Class 11 Chemistry Chapter 7 NCERT Solutions – Equilibrium (साम्यावस्था)
📘 यहां आपको Class 11 Chemistry Chapter 7 Equilibrium NCERT Solutions (English + Hindi Medium) में NCERT के सभी प्रश्न-उत्तर और Step-by-Step Explanation मिलेंगे। इस chapter में Equilibrium constant (Kc, Kp), Reaction quotient (Q), Le Chatelier’s Principle, Ionic equilibrium, pH, pKa, Buffer solution, Solubility product (Ksp), Acid–Base और Common ion effect जैसे topics को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपकी Board परीक्षा के साथ JEE/NEET तैयारी भी मजबूत हो। ✅
👉 किसी भी question को जल्दी ढूंढने के लिए नीचे दिए गए Search Box में Q. नंबर (जैसे Q.5, Q.18) या question का कोई keyword (जैसे equilibrium constant, Kc, Kp, Le Chatelier, pH, buffer, Ksp) टाइप करें। ✅
- Example: Search में लिखें: Q.12 या Kc या pH
- Tip: 2–3 शब्द का keyword लिखेंगे तो result और fast मिलेगा।
- Mobile: Browser में Find in page (Chrome: Menu → Find in page) भी use कर सकते हैं।
(क) वाष्प-दाब परिवर्तन का प्रारम्भिक परिणाम क्या होगा?
(ख) प्रारम्भ में वाष्पन तथा संघनन की दर कैसे बदलेगी?
(ग) जब साम्य पुनः अंतिम रूप से स्थापित हो जाएगा तब अंतिम वाष्प-दाब क्या होगा?
✅ (ख) वाष्पन की दर लगभग समान रहेगी, पर संघनन की दर प्रारम्भ में घट जाएगी।
✅ (ग) नया साम्य बनने पर अंतिम वाष्प-दाब पहले जितना ही रहेगा।
आयतन अचानक बढ़ने पर वही वाष्प (लगभग वही mol) बड़े आयतन में फैल जाती है, इसलिए उसका दाब तुरंत कम हो जाता है।
(ख) वाष्पन और संघनन की दर का क्या होगा?
• वाष्पन (evaporation) मुख्यतः द्रव की सतह और ताप पर निर्भर करता है, इसलिए नियत ताप पर इसकी दर लगभग स्थिर रहती है।
• संघनन (condensation) वाष्प के कणों की संख्या/दाब पर निर्भर करता है। दाब घटते ही सतह पर टकराने वाले कण कम हो जाते हैं, इसलिए संघनन की दर घट जाती है।
👉 इसलिए शुरू में वाष्पन > संघनन हो जाएगा और अधिक वाष्प बनेगी।
(ग) अंतिम वाष्प-दाब वही क्यों रहता है?
कुछ समय बाद और वाष्प बनकर दाब बढ़ाती है, जब तक कि फिर से:
✅ वाष्पन की दर = संघनन की दर
और नियत ताप पर द्रव का संतृप्त वाष्प-दाब (saturated vapour pressure) एक निश्चित मान होता है, जो केवल ताप पर निर्भर करता है।
✅ इसलिए अंतिम वाष्प-दाब पहले जैसा ही हो जाता है।
✅ नियत ताप पर यह केवल ताप पर निर्भर करता है, पात्र के आयतन पर नहीं।
बस equilibrium तक पहुँचने में समय लग सकता है।
[SO2] = 0.60 M, [O2] = 0.82 M, [SO3] = 1.90 M
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
\( K_c=\frac{[SO_3]^2}{[SO_2]^2\,[O_2]} \)
Step 2: मान रखकर गणना करें
👉 [SO3]2 = (1.90)2 = 3.61
👉 [SO2]2 = (0.60)2 = 0.36
👉 नीचे = 0.36 × 0.82 = 0.2952
अब,
Kc = 3.61 / 0.2952 = 12.229…
✅ इसलिए Kc ≈ 12.23 L mol−1
इस reaction में Δn = (2) − (2+1) = −1, इसलिए Kc की unit L mol−1 आती है।
I2(g) ⇌ 2I(g)
साम्य के लिए Kp की गणना कीजिए।
कुल दाब P = 105 Pa
👉 I का प्रतिशत = 40% ⇒ PI = (40/100) × 105 = 0.40 × 105 Pa
👉 I2 का प्रतिशत = 60% ⇒ PI2 = (60/100) × 105 = 0.60 × 105 Pa
Step 2: Kp का सूत्र लिखें
I2(g) ⇌ 2I(g)
\( K_p=\frac{(P_I)^2}{P_{I_2}} \)
Step 3: मान रखकर गणना करें
\( =\frac{0.16\times10^{10}}{0.60\times10^5} \)
\( =\left(\frac{0.16}{0.60}\right)\times10^5 \)
\( =0.2667\times10^5
=2.67\times10^4\ \text{Pa} \)
✅ इसलिए Kp ≈ 2.67 × 104 Pa
✅ Pi = xi × P(total)
इसलिए ऐसे सवाल super fast हो जाते हैं।
(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g)
(ii) 2Cu(NO3)2(s) ⇌ 2CuO(s) + 4NO2(g) + O2(g)
(iii) CH3COOC2H5(aq) + H2O(l) ⇌ CH3COOH(aq) + C2H5OH(aq)
(iv) Fe3+(aq) + 3OH−(aq) ⇌ Fe(OH)3(s)
(v) I2(s) + 5F2(g) ⇌ 2IF5(g)
👉 Kc लिखते समय ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) को नहीं लिखते, क्योंकि उनकी activity ≈ 1 मानी जाती है।
और गैस/aq species की सांद्रता को स्टोइकोमेट्रिक घातांक में लिखते हैं।
(i) गैसों के लिए सीधे सांद्रता लिख दी।
(ii) Cu(NO3)2(s) और CuO(s) ठोस हैं, इसलिए हट गए; बचे गैसों NO2 और O2।
(iii) H2O(l) शुद्ध द्रव है, इसलिए हट गया।
(iv) Fe(OH)3(s) solid है, इसलिए numerator में नहीं आएगा; ions denominator में आएँगे।
(v) I2(s) solid है, इसलिए हट गया; F2 और IF5 gases हैं।
❌ ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) को लिख देना
✅ याद रखो: (s) और (l) = 1 (साम्य व्यंजक में नहीं आते)।
(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g); Kp = 1.8 × 10−2 at 500 K
(ii) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g); Kp = 167 at 1073 K
(मानिए R = 0.0831 L bar mol−1 K−1)
✅ (ii) Kc = 1.87 (लगभग)
उत्पादों के गैस मोल = 2 + 1 = 3
अभिकारकों के गैस मोल = 2
Δng = 3 − 2 = 1
Step 2: Relation लगाएँ
\( \Delta n = 1 \Rightarrow K_p = K_c(RT) \)
\( K_c=\frac{K_p}{RT} \)
\( =\frac{1.8\times10^{-2}}{41.55} \)
\( =4.33\times10^{-4} \)
Products gas = 1 (CO2)
Reactants gas = 0 (solid है)
Δng = 1 − 0 = 1
Step 2: Relation लगाएँ
\( \Delta n = 1 \Rightarrow K_c=\frac{K_p}{RT} \)
\( =\frac{167}{89.1963} \)
\( =1.873\approx1.87 \)
• अगर Δng = 0, तो ✅ Kp = Kc
• अगर Δng ≠ 0, तो ✅ (RT)Δn factor जरूर लगेगा।
\( =\frac{1}{6.3\times10^{14}} \)
\( =1.59\times10^{-15} \)
👉 किसी भी साम्य अभिक्रिया को उल्टा करने पर साम्य स्थिरांक का मान उल्टा (reciprocal) हो जाता है:
Kc(forward) = 6.3 × 1014
Step 2: प्रतिलोम के लिए Kc निकालिए
\( =\left(\frac{1}{6.3}\right)\times10^{-14} \)
\( \approx0.1587\times10^{-14} \)
\( =1.587\times10^{-15}\approx1.59\times10^{-15} \)
इसलिए Reverse K बहुत छोटा (जैसे 10−15) आता है।
✅ इसलिए K के व्यंजक में उन्हें शामिल नहीं करते, क्योंकि उनका मान बदलता नहीं है।
👉 K = उत्पादों की सांद्रता / अभिकारकों की सांद्रता
लेकिन शुद्ध ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) की activity = 1 मानी जाती है, इसलिए वे K के व्यंजक में नहीं आते।
अतः सामान्यतः शुद्ध ठोस एवं शुद्ध द्रव को साम्य-स्थिरांक के व्यंजक में नहीं लिखा जाता।
Step 1: शुद्ध ठोस/द्रव की सांद्रता स्थिर क्यों रहती है?
शुद्ध पदार्थों में:
👉 घनत्व (density) निश्चित होता है
👉 मोलर द्रव्यमान (molar mass) निश्चित होता है
इसलिए उनकी मोलर सांद्रता स्थिर रहती है।
मोलरता = मोल / आयतन (L)
और, मोल = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान
लेकिन, द्रव्यमान / आयतन = घनत्व
अतः मोलरता = घनत्व / मोलर द्रव्यमान
Step 2: K में क्यों नहीं लिखते?
👉 K के व्यंजक में केवल वही species लिखते हैं जिनकी प्रभावी सांद्रता बदल सकती है:
✅ गैसें (g) और विलयन में आयन/अणु (aq)
❌ शुद्ध ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l)
क्योंकि उनकी activity = 1 होती है, और 1 से गुणा/भाग करने पर मान नहीं बदलता।
❌ K का व्यंजक लिखते समय (s) और (l) को भी शामिल कर देना
✅ याद रखो: (s) और (l) की activity = 1 होती है, इसलिए K में नहीं आते।
2N2(g) + O2(g) ⇌ 2N2O(g)
होती है। यदि 10 L पात्र में प्रारम्भ में 0.482 mol N2 और 0.933 mol O2 लिए जाएँ, तथा उस ताप पर साम्य स्थापित हो जहाँ Kc = 2.0 × 10−37 है, तो साम्य मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए।
✅ [O2]eq ≈ 0.0933 mol L−1
✅ [N2O]eq = 6.6 × 10−21 mol L−1
(मोल में: N2 ≈ 0.482, O2 ≈ 0.933, N2O ≈ 6.6 × 10−20 mol)
N2: 0.482 − x
O2: 0.933 − x/2
N2O: x
आयतन = 10 L, इसलिए
[N2] ≈ 0.482/10 = 0.0482
[O2] ≈ 0.933/10 = 0.0933
अब
\( [N_2O]=\sqrt{(2.0\times10^{-37})(0.0482)^2(0.0933)} \)
\( =6.6\times10^{-21}\ \text{mol L}^{-1} \)
\( x=10[N_2O]=6.6\times10^{-20}\ \text{mol} \)
इसीलिए ऐसे सवालों में x को नगण्य (approximation) मानकर गणना बहुत आसान हो जाती है।
2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)
यदि स्थिर ताप पर बंद पात्र में प्रारम्भ में 0.087 mol NO और 0.0437 mol Br2 मिलाए जाएँ, तथा साम्य पर 0.0518 mol NOBr प्राप्त हो, तो साम्य पर NO और Br2 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
✅ साम्य पर Br2 = 0.0178 mol
👉 2 mol NO खर्च होता है
👉 1 mol Br2 खर्च होता है
अर्थात
👉 NOBr : NO = 1 : 1
👉 NOBr : Br2 = 2 : 1
⇒ Br2 ग्रहण किया हुआ = NOBr/2
Step 2: NOBr के आधार पर क्रियाकारक की खपत
दिया है: NOBr बनाया = 0.0518 mol
तो,
NO ग्रहण किया हुआ = 0.0518 mol
Br2 ग्रहण किया हुआ =
Step 3: साम्य पर बची हुई मात्रा
\( Br_{2\,(eq)}=0.0437-0.0259=0.0178\ \text{mol} \)
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
के लिए 450 K पर Kp = 2.0 × 1010 bar−1 है। इस ताप पर Kc का मान ज्ञात कीजिए।
Δng = (गैसीय उत्पाद मोल) − (गैसीय क्रियाकारक मोल)
\( K_c=K_p(RT)^{-\Delta n_g} \)
\( \Delta n_g=-1 \Rightarrow K_c=K_p(RT)^1=K_p(RT) \)
\( =74.79\times10^{10} \)
\( =7.479\times10^{11} \)
\( \therefore\ K_c\approx7.48\times10^{11}\ \text{L mol}^{-1} \)
2HI(g) ⇌ H2(g) + I2(g)
के लिए Kp का मान ज्ञात कीजिए।
👉 प्रारम्भिक दाब: PHI = 0.2 atm, PH2 = 0, PI2 = 0
👉 साम्य पर: PHI = 0.04 atm
तो HI के दाब में कमी:
2HI → H2 + I2
2 mol HI घटने पर 1 mol H2 और 1 mol I2 बनते हैं।
अतः,
\( K_p=\frac{(0.08)(0.08)}{(0.04)^2} \)
\( K_p=\frac{0.0064}{0.0016} \)
\( K_p=4.0 \)
इसलिए कई बार दाब आधारित डेटा से K निकालना बहुत आसान हो जाता है।
N2(g) + 3H2(g) ⇌ 2NH3(g)
के लिए Kc = 1.7 × 102 है। क्या मिश्रण साम्य में है? यदि नहीं, तो नेट अभिक्रिया की दिशा क्या होगी?
✅ Qc = 2.38 × 103
और Qc > Kc (2.38 × 103 > 1.7 × 102)
इसलिए नेट अभिक्रिया पश्च (reverse) दिशा में होगी (अर्थात NH3 टूटकर N2 और H2 बनेगा)।
\( [H_2]=\frac{1.92}{20}=0.096\ \text{M} \)
\( [NH_3]=\frac{8.13}{20}=0.4065\ \text{M} \)
\( Q_c=\frac{(0.4065)^2}{(0.0785)(0.096)^3} \)
\( (0.096)^3=0.000884736 \)
\( (0.0785)(0.000884736)=0.000069451776 \)
\( Q_c=\frac{0.16524225}{0.000069451776}\approx2.38\times10^3 \)
Qc = 2.38 × 103, Kc = 1.7 × 102
Qc > Kc
इसका अर्थ: उत्पाद (NH3) अपेक्षाकृत अधिक हैं, इसलिए सिस्टम उन्हें कम करने के लिए विपरीत दिशा में शिफ्ट करेगा।
👉 Q < K ⇒ आगे की दिशा
👉 Q > K ⇒ विपरीत दिशा
👉 Q = K ⇒ साम्य पर
📌 Kc में:
👉 अंश (Numerator) = उत्पाद (products)
👉 भाजक (Denominator) = अभिकारक (reactants)
👉 प्रत्येक का घातांक = समीकरण में उसका स्टोइकोमेट्रिक गुणांक
दिए गए Kc से पढ़ें:
👉 उत्पाद: NH3 का गुणांक 4, O2 का गुणांक 5
👉 अभिकारक: NO का गुणांक 4, H2O का गुणांक 6
इसलिए अभिक्रिया:
👉 N: 4 = 4
👉 H: 12 = 12
👉 O: 4 + 6 = 10, RHS = 10 ✅
इसलिए K और स्टोइकोमेट्रिक गुणांक का सीधा, बहुत महत्वपूर्ण संबंध है।
📌 Kc में:
👉 अंश (Numerator) = उत्पाद (products)
👉 भाजक (Denominator) = अभिकारक (reactants)
👉 प्रत्येक का घातांक = समीकरण में उसका स्टोइकोमेट्रिक गुणांक
दिए गए Kc से पढ़ें:
👉 उत्पाद: NH3 का गुणांक 4, O2 का गुणांक 5
👉 अभिकारक: NO का गुणांक 4, H2O का गुणांक 6
इसलिए अभिक्रिया:
👉 N: 4 = 4
👉 H: 12 = 12
👉 O: 4 + 6 = 10, RHS = 10 ✅
इसलिए K और स्टोइकोमेट्रिक गुणांक का सीधा, बहुत महत्वपूर्ण संबंध है।
H2O(g) + CO(g) ⇌ H2(g) + CO2(g)
अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
👉 H2O = 1 mol
👉 CO = 1 mol
👉 H2 = 0, CO2 = 0
Step 2: 40% H2O अभिक्रिया कर चुका है
अभिक्रियित H2O = 1 mol का 40% = 0.40 mol
स्टॉइकोमेट्री 1:1:1:1 है, इसलिए:
👉 ग्रहण किया हुआ CO = 0.40 mol
👉 H2 की प्राप्त मात्रा = 0.40 mol
👉 CO2 की प्राप्त मात्रा = 0.40 mol
Step 3: साम्य पर मोल
👉 H2O = 1 − 0.40 = 0.60 mol
👉 CO = 1 − 0.40 = 0.60 mol
👉 H2 = 0.40 mol
👉 CO2 = 0.40 mol
Step 4: साम्य सांद्रता (Volume = 10 L)
\( [CO]=\frac{0.60}{10}=0.06\ \text{M} \)
\( [H_2]=\frac{0.40}{10}=0.04\ \text{M} \)
\( [CO_2]=\frac{0.40}{10}=0.04\ \text{M} \)
\( K_c =\frac{(0.04)(0.04)}{(0.06)(0.06)} \)
\( K_c =\frac{0.0016}{0.0036} \)
\( K_c =0.444 \)
H2(g) + I2(g) ⇌ 2HI(g)
के लिए Kc = 54.8 है। यदि शुरू में केवल HI(g) लिया गया हो और साम्य पर [HI] = 0.5 mol L−1 हो, तो साम्य पर [H2] और [I2] क्या होंगे?
दी गई अभिक्रिया:
H2 + I2 ⇌ 2HI, Kc = 54.8
लेकिन यहाँ शुरुआत केवल HI से है, इसलिए नेट दिशा उल्टी होगी:
2HI ⇌ H2 + I2
उल्टी अभिक्रिया के लिए:
Step 2: मान लेते हैं
साम्य पर:
[H2] = [I2] = x
(क्योंकि 2HI → H2 + I2 में H2 और I2 बराबर बनते हैं)
दिया है:
[HI] = 0.5 mol L−1
उल्टी अभिक्रिया के लिए:
\( 1.82\times10^{-2}=\frac{x^2}{(0.5)^2} \)
\( x^2=(1.82\times10^{-2})(0.25) \)
\( x^2=4.55\times10^{-3} \)
\( x=\sqrt{4.55\times10^{-3}}=0.06745\approx0.068 \)
[H2] = [I2] = 0.068 mol L−1
2ICl(g) ⇌ I2(g) + Cl2(g), Kc = 0.14
के लिए प्रत्येक की साम्य पर सान्द्रताएँ क्या होंगी?
✅ [ICl]eq = 0.446 M
2ICl ⇌ I2 + Cl2
प्रारम्भिक:
[ICl] = 0.78, [I2] = 0, [Cl2] = 0
मान लें साम्य पर:
[I2] = [Cl2] = x
तो 2ICl ग्रहण किया होगा 2x:
[ICl]eq = 0.78 − 2x
Step 2: Kc का व्यंजक
\( \frac{x}{0.78-2x}=\sqrt{0.14}=0.374 \)
\( x=0.374(0.78-2x) \)
\( x=0.292-0.748x \)
\( 1.748x=0.292 \)
\( x=0.167 \)
Step 3: साम्य सांद्रताएँ
[I2] = [Cl2] = x = 0.167 M
[ICl] = 0.78 − 2x = 0.78 − 0.334 = 0.446 M
C2H6(g) ⇌ C2H4(g) + H2(g)
प्रारम्भिक:
PC2H6 = 4.0, PC2H4 = 0, PH2 = 0
मान लें साम्य पर C2H4 और H2 का दाब p atm बनता है।
तो:
PC2H6 = 4.0 - p,; PC2H4 = p,; PH2 = p
Step 2: Kp का व्यंजक
\( p^2=0.04(4.0-p) \)
\( p^2=0.16-0.04p \)
\( p^2+0.04p-0.16=0 \)
\( =\frac{-0.04\pm\sqrt{0.6416}}{2} \)
\( =\frac{-0.04\pm0.801}{2} \)
p = 0.761/2 ≈ 0.38 atm
(राउंडिंग के साथ अक्सर p ≈ 0.40 atm लिया जाता है)
Step 4: C2H6 का साम्य दाब
\( \approx4.0-0.40 \)
\( =3.60\ \text{atm} \)
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) ⇌ CH3COOC2H5(l) + H2O(l)
(i) इस अभिक्रिया के लिए सांद्रता अनुपात (reaction quotient/Qc) लिखिए।
(ii) 293 K पर प्रारम्भ में 1.00 mol एसीटिक अम्ल और 0.18 mol एथेनॉल लिए गए। साम्य पर 0.171 mol एथिल एसीटेट मिला। Kc ज्ञात कीजिए।
(iii) 293 K पर 1.0 mol एसीटिक अम्ल और 0.5 mol एथेनॉल से शुरू करके, कुछ समय बाद 0.214 mol एथिल एसीटेट पाया गया। क्या साम्य स्थापित हो गया है?
✅ (iii) Qc = 0.204
और Qc ≠ Kc (साथ ही Qc < Kc), इसलिए साम्य स्थापित नहीं हुआ है; नेट अभिक्रिया अग्र (forward) दिशा में जाएगी।
यहाँ सभी द्रव अवस्था में दी गई हैं और प्रश्न में पानी अतिरिक्त विलायक नहीं माना गया है, इसलिए सभी species को समीकरण में शामिल करेंगे:
(ii) Kc की गणना (293 K)
अभिक्रिया: CH3COOH + C2H5OH ⇌ CH3COOC2H5 + H2O
प्रारम्भिक मोल:
👉 अम्ल = 1.00
👉 अल्कोहल = 0.18
👉 एस्टर = 0
👉 जल = 0
साम्य पर एस्टर = 0.171 mol बना ⇒ जल भी 0.171 mol बनेगा, और अभिकारक उतने ही घटेंगे।
साम्य मोल:
👉 अम्ल = 1.00 − 0.171 = 0.829
👉 अल्कोहल = 0.18 − 0.171 = 0.009
👉 एस्टर = 0.171
👉 जल = 0.171
यदि आयतन V L हो, तो:
\( K_c=\frac{(0.171)^2}{0.829\times0.009} \)
\( K_c=3.92 \)
(iii) क्या साम्य स्थापित है?
नई स्थिति (293 K):
👉 प्रारम्भिक: अम्ल = 1.0, अल्कोहल = 0.5, एस्टर = 0, जल = 0
👉 किसी समय पर एस्टर = 0.214 mol
तो उसी समय:
👉 अम्ल = 1.0 − 0.214 = 0.786
👉 अल्कोहल = 0.5 − 0.214 = 0.286
👉 एस्टर = 0.214
👉 जल = 0.214
\( Q_c=\frac{(0.214)^2}{0.786\times0.286} \)
\( Q_c=0.204 \)
Qc = 0.204, Kc = 3.92
Qc < Kc
अतः मिश्रण अभी साम्य पर नहीं है; उत्पाद बढ़ाने के लिए अभिक्रिया आगे जाएगी।
👉 Q < K: forward
👉 Q > K: reverse
👉 Q = K: equilibrium
PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
\( K_c=8.3\times10^{-3} \)
तब
\( x^2=(8.3\times10^{-3})(0.05)=4.15\times10^{-4} \)
\( x=\sqrt{4.15\times10^{-4}}=2.04\times10^{-2}\ \text{M} \)
FeO(s) + CO(g) ⇌ Fe(s) + CO2(g) ; Kp = 0.265 atm at 1050K
1050 K पर Kp = 0.265 है। यदि प्रारम्भिक आंशिक दाब pCO = 1.4 atm और pCO2 = 0.80 atm हों, तो साम्य पर CO और CO2 के आंशिक दाब ज्ञात कीजिए।
✅ pCO2,eq = 0.461 atm
इस अभिक्रिया के लिए:
प्रारम्भिक Qp:
अतः नेट अभिक्रिया पश्च दिशा में जाएगी, यानी CO2 घटेगा और CO बढ़ेगा।
Step 2: परिवर्तन मानें
मान लें पश्च दिशा के कारण दाब में परिवर्तन p atm है:
pCO2,eq = 0.80 − p, pCO,eq = 1.4 + p
अब Kp लगाएँ:
\( 0.265(1.4+p)=0.80-p \)
\( 0.371+0.265p=0.80-p \)
\( 1.265p=0.429 \)
\( p=\frac{0.429}{1.265}=0.339\ \text{atm} \)
\( p_{CO_2,eq}=0.80-0.339=0.461\ \text{atm} \)
👉 Qp > Kp: reverse
👉 Qp < Kp: forward
✅ Qc = 0.0104
और Qc < Kc (0.0104 < 0.061)
अतः अभिक्रिया अग्र दिशा (forward) में जाएगी (NH3 बनने की दिशा में)।
\( =\frac{0.25}{3.0\times8.0} \)
\( =\frac{0.25}{24} \)
\( =0.0104 \)
Qc = 0.0104, Kc = 0.061
Qc < Kc
इसका मतलब उत्पाद (NH3) अभी कम है, इसलिए सिस्टम आगे बढ़कर अधिक NH3 बनाएगा।
Q = K → साम्य
Q < K → forward
Q > K → reverse
2BrCl(g) ⇌ Br2(g) + Cl2(g)
इसके लिए 500 K पर Kc = 32 है। यदि प्रारम्भ में [BrCl] = 3.3 × 10−3 mol L−1 हो, तो साम्य पर [BrCl] ज्ञात कीजिए।
प्रारम्भिक:
[BrCl] = 3.3 × 10−3, [Br2] = 0, [Cl2] = 0
मान लें BrCl की x मात्रा विघटित होती है, तो:
[BrCl]eq = 3.3 × 10−3 − x
[Br2]eq = [Cl2]eq = x/2
(क्योंकि 2BrCl से 1 Br2 और 1 Cl2 बनते हैं)
Step 2: Kc लगाएँ
\( \frac{x^2}{4(3.3\times10^{-3}-x)^2}=32 \)
\( \frac{x}{2(3.3\times10^{-3}-x)}=\sqrt{32}\approx5.66 \)
\( \frac{x}{3.3\times10^{-3}-x}=11.32 \)
\( x=11.32(3.3\times10^{-3}-x) \)
\( x\approx3.03\times10^{-3} \)
✅ [BrCl]eq ≈ 3.0 × 10−4 mol L−1
C(s) + CO2(g) ⇌ 2CO(g)
उपरोक्त ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए।
सुविधा के लिए कुल गैसीय मिश्रण (CO + CO2) का द्रव्यमान 100 g मानते हैं।
👉 CO = 90.55 g
👉 CO2 = 9.45 g
मोल:
\( n_{CO_2}=\frac{9.45}{44}=0.215 \)
\( n_{\text{tot}}=3.234+0.215=3.449 \)
Step 2: 1 atm पर आंशिक दाब
\( p_{CO_2}=\frac{n_{CO_2}}{n_{\text{tot}}}\times1 =\frac{0.215}{3.449}=0.062\ \text{atm} \)
Step 3: Kp निकालें
अभिक्रिया: C(s) + CO2(g) ⇌ 2CO(g)
Step 4: Kp से Kc
Δng = 2 − 1 = 1
\( K_p=K_c(RT) \)
\( K_c=\frac{K_p}{RT} \)
\( K_c=\frac{14.19}{(0.0821)(1127)} =\frac{14.19}{92.5367} =0.153 \)
NO(g) + 1/2 O2(g) ⇌ NO2(g)
के लिए (क) ΔrG∘ तथा (ख) साम्य स्थिरांक K ज्ञात कीजिए।
दिया है:
ΔfG∘(NO2) = 52.0 kJ mol−1, ΔfG∘(NO) = 87.0 kJ mol−1, ΔfG∘(O2) = 0
✅ K = 1.36 × 106
\( \Delta_r G^\circ=\Delta_f G^\circ(NO_2)-\left[\Delta_f G^\circ(NO)+\frac{1}{2}\Delta_f G^\circ(O_2)\right] \)
\( =52.0-\left[87.0+\frac{1}{2}(0)\right] \)
\( =52.0-87.0=-35.0\ \text{kJ mol}^{-1} \)
Step 2: ΔrG∘ से K
\( \log K=\frac{-\Delta_r G^\circ}{2.303RT} \)
\( =\frac{35.0}{2.303\times(8.314\times10^{-3})\times298} \)
\( 2.303\times2.4776=5.7059 \)
\( \log K=\frac{35.0}{5.7059}=6.134 \)
\( K=\text{antilog}(6.134)=1.36\times10^6 \)
(क) PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
(ख) CaO(s) + CO2(g) ⇌ CaCO3(s)
(ग) 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇌ Fe3O4(s) + 4H2(g)
✅ (ख) घटेगी
✅ (ग) समान रहेगी
👉 दाब कम करने (या आयतन बढ़ाने) पर साम्य उस दिशा में शिफ्ट होता है जहाँ गैसीय मोल अधिक हों।
👉 ठोस (s) के मोल दाब-शिफ्ट में नहीं माने जाते।
(क) PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 1
👉 दाएँ गैसीय मोल = 2
दाब कम करने पर दाएँ शिफ्ट होगा ⇒ उत्पादों के मोल बढ़ेंगे।
(ख) CaO(s) + CO2(g) ⇌ CaCO3(s)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 1 (CO2)
👉 दाएँ गैसीय मोल = 0
दाब कम करने पर साम्य बाएँ शिफ्ट होगा ⇒ उत्पाद CaCO3 कम बनेगा ⇒ उत्पादों के मोल घटेंगे।
(ग) 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇌ Fe3O4(s) + 4H2(g)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 4
👉 दाएँ गैसीय मोल = 4
दोनों तरफ गैसीय मोल समान हैं, इसलिए दाब बदलने से साम्य शिफ्ट नहीं होगा ⇒ उत्पादों के मोल समान रहेंगे।
(i) COCl2(g) ⇌ CO(g) + Cl2(g)
(ii) CH4(g) + 2S2(g) ⇌ CS2(g) + 2H2S(g)
(iii) CO2(g) + C(s) ⇌ 2CO(g)
(iv) 2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)
(v) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g)
(vi) 4NH3(g) + 5O2(g) ⇌ 4NO(g) + 6H2O(g)
✅ अप्रभावित: (ii)
दिशा:
(i) पश्च दिशा
(ii) कोई प्रभाव नहीं
(iii) पश्च दिशा
(iv) अग्र दिशा
(v) पश्च दिशा
(vi) पश्च दिशा
👉 दाब बढ़ाने पर साम्य उस दिशा में जाता है जहाँ गैसीय मोल कम हों।
👉 केवल गैसों के मोल गिने जाते हैं; ठोस (s) नहीं गिने जाते।
(i) COCl2(g) ⇌ CO(g) + Cl2(g)
👉 Reactant गैसीय मोल nr = 1
👉 Product गैसीय मोल np = 2
👉 np > nr ⇒ दाब बढ़ाने पर कम मोल वाली तरफ (बाएँ)
✅ पश्च दिशा
(ii) CH4(g) + 2S2(g) ⇌ CS2(g) + 2H2S(g)
👉 nr = 3, np = 3
👉 दोनों बराबर ⇒ दाब परिवर्तन का असर नहीं
✅ अप्रभावित
(iii) CO2(g) + C(s) ⇌ 2CO(g)
👉 C(s) नहीं गिनेंगे
👉 nr = 1, np = 2
👉 np > nr
✅ पश्च दिशा
(iv) 2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)
👉 nr = 3, np = 1
👉 np < nr, दाब बढ़ाने पर दाएँ शिफ्ट
✅ अग्र दिशा
(v) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g)
👉 solids नहीं गिनेंगे
👉 nr = 0, np = 1
👉 np > nr
✅ पश्च दिशा
(vi) 4NH3(g) + 5O2(g) ⇌ 4NO(g) + 6H2O(g)
👉 nr = 9, np = 10
👉 np > nr
✅ पश्च दिशा
H2(g) + Br2(g) ⇌ 2HBr(g)
यदि HBr को 10.0 bar वाले बंद पात्र में रखा जाए, तो 1024 K पर सभी गैसों के साम्य दाब ज्ञात कीजिए।
✅ pHBr = 10 − p ≈ 9.95 bar
अग्र अभिक्रिया का Kp दिया है: Kp(forward) = 1.6 × 105
लेकिन system में शुरुआत में केवल HBr है, इसलिए net प्रक्रिया उल्टी होगी:
2HBr ⇌ H2 + Br2
Step 2: दाब परिवर्तन मान लें
मान लें साम्य तक HBr के दाब में p bar की कमी होती है। तब:
pHBr = 10 − p,
pH₂ = pBr₂ = p/2
प्रतिप अभिक्रिया के लिए:
\( \frac{p^2}{4(10-p)^2}=\frac{1}{1.6\times10^5} \)
\( 400p=2(10-p) \)
\( 400p=20-2p \)
\( 402p=20 \)
\( p=\frac{20}{402}=4.98\times10^{-2}\ \text{bar} \)
Step 3: अंतिम साम्य दाब
\( p_{HBr}=10-p =10-0.0498 =9.9502\ \text{bar} \approx9.95\ \text{bar} \)
CH4(g) + H2O(g) ⇌ CO(g) + 3H2(g)
(क) उपरोक्त अभिक्रिया के लिए Kp का व्यंजक लिखिए।
(ख) Kp तथा साम्य मिश्रण के संघटन पर क्या प्रभाव होगा, यदि:
(i) दाब बढ़ा दिया जाए
(ii) ताप बढ़ा दिया जाए
(iii) उत्प्रेरक प्रयुक्त किया जाए
✅ K_p=\dfrac{p_{CO}\,(p_{H_2})^3}{p_{CH_4}\,p_{H_2O}}
(ख) प्रभाव
(i) दाब बढ़ाने पर
✅ गैसीय मोल: बाएँ 2, दाएँ 4
✅ दाब बढ़ाने पर साम्य बाईं दिशा (कम मोल वाली तरफ) शिफ्ट होगा।
✅ Kp: नहीं बदलता (क्योंकि Kp केवल ताप पर निर्भर है)।
(ii) ताप बढ़ाने पर (अभिक्रिया ऊष्माशोषी है)
✅ साम्य अग्र दिशा में शिफ्ट होगा।
✅ Kp: बढ़ेगा (endothermic reaction के लिए)।
(iii) उत्प्रेरक डालने पर
✅ साम्य की स्थिति (equilibrium composition) नहीं बदलती।
✅ Kp: नहीं बदलता।
✅ केवल साम्य तक पहुँचने की गति बढ़ती है (forward और reverse दोनों rates बढ़ती हैं)।
👉 Kp का expression लिखते समय हर गैस का partial pressure लेते हैं।
👉 और जिस पदार्थ का coefficient जितना होता है, pressure पर उतनी power लगती है।
Rule 2:
👉 Pressure बदलने से equilibrium की direction (left/right) बदल सकती है।
👉 लेकिन Kp की value नहीं बदलती, अगर temperature same रहे।
Rule 3:
👉 अगर reaction endothermic है, तो temperature बढ़ाने पर forward reaction ज़्यादा चलती है।
👉 यानी products ज़्यादा बनते हैं।
Rule 4:
👉 Catalyst Kp नहीं बदलता।
👉 Catalyst equilibrium पर amounts भी नहीं बदलता।
👉 बस equilibrium जल्दी achieve हो जाता है।
👉 क्योंकि forward reaction endothermic होती है, इसलिए high temperature पर H2 की yield बढ़ जाती है।
(क) H2 मिलाने पर
(ख) CH3 OHमिलाने पर
(ग) CO हटाने पर
(घ) CH3 OH हटाने पर
✅ (ख) साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होगा।
✅ (ग) साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होगा।
✅ (घ) साम्य अग्र दिशा में विस्थापित होगा।
👉 क्रियाकारक बढ़ाओ ⇒ क्रियाकारक को काम में लेने के लिए अभिक्रिया अग्र दिशा मे बढती है।
👉 उत्पाद बढ़ाओ ⇒ उत्पाद को काम में लेने के लिए अभिक्रिया पश्च दिशा मे बढती है।
👉 क्रियाकारक घटाओ ⇒ क्रियाकारक को बनाने के लिए अभिक्रिया पश्च दिशा मे बढती है।
👉 उत्पाद घटाओ ⇒ उत्पाद को बनाने के लिए अभिक्रिया अग्र दिशा मे बढती है।
इसी से:
👉 H2 जोड़ने पर → अग्र दिशा मे
👉 CH3 OH जोड़ने पर → पश्च दिशा मे
👉 CO हटाने पर → पश्च दिशा मे
👉 CH3 OH हटाने पर → अग्र दिशा मे
\(PCl_5(g)\rightleftharpoons PCl_3(g)+Cl_2(g),\ \Delta_r H^\circ=+124.0\ \text{kJ mol}^{-1}\)
(क) अभिक्रिया के लिए \(K_c\) का व्यंजक लिखिए।
(ख) प्रतिगामी अभिक्रिया के लिए समान ताप पर \(K_c\) का मान क्या होगा?
(ग) यदि
(i) और अधिक \(PCl_5\) मिलाया जाए,
(ii) दाब बढ़ाया जाए, तथा
(iii) ताप बढ़ाया जाए,
तो \(K_c\) पर क्या प्रभाव होगा?
\( K_c=\dfrac{[PCl_3][Cl_2]}{[PCl_5]} \)
✅ (ख) प्रतीप अभिक्रिया के लिए
\( K_c'=\dfrac{1}{K_c}=\dfrac{1}{8.3\times10^{-3}}=120.48 \) (लगभग)
✅ (ग) \(K_c\) पर प्रभाव:
👉 (i) \(PCl_5\) मिलाने पर: \(K_c\) पर कोई प्रभाव नहीं
👉 (ii) दाब बढ़ाने पर: \(K_c\) पर कोई प्रभाव नहीं
👉 (iii) ताप बढ़ाने पर: अभिक्रिया ऊष्माशोषी है, इसलिए \(K_c\) बढ़ेगा
👉 दी गई अभिक्रिया:
\( PCl_5(g)\rightleftharpoons PCl_3(g)+Cl_2(g) \)
इसका साम्य व्यंजक होगा:
\( K_c=\dfrac{[PCl_3][Cl_2]}{[PCl_5]} \)
👉 प्रतीप अभिक्रिया के लिए संतुलन स्थिरांक उल्टा हो जाता है:
\( K_c'=\dfrac{1}{K_c} \)
👉 (i) अभिकारक \(PCl_5\) बढ़ाने से साम्य स्थिति बदलेगी, लेकिन \(K_c\) नहीं बदलेगा।
👉 (ii) दाब बढ़ाने से भी साम्य की स्थिति प्रभावित हो सकती है, पर \(K_c\) वही रहेगा (जब तक ताप स्थिर है)।
👉 (iii) ताप बढ़ाने पर क्योंकि \(\Delta_r H^\circ>0\) (ऊष्माशोषी), अग्र अभिक्रिया को बढ़ावा मिलता है, इसलिए \(K_c\) का मान बढ़ता है।
👉 सान्द्रता, दाब, उत्प्रेरक आदि साम्य की स्थिति बदलते हैं, \(K\) का मान नहीं (स्थिर ताप पर)।
\(CO(g)+H_2O(g)\rightleftharpoons CO_2(g)+H_2(g)\)
यदि \(400^\circ C\) पर अभिक्रिया पात्र में CO तथा \(H_2O\) का सममोलर मिश्रण इस प्रकार लिया जाए कि
\(p_{CO}=p_{(H_2O)}=4.0\ \text{bar}\)
तो साम्यावस्था पर \(H_2\) का आंशिक दाब क्या होगा?
दिया है: \(K_p=0.1\ (\text{at }400^\circ C)\)
\(\left(p_{(H_2)}\right)_{eq}\approx 0.96\ \text{bar}\)
तब अभिक्रिया:
\(CO(g)+H_2O(g)\rightleftharpoons CO_2(g)+H_2(g)\)
प्रारंभिक दाब (bar):
\(p_{CO}=4,\)
\( \ p_{(H_2O)}=4,\)
\( \ p_{(CO_2)}=0,\)
\( \ p_{(H_2)}=0\)
साम्य पर दाब (bar):
\(p_{CO}=(4-p),\)
\( \ p_{(H_2O)}=(4-p),\)
\( \ p_{(CO_2)}=p,\)
\( \ p_{(H_2)}=p\)
अब,
\( K_p=\frac{p_{(CO_2)}\,p_{(H_2)}}{p_{CO}\,p_{(H_2O)}}=\frac{p^2}{(4-p)^2} \) दिया है \(K_p=0.1\), इसलिए
\( \frac{p^2}{(4-p)^2}=0.1 \)
\( \frac{p}{4-p}=\sqrt{0.1}=0.316 \)
\( p=0.316(4-p)=1.264-0.316p \)
\( 1.316p=1.264 \)
\( p=\frac{1.264}{1.316}=0.960\ \text{bar}\ (\text{लगभग}) \)
अतः,
\(\left(p_{(H_2)}\right)_{eq}\approx 0.96\ \text{bar}\)
👉 \(CO+H_2O\rightleftharpoons CO_2+H_2\) को जल-गैस शिफ्ट अभिक्रिया कहा जाता है, जो औद्योगिक \(H_2\) उत्पादन में बहुत महत्वपूर्ण है।
(क) Cl2(g) ⇌ 2Cl(g), Kc = 5×10-39
(ख) Cl2(g) + 2NO(g) ⇌ 2NOCl(g), Kc = 3.7×108
(ग) Cl2(g) + 2NO2(g) ⇌ 2NO2Cl(g), Kc = 1.8
👉 यदि Kc ≪ 1, तो साम्य पर अभिक्रिया बाईं ओर (अभिकारक) अधिक रहती है, उत्पाद बहुत कम बनते हैं।
(क) में Kc = 5×10-39 बहुत ही छोटा है, इसलिए उत्पाद की सांद्रता नगण्य होगी।
👉 यदि Kc ≫ 1, तो साम्य पर अभिक्रिया दाईं ओर (उत्पाद) अधिक रहती है, अभिकारक बहुत कम बचते हैं।
(ख) में Kc = 3.7×108 बहुत बड़ा है, इसलिए अभिकारकों की सांद्रता नगण्य होगी।
👉 यदि Kc ≈ 1, तो अभिकारक और उत्पाद दोनों ही उल्लेखनीय मात्रा में मौजूद रहते हैं।
(ग) में Kc = 1.8, जो 1 के आसपास है, इसलिए दोनों पक्षों की सांद्रता सुप्रेक्ष्य होगी।
इसलिए सही विकल्प: (ग)
👉 Kc का मान तापमान बदलने पर बदलता है, लेकिन एक निश्चित ताप पर स्थिर रहता है।
3O2(g) ⇌ 2O3(g)
इसका साम्य व्यंजक:
Kc = [O3]2 / [O2]3
दिया है:
Kc = 2.0×10-50,
[O2] = 1.6×10-2 M
अब मान रखकर:
2.0×10-50 = [O3]2 / (1.6×10-2)3
[O3]2 = (2.0×10-50)(1.6×10-2)3
यहाँ (1.6×10-2)3हो जायेगा = 4.096×10-6
[O3]2 = (2.0×10-50)(4.096×10-6)
= 8.192×10-56
अब वर्गमूल:
[O3] = √(8.192×10-56)
= 2.86×10-28 M
अतः, [O3] = 2.86×10-28 M
👉 यही कारण है कि सामान्य परिस्थितियों में O2 अधिक स्थिर है, जबकि O3 की सांद्रता बहुत कम मिलती है।
✅ 1 L फ्लास्क होने के कारण:
n(CH4)=5.85×10-2 mol
साम्य स्थिरांक व्यंजक:
Kc=[CH4][H2O]/([CO][H2]3)
दिया है:
Kc=3.90,
[CO]=0.30,
[H2]=0.10,
[H2O]=0.02
(क्योंकि आयतन 1 L है, इसलिए मोलरता = मोल)
अब,
\( 3.90=\dfrac{[CH_4](0.02)}{(0.30)(0.10)^3} \)
\( [CH_4]=\dfrac{3.90\times(0.30)\times(0.10)^3}{0.02} \)
\( (0.10)^3=0.001,\quad 0.30\times0.001 \)
\( (0.10)^3\times0.30=3.0\times10^{-4} \)
\( 3.90\times3.0\times10^{-4}=1.17\times10^{-3} \)
\( [CH_4]=\dfrac{1.17\times10^{-3}}{0.02} \)
\( [CH_4]=5.85\times10^{-2}\ \text{M} \)
\( \therefore\ [CH_4]=5.85\times10^{-2}\ \text{M} \)
और 1 L में CH4 के मोल:
n(CH4)=5.85×10-2 mol
👉 CO+3H2→CH4+H2O प्रकार की अभिक्रिया औद्योगिक गैस-साम्य समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
दिए गए कणों के संयुग्मी युग्म:
| क्रमांक | दिया गया कण | प्रकृति | संयुग्मी युग्म |
|---|---|---|---|
| 1 | HNO2 | अम्ल | NO2− (संयुग्मी क्षार) |
| 2 | CN− | क्षार | HCN (संयुग्मी अम्ल) |
| 3 | HClO4 | अम्ल | ClO4− (संयुग्मी क्षार) |
| 4 | F− | क्षार | HF (संयुग्मी अम्ल) |
| 5 | OH− | क्षार | H2O (संयुग्मी अम्ल) |
| 6 | CO32− | क्षार | HCO3− (संयुग्मी अम्ल) |
| 7 | S2− | क्षार | HS− (संयुग्मी अम्ल) |
👉 अम्ल H+ देता है, तो उसका संयुग्मी क्षार बनता है।
👉 क्षार H+ ग्रहण करता है, तो उसका संयुग्मी अम्ल बनता है।
अब एक-एक करके:
HNO2 → NO2- + H+
इसलिए NO2-, HNO2 का संयुग्मी क्षार है।
CN- + H+ → HCN
इसलिए HCN, CN- का संयुग्मी अम्ल है।
HClO4 → ClO4- + H+
इसलिए ClO4-, HClO4 का संयुग्मी क्षार है।
F- + H+ → HF
इसलिए HF, F- का संयुग्मी अम्ल है।
OH- + H+ → H2O
इसलिए H2O, OH- का संयुग्मी अम्ल है।
CO3(2-) + H+ → HCO3-
इसलिए HCO3-, CO3(2-) का संयुग्मी अम्ल है।
S(2-) + H+ → HS-
इसलिए HS-, S(2-) का संयुग्मी अम्ल है।
👉 जितना मजबूत अम्ल होगा, उसका संयुग्मी क्षार उतना ही कमजोर होगा (और इसके विपरीत)।
H2O, BF3, H+, NH4+
❌ H2O लुईस अम्ल नहीं है (यह सामान्यतः लुईस क्षार की तरह व्यवहार करता है)।
👉 लुईस क्षार (Lewis base) वह होता है जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करे।
अब दिए गए species देखें:
H2O:
ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं, इसलिए यह इलेक्ट्रॉन युग्म दाता है → लुईस क्षार |
BF3:
बोरॉन के पास अपूर्ण अष्टक (6 electrons) होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही → लुईस अम्ल|
H+:
इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर बंध बनाता है → लुईस अम्ल|
NH4+:
यह प्रोटॉन दान कर सकता है (Brønsted acid) और प्रजाति के रूप में electron pair स्वीकार करने की क्षमता के कारण इसे भी लुईस अम्ल माना जाता है।
इसलिए सही उत्तर: 👉 BF3, H+, NH4+
👉 BF3 जैसा इलेक्ट्रॉन-अल्प (electron-deficient) अणु Lewis acid का क्लासिक उदाहरण है।
HF, H2SO4, एवं HCO3−
✅ H2SO4 का संयुग्मी क्षारक: HSO4−
✅ HCO3− का संयुग्मी क्षारक: CO32−
इसलिए संयुग्मी क्षारक = अम्ल − H+
👉 HF − H+ = F−
👉 H2SO4 − H+ = HSO4−
👉 HCO3− − H+ = CO32−
👉 HCO3− उभयधर्मी (amphiprotic) है, यानी यह H+ दे भी सकता है और ले भी सकता है।
✅ NH3 का संयुग्मी अम्ल: NH4+
✅ HCOO− का संयुग्मी अम्ल: HCOOH
इसलिए संयुग्मी अम्ल = क्षारक + H+
👉 NH2− + H+ = NH3
👉 NH3 + H+ = NH4+
👉 HCOO− + H+ = HCOOH
👉 HCOO− (formate ion) का conjugate acid, formic acid (HCOOH) होता है।
👉 H2O का संयुग्मी अम्ल: H3O+, संयुग्मी क्षारक: OH−
👉 HCO3− का संयुग्मी अम्ल: H2CO3, संयुग्मी क्षारक: CO32−
👉 HSO4− का संयुग्मी अम्ल: H2SO4, संयुग्मी क्षारक: SO42−
👉 NH3 का संयुग्मी अम्ल: NH4+, संयुग्मी क्षारक: NH2−
👉 यदि वही स्पीशीज़ H+ त्याग दे, तो वह अम्ल की तरह कार्य करती है और उसका संयुग्मी क्षारक बनता है।
इसी आधार पर ऊपर दिए गए सभी species amphiprotic/amphoteric व्यवहार दिखाते हैं।
| स्पीशीज़ | संयुग्मी अम्ल (जब ब्रॉन्स्टेड क्षारक की तरह कार्य करे) |
संयुग्मी क्षारक (जब ब्रॉन्स्टेड अम्ल की तरह कार्य करे) |
|---|---|---|
| H2O | H3O+ | OH− |
| HCO3− | H2CO3 | CO32− |
| HSO4− | H2SO4 | SO42− |
| NH3 | NH4+ | NH2− |
👉 HCO3− और HSO4− बफर रसायन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
(क) OH−
(ख) F−
(ग) H+
(घ) BCl3
👉 OH−
👉 F−
✅ लुईस अम्ल (Lewis Acid):
👉 H+
👉 BCl3
👉 Lewis acid = जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करे।
अब एक-एक species:
1. OH−
ऑक्सीजन पर lone pair होते हैं, यह electron pair दान कर सकता है।
इसलिए यह लुईस क्षारक है।
2. F−
फ्लोराइड आयन पर अतिरिक्त electron pair होता है, यह pair दान करता है।
इसलिए यह लुईस क्षारक है।
3. H+
यह electron pair ग्रहण करके सहसंयोजक बंध बनाता है।
इसलिए यह लुईस अम्ल है।
4. BCl3
बोरॉन इलेक्ट्रॉन-अल्प (electron deficient) है, इसका octet अधूरा रहता है।
इसलिए यह electron pair ग्रहण करता है और लुईस अम्ल है।
👉 OH− जैसे आयन कई अभिक्रियाओं में nucleophile (electron pair donor) की तरह भी काम करते हैं।
pH = -log[H+]
दिया है:
[H+] = 3.8×10-3
अब,
pH = -log(3.8×10-3)
= -(log 3.8 + log 10-3)
= -(0.58 - 3) = 2.42
अतः, pH = 2.42
👉 pH = 2.42 काफी अम्लीय पेय को दर्शाता है।
pH = -log[H+]
दिया है:
pH = 3.76
तो,
-log[H+] = 3.76
log[H+] = -3.76
अब antilog लेने पर:
[H+] = 10-3.76
[H+] = 1.74×10-4 M
अतः, [H+] = 1.74×10-4 M
👉 इसलिए pH स्केल logarithmic होता है, linear नहीं।
Kb = 1.47×10-11 (लगभग 1.5×10-11)
✅ HCOO- के लिए:
Kb = 5.56 × 10-11 (लगभग 5.6×10-11)
✅ CN- के लिए:
Kb = 2.08×10-6
Kw = 1.0×10-14
और संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म के लिए:
Ka × Kb = Kw
⇒ Kb = Kw / Ka
HF का संयुग्मी क्षारक F-:
Kb(F-) = 10-14 / (6.8×10-4) = 1.47×10-11
HCOOH का संयुग्मी क्षारक HCOO-:
Kb(HCOO-) = 10-14 / (1.8×10-4) = 5.56×10-11
HCN का संयुग्मी क्षारक CN-:
Kb(CN-) = 10-14 / (4.8×10-9) = 2.08×10-6
👉 इसलिए HF और HCOOH के conjugate bases कमजोर हैं, जबकि HCN बहुत कमजोर अम्ल होने से CN- तुलनात्मक रूप से ज्यादा मजबूत क्षारक है।
[C6H5O-] = 2.24×10-6 M
✅ 0.01 M सोडियम फिनॉक्साइड में फिनॉल के आयनन की मात्रा (degree of ionization):
α = 1.0×10-8
(अर्थात आयनित सांद्रता y = 5.0×10-10 M)
C6H5OH ⇌ C6H5O- + H+
Ka = [C6H5O-][H+] / [C6H5OH]
(1) 0.05 M फिनॉल में [C6H5O-]
मान लें साम्य पर [C6H5O-] = x,
[H+] = x,
[C6H5OH] = 0.05 - x
Ka = x2/(0.05-x) = 1.0×10-10
क्योंकि Ka बहुत छोटा है, x ≪ 0.05, इसलिए:
x2/0.05 ≈ 1.0×10-10
x2 = 0.05×10-10 = 5.0×10-12
x = √(5.0×10-12) = 2.24×10-6 M
अतः,
[C6H5O-] = 2.24×10-6 M
(2) 0.01 M सोडियम फिनॉक्साइड में फिनॉल का आयनन
यहाँ प्रारंभ में [C6H5O-] = 0.01 M (common ion उपस्थित है)।
मान लें फिनॉल का आयनन = y:
[C6H5OH] = 0.05 - y,
[C6H5O-] = 0.01 + y,
[H+] = y
Ka = ((0.01+y)(y))/(0.05-y) = 1.0×10-10
क्योंकि y बहुत छोटा होगा:
0.01+y ≈ 0.01, 0.05-y ≈ 0.05
(0.01×y)/0.05 = 1.0×10-10
y = (1.0×10-10×0.05)/0.01
y = 5.0×10-10 M
अब आयनन की मात्रा:
α = आयनित सान्द्रता ÷ प्रारम्भिक सान्द्रता
α = y/0.05
α = (5.0×10-10)/0.05
α = 1.0×10-8
👉 इसे समआयन प्रभाव कहते हैं, जो दूर्बल अम्ल या दूर्बल क्षार साम्य में बहुत महत्वपूर्ण है।
[HS-] = 9.54 × 10-5 M
✅ स्थिति–2: 0.1 M H2S + 0.1 M HCl
[HS-] = 9.1×10-8 M
[S2-] ≈ 1.1×10-19 M
✅ निष्कर्ष: 0.1 M HCl की उपस्थिति में [HS-] और [S2-] दोनों बहुत कम हो जाते हैं (समआयन प्रभाव, high [H+]).
पहला वियोजन:
H2S ⇌ H+ + HS-, Ka1=9.1×10-8
मान लें [HS-] = x, तो
Ka1 = x2/(0.1-x) ≈ x2/0.1
x2 = 9.1×10-8×0.1 = 9.1×10-9
x = 9.54×10-5
अतः
[HS-] = 9.54×10-5 M,
[H+] ≈ 9.54×10-5 M
दूसरा वियोजन:
HS- ⇌ H+ + S2-, Ka2=1.2×10-13
Ka2 = [H+][S2-]/[HS-]
⇒ [S2-] = Ka2[HS-]/[H+]
क्योंकि [HS-] ≈ [H+], इसलिए
[S2-] ≈ Ka2 = 1.2×10-13 M
(B) 0.1 M HCl की उपस्थिति में
यहाँ [H+] ≈ 0.1 M (प्रबल अम्ल से)।
पहला वियोजन:
Ka1 = [H+][HS-]/[H2S]
9.1×10-8 = ((0.1)×y)/0.1
⇒ y = 9.1×10-8
अतः
[HS-] = 9.1×10-8 M
दूसरा वियोजन:
Ka2 = [H+][S2-]/[HS-]
⇒ [S2-] = Ka2[HS-]/[H+]
[S2-] = 1.2×10-13×(9.1×10-8)/0.1
= 1.092×10-19 M
≈ 1.1×10-19 M
👉 इसी कारण HCl की उपस्थिति में S2- आयन की मात्रा अत्यंत नगण्य हो जाती है।
✅ [CH3COO−] = 9.33 × 10−4 mol L−1
✅ [H+] = 9.33 × 10−4 mol L−1
✅ pH = 3.03
CH3COOH ⇌ CH3COO− + H+
प्रारम्भिक सांद्रता:
[CH3COOH] = 0.05 M,
[CH3COO−] = 0,
[H+] = 0
मान लें साम्य पर x मोल प्रति लीटर वियोजित होता है। तब:
[CH3COOH] = 0.05 − x
[CH3COO−] = x
[H+] = x
Ka = [CH3COO−][H+] / [CH3COOH]
1.74 × 10−5 = x2 / (0.05 − x)
क्योंकि x बहुत छोटा होगा, इसलिए 0.05 − x ≈ 0.05 मानते हैं:
1.74 × 10−5 = x2 / 0.05
x2 = 1.74 × 10−5 × 0.05 = 8.7 × 10−7
x = √(8.7 × 10−7) = 9.33 × 10−4
अतः,
[CH3COO−] = x = 9.33 × 10−4 mol L−1
[H+] = x = 9.33 × 10−4 mol L−1
वियोजन की मात्रा:
α = x/0.05 = (9.33 × 10−4)/0.05 = 0.01866 ≈ 0.018
pH = −log[H+]
= −log(9.33 × 10−4)
= 3.03
👉 CH3COOH और CH3COO− मिलकर buffer solution बनाने में बहुत उपयोगी conjugate pair हैं।
✅ [A⁻] = 7.08 × 10⁻5 M
✅ Ka = 5.01 × 10⁻7
✅ pKa = 6.30 (लगभग)
HA ⇌ H+ + A⁻
दिया है: pH = 4.15
इससे,
pH = −log[H+]
4.15 = −log[H+]
[H+] = 10−4.15 = 7.08 × 10⁻5 M
क्योंकि HA एक एक-प्रोटॉन अम्ल है, इसलिए
[A⁻] = [H+] = 7.08 × 10⁻5 M
प्रारम्भिक [HA] = 0.01 M
और आयनन बहुत कम है, इसलिए साम्य पर [HA] ≈ 0.01 M लिया जा सकता है।
अब,
Ka = [H+][A⁻]/[HA]
= (7.08 × 10⁻5)(7.08 × 10⁻5)/(0.01)
= 5.01 × 10⁻7
अब,
pKa = −log(Ka)
= −log(5.01 × 10⁻7)
= 6.30 (लगभग 6.3002)
👉 pKa जितना कम, अम्ल उतना अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
(क) 0.003 M HCl
(ख) 0.005 M NaOH
(ग) 0.002 M HBr
(घ) 0.002 M KOH
✅ (ख) 0.005 M NaOH का pH = 11.70
✅ (ग) 0.002 M HBr का pH = 2.70
✅ (घ) 0.002 M KOH का pH = 11.30
HCl एक प्रबल अम्ल है, इसलिए
[H+] = 0.003 = 3 × 10⁻3 M
pH = −log(3 × 10⁻3) = 2.52
(ख) 0.005 M NaOH
NaOH एक प्रबल क्षार है, इसलिए
[OH⁻] = 0.005 = 5 × 10⁻3 M
pOH = −log(5 × 10⁻3) = 2.30
pH = 14 − pOH = 14 − 2.30 = 11.70
(ग) 0.002 M HBr
HBr प्रबल अम्ल है, इसलिए
[H+] = 0.002 = 2 × 10⁻3 M
pH = −log(2 × 10⁻3) = 2.70
(घ) 0.002 M KOH
KOH प्रबल क्षार है, इसलिए
[OH⁻] = 0.002 = 2 × 10⁻3 M
pOH = −log(2 × 10⁻3) = 2.70
pH = 14 − 2.70 = 11.30
👉 क्षार के लिए पहले pOH निकालकर pH = 14 − pOH भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
(क) 2 ग्राम TlOH को जल में घोलकर 2 लीटर विलयन बनाया जाए।
(ख) 0.3 ग्राम Ca(OH)2 को जल में घोलकर 500 mL विलयन बनाया जाए।
(ग) 0.3 ग्राम NaOH को जल में घोलकर 200 mL विलयन बनाया जाए।
(घ) 13.6 M HCl के 1 mL को जल से तनु करके कुल आयतन 1 लीटर किया जाए।
✅ (ख) pH = 12.21
✅ (ग) pH = 12.57
✅ (घ) pH = 1.87
TlOH का मोलर द्रव्यमान = 204 + 16 + 1 = 221 g mol−1
मोल = 2/221 = 0.0090498 mol
मोलरता = 0.0090498/2 = 4.52 × 10−3 M
TlOH प्रबल क्षार मानकर:
[OH−] = 4.52 × 10−3 M
[H+] = 10−14 / (4.52 × 10−3) = 2.21 × 10−12 M
pH = −log(2.21 × 10−12) = 11.66
(ख) 0.3 g Ca(OH)2 in 500 mL
Ca(OH)2 का मोलर द्रव्यमान = 40 + 2(16+1) = 74 g mol−1
मोल = 0.3/74 = 0.004054 mol
आयतन = 0.5 L
[Ca(OH)2] = 0.004054/0.5 = 8.11 × 10−3 M
Ca(OH)2 → Ca2+ + 2OH−
[OH−] = 2 × 8.11 × 10−3 = 1.622 × 10−2 M
pOH = −log(1.622 × 10−2) = 1.79
pH = 14 − 1.79 = 12.21
(ग) 0.3 g NaOH in 200 mL
NaOH का मोलर द्रव्यमान = 40 g mol−1
मोल = 0.3/40 = 0.0075 mol
आयतन = 0.2 L
[NaOH] = [OH−] = 0.0075/0.2 = 3.75 × 10−2 M
pOH = −log(3.75 × 10−2) = 1.43
pH = 14 − 1.43 = 12.57
(घ) 13.6 M HCl, 1 mL diluted to 1 L
Dilution formula: M1V1 = M2V2
M2 = (13.6 × 1 mL)/(1000 mL) = 1.36 × 10−2 M
HCl प्रबल अम्ल है, इसलिए [H+] = 1.36 × 10−2 M
pH = −log(1.36 × 10−2) = 1.87
👉 25°C पर pH + pOH = 14 का संबंध बहुत उपयोगी shortcut है।
✅ pKa = 2.70 (लगभग)
CH2BrCOOH ⇌ CH2BrCOO− + H+
दिया है:
प्रारम्भिक सांद्रता C = 0.1 M,
आयनन की मात्रा α = 0.132
साम्य पर:
[H+] = Cα = 0.1 × 0.132 = 1.32 × 10−2 M
[CH2BrCOO−] = 1.32 × 10−2 M
[CH2BrCOOH] = C(1−α) = 0.1(1−0.132) = 0.0868 M
अब,
Ka = [CH2BrCOO−][H+] / [CH2BrCOOH]
= (1.32×10−2)(1.32×10−2) / 0.0868
= 2.01×10−3
pKa = −log(Ka)
= −log(2.01 × 10−3)
= 2.70 (लगभग)
pH = −log[H+]
= −log(1.32 × 10−2)
= 1.88
👉 ब्रोमोएसेटिक अम्ल, एसीटिक अम्ल से अधिक अम्लीय होता है क्योंकि Br का −I प्रभाव conjugate base को स्थिर करता है।
✅ pKb = 5.80
कोडीन + H2O ⇌ कोडीनH+ + OH−
दिया है:
pH = 9.95
पहले pOH निकालें:
pOH = 14 − pH = 14 − 9.95 = 4.05
अब,
[OH−] = 10−pOH = 10−4.05 = 8.91 × 10−5 M
मान लें x = [OH−] = [कोडीनH+] = 8.91 × 10−5 M
प्रारम्भिक [कोडीन] = 0.005 M
क्योंकि x बहुत छोटा है, इसलिए साम्य पर [कोडीन] ≈ 0.005 M
अब,
Kb = [कोडीनH+][OH−] / [कोडीन]
= x2 / 0.005
= (8.91 × 10−5)2 / (5 × 10−3)
= 1.6 × 10−6
अब,
pKb = −log(Kb)
= −log(1.6 × 10−6)
= 5.80
👉 Kb छोटा होने का मतलब है कि क्षार का आयनन कम (आंशिक) है।
✅ एनीलीन के वियोजन की मात्रा α = 6.53×10−4
✅ संयुग्मी अम्ल (C6H5NH3+) का Ka = 2.34×10−5 (लगभग 2.4×10−5)
C6H5NH2 + H2O ⇌ C6H5NH3+ + OH−
दिया है:
C = 0.001 M, Kb = 4.27×10−10
कमजोर क्षार के लिए,
[OH−] = √(Kb⋅C)
[OH−] = √((4.27×10−10)(0.001))
= √(4.27×10−13)
= 6.53×10−7 M
अब,
pOH = −log[OH−]
pOH = −log(6.53×10−7)
pOH = 6.185
pH = 14 − pOH
pH = 14 − 6.185
pH = 7.815
इसलिए pH ≈ 7.82
वियोजन की मात्रा (α):
α = [OH−]/C
= (6.53×10−7)/(10−3)
= 6.53×10−4
संयुग्मी अम्ल C6H5NH3+ के लिए:
Ka⋅Kb = Kw = 10−14
Ka = 10−14/(4.27×10−10)
Ka = 2.34×10−5
अतः Ka ≈ 2.34×10−5 (लगभग 2.4×10−5)
👉 एनीलीन aromatic amine होने के कारण अमोनिया से दूर्बल (कमजोर) क्षार होती है।
(क) 0.01 M HCl तथा
(ख) 0.1 M HCl विलयन में डाला जाए,
तो वियोजन की मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है?
✅ 0.01 M HCl की उपस्थिति में वियोजन की मात्रा: α = 1.82×10−3
✅ 0.1 M HCl की उपस्थिति में वियोजन की मात्रा: α = 1.82×10−4
निष्कर्ष: HCl की सांद्रता बढ़ने पर एसीटिक अम्ल का आयनन बहुत घटता है।
इससे,
Ka = 10−4.74 = 1.82 × 10−5
(1) शुद्ध 0.05 M एसीटिक अम्ल के लिए
दूर्बल अम्ल के लिए,
α = √(Ka/C)
α = √((1.82×10−5)/(5×10−2))
= √(3.64×10−4)
= 1.91×10−2
(2) 0.01 M HCl की उपस्थिति में
CH3COOH ⇌ CH3COO− + H+
मान लें वियोजित मात्रा x है। तब
[H+] ≈ 0.01 (HCl से, क्योंकि x बहुत छोटा)
[CH3COOH] ≈ 0.05
Ka = [CH3COO−][H+] / [CH3COOH]
≈ x(0.01)/0.05
x/0.05 = Ka/0.01
= (1.82×10−5)/10−2 = 1.82×10−3
α = x/0.05 = 1.82×10−3
(3) 0.1 M HCl की उपस्थिति में
इसी तरह, [H+] ≈ 0.1, [CH3COOH] ≈ 0.05
Ka ≈ y(0.1)/0.05
⇒ y/0.05 = Ka/0.1
= (1.82×10−5)/10−1 = 1.82×10−4
α = y/0.05 = 1.82×10−4
अतः H+ आयन बढ़ने से (common ion effect) एसीटिक अम्ल का वियोजन दब जाता है।
👉 यही सिद्धांत buffer solutions की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है।
α = 0.164
(लगभग 16.4%)
✅ 0.1 M NaOH की उपस्थिति में डाइमिथाइल अमीन का प्रतिशत आयनन:
% ionization = 0.54%
(CH3)2NH + H2O ⇌ (CH3)2NH2+ + OH−
(1) केवल 0.02 M डाइमिथाइल अमीन के लिए
कमजोर क्षार के लिए:
α = √(Kb/C)
α = √((5.4×10−4)/0.02)
= √(2.7×10−2) = 0.164
अर्थात प्रतिशत आयनन ≈ 16.4%
(2) 0.1 M NaOH की उपस्थिति में
मान लें डाइमिथाइल अमीन की वियोजित सांद्रता = x
साम्य पर:
[(CH3)2NH] ≈ 0.02
[(CH3)2NH2+] = x
[OH−] = 0.1 + x ≈ 0.1
अब,
Kb = [(CH3)2NH2+][OH−] / [(CH3)2NH]
≈ x(0.1)/0.02
5.4×10−4 = 0.1x/0.02
⇒ x = (5.4×10−4×0.02)/0.1 = 1.08×10−4 M
प्रतिशत आयनन:
% आयनन = (x/0.02)×100
= (1.08×10−4/0.02)×100 = 0.54%
इसलिए NaOH (common OH−) की उपस्थिति में आयनन बहुत कम हो जाता है।
👉 इसे common ion effect कहते हैं, और यही कारण है कि 16.4% से घटकर आयनन केवल 0.54% रह गया।
(क) मानव पेशीय द्रव, pH = 6.83
(ख) मानव उदर द्रव, pH = 1.2
(ग) मानव रक्त, pH = 7.38
(घ) मानव लार, pH = 6.4
✅ (ख) [H+] = 6.3 × 10⁻2 M
✅ (ग) [H+] = 4.17 × 10⁻8 M
✅ (घ) [H+] = 3.98 × 10⁻7 M
pH = −log[H+]
⇒ [H+] = 10−pH
(क) pH = 6.83
[H+] = 10−6.83 = 1.48 × 10⁻7 M
(ख) pH = 1.2
[H+] = 10−1.2 = 6.3 × 10⁻2 M
(ग) pH = 7.38
[H+] = 10−7.38 = 4.17 × 10⁻8 M
(घ) pH = 6.4
[H+] = 10−6.4 = 3.98 × 10⁻7 M
👉 उदर (gastric) द्रव का pH बहुत कम होता है, इसलिए उसमें [H+] बहुत अधिक होती है।
✅ कॉफी (pH 5.0): [H+] = 1.00 × 10⁻5 M
✅ टमाटर रस (pH 4.2): [H+] = 6.31 × 10⁻5 M
✅ नींबू रस (pH 2.2): [H+] = 6.31 × 10⁻3 M
✅ अंडे की सफेदी (pH 7.8): [H+] = 1.58 × 10⁻8 M
pH = −log[H+]
⇒ [H+] = 10−pH
अब एक-एक करके:
1) दूध, pH = 6.8
[H+] = 10−6.8 = 1.58 × 10⁻7 M
2) कॉफी, pH = 5.0
[H+] = 10−5.0 = 1.00 × 10⁻5 M
3) टमाटर रस, pH = 4.2
[H+] = 10−4.2 = 6.31 × 10⁻5 M
4) नींबू रस, pH = 2.2
[H+] = 10−2.2 = 6.31 × 10⁻3 M
5) अंडे की सफेदी, pH = 7.8
[H+] = 10−7.8 = 1.58 × 10⁻8 M
👉 इसलिए नींबू रस (pH 2.2) कॉफी (pH 5.0) से लगभग 102.8 ≈ 630 गुना अधिक अम्लीय है।
✅ [K+] = 0.05 M
✅ [OH−] = 0.05 M
✅ [H+] = 2.0 × 10−13 M
KOH का द्रव्यमान = 0.561 g
आयतन = 200 mL = 0.200 L
KOH का मोलर द्रव्यमान = 56 g mol−1
Step 1: मोल KOH
n = 0.561/56 = 0.0100179 mol
Step 2: मोलरता
[KOH] = 0.0100179 / 0.200 = 0.0501 M ≈ 0.05 M
Step 3: पूर्ण वियोजन (Strong Base)
KOH → K+ + OH−
[K+] = [OH−] = 0.05 M
Step 4: [H+] निकालना
[H+][OH−] = 10−14 (at 298 K)
[H+] = 10−14 / 0.05 = 2.0 × 10−13 M
Step 5: pH
pH = −log[H+]
= −log(2.0 × 10−13)
= 13 − 0.3010
= 12.699
👉 Strong base के dilute विलयन में [OH−] ≈ base की molarity के बराबर होता है।
α = 1.62×10−2
pH = 3.09 (लगभग)
✅ 0.01 M HCl की उपस्थिति में:
α = 1.32×10−3
CH3CH2COOH ⇌ CH3CH2COO− + H+
दिया है: Ka = 1.32×10−5, C = 0.05 M
(1) 0.05 M अम्ल में आयनन की मात्रा (α)
कमजोर अम्ल के लिए:
α = √(Ka/C)
α = √((1.32×10−5)/0.05)
= √(2.64×10−4)
α = 1.62×10−2
(2) pH की गणना
[H+] = Cα = 0.05×1.62×10−2
[H+] = 8.10×10−4 M
pH = −log(8.10×10−4)
pH = 3.09
(3) 0.01 M HCl की उपस्थिति में आयनन
अब बाहरी H+ पहले से मौजूद है, इसलिए आयनन दबेगा (common ion effect)।
मान लें अम्ल का वियोजन x है। तब लगभग:
[H+] ≈ 0.01, [acid] ≈ C = 0.05, [conjugate base] = x
Ka = x(0.01)/0.05
⇒ x/0.05 = Ka/0.01
लेकिन x/0.05 = α, अतः
α = (1.32×10−5)/(10−2)
α = 1.32×10−3
अतः HCl की उपस्थिति में आयनन की मात्रा बहुत कम हो जाती है।
👉 यह common ion effect qualitative और quantitative दोनों तरह के प्रश्नों में बहुत पूछा जाता है।
✅ Ka = 2.1×10−4 (लगभग)
HCNO ⇌ H+ + CNO−
प्रारम्भिक सांद्रता C = 0.1 M
मान लें आयनन की मात्रा α है।
साम्य पर:
[HCNO] = 0.1(1 − α)
[H+] = 0.1α
[CNO−] = 0.1α
Step 1: pH से [H+] निकालें
[H+] = 10−2.34 = 0.00457
लेकिन [H+] = 0.1α
0.1α = 0.00457
⇒ α = 0.00457 / 0.1 = 0.0457
Step 2: Ka की गणना
Ka = [H+][CNO−] / [HCNO]
= ((0.1α)(0.1α)) / (0.1(1−α))
= (0.1α2)/(1−α)
α = 0.0457 रखने पर:
α2 = 0.002088, 1−α = 0.9543
Ka = (0.1×0.002088)/0.9543
= 2.19×10−4 ≈ 2.1×10−4
अतः α = 0.0457 और Ka ≈ 2.1×10−4
👉 α प्रतिशत में चाहिए हो तो α×100 करते हैं (यहाँ 4.57%)।
✅ जल-अपघटन की मात्रा (h) = 2.36 × 10−5
इसलिए विलयन क्षारीय होगा।
ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw + 1/2 pKa + 1/2 log C
दिया है:
Ka = 4.5 × 10−4, C = 0.04, pKw = 14
Step 1: pKa निकालें
pKa = −log(4.5 × 10−4) = 3.35 (लगभग)
Step 2: pH की गणना
pH = 1/2(14) + 1/2(3.35) + 1/2 log(0.04)
= 7 + 1.675 + 1/2(−1.398)
= 7 + 1.675 − 0.699
= 7.976 ≈ 7.975
Step 3: जल-अपघटन की मात्रा (h)
h = √(Kw/(Ka C))
h = √((1.0×10−14)/((4.5×10−4)(0.04)))
= √((1.0×10−14)/(1.8×10−5))
= √(5.56×10−10)
= 2.36×10−5
अतः pH ≈ 7.98 और h = 2.36×10−5
👉 जल-अपघटन (hydrolysis) की मात्रा बहुत छोटी होने पर भी pH में स्पष्ट बदलाव आ सकता है।
ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw − 1/2 pKb − 1/2 log C
जहाँ:
pH = 3.44, pKw = 14, C = 0.02
Step 1: मान रखें
3.44 = 1/2(14) − 1/2 pKb − 1/2 log(0.02)
log(0.02) = −1.699
Step 2: सरल करें
3.44 = 7 − 1/2 pKb + 0.8495
3.44 = 7.8495 − 1/2 pKb
1/2 pKb = 7.8495 − 3.44 = 4.4095
pKb = 8.819 ≈ 8.82
Step 3: Kb निकालें
Kb = 10−pKb = 10−8.82
= 1.5 × 10−9 (लगभग)
अतः Kb ≈ 1.5×10−9
👉 pH से pKb निकालकर सीधे Kb प्राप्त करना salt hydrolysis के सवालों का standard तरीका है।
NaCl, KBr, NaCN, NH4NO3, NaNO2 तथा KF
✅ अम्लीय (Acidic): NH4NO3
✅ क्षारीय (Basic): NaCN, NaNO2, KF
1) प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार → विलयन उदासीन
👉 NaCl (HCl + NaOH)
👉 KBr (HBr + KOH)
2) प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार → विलयन अम्लीय
👉 NH4NO3 (HNO3 + NH4OH/NH3)
3) दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार → विलयन क्षारीय
👉 NaCN (HCN + NaOH)
👉 NaNO2 (HNO2 + NaOH)
👉 KF (HF + KOH)
इसलिए निष्कर्ष:
उदासीन: NaCl, KBr
अम्लीय: NH4NO3
क्षारीय: NaCN, NaNO2, KF
👉 NaCl जैसे salts में दोनों आयन (Na+, Cl−) hydrolysis नहीं करते, इसलिए pH लगभग 7 रहता है।
✅ 0.1 M सोडियम क्लोरोएसीटेट का pH = 7.94
अभिक्रिया:
CH2ClCOOH ⇌ CH2ClCOO− + H+
मान लें आयनन की मात्रा α है। तब,
👉 [CH2ClCOOH] = 0.1(1−α)
👉 [CH2ClCOO−] = 0.1α
👉 [H+] = 0.1α
Ka = ((0.1α)(0.1α)) / 0.1(1−α) ≈ (0.1α)2 / 0.1
1.35×10−3 = (0.1α)2/0.1
⇒ α2 = 0.0135
⇒ α = 0.116
[H+] = 0.1×0.116 = 0.0116
pH = −log(0.0116)
pH = 1.94
(2) 0.1 M सोडियम क्लोरोएसीटेट (weak acid + strong base salt)
ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw + 1/2 pKa + 1/2 log C
जहाँ
pKw = 14
pKa = −log(1.35×10−3) = 2.87
C = 0.1 ⇒ log C = −1
pH = 14/2 + 2.87/2 + (−1)/2
pH = 7 + 1.435 − 0.5
pH = 7.935 ≈ 7.94
अतः:
👉 अम्ल का pH = 1.94
👉 उसके सोडियम लवण का pH = 7.94
👉 क्लोरीन का −I प्रभाव क्लोरोएसीटिक अम्ल को एसीटिक अम्ल से अधिक अम्लीय बनाता है।
[H+] = [OH−]
और
Kw = [H+][OH−] = [H+]2
Step 1: [H+] निकालें
[H+] = √(Kw)
= √(2.7×10−14)
= 1.643×10−7 M
Step 2: pH की गणना
pH = −log[H+]
pH = −log(1.643×10−7)
pH = 7 − log(1.643)
जहाँ log(1.643) = 0.2156
pH = 7 − 0.2156 = 6.7844
अतः: pH ≈ 6.78
👉 इसलिए 310 K पर pH = 6.78 होने के बावजूद जल अभी भी उदासीन है (क्योंकि [H+] = [OH−])।
(क) 0.2 M Ca(OH)2 का 10 mL + 0.1 M HCl का 25 mL
(ख) 0.01 M H2SO4 का 10 mL + 0.01 M Ca(OH)2 का 10 mL
(ग) 0.1 M H2SO4 का 10 mL + 0.1 M KOH का 10 mL
✅ (ख) pH = 7.00
✅ (ग) pH = 1.30
मिलीमोल Ca(OH)2 = 0.2 × 10 = 2.0 mmol
मिलीमोल HCl = 0.1 × 25 = 2.5 mmol
अभिक्रिया: Ca(OH)2 + 2HCl → CaCl2 + 2H2O
1 mmol Ca(OH)2 को 2 mmol HCl चाहिए।
2.5 mmol HCl, Ca(OH)2 के 2.5/2 = 1.25 mmol को उदासीन करेगा।
शेष Ca(OH)2 = 2.0 − 1.25 = 0.75 mmol
कुल आयतन = 10 + 25 = 35 mL
[Ca(OH)2] (शेष) = 0.75/35 = 0.0214 M
[OH−] = 2 × 0.0214 = 4.28 × 10−2 M
pOH = −log(4.28 × 10−2) = 1.37
pH = 14 − 1.37 = 12.63
(ख) 0.01 M H2SO4 (10 mL) + 0.01 M Ca(OH)2 (10 mL)
मिलीमोल H2SO4 = 0.01 × 10 = 0.1 mmol
मिलीमोल Ca(OH)2 = 0.01 × 10 = 0.1 mmol
अभिक्रिया: Ca(OH)2 + H2SO4 → CaSO4 + 2H2O
यह 1:1 अनुपात में पूरी तरह उदासीन हो जाते हैं।
कोई अतिरिक्त अम्ल/क्षार नहीं बचता।
अतः pH = 7.00
(ग) 0.1 M H2SO4 (10 mL) + 0.1 M KOH (10 mL)
मिलीमोल H2SO4 = 0.1 × 10 = 1.0 mmol
मिलीमोल KOH = 0.1 × 10 = 1.0 mmol
अभिक्रिया: H2SO4 + 2KOH → K2SO4 + 2H2O
1 mmol KOH, केवल 0.5 mmol H2SO4 उदासीन करेगा।
शेष H2SO4 = 1.0 − 0.5 = 0.5 mmol
कुल आयतन = 10 + 10 = 20 mL
[H2SO4] शेष = 0.5/20 = 0.025 M
H2SO4 से कुल [H+] ≈ 2 × 0.025 = 0.05 M
pH = −log(5 × 10−2) = 1.30
👉 diprotic acid (H2SO4) और dibasic base (Ca(OH)2) में stoichiometry factor (2) ध्यान से लगाना जरूरी है।
दिया है:
Ksp(Ag2CrO4) = 1.1×10−12
Ksp(BaCrO4) = 1.2×10−10
Ksp(Fe(OH)3) = 1.0×10−38
Ksp(PbCl2) = 1.6×10−5
Ksp(Hg2I2) = 4.5×10−29
👉 विलेयता s = 6.5×10−5 M
👉 [Ag+] = 1.3×10−4 M
👉 [CrO42−] = 6.5×10−5 M
✅ BaCrO4:
👉 s = 1.095×10−5 M
👉 [Ba2+] = 1.095×10−5 M
👉 [CrO42−] = 1.095×10−5 M
✅ Fe(OH)3:
👉 s = 1.39×10−10 M
👉 [Fe3+] = 1.39×10−10 M
👉 [OH−] = 4.17×10−10 M
✅ PbCl2:
👉 s = 1.59×10−2 M
👉 [Pb2+] = 1.59×10−2 M
👉 [Cl−] = 3.17×10−2 M
✅ Hg2I2:
👉 s = 2.24×10−10 M
👉 [Hg22+] = 2.24×10−10 M
👉 [I−] = 4.48×10−10 M
Ag2CrO4 ⇌ 2Ag+ + CrO42−
यदि विलेयता s हो, तो [Ag+] = 2s, [CrO42−] = s
Ksp = (2s)2(s) = 4s3
s = ((1.1×10−12)/4)1/3 = 6.5×10−5 M
[Ag+] = 2s = 1.3×10−4 M, [CrO42−] = s
BaCrO4
BaCrO4 ⇌ Ba2+ + CrO42−
[Ba2+] = [CrO42−] = s
Ksp = s2
s = √(1.2×10−10) = 1.095×10−5 M
Fe(OH)3
Fe(OH)3 ⇌ Fe3+ + 3OH−
[Fe3+] = s, [OH−] = 3s
Ksp = s(3s)3 = 27s4
s = ((1.0×10−38)/27)1/4 = 1.39×10−10 M
[OH−] = 3s = 4.17×10−10 M
PbCl2
PbCl2 ⇌ Pb2+ + 2Cl−
[Pb2+] = s, [Cl−] = 2s
Ksp = s(2s)2 = 4s3
s = ((1.6×10−5)/4)1/3 = (4.0×10−6)1/3 = 1.59×10−2 M
[Cl−] = 2s = 3.17×10−2 M
Hg2I2
Hg2I2 ⇌ Hg22+ + 2I−
[Hg22+] = s, [I−] = 2s
Ksp = s(2s)2 = 4s3
s = ((4.5×10−29)/4)1/3 = 2.24×10−10 M
[I−] = 2s = 4.48×10−10 M
👉 आयनों की मोलरता निकालते समय dissociation coefficients (1, 2, 3...) जरूर गुणा करें, वहीं से अक्सर calculation गलती होती है।
s(Ag2CrO4) / s(AgBr) = 91.9
(लगभग 92 : 1 )
Ag2CrO4 ⇌ 2Ag+ + CrO42−
यदि विलेयता = s, तो:
Ksp = [Ag+]2[CrO42−] = (2s)2(s) = 4s3
s = (Ksp/4)1/3
s = ((1.1×10−12)/4)1/3 = 6.5×10−5 M
2) AgBr के लिए
AgBr ⇌ Ag+ + Br−
यदि विलेयता = s′, तो:
Ksp = s′2
s′ = √(Ksp)
s′ = √(5.0×10−13) = 7.1×10−7 M
3) अनुपात
s/s′ = (6.5×10−5)/(7.1×10−7) = 91.9
अतः संतृप्त मोलरताओं का अनुपात = 91.9 : 1 (लगभग 92 : 1)
👉 यही कारण है कि Ag2CrO4 के लिए 4s3 और AgBr के लिए s2 आता है।
दिया है: Ksp(Cu(IO3)2) = 7.4×10−8
2NaIO3 + CuCrO4 → Na2CrO4 + Cu(IO3)2
समान आयतन मिलाने पर दोनों विलयनों की सांद्रता आधी हो जाएगी:
[IO3−] = 0.002/2 = 1.0×10−3 M
[Cu2+] = 0.002/2 = 1.0×10−3 M
अब ionic product (Qsp) निकालें:
Qsp = [Cu2+][IO3−]2
Qsp = (1.0×10−3)(1.0×10−3)2
Qsp = 1.0×10−9
तुलना:
Qsp = 1.0×10−9
Ksp = 7.4×10−8
क्योंकि Qsp < Ksp , विलयन अभी असंतृप्त है।
इसलिए अवक्षेपण नहीं होगा।
👉 Qsp > Ksp ⇒ अवक्षेपण होगा
👉 Qsp = Ksp ⇒ संतृप्त अवस्था
👉 Qsp < Ksp ⇒ अवक्षेपण नहीं होगा
C6H5COOAg ⇌ C6H5COO− + Ag+
(1) जल में विलेयता = s
Ksp = [Ag+][C6H5COO−] = s2
s = √(2.5×10−13)
s = 5.0×10−7 mol L−1
(2) बफर (pH = 3.19) में
[H+] = 10−3.19 = 6.45×10−4 M
बेंजोइक अम्ल के लिए:
Ka = [H+][C6H5COO−] / [C6H5COOH]
[C6H5COOH] / [C6H5COO−] = [H+] / Ka
= (6.45×10−4) / (6.46×10−5) ≈ 10
मान लें बफर में नई विलेयता = s′
तब [Ag+] = s′
और कुल बेंजोएट-उत्पन्न species:
s′ = [C6H5COO−] + [C6H5COOH]
अनुपात से: [C6H5COOH] = 10[C6H5COO−]
s′ = 11[C6H5COO−] ⇒ [C6H5COO−] = s′/11
अब Ksp लगाएँ:
2.5×10−13 = [Ag+][C6H5COO−] = s′(s′/11) = s′2/11
s′2 = 2.5×10−13 × 11 = 2.75×10−12
s′ = √(2.75×10−12) = 1.66×10−6 mol L−1
(3) गुना विलेयता
s′/s = (1.66×10−6)/(5.0×10−7) = 3.32
अतः बफर में विलेयता 3.32 गुना बढ़ जाती है।
👉 इसे protonation-assisted solubility enhancement के रूप में समझ सकते हैं।
दिया है: Ksp(FeS)=6.3×10−18
xmax = 5.02×10−9 mol L−1
समान आयतन मिलाने पर दोनों की सांद्रता आधी हो जाएगी:
[Fe2+] = x/2, [S2−] = x/2
FeS के लिए अवक्षेपण शुरू होने की सीमा पर:
Qsp = Ksp
[Fe2+][S2−] = 6.3×10−18
(x/2)(x/2) = 6.3×10−18
x2/4 = 6.3×10−18
x2 = 2.52×10−17
x = √(2.52×10−17) = 5.02×10−9 M
यही अधिकतम सांद्रता है जिस पर मिश्रण करते ही अवक्षेपण बनने की कगार पर होगा।
इससे अधिक सांद्रता पर FeS का अवक्षेपण होगा।
👉 equal-volume mixing में concentration आधी हो जाती है, यह step बहुत महत्वपूर्ण है।
दिया है: Ksp(CaSO4) = 9.1×10−6
CaSO4 ⇌ Ca2+ + SO42−
यदि विलेयता = s (mol L−1), तो
Ksp = s2
s = √(9.1×10−6)
s = 3.0×10−3 mol L−1 (लगभग)
Step 2: g/L में बदलें
मोलर द्रव्यमान: M(CaSO4) = 40 + 32 + 64 = 136 g mol−1
g/L में विलेयता = s × M
= (3.0×10−3) × 136
= 0.411 g L−1
अर्थात 1 L जल में अधिकतम 0.411 g CaSO4 घुलेगा।
Step 3: 1 g घोलने के लिए आयतन
V = mass / (solubility in g L−1) = 1 / 0.411
V = 2.43 L (लगभग)
अतः न्यूनतम आवश्यक जल आयतन = 2.43 L
👉 “कम-से-कम जल आयतन” वाले प्रश्न में solution को संतृप्त माना जाता है।
FeSO4, MnCl2, ZnCl2, CdCl2
❌ FeS तथा MnS का अवक्षेप नहीं होगा।
कुल आयतन = 10 + 5 = 15 mL
Step 2: नई सल्फाइड आयन सांद्रता
[S2−]new = 1.0×10−19 × (10/15)
[S2−]new = 6.67×10−20 M
Step 3: धातु आयन की नई सांद्रता
[M2+]new = 0.04 × (5/15)
[M2+]new = 1.33×10−2 M
Step 4: Ionic product (Q)
Q = [M2+][S2−] = (1.33×10−2)(6.67×10−20)
Q = 8.87×10−22
📌 नियम:
👉 Q > Ksp ⇒ अवक्षेप बनेगा
👉 Q < Ksp ⇒ अवक्षेप नहीं बनेगा
ZnS और CdS के Ksp बहुत छोटे होते हैं, इसलिए Q > Ksp होकर अवक्षेप बनता है।
FeS और MnS के लिए Ksp तुलनात्मक रूप से बड़ा होने से Q < Ksp रहता है, इसलिए अवक्षेप नहीं बनता।
अतः ZnCl2 और CdCl2 वाले विलयनों में क्रमशः ZnS और CdS के अवक्षेप मिलेंगे।
📘 Chapter FAQs: Equilibrium, pH, Ksp, Acid-Base (Class 11 Chemistry)
Quick revision for NCERT Chemistry chapter questions on chemical equilibrium, ionic equilibrium, pH, buffer, hydrolysis, and solubility product.
AB2 → A2+ + 2B− ⇒ Ksp = 4s3
इसलिए Ksp compare करते समय stoichiometric factor जरूर consider करें।
यदि Qsp = Ksp तो solution saturated है।
यदि Qsp < Ksp तो precipitate नहीं बनेगा।
