रहे।
Step 2: Lawrence Berkeley Laboratory से जुड़े नाम
✅ Lawrencium — “Lawrence” के सम्मान में
✅ Berkelium — “Berkeley” स्थान के नाम पर
Step 3: Seaborg समूह से जुड़ा नाम
✅ Seaborgium नाम Glenn T. Seaborg के सम्मान में रखा गया, इसलिए इसे “सीबोर्ग समूह” से जोड़ा जाता है।
क्या आप जानते हैं?
💡 कई कृत्रिम (man-made) तत्वों के नाम
वैज्ञानिकों, जगहों
या प्रयोगशालाओं के सम्मान में रखे जाते हैं।इससे उनकी खोज की पहचान और इतिहास याद रखना आसान हो जाता है। ✅
Q.8: एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
उत्तर
✅ क्योंकि एक ही वर्ग (Group) के तत्वों के
संयोजी कोश (Valence shell) में
इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है।इसी वजह से उनके भौतिक और रासायनिक गुणधर्म भी काफी मिलते-जुलते होते हैं।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: गुणधर्म किस पर निर्भर करते हैं?🔍 किसी भी तत्व के गुणधर्म मुख्य रूप से उसके बाहरी (संयोजी) इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं।
Step 2: एक ही group में क्या समान होता है?
✅ एक ही group के सभी तत्वों का valence shell electronic configuration एक जैसा होता है।
👉 यानी valence electrons की संख्या समान रहती है।
Step 3: valence electrons समान होने पर क्या असर होता है?
👉 संयोजकता (Valency) अक्सर समान होती है
👉 आयन बनने की प्रवृत्ति (जैसे +1, +2, −1) मिलती-जुलती होती है
👉 यौगिक (Compounds) बनाने का तरीका भी मिलता-जुलता होता है
Step 4: निष्कर्ष
✅ इसलिए एक ही वर्ग के तत्वों के रासायनिक गुण (और कई भौतिक गुण) में समानता दिखती है।
क्या आप जानते हैं?
💡 Group 1 (Li, Na, K) सभी के पास
1 valence electron होता है, इसलिए ये अक्सर
+1 आयन बनाते हैं और पानी के साथ तेज़ी से अभिक्रिया करते हैं।✅ यही “एक जैसा valence electron” वाला नियम group की समानता की सबसे बड़ी वजह है।
Q.9: “परमाणु त्रिज्या” और “आयनिक त्रिज्या” से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
✅ परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius):
परमाणु के आकार का माप, जिसे सामान्यतः नाभिक के केन्द्र से
बाह्यतम कक्षा के इलेक्ट्रॉन तक की दूरी माना जाता है।✅ आयनिक त्रिज्या (Ionic Radius): किसी आयन के आकार का माप, यानी आयन के नाभिक से उसके इलेक्ट्रॉन मेघ (electron cloud) की प्रभावी सीमा तक की दूरी।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: परमाणु त्रिज्या क्या बताती है?👉 यह बताती है कि एक तटस्थ (neutral) परमाणु कितना बड़ा है।
✅ आसान भाषा में: नाभिक से बाहर वाले इलेक्ट्रॉन तक की दूरी = परमाणु त्रिज्या।
Step 2: आयनिक त्रिज्या क्या होती है?
👉 जब परमाणु इलेक्ट्रॉन त्याग कर या ग्रहण कर आयन बनता है, तो उसका आकार बदल जाता है।
✅ उस आयन के नाभिक का प्रभाव जहाँ तक उसके इलेक्ट्रॉन मेघ पर माना जाता है, वही आयनिक त्रिज्या कहलाती है।
Step 3: एक छोटा नियम (याद रखने के लिए)
👉 धनायन (Cation) बनने पर आकार घटता है (electron निकलते हैं)।
👉 ऋणायन (Anion) बनने पर आकार बढ़ता है (electron बढ़ते हैं)।
क्या आप जानते हैं?
💡 Na परमाणु से
Na+ बनने पर त्रिज्या काफी कम हो जाती है, क्योंकि✅ इलेक्ट्रॉन निकलने से electron–electron repulsion घटता है
✅ और नाभिक का खिंचाव ज्यादा प्रभावी हो जाता है।
Q.10: किसी वर्ग या आवर्त में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर
✅ आवर्त (Period) में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु त्रिज्या
घटती है।✅ वर्ग (Group) में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
व्याख्या – Step by Step
(A) आवर्त में परमाणु त्रिज्या क्यों घटती है? (Left → Right)Step 1: आवर्त में आगे बढ़ने पर परमाणु क्रमांक (Z) बढ़ता है, यानी नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
Step 2: इलेक्ट्रॉन भी उसी एक ही बाहरी कोश (same shell) में जुड़ते जाते हैं।
Step 3: Shielding (परिरक्षण) ज्यादा नहीं बढ़ता, क्योंकि नया इलेक्ट्रॉन उसी shell में आता है।
Step 4: इसलिए प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) बढ़ जाता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर और पास खिंच जाते हैं।
✅ परिणाम: परमाणु त्रिज्या घटती है।
उदाहरण: 3rd period में Na की त्रिज्या बड़ी, जबकि Cl की कम।
(B) वर्ग में परमाणु त्रिज्या क्यों बढ़ती है? (Top → Bottom)
Step 1: नीचे जाते समय हर नए तत्व में एक नई इलेक्ट्रॉनिक कोश (new shell) जुड़ जाती है।
Step 2: shell बढ़ने से बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं।
Step 3: साथ ही अंदर के इलेक्ट्रॉन परिरक्षण प्रभाव बढ़ा देते हैं, जिससे नाभिक का प्रभाव बाहर तक कम पहुँचता है।
✅ परिणाम: परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
उदाहरण: Group 1 में Li < Na < K < Rb < Cs (त्रिज्या बढ़ती जाती है)
क्या आप जानते हैं?
👉 निष्क्रिय गैसों (He, Ne, Ar…) की त्रिज्या की तुलना अक्सर अलग तरीके से की जाती है,
क्योंकि वे सामान्यतः बन्ध नहीं बनातीं।✅ इसलिए उनके लिए सहसंयोजक त्रिज्या की जगह अक्सर वान्डर वाल्स (Van der Waals) त्रिज्या का उपयोग किया जाता है।
Q.11: समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज का नाम लिखिए जो निम्नलिखित परमाणुओं/आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी:
(i) F−
(ii) Ar
(iii) Mg2+
(iv) Rb+
(i) F−
(ii) Ar
(iii) Mg2+
(iv) Rb+
उत्तर
✅ समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज (Isoelectronic species) वे परमाणु/आयन होते हैं
जिनमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, लेकिन
नाभिकीय आवेश (Z) अलग होता है।एक-एक उदाहरण:
(i) F− के साथ: Ne
(ii) Ar के साथ: K+
(iii) Mg2+ के साथ: O2−
(iv) Rb+ के साथ: Kr
व्याख्या – Step by Step
Idea: पहले इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालो, फिर उसी जितने इलेक्ट्रॉन वाली कोई स्पीशीज लिख दो। ✅
(i) F−
F का Z = 9, 1 इलेक्ट्रॉन और जुड़ा → 9 + 1 = 10 e−
✅ इसलिए Ne (10) समइलेक्ट्रॉनिक है।
(ii) Ar
Ar में सीधे 18 e− होते हैं।
✅ इसलिए K+ (19 − 1 = 18) समइलेक्ट्रॉनिक है।
(iii) Mg2+
Mg का Z = 12, 2 इलेक्ट्रॉन निकल गए → 12 − 2 = 10 e−
✅ इसलिए O2− (8 + 2 = 10) समइलेक्ट्रॉनिक है।
(iv) Rb+
Rb का Z = 37, 1 इलेक्ट्रॉन निकल गया → 37 − 1 = 36 e−
✅ इसलिए Kr (36) समइलेक्ट्रॉनिक है।
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही समइलेक्ट्रॉनिक श्रेणी में जैसे-जैसे
Z बढ़ता है, नाभिक का खिंचाव बढ़ता है और
आकार (त्रिज्या) घटता जाता है।उदाहरण (आकार घटता है):
O2− > F− > Ne > Na+ > Mg2+
Q.12: निम्नलिखित स्पीशीज पर विचार कीजिए— N3−, O2−, F−, Na+, Mg2+ एवं Al3+
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
उत्तर
✅ (क) समानता: इन सभी में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान (10) है,
इसलिए ये समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic) स्पीशीज हैं।✅ (ख) आयनिक त्रिज्या (Increasing order):
Al3+ < Mg2+ < Na+ < F− < O2− < N3−
व्याख्या – Step by Step
(क) समानता क्यों? (Isoelectronic)हर स्पीशीज में इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालते हैं:
👉 N3−: 7 + 3 = 10
👉 O2−: 8 + 2 = 10
👉 F−: 9 + 1 = 10
👉 Na+: 11 − 1 = 10
👉 Mg2+: 12 − 2 = 10
👉 Al3+: 13 − 3 = 10
✅ सभी में 10 electrons → इसलिए ये समइलेक्ट्रॉनिक हैं।
(ख) आयनिक त्रिज्या का क्रम कैसे बनता है?
समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज में नियम:
👉 जैसे-जैसे परमाणु क्रमांक (Z) बढ़ता है, नाभिकीय आकर्षण बढ़ता है और आयनिक त्रिज्या घटती है।
Z (नाभिकीय आवेश) देखें:
N = 7, O = 8, F = 9, Na = 11, Mg = 12, Al = 13
✅ सबसे बड़ा Z = Al → सबसे छोटी त्रिज्या
✅ सबसे छोटा Z = N → सबसे बड़ी त्रिज्या
इसलिए बढ़ती त्रिज्या का क्रम:
Al3+ < Mg2+ < Na+ < F− < O2− < N3−
क्या आप जानते हैं?
👉 इसी “समइलेक्ट्रॉनिक” rule की वजह से
एक ही electrons संख्या होने पर भी अलग-अलग आयन का आकार काफी अलग हो सकता है।✅ बस याद रखो: Z ज्यादा → आकर्षण बल ज्यादा → radius छोटा
Q.13: धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।
उत्तर
✅ धनायन (Cation) बनने पर परमाणु का आकार घटता है,
इसलिए धनायन अपने जनक परमाणु से छोटे होते हैं।✅ ऋणायन (Anion) बनने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, इसलिए ऋणायनों की त्रिज्या अपने जनक परमाणु से अधिक होती है।
व्याख्या – Step by Step
(A) धनायन छोटे क्यों होते हैं?Step 1: धनायन तब बनता है जब परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन खो देता है।
Step 2: इलेक्ट्रॉन निकलने से electron–electron repulsion कम हो जाता है।
Step 3: अब वही नाभिकीय आकर्षण (protons का खिंचाव) कम इलेक्ट्रॉनों पर लगता है, इसलिए प्रभावी नाभिकीय आवेश Zeff बढ़ जाता है।
Step 4: बचे हुए इलेक्ट्रॉन ज्यादा खिंचाव महसूस करते हैं और नाभिक के और पास आ जाते हैं।
✅ निष्कर्ष: त्रिज्या घटती है और धनायन छोटा हो जाता है।
Example: Na → Na+ (Na+ का आकार Na से छोटा)
(B) ऋणायन बड़े क्यों होते हैं?
Step 1: ऋणायन तब बनता है जब परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर लेता है।
Step 2: इलेक्ट्रॉन बढ़ने से electron–electron repulsion बढ़ जाता है।
Step 3: नाभिकीय आकर्षण वही रहता है, लेकिन इलेक्ट्रॉन बढ़ने पर प्रति इलेक्ट्रॉन खिंचाव कम प्रभावी लगता है (Zeff घटता-सा महसूस होता है)।
Step 4: इलेक्ट्रॉन मेघ फैल जाता है, इसलिए त्रिज्या बढ़ जाती है।
✅ निष्कर्ष: ऋणायन अपने जनक परमाणु से बड़ा होता है।
Example: Cl → Cl− (Cl− का आकार Cl से बड़ा)
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही तत्व के लिए तुलना हमेशा याद रखें:Anion > Atom > Cation
✅ जैसे: Cl− > Cl > Cl+ (आकार के हिसाब से)
Q.14: आयनन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में “विलगित गैसीय परमाणु” तथा “आद्य अवस्था” शब्दों की सार्थकता क्या है?
उत्तर
✅ “विलगित गैसीय परमाणु” इसलिए लिखा जाता है ताकि
परमाणु पर दूसरे परमाणुओं/पड़ोसी कणों का प्रभाव न पड़े और मान
शुद्ध (true) रहें।✅ “आद्य अवस्था (Ground state)” इसलिए जरूरी है क्योंकि यही परमाणु की सबसे स्थिर और न्यूनतम ऊर्जा वाली अवस्था है; उत्तेजित अवस्था में मान बदल सकते हैं।
व्याख्या – Easy Step by Step
1) “विलगित गैसीय परमाणु” क्यों?Step 1: किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बल आसपास उपस्थित अन्य परमाणुओं/बंधों से बदल सकता है।
Step 2: आयनन एन्थैल्पी (IE) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (EA) का मान इसी आकर्षण बल पर निर्भर करता है।
Step 3: इसलिए परिभाषा में परमाणु को अकेला (isolated) माना जाता है।
Step 4: गैसीय अवस्था में कण एक-दूसरे से काफी दूर होते हैं, इसलिए उन्हें लगभग विलगित मान लिया जाता है।
✅ इसलिए शब्द आता है: विलगित गैसीय परमाणु।
2) “आद्य अवस्था (Ground state)” क्यों?
Step 1: आद्य अवस्था = सबसे कम ऊर्जा और सबसे अधिक स्थिर अवस्था।
Step 2: यदि परमाणु उत्तेजित अवस्था (excited state) में हो, तो उसकी ऊर्जा पहले से ज्यादा होगी।
Step 3: तब इलेक्ट्रॉन निकालने (IE) या जोड़ने (EA) में लगने/निकलने वाली ऊर्जा भी अलग हो जाएगी।
✅ इसलिए सही तुलना और तय (standard) परिभाषा के लिए परमाणु को हमेशा ground state में माना जाता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 यही कारण है कि किताबों में IE/EA की परिभाषा में हमेशा लिखा होता है:“आद्य अवस्था में विलगित गैसीय परमाणु”
✅ ताकि हर तत्व के मानों की तुलना एक ही मानक (standard) अवस्था/परिस्थिति में की जा सके।
Q.15: हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा –2.18 × 10−18 J है। परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी (J mol−1 में) परिकलित कीजिए।
(संकेत: उत्तर प्राप्त करने के लिए मोल संकल्पना का उपयोग कीजिए।)
(संकेत: उत्तर प्राप्त करने के लिए मोल संकल्पना का उपयोग कीजिए।)
उत्तर
✅ परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी =
1.313 × 106 J mol−1(≈ 1313 kJ mol−1)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: आयनन के लिए आवश्यक ऊर्जा (per atom)आद्य अवस्था में ऊर्जा:
E1 = −2.18 × 10−18 J
आयनन के बाद इलेक्ट्रॉन को अनंत (infinity) पर मुक्त माना जाता है, जहाँ ऊर्जा:
E∞ = 0
इसलिए आयनन ऊर्जा (per atom):
ΔE = E∞ − E1
ΔE = 0 − (−2.18 × 10−18)
✅ ΔE = 2.18 × 10−18 J atom−1
Step 2: J mol−1 में बदलना (Mole concept)
1 mol में कणों की संख्या (Avogadro number):
NA = 6.022 × 1023 mol−1
आयनन एन्थैल्पी:
ΔH = (2.18 × 10−18) × (6.022 × 1023) J mol−1
= (2.18 × 6.022) × 105
= 13.12796 × 105
✅ ΔH = 1.312796 × 106 J mol−1
≈ 1.313 × 106 J mol−1
क्या आप जानते हैं?
💡 यही मान per atom के हिसाब से लगभग
13.6 eV के बराबर होता है, जिसे हाइड्रोजन की
first ionization energy भी कहा जाता है। ✅
Q.16: द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है—
Li < B < Be < C < O < N < F < Ne. व्याख्या कीजिए कि
(i) Be की ΔiH, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ΔiH, N और F से कम क्यों है?
(i) Be की ΔiH, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ΔiH, N और F से कम क्यों है?
उत्तर
✅ (i) Be की ΔiH, B से अधिक होती है, क्योंकि Be का बाहरी विन्यास
2s2 (पूर्ण-पूरित) है और 2s इलेक्ट्रॉन का
भेदन (penetration) ज्यादा होता है, इसलिए उसे निकालना कठिन है।✅ (ii) O की ΔiH, N और F से कम होती है, क्योंकि O में 2p में pairing (युग्मन) होने से electron–electron repulsion बढ़ता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन निकालना आसान हो जाता है।
व्याख्या – Step by Step
(i) Be की ΔiH, B से अधिक क्यों?Step 1: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
👉 Be (Z = 4): 1s2 2s2
👉 B (Z = 5): 1s2 2s2 2p1
Step 2: किस उपकक्षा से इलेक्ट्रॉन निकलेगा?
👉 Be में हटने वाला इलेक्ट्रॉन 2s से निकलेगा।
👉 B में हटने वाला इलेक्ट्रॉन 2p से निकलेगा।
Step 3: 2s vs 2p (मुख्य कारण)
✅ 2s इलेक्ट्रॉन का भेदन (penetration) 2p से ज्यादा होता है।
✅ इसलिए 2s इलेक्ट्रॉन नाभिक के ज्यादा पास रहता है और कम परिरक्षित होता है।
✅ साथ ही Be का 2s2 पूर्ण-पूरित (stable) विन्यास है।
✅ इसलिए Be से इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन → ΔiH(Be) > ΔiH(B)
(ii) O की ΔiH, N और F से कम क्यों?
Step 1: N और O के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
👉 N (Z = 7): 1s2 2s2 2p3
(तीनों p-orbitals में एक-एक electron: अर्ध-भरा, ज्यादा स्थायी)
👉 O (Z = 8): 1s2 2s2 2p4
(एक p-orbital में pairing हो जाती है)
Step 2: O में pairing का असर
👉 O में एक 2p कक्षक में दो इलेक्ट्रॉन साथ होते हैं।
✅ इससे electron–electron repulsion बढ़ता है।
✅ इसलिए युग्मित इलेक्ट्रॉन में से एक को निकालना आसान हो जाता है।
✅ इसलिए ΔiH(O) < ΔiH(N)
F के साथ क्यों कम?
👉 F में Z बढ़ने से नाभिकीय आकर्षण और Zeff ज्यादा हो जाता है।
✅ इसलिए F से इलेक्ट्रॉन निकालना O की तुलना में कठिन।
✅ इसलिए ΔiH(O) < ΔiH(F)
क्या आप जानते हैं?
👉 Second period में दो famous “exceptions” याद रखो:✅ Be > B (2s vs 2p)
✅ N > O (अर्ध-भरा stable vs pairing repulsion)
✅ बस ये दो लाइन याद रहने से पूरा trend आसानी से समझ में आ जाता है।
Q.17: आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी से कम है, परन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है?
उत्तर
✅ Na की 1st ionization enthalpy
(ΔiH1) <
Mg की
ΔiH1, क्योंकि Na में नाभिकीय आवेश कम है और उसका 3s इलेक्ट्रॉन nwcZy तरीके से बंधा होता है।✅ लेकिन Na की 2nd ionization enthalpy (ΔiH2) > Mg की ΔiH2, क्योंकि Na से पहला इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद Na+ का विन्यास बहुत स्थिर (noble gas जैसा) हो जाता है, जिससे दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत कठिन हो जाता है।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Na और Mg का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें👉 Na (Z = 11): 1s2 2s2 2p6 3s1
👉 Mg (Z = 12): 1s2 2s2 2p6 3s2
________________________________________
(A) Na की ΔiH1 Mg से कम क्यों?1. Na में बाहरी इलेक्ट्रॉन 3s1 है, जो एक ही इलेक्ट्रॉन है और अपेक्षाकृत आसानी से निकल जाता है।
2. Mg में 3s2 है और Mg का नाभिकीय आवेश (+12) Na (+11) से अधिक है, इसलिए Mg अपने बाहरी इलेक्ट्रॉनों को ज्यादा मजबूती से पकड़ता है।
✅ इसलिए ΔiH1(Na) < ΔiH1(Mg)
________________________________________
(B) Na की ΔiH2 Mg से अधिक क्यों?पहला इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद बनने वाले आयन देखें:
👉 Na → Na+ + e−
Na+ का विन्यास: 1s2 2s2 2p6 (यह Ne जैसा, बहुत stable)
👉 Mg → Mg+ + e−
Mg+ का विन्यास: 1s2 2s2 2p6 3s1 (अब भी बाहरी 3s इलेक्ट्रॉन बचा है)
अब दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना:
👉 Na+ से इलेक्ट्रॉन निकालना मतलब स्थिर Ne-जैसे core से इलेक्ट्रॉन निकालना → बहुत कठिन → ऊर्जा बहुत ज्यादा।
👉 Mg+ से इलेक्ट्रॉन निकालना अभी भी 3s1 (valence electron) से है → तुलनात्मक रूप से आसान।
✅ इसलिए ΔiH2(Na) > ΔiH2(Mg)
________________________________________
क्या आप जानते हैं?
👉 आयनन एन्थैल्पी में बड़ा “jump” वहीं आता है जहाँ इलेक्ट्रॉन हटाने के बाद या हटाने से पहले noble gas जैसा stable configuration बनता/टूटता है।इसी वजह से Na की दूसरी IE अचानक बहुत बढ़ जाती है ✅
Q.18: मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कौन-से कारण हैं?
उत्तर
✅ समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी कम होती है,
क्योंकि बाहरी इलेक्ट्रॉन को निकालना धीरे-धीरे आसान हो जाता है।
व्याख्या – Step by Step
1. नाभिकीय आवेश (Z) बढ़ता है👉 नीचे जाते समय प्रोटॉन बढ़ते हैं, इसलिए Z बढ़ता है।
👉 लेकिन यह अकेला कारण नहीं है, क्योंकि बाकी प्रभाव इसे “कवर” कर देते हैं।
2. परमाणु आकार बढ़ता है (नई-नई कोश जुड़ती हैं)
👉 हर अगली अवधि में एक नया कोश (shell) जुड़ता है।
👉 बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से और दूर चला जाता है।
👉 दूरी बढ़ने से आकर्षण बल कम हो जाता है।
3. परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) बढ़ता है
👉 नीचे जाने पर आंतरिक इलेक्ट्रॉन बढ़ते हैं।
👉 ये अंदर वाले इलेक्ट्रॉन बाहरी इलेक्ट्रॉन पर नाभिक के खिंचाव को कम कर देते हैं।
👉 यानी बाहरी इलेक्ट्रॉन को नाभिक “कम पकड़” पाता है।
4. Final समझ
✅ भले ही Z बढ़ता है, लेकिन
परमाणु आकार में वृद्धि + shielding effect का प्रभाव इतना ज्यादा होता है कि
नाभिक और बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच खिंचाव कम हो जाता है।
👉 इसलिए समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है।
क्या आप जानते हैं?
👉 यही वजह है कि Group 1 (Li, Na, K, Rb, Cs) में नीचे जाते-जाते
धातु की reactivity बढ़ती जाती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन निकालना
आसान होता जाता है।
Q.19: वर्ग 13 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol−1) इस प्रकार हैं—
सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
| B | Al | Ga | In | Tl |
|---|---|---|---|---|
| 801 | 577 | 579 | 558 | 589 |
Unit: kJ mol−1 (First Ionization Enthalpy)
सामान्य से इस विचलन की प्रवृत्ति की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर
✅ सामान्यतः Group 13 में ऊपर से नीचे जाने पर प्रथम आयनन एन्थैल्पी
घटती है, लेकिन Ga और
Tl में यह अपेक्षा से थोड़ी अधिक हो जाती है।✅ इसका मुख्य कारण है d और f इलेक्ट्रॉनों का कमजोर परिरक्षण (poor shielding), जिससे Zeff बढ़ जाता है और बाहरी इलेक्ट्रॉन ज्यादा मजबूती से बंध जाता है।
व्याख्या – Step by Step
1) सामान्य ट्रेंड क्या होना चाहिए?Group में नीचे जाने पर:
👉 आकार बढ़ता है
👉 परिरक्षण बढ़ता है
👉 बाहरी इलेक्ट्रॉन दूर और ढीला बंधा होता है
✅ इसलिए आम तौर पर Ionization enthalpy कम होनी चाहिए।
यह trend B → Al → In तक मोटे तौर पर दिखता भी है।
2) Ga (Gallium) में IE Al से थोड़ा ज्यादा क्यों?
👉 Al: [Ne] 3s2 3p1
👉 Ga: [Ar] 3d10 4s2 4p1
Key point: Ga में 3d10 इलेक्ट्रॉन मौजूद हैं।
👉 d इलेक्ट्रॉन shielding ठीक से नहीं कर पाते (poor shielding)
➡️ नाभिक का प्रभाव बाहरी 4p इलेक्ट्रॉन पर ज्यादा पड़ता है (Zeff बढ़ता है)
✅ इसलिए Ga का बाहरी इलेक्ट्रॉन ज्यादा मजबूती से पकड़ में रहता है
➡️ Ga की IE, Al से थोड़ी बढ़ जाती है (579 > 577)
3) Tl (Thallium) में IE In से ज्यादा क्यों?
👉 In: [Kr] 4d10 5s2 5p1
👉 Tl: [Xe] 4f14 5d10 6s2 6p1
Key point: Tl में 4f14 और 5d10 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
👉 f और d इलेक्ट्रॉनों का shielding और भी कमजोर होता है
➡️ Zeff और बढ़ जाता है
✅ इसलिए Tl में बाहरी 6p इलेक्ट्रॉन ज्यादा मजबूती से बंधा रहता है
➡️ Tl की IE, In से बढ़ जाती है (589 > 558)
क्या आप जानते हैं?
👉 d और f electrons “poor shielders” कहलाते हैं।इसी वजह से कई जगह periodic trend में छोटे-छोटे “exceptions” दिखते हैं, जैसे Ga > Al और Tl > In वाली case.
Q.20: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F
(ii) F या Cl
(i) O या F
(ii) F या Cl
उत्तर
✅ (i) F की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
अधिक ऋणात्मक होगी।✅ (ii) Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी।
व्याख्या – Step by Step
(i) O या F में F की EA अधिक ऋणात्मक क्यों?1. O से F की ओर जाने पर परमाणु आकार घटता है।
2. साथ ही नाभिकीय आवेश (Z) बढ़ता है।
3. इसलिए आने वाले इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का आकर्षण और बढ़ जाता है।
✅ परिणाम: F इलेक्ट्रॉन को ज्यादा आसानी से ग्रहण करता है → EA ज्यादा ऋणात्मक।
(ii) F या Cl में Cl की EA अधिक ऋणात्मक क्यों?
यह थोड़ा “फेमस exception” है।
1. F का आकार बहुत छोटा है, उसका बाहरी 2p कक्षक बहुत सघन होता है।
2. जब नया इलेक्ट्रॉन F में आता है, तो छोटे कक्षक में electron–electron प्रतिकर्षण ज्यादा बढ़ जाता है।
3. Cl का आकार थोड़ा बड़ा है और बाहरी 3p कक्षक में जगह ज्यादा होती है, इसलिए प्रतिकर्षण कम होता है।
✅ इसलिए Cl में इलेक्ट्रॉन जोड़ना ज्यादा “आसान” होता है और ऊर्जा ज्यादा निकलती है।
➡️ Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी ज्यादा ऋणात्मक होती है।
क्या आप जानते हैं?
👉 Halogens में सामान्य trend यह है कि ऊपर से नीचे EA
कम ऋणात्मक होती है, लेकिन
F vs Cl में Cl का मान अधिक ऋणात्मक मिलता है क्योंकि
F का कक्षक बहुत छोटा होने से repulsion बढ़ जाता है।
Q.21: आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर
✅ ऑक्सीजन (O) की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
(ΔegH2)
धनात्मक (positive) होती है।यानी यह पहली इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की तुलना में बिल्कुल उलटी (और “कम ऋणात्मक” नहीं, बल्कि धनात्मक) होती है।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: पहली इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (First electron gain enthalpy)जब उदासीन O परमाणु एक इलेक्ट्रॉन लेता है:
O(g) + e− → O−(g)
इसमें ऊर्जा निकलती है, इसलिए पहला मान ऋणात्मक होता है:
✅ ΔegH1 ≈ −141 kJ mol−1
Step 2: दूसरी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Second electron gain enthalpy)
अब O पहले से ही ऋण आवेशित (O−) है।
जब उस पर एक और इलेक्ट्रॉन जोड़ते हैं:
O−(g) + e− → O2−(g)
यहाँ आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से मौजूद ऋण आवेशित आयन के बीच प्रबल (तगड़ा) विद्युत स्थैतिक प्रतिकर्षण (repulsion) होता है।
👉 इस प्रतिकर्षण को पार “हराने” के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है (absorb)।
✅ इसलिए ΔegH2 धनात्मक होता है:
ΔegH2 ≈ +780 kJ mol−1
क्या आप जानते हैं?
👉 यही कारण है कि गैस अवस्था में O2− बनना अकेले आसान नहीं होता।ऑक्साइड आयन वास्तविकता में ज़्यादातर आयनिक ठोसों (जैसे MgO, CaO) में बनता है, जहाँ क्रिस्टल जाल (lattice) की ऊर्जा इसे स्थिर कर देती है।
Q.22: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता में क्या मूल अंतर है?
उत्तर
✅ इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy):
किसी विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर होने वाले
ऊर्जा परिवर्तन को बताती है।✅ इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता (Electronegativity): किसी परमाणु की सहसंयोजक बंध (covalent bond) में साझा (shared) इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति है।
व्याख्या – Step by Step
1) इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्या बताती है?👉 यह विलगित गैसीय परमाणु पर लागू होती है।
👉 प्रक्रिया ऐसी होती है:
X(g) + e− → X−(g)
👉 इसमें ऊर्जा निकल भी सकती है (ऋणात्मक) या लग भी सकती है (धनात्मक)।
✅ यानी यह एक मापने योग्य ऊर्जा परिवर्तन (kJ mol−1) है।
2) इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता क्या बताती है?
👉 यह bond के अंदर की property है।
👉 जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं, तो कौन उन्हें ज्यादा अपनी ओर खींचता है, यही electronegativity बताती है।
✅ यह सापेक्ष पैमाना है (Pauling scale), कोई सीधी “enthalpy” नहीं।
3) सबसे आसान याद रखने वाली लाइन
👉 इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी = "इलेक्ट्रॉन ग्रहण" (मुक्त परमाणु, गैस)
👉 इलेक्ट्रोनगेटिविटी = "साझा इलेक्ट्रॉन खींचाना" (बंध के अंदर)
क्या आप जानते हैं?
👉 निष्क्रिय गैसों (Ne, Ar आदि) की इलेक्ट्रॉन ऋणात्मकता आमतौर पर नहीं दी जाती,
क्योंकि वे सामान्यतः covalent bond कम बनाती हैं।लेकिन उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का concept अलग तरह से समझा जाता है (अक्सर positive/less favorable)।
Q.23: “सभी नाइट्रोजन यौगिकों में N की विद्युत ऋणात्मकता पॉलिंग पैमाने पर 3.0 होती है।” आप इस कथन पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देंगे?
उत्तर
✅ मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत नहीं हूँ।क्योंकि किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता हर यौगिक में बिल्कुल समान (fixed) नहीं रहती; यह संकरण (hybridisation) और ऑक्सीकरण अवस्था (oxidation state) के साथ बदल सकती है।
व्याख्या – Step by Step
1. पॉलिंग पैमाने पर N की electronegativity लगभग 3.0 बताई जाती है,
लेकिन यह एक सामान्य/औसत विचार है।2. वास्तविकता में, किसी यौगिक में N के चारों तरफ के परमाणु बदलते ही:
👉 N की ऑक्सीकरण अवस्था बदल सकती है
👉 N की संकरण बदल सकती है
👉 और N की electron खींचने की क्षमता भी थोड़ी बदल जाती है
3. इसलिए यह कहना कि “सभी नाइट्रोजन यौगिकों में” N की electronegativity हमेशा 3.0 ही रहेगी, सही नहीं माना जाता।
Example (उदाहरण):
👉 NO और NO2 में N की oxidation state अलग होती है, इसलिए N का electron-attracting behaviour भी अलग दिखता है।
✅ इसी वजह से N की electronegativity को हर compound में एकदम constant मानना विवादास्पद है।
क्या आप जानते हैं?
👉 Electronegativity को अक्सर “fixed number” की तरह पढ़ा दिया जाता है,
लेकिन असल में यह bonding situation पर depend करती है।यही कारण है कि अलग-अलग models/contexts में इसके मानों में थोड़ा फर्क मिल सकता है।
Q.24: वह सिद्धान्त/धारणा बताइए जो परमाणु की त्रिज्या से संबंधित है—
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
(i) जब वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है।
(ii) जब वह इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है।
उत्तर
✅ (i) इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने पर परमाणु ऋणायन (anion) बनता है और उसकी त्रिज्या
बढ़ जाती है।✅ (ii) इलेक्ट्रॉन त्यागने पर परमाणु धनायन (cation) बनता है और उसकी त्रिज्या घट जाती है।
व्याख्या – Step by Step
(i) जब परमाणु इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है (Anion बनने पर त्रिज्या क्यों बढ़ती है?)1. परमाणु 1 या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है → ऋणायन बनता है।
2. नाभिकीय आवेश (protons) वही रहता है, लेकिन संयोजी कोश (valence shell) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
3. इलेक्ट्रॉन बढ़ने से इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण और आपसी परिरक्षण बढ़ता है।
4. इससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का खिंचाव कम प्रभावी लगता है (Zeff घटता हुआ महसूस होता है)।
✅ परिणाम: इलेक्ट्रॉन घनत्व फैलता है → त्रिज्या बढ़ जाती है।
Example: Cl → Cl− (Cl− बड़ा)
(ii) जब परमाणु इलेक्ट्रॉन त्याग करता है (Cation बनने पर त्रिज्या क्यों घटती है?)
1. परमाणु 1 या अधिक इलेक्ट्रॉन त्याग करता है → धनायन बनता है।
2. इलेक्ट्रॉन कम होने से इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण घटता है।
3. कुल नाभिकीय आवेश वही रहता है, लेकिन अब वह कम इलेक्ट्रॉनों को खींच रहा होता है, इसलिए Zeff बढ़ जाता है।
4. कई बार इलेक्ट्रॉन निकलने पर बाहरी shell ही हट जाती है (valence shell eliminate हो सकती है), जिससे आकार और तेजी से घटता है।
✅ परिणाम: इलेक्ट्रॉन नाभिक के और पास आ जाते हैं → त्रिज्या घट जाती है।
Example: Na → Na+ (Na+ छोटा)
क्या आप जानते हैं?
👉 एक ही तत्व के लिए size rule हमेशा याद रखो:✅ Anion > Atom > Cation
जैसे: Cl− > Cl > Cl+
Q.25: किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी समान होगी या भिन्न? आप क्या मानते हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर
✅ किसी तत्व के दो समस्थानिकों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी सामान्यतः समान होती है।
व्याख्या – Step by Step
1. समस्थानिक (isotopes) में परमाणु क्रमांक (Z) समान होता है।👉 यानी नाभिक में प्रोटॉन संख्या समान रहती है।
2. इसलिए समस्थानिकों में:
👉 इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है (उदासीन परमाणु में)
👉 नाभिकीय आवेश (nuclear charge) समान होता है
👉 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (electronic configuration) समान होता है
3. आयनन एन्थैल्पी का सीधा संबंध बाहरी इलेक्ट्रॉन पर नाभिक के खिंचाव और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से होता है।
✅ जब ये सब समान हैं, तो पहली आयनन एन्थैल्पी भी समान होगी।
क्या आप जानते हैं?
👉 समस्थानिकों में सबसे बड़ा फर्क द्रव्यमान (mass) का होता है,
इसलिए उनके भौतिक गुण (जैसे diffusion rate, density) बदल सकते हैं,लेकिन रासायनिक गुण और ionization enthalpy जैसे गुण लगभग समान रहते हैं।
Q.26: धातुओं और अधातुओं में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर
✅ धातुएँ (Metals) सामान्यतः इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं और
धनायन (cation) बनाती हैं।✅ अधातुएँ (Non-metals) सामान्यतः इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं और ऋणायन (anion) बनाती हैं।
व्याख्या – Step by Step
1) इलेक्ट्रॉन देने-लेने की प्रवृत्ति• धातुएँ विद्युत धनात्मक (electropositive) होती हैं।
👉 1 या अधिक संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर: M → M+ + e−
• अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक (electronegative) होती हैं।
👉 1 या अधिक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके: X + e− → X−
2) Redox nature (अपचायक/ऑक्सीकारक)
• धातुएँ इलेक्ट्रॉन देती हैं, इसलिए ये अक्सर अपचायक (reducing agent) होती हैं।
• अधातुएँ इलेक्ट्रॉन लेती हैं, इसलिए ये अक्सर ऑक्सीकारक (oxidising agent) होती हैं।
3) ऊर्जा व गुणधर्म (ट्रेंड)
• धातुओं में
✅ आयनन एन्थैल्पी कम
✅ इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम (कम ऋणात्मक/कभी धनात्मक)
✅ विद्युत ऋणात्मकता कम
• अधातुओं में
✅ आयनन एन्थैल्पी अधिक
✅ इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक
✅ विद्युत ऋणात्मकता अधिक
4) Oxides का स्वभाव
• धातुएँ आमतौर पर क्षारीय (basic) ऑक्साइड बनाती हैं।
उदाहरण: Na2O, CaO
• अधातुएँ आमतौर पर अम्लीय (acidic) ऑक्साइड बनाती हैं।
उदाहरण: CO2, SO3
क्या आप जानते हैं?
👉 कुछ तत्व (जैसे Al, Zn) के ऑक्साइड
उभयधर्मी (amphoteric) होते हैं, यानी वे कुछ स्थितियों में अम्ल और कुछ में क्षार जैसा व्यवहार कर सकते हैं।
Q.27: आवर्त सारणी का उपयोग करते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) उस तत्व का नाम बताइए, जिसके बाह्य उपकक्ष में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ख) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो।
(ग) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो।
(घ) उस वर्ग का नाम बताइए, जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
(क) उस तत्व का नाम बताइए, जिसके बाह्य उपकक्ष में पाँच इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(ख) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की हो।
(ग) उस तत्व का नाम बताइए, जिसकी प्रवृत्ति दो इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करने की हो।
(घ) उस वर्ग का नाम बताइए, जिसमें सामान्य ताप पर धातु, अधातु, द्रव और गैस उपस्थित हों।
उत्तर
✅ (क) फ्लुओरीन (F)✅ (ख) मैग्नीशियम (Mg)
✅ (ग) ऑक्सीजन (O)
✅ (घ) वर्ग 17 (हैलोजन समूह / Halogens)
व्याख्या – Step by Step
(क) बाह्य उपकक्ष में 5 इलेक्ट्रॉन वाला तत्व• बाह्य उपकक्ष में 5 इलेक्ट्रॉन का मतलब np5 विन्यास (हैलोजन)
F का विन्यास: 1s2 2s2 2p5
✅ इसलिए उत्तर: F (फ्लुओरीन)
(ख) दो इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति
• जो तत्व आसानी से 2e− छोड़कर स्थिर विन्यास बनाता है, वह सामान्यतः Group 2 का होता है।
Mg का विन्यास: 1s2 2s2 2p6 3s2
Mg → Mg2+ + 2e−
✅ इसलिए उत्तर: Mg (मैग्नीशियम)
(ग) दो इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की प्रवृत्ति
• जो तत्व 2 इलेक्ट्रॉन लेकर octet पूरा करता है, वह अक्सर Group 16 (chalcogens) का होता है।
O का विन्यास: 1s2 2s2 2p4
O + 2e− → O2−
✅ इसलिए उत्तर: O (ऑक्सीजन)
(घ) वह वर्ग जिसमें धातु, अधातु, द्रव और गैस मिलते हैं
वर्ग 17 (हैलोजन समूह) में:
• गैस: F2, Cl2
• द्रव: Br2
• ठोस: I2
और कुछ halogens कुछ स्थितियों/रूपों में धात्विक (metallic character) की ओर भी झुकाव दिखाते हैं (trend down the group)।
✅ इसलिए “सबसे उपयुक्त” उत्तर: वर्ग 17 (Halogens)
क्या आप जानते हैं?
👉 वर्ग 17 ऐसा rare group है जहाँ सामान्य ताप पर
गैस (F, Cl), द्रव (Br) और
ठोस (I) तीनों अवस्थाएँ मिल जाती हैं। यही इसे बहुत interesting बनाता है।
Q.28: प्रथम वर्ग के तत्वों के लिए क्रियाशीलता का बढ़ता क्रम Li < Na < K < Rb < Cs है, जबकि वर्ग 17 के तत्वों में क्रम F > Cl > Br > I है। इसकी व्याख्या कीजिए।
उत्तर
✅ Group 1 (Alkali metals) में नीचे जाने पर क्रियाशीलता
बढ़ती है, इसलिए:Li < Na < K < Rb < Cs
✅ Group 17 (Halogens) में नीचे जाने पर क्रियाशीलता घटती है, इसलिए:
F > Cl > Br > I
व्याख्या – Step by Step
(A) Group 1 में क्रियाशीलता नीचे जाने पर क्यों बढ़ती है?1. Group 1 के तत्व 1 संयोजी इलेक्ट्रॉन रखते हैं और आसानी से 1 इलेक्ट्रॉन त्यागकर M+ बनाते हैं।
2. क्रियाशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि इलेक्ट्रॉन निकालना कितना आसान है।
3. नीचे जाने पर:
👉 परमाणु आकार बढ़ता है
👉 shielding बढ़ता है
👉 बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर और ढीला बंधा होता है
✅ इसलिए Ionization enthalpy घटती है → इलेक्ट्रॉन निकालना आसान → reactivity बढ़ती है
इसीलिए: Li < Na < K < Rb < Cs
(B) Group 17 में क्रियाशीलता नीचे जाने पर क्यों घटती है?
1. Group 17 के तत्वों के पास 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं और ये 1 इलेक्ट्रॉन लेकर X− बनना चाहते हैं।
2. इनकी क्रियाशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे इलेक्ट्रॉन कितनी मजबूती से खींचते हैं (electron gain tendency / oxidising power)।
3. नीचे जाने पर:
👉 परमाणु आकार बढ़ता है
👉 आने वाला इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर जुड़ता है
👉 नाभिक का आकर्षण (effective pull) कम हो जाता है
✅ इसलिए इलेक्ट्रॉन लेना मुश्किल होता जाता है → reactivity घटती है
इसीलिए: F > Cl > Br > I
क्या आप जानते हैं?
👉 सरल trick:👉 Metals react by “electron देना” → नीचे जाएँ तो देना आसान → reactivity बढ़ती ✅
👉 Halogens react by “electron लेना” → नीचे जाएँ तो लेना मुश्किल → reactivity घटती ✅
Q.29: s–, p–, d– और f– ब्लॉक के तत्वों का सामान्य बाह्य (valence) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर
✅ s–block: ns1–2✅ p–block: ns2 np1–6
✅ d–block (transition): (n−1)d1–10 ns0–2
✅ f–block (inner transition): (n−2)f1–14 (n−1)d0–1 ns2
व्याख्या – Step by Step
1. Block का मतलब: आवर्त सारणी में वह भाग जहाँ कौन-सा उपकक्ष (subshell) भर रहा है।2. इसलिए:
• s–block में s उपकक्ष भरता है → ns1–2
• p–block में p उपकक्ष भरता है → ns2 np1–6
• d–block में (n−1)d भरता है → (n−1)d1–10 ns0–2
• f–block में (n−2)f भरता है → (n−2)f1–14 (n−1)d0–1 ns2
क्या आप जानते हैं?
👉 d–block में कई तत्वों में ns इलेक्ट्रॉन पहले निकल जाते हैं (oxidation में),
भले ही ns बाहर लिखा होता है। यही संक्रमण तत्वों की chemistry को रोचक बनाता है।
Q.30: तत्व, जिसका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्न है, का स्थान आवर्त सारणी में बताइए—
(i) ns2 np4, जिसके लिए n = 3 है।
(ii) (n−1)d2 ns2, जब n = 4 है।
(iii) (n−2)f7 (n−1)d1 ns2, जब n = 6 है।
(i) ns2 np4, जिसके लिए n = 3 है।
(ii) (n−1)d2 ns2, जब n = 4 है।
(iii) (n−2)f7 (n−1)d1 ns2, जब n = 6 है।
उत्तर
✅ (i) आवर्त 3, समूह 16,
p-ब्लॉक (तत्व: S – सल्फर)✅ (ii) आवर्त 4, समूह 4, d-ब्लॉक (तत्व: Ti – टाइटेनियम)
✅ (iii) आवर्त 6, f-ब्लॉक (लैंथेनाइड), समूह 3 के अंतर्गत (तत्व: Gd – गैडोलिनियम)
व्याख्या – Step by Step
(i) ns2 np4, n = 31. n = 3 ⇒ तीसरा आवर्त
2. विन्यास: 3s2 3p4 ⇒ p-subshell भर रहा है ⇒ p-ब्लॉक
3. p-ब्लॉक में समूह = 10 + (valence electrons)
valence electrons = 2 + 4 = 6 ⇒ समूह = 10 + 6 = 16
✅ स्थान: आवर्त 3, समूह 16, p-ब्लॉक
✅ तत्व: Sulfur (S)
(ii) (n−1)d2 ns2, n = 4
1. n = 4 ⇒ चौथा आवर्त
2. (n−1)d = 3d ⇒ विन्यास: 3d2 4s2 ⇒ d भर रहा है ⇒ d-ब्लॉक
3. d-ब्लॉक में समूह = (d electrons) + (s electrons)
= 2 + 2 = 4
✅ स्थान: आवर्त 4, समूह 4, d-ब्लॉक
✅ तत्व: Titanium (Ti)
(iii) (n−2)f7 (n−1)d1 ns2, n = 6
1. n = 6 ⇒ छठा आवर्त
2. (n−2)f = 4f ⇒ 4f7 ⇒ f भर रहा है ⇒ f-ब्लॉक (लैंथेनाइड)
3. साथ में (n−1)d = 5d और ns = 6s ⇒ विन्यास: 4f7 5d1 6s2
✅ स्थान: आवर्त 6, f-ब्लॉक (Lanthanides), समूह 3 के अंतर्गत
✅ तत्व: Gadolinium (Gd)
क्या आप जानते हैं?
👉 f-ब्लॉक के तत्वों को मुख्य तालिका के नीचे अलग दिखाया जाता है,
लेकिन वे वास्तव में 6th और 7th period का ही हिस्सा होते हैं
(lanthanoids/actinoids)।
Q.31: कुछ तत्वों की प्रथम (ΔiH1) व द्वितीय (ΔiH2) आयनन एन्थैल्पी (kJ mol−1) तथा इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (ΔegH) (kJ mol−1) निम्नलिखित है—
| तत्व | ΔiH1 | ΔiH2 | ΔegH |
|---|---|---|---|
| I | 520 | 7300 | −60 |
| II | 419 | 3051 | −48 |
| III | 1681 | 3374 | −328 |
| IV | 1008 | 1846 | −295 |
| V | 2372 | 5251 | +48 |
| VI | 738 | 1451 | −40 |
उत्तर
✅ (क) सबसे कम क्रियाशील धातु = V✅ (ख) सबसे अधिक क्रियाशील धातु = II
✅ (ग) सबसे अधिक क्रियाशील अधातु = III
✅ (घ) सबसे कम क्रियाशील अधातु = IV
✅ (ङ) ऐसी धातु जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड MX2 बनाती है = VI
✅ (च) ऐसी धातु जो मुख्यतः स्थायी सहसंयोजी हैलाइड MX बनाती है = I
व्याख्या – Step by Step
(क) सबसे कम क्रियाशील धातु = V• V की ΔiH1 बहुत अधिक (2372) है → इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत कठिन
• ΔegH धनात्मक (+48) है → इलेक्ट्रॉन लेना भी पसंद नहीं
👉 इसलिए यह लगभग inert है (निष्क्रिय प्रकृति)
✅ सबसे कम क्रियाशील “metal side” पर यही फिट बैठता है (वास्तव में noble gas जैसा)
(ख) सबसे अधिक क्रियाशील धातु = II
• धातु की क्रियाशीलता बढ़ती है जब ΔiH1 कम हो
• II की ΔiH1 सबसे कम 419 है
👉 इलेक्ट्रॉन सबसे आसानी से निकलेगा
✅ इसलिए II सबसे अधिक क्रियाशील धातु (alkali metal जैसा)
(ग) सबसे अधिक क्रियाशील अधातु = III
• अधातु/हैलोजन की क्रियाशीलता बढ़ती है जब ΔegH बहुत अधिक ऋणात्मक हो (electron लेना आसान)
• III का ΔegH = −328 (सबसे ज्यादा ऋणात्मक)
और ΔiH1 भी काफी अधिक 1681 (electron छोड़ना नहीं चाहता)
✅ इसलिए III सबसे अधिक क्रियाशील अधातु (halogen जैसा)
(घ) सबसे कम क्रियाशील अधातु = IV
• IV का ΔegH भी ऋणात्मक है लेकिन III से कम (−295)
• ΔiH1 भी III से कम 1008
👉 इसलिए यह non-metal तो है, पर III जितना strong oxidising नहीं
✅ इसलिए IV कम क्रियाशील अधातु (कम reactive halogen जैसा)
(ङ) ऐसी धातु जो स्थायी द्विअंगी हैलाइड MX2 बनाती है = VI
• MX2 आमतौर पर Group 2 (alkaline earth metals) बनाते हैं: M → M2+
• VI में ΔiH1 738 और ΔiH2 1451 है
👉 दोनों निकालना संभव है और ΔiH2 “बहुत ज्यादा jump” नहीं है
✅ इसलिए VI = mild reactive metal, Group 2 जैसा → MX2
(च) ऐसी धातु जो मुख्यतः स्थायी सहसंयोजी हैलाइड MX बनाती है = I
• I की ΔiH1 कम है (520) → 1 इलेक्ट्रॉन आसानी से दे सकता है
• लेकिन ΔiH2 बहुत ज्यादा (7300) → दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना लगभग असंभव
👉 यह स्पष्ट संकेत है कि यह Group 1 का तत्व है
और Group 1 में जो MX को अधिक covalent बनाता है वह Li होता है (छोटा आकार, ज्यादा polarising power)
✅ इसलिए I मुख्यतः सहसंयोजी MX बनाने वाली धातु के जैसा व्यवहार करेगा
क्या आप जानते हैं?
👉 ΔiH2 में बहुत बड़ा
jump आमतौर पर बताता है कि पहला इलेक्ट्रॉन निकलते ही ion
noble gas जैसा stable बन गया।इसी “jump trick” से ऐसे questions बहुत जल्दी solve हो जाते हैं।
Q.32: तत्वों के निम्नलिखित युग्मों के संयोजन से बने स्थायी द्विअंगी यौगिकों के सूत्रों की प्रगुणित कीजिए—
(क) लीथियम और ऑक्सीजन
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन
(ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन
(घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन
(ङ) फॉस्फोरस और फ्लुओरीन
(च) 71वाँ तत्व और फ्लुओरीन
(क) लीथियम और ऑक्सीजन
(ख) मैग्नीशियम और नाइट्रोजन
(ग) ऐलुमिनियम और आयोडीन
(घ) सिलिकॉन और ऑक्सीजन
(ङ) फॉस्फोरस और फ्लुओरीन
(च) 71वाँ तत्व और फ्लुओरीन
उत्तर
✅ (क) Li2O✅ (ख) Mg3N2
✅ (ग) AlI3
✅ (घ) SiO2
✅ (ङ) PF3 (या) PF5
✅ (च) LuF3
व्याख्या – Step by Step
(क) Li और O → Li2O• Li (Group 1) की संयोजकता = 1 (Li+)
• O (Group 16) की संयोजकता = 2 (O2−)
✅ क्रॉस करके: Li2O
(ख) Mg और N → Mg3N2
• Mg (Group 2) की संयोजकता = 2 (Mg2+)
• N (Group 15) की संयोजकता = 3 (N3−)
✅ क्रॉस करके: Mg3N2
(ग) Al और I → AlI3
• Al (Group 13) की संयोजकता = 3 (Al3+)
• I (Group 17) की संयोजकता = 1 (I−)
✅ क्रॉस करके: AlI3
(घ) Si और O → SiO2
• Si (Group 14) की संयोजकता = 4
• O (Group 16) की संयोजकता = 2
✅ क्रॉस करके: SiO2
(ङ) P और F → PF3 या PF5
• P (Group 15) की संयोजकता 3 या 5 हो सकती है
• F (Group 17) की संयोजकता = 1
✅ इसलिए: PF3 तथा PF5 दोनों संभव (स्थायी) हैं।
(च) 71वाँ तत्व और F → LuF3
• Z = 71 तत्व = Lu (ल्यूटीशियम)
• Lu की सामान्य संयोजकता = 3 (Lu3+)
• F की संयोजकता = 1 (F−)
✅ क्रॉस करके: LuF3
क्या आप जानते हैं?
👉 ऐसे प्रश्नों में fastest तरीका यही है:समूह (Group) से संयोजकता निकालो → आवेश लिखो → क्रॉस विधि से सूत्र बनाओ दो।
Q.33: आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त निम्नलिखित में से किसको व्यक्त करता है?
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(घ) दिगंशीय (Azimuthal) क्वाण्टम संख्या
(क) परमाणु संख्या
(ख) परमाणु द्रव्यमान
(ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(घ) दिगंशीय (Azimuthal) क्वाण्टम संख्या
उत्तर
✅ (ग) मुख्य क्वाण्टम संख्या
(Principal Quantum Number, n)
व्याख्या – Step by Step
1. आधुनिक आवर्त सारणी में हर आवर्त (period) एक नई इलेक्ट्रॉनिक कक्षा/शेल
(shell) के भरने से शुरू होता है।2. किसी शेल की पहचान मुख्य क्वाण्टम संख्या (n) से होती है।
3. इसलिए जिस आवर्त में तत्व है, वह बताता है कि उसके परमाणु में सबसे बाहरी भरी हुई कक्षा का n क्या है।
उदाहरण (Example):
• 2nd period के तत्वों में बाहरी शेल n = 2
• 3rd period के तत्वों में बाहरी शेल n = 3
✅ इसी कारण “आवर्त” वास्तव में Principal Quantum Number (n) को व्यक्त करता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 किसी भी तत्व का period जानने का shortcut:✅ उसके electron configuration में सबसे बड़ा n देखो — वही उसका period number होता है।
Q.34: आधुनिक आवर्त सारणी के लिए, निम्नलिखित के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है?
(क) p–ब्लॉक में 6 स्तम्भ हैं, क्योंकि p–उपकक्ष के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ख) d–ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं, क्योंकि d–उपकक्ष के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तम्भों की संख्या उस उपकक्ष में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(घ) तत्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास को भरते समय अंतिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उपकक्ष उसके द्विगंशीय (azimuthal) क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
(क) p–ब्लॉक में 6 स्तम्भ हैं, क्योंकि p–उपकक्ष के सभी कक्षक भरने के लिए अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ख) d–ब्लॉक में 8 स्तम्भ हैं, क्योंकि d–उपकक्ष के कक्षक भरने के लिए अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
(ग) प्रत्येक ब्लॉक में स्तम्भों की संख्या उस उपकक्ष में भरे जा सकने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है।
(घ) तत्वों के इलेक्ट्रॉन विन्यास को भरते समय अंतिम भरे जाने वाले इलेक्ट्रॉन का उपकक्ष उसके द्विगंशीय (azimuthal) क्वाण्टम संख्या को प्रदर्शित करता है।
उत्तर
✅ (ख) कथन सही नहीं है।
व्याख्या – Step by Step
1. p-उपकक्ष (p-subshell) में अधिकतम इलेक्ट्रॉन =
6 (p में 3 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन)✅ इसलिए (क) सही है और p-ब्लॉक में 6 स्तम्भ होते हैं।
2. d-उपकक्ष (d-subshell) में अधिकतम इलेक्ट्रॉन = 10 (d में 5 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन)
👉 इसलिए d-ब्लॉक में 8 नहीं, 10 स्तम्भ होने चाहिए।
✅ इसी कारण (ख) गलत है।
3. (ग) भी सही है क्योंकि block के स्तम्भों की संख्या उसी subshell की capacity के बराबर होती है:
• s → 2
• p → 6
• d → 10
• f → 14
4. (घ) भी सही है क्योंकि अंतिम इलेक्ट्रॉन जिस subshell (s/p/d/f) में जाता है, वही उसकी azimuthal quantum number (ℓ) को बताता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 d-ब्लॉक के 10 स्तम्भ इसलिए होते हैं क्योंकि d-subshell में
5 orbitals होते हैं और हर orbital में
2 electrons आ सकते हैं:5 × 2 = 10 ✅
Q.35: ऐसा कारक, जो संयोजकता (valence) इलेक्ट्रॉनों को प्रभावित करता है, उस तत्व की रासायनिक प्रवृत्ति भी प्रभावित करता है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारक संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता?
(क) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ख) नाभिकीय आवेश (Z)
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान
(घ) क्रोड (core) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(क) संयोजक मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ख) नाभिकीय आवेश (Z)
(ग) नाभिकीय द्रव्यमान
(घ) क्रोड (core) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उत्तर
✅ (ग) नाभिकीय द्रव्यमान — यह संयोजकता कोश को प्रभावित नहीं करता।
व्याख्या – Step by Step
1. संयोजकता कोश (valence shell) का संबंध इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था और नाभिक के आकर्षण से होता है।2. इसलिए ये कारक संयोजकता कोश पर असर डालते हैं:
• (n): कौन-सी कोश बाहरी है, यह तय करता है।
• (Z): नाभिक का आकर्षण बढ़ाता/घटाता है (Zeff पर असर)।
• आन्तरिक इलेक्ट्रॉन : shielding effect बढ़ाते हैं, जिससे valence electrons पर नाभिक का प्रभाव बदलता है।
3. लेकिन नाभिकीय द्रव्यमान (mass) बदलने से इलेक्ट्रॉनिक विन्यास/valence shell की व्यवस्था नहीं बदलती।
✅ इसलिए यह valence shell को प्रभावित नहीं करता।
क्या आप जानते हैं?
👉 इसी वजह से समस्थानिकों (isotopes) के रासायनिक गुण लगभग समान रहते हैं,
क्योंकि उनका Z और electronic configuration वही रहता है,
सिर्फ द्रव्यमान बदलता है।
Q.36: समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज F−, Ne और Na+ का आकार इनमें से किससे प्रभावित होता है?
(क) नाभिकीय आवेश (Z)
(ख) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(घ) ऊपर दिए गए कारणों में से कोई भी नहीं, क्योंकि उनका आकार समान है।
(क) नाभिकीय आवेश (Z)
(ख) मुख्य क्वाण्टम संख्या (n)
(ग) बाह्य कक्षकों में इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन अन्योन्य क्रिया
(घ) ऊपर दिए गए कारणों में से कोई भी नहीं, क्योंकि उनका आकार समान है।
उत्तर
✅ (क) नाभिकीय आवेश (Z)
व्याख्या – Step by Step
1. F−, Ne और Na+ — तीनों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या
10 है, इसलिए ये समइलेक्ट्रॉनिक हैं।2. समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज में n और electron–electron repulsion लगभग समान स्तर पर होते हैं, इसलिए मुख्य फर्क Z (नाभिकीय आवेश) से आता है।
3. जैसे-जैसे Z बढ़ता है, नाभिक का खिंचाव बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन मेघ और पास खिंच जाता है।
✅ इसलिए त्रिज्या घटती जाती है।
नाभिकीय आवेश (Z):
• F का Z = 9 → F−
• Ne का Z = 10
• Na का Z = 11 → Na+
✅ आकार (त्रिज्या) का क्रम:
F− > Ne > Na+
(या घटते क्रम में: F− > Ne > Na+)
क्या आप जानते हैं?
👉 समइलेक्ट्रॉनिक series में quick rule याद रखो:✅ Z ज्यादा → radius छोटा
इसी rule से ऐसे questions 5 सेकंड में हो जाते हैं।
Q.37: आयनन एन्थैल्पी के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
(क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन की आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(ख) उत्कृष्ट गैस (noble gas) के विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने पर आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करती है।
(घ) कम n मान वाले कक्षकों की तुलना में अधिक n मान वाले कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
(क) प्रत्येक उत्तरोत्तर इलेक्ट्रॉन की आयनन एन्थैल्पी बढ़ती है।
(ख) उत्कृष्ट गैस (noble gas) के विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने पर आयनन एन्थैल्पी का मान अत्यधिक होता है।
(ग) आयनन एन्थैल्पी के मान में अत्यधिक तीव्र वृद्धि संयोजकता इलेक्ट्रॉनों के विलोपन को व्यक्त करती है।
(घ) कम n मान वाले कक्षकों की तुलना में अधिक n मान वाले कक्षकों से इलेक्ट्रॉनों को आसानी से निकाला जा सकता है।
उत्तर
✅ कोई भी कथन गलत नहीं है।(दिए गए चारों कथन आयनन एन्थैल्पी के बारे में सही हैं।)
व्याख्या – Step by Step
1. (क) सही हैहर बार इलेक्ट्रॉन हटाने के बाद आयन अधिक धनात्मक हो जाता है, इसलिए अगले इलेक्ट्रॉन को हटाना और कठिन होता है।
2. (ख) सही है
निष्क्रिय गैस जैसा विन्यास बहुत स्थिर होता है, इसलिए वहाँ से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा चाहिए।
3. (ग) सही है
जब संयोजकता (valence) इलेक्ट्रॉन हट चुके होते हैं और अब आन्तरिक कोश से इलेक्ट्रॉन निकालना पड़ता है, तब आयनन एन्थैल्पी में अचानक बहुत बड़ा jump आता है।
4. (घ) भी सही है
अधिक n (बाहरी) कक्ष में इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होता है और shielding भी ज्यादा होती है, इसलिए उसे निकालना आसान होता है।
✅ इसलिए “गलत” कथन यहाँ कोई नहीं है।
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर question में “सबसे बड़ा jump” पूछा जाए,
तो वह अक्सर बताता है कि अब इलेक्ट्रॉन valence shell नहीं,
core shell से निकाला जा रहा है।
Q.38: B, Al, Mg, K तत्वों के लिए धात्विक (metallic) अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा है?
(क) B > Al > Mg > K
(ख) Al > Mg > B > K
(ग) Mg > Al > K > B
(घ) K > Mg > Al > B
(क) B > Al > Mg > K
(ख) Al > Mg > B > K
(ग) Mg > Al > K > B
(घ) K > Mg > Al > B
उत्तर
✅ (घ) K > Mg > Al > B
व्याख्या – Step by Step
1. धात्विक अभिलक्षण का मतलब है:👉 इलेक्ट्रॉन आसानी से देना (electropositive nature), यानी reactivity as metal
2. धात्विक गुण सामान्यतः:
• Group में नीचे जाने पर बढ़ता है।
• Period में बाएँ से दाएँ जाने पर घटता है।
3. अब इन तत्वों को देखें:
• K (Group 1, Period 4) → सबसे ज्यादा metallic (सबसे आसानी से e⁻ देगा)
• Mg (Group 2, Period 3) → K से कम, लेकिन Al से ज्यादा metallic
• Al (Group 13, Period 3) → Mg से कम metallic (right side)
• B (Group 13, Period 2) → non-metal/metalloid nature, सबसे कम metallic
✅ इसलिए सही क्रम: K > Mg > Al > B
क्या आप जानते हैं?
👉 Metallic character का quick test:✅ Ionization enthalpy कम → metal nature ज्यादा.
इसीलिए K सबसे ज्यादा metallic होता है।
Q.39: तत्वों B, C, N, F और Si के लिए अधातु (non-metallic) अभिलक्षण का सही क्रम इनमें से कौन-सा है?
(क) B > C > Si > N > F
(ख) Si > C > B > N > F
(ग) F > N > C > B > Si
(घ) F > N > C > Si > B
(क) B > C > Si > N > F
(ख) Si > C > B > N > F
(ग) F > N > C > B > Si
(घ) F > N > C > Si > B
उत्तर
✅ (ग) F > N > C > B > Si
व्याख्या – Step by Step
1. अधातु अभिलक्षण (non-metallic character) का मतलब:
इलेक्ट्रॉन खींचने/ग्रहण करने की प्रवृत्ति,
यानी electronegativity/oxidising tendency ज़्यादा।2. यह सामान्यतः:
• एक आवर्त में बाएँ से दाएँ बढ़ता है।
• एक वर्ग में ऊपर से नीचे घटता है।
3. अब देखें:
• F सबसे दाईं ओर और सबसे अधिक electronegative → सबसे ज्यादा non-metallic
• N C से दाईं ओर → N > C
• B C के बाएँ → C > B
• Si Group 14 में C के नीचे → non-metallic कम हो जाता है → C > Si
✅ इसलिए सही क्रम: F > N > C > B > Si
क्या आप जानते हैं?
👉 Si “metalloid” है,
इसलिए यह C की तुलना में कम non-metallic होता है,
लेकिन कई compounds (जैसे SiO2) में यह non-metal जैसा behavior भी दिखाता है।
Q.40: तत्वों F, Cl, O और N तथा ऑक्सीकारक (oxidising) गुणधर्मों के आधार पर उनकी रासायनिक अभिक्रियाशीलता का सही क्रम क्या है?
(क) F > Cl > O > N
(ख) F > O > Cl > N
(ग) Cl > F > O > N
(घ) O > F > N > Cl
(क) F > Cl > O > N
(ख) F > O > Cl > N
(ग) Cl > F > O > N
(घ) O > F > N > Cl
उत्तर
✅ (ख) F > O > Cl > N
व्याख्या – Step by Step
1. ऑक्सीकारक (oxidising) शक्ति का मतलब:
दूसरे से इलेक्ट्रॉन छीनने/लेने की क्षमता।2. सामान्य trend:
• Period में बाएँ से दाएँ oxidising power बढ़ती है।
• Group में नीचे जाने पर घटती है।
3. इसलिए:
• F सबसे प्रबल oxidising agent (सबसे ज्यादा electronegative)
• O बहुत strong oxidiser है और Cl से generally ज्यादा electronegative होने के कारण O > Cl
• Cl halogen है, oxidising nature strong, लेकिन F और O से कम
• N comparatively कम oxidising
✅ इसलिए सही क्रम: F > O > Cl > N
क्या आप जानते हैं?
👉 Halogens में F सबसे powerful oxidising agent होता है,
लेकिन aqueous medium में उसकी chemistry sometimes अलग behave कर सकती है
(बहुत high reactivity की वजह से).
