जिस अभिक्रिया में एक species का oxidation और दूसरी का reduction साथ-साथ हो, उसे redox reaction कहते हैं। पहचान का आसान तरीका: oxidation number में एक का मान बढ़े और दूसरे का घटे।
NCERT Solutions for Class 11 Chemistry Chapter 7 – Redox Reactions (अपचयोपचय अभिक्रियाएँ)
📘 यहाँ आपको Class 11 Chemistry Chapter 7 Redox Reactions NCERT Solutions (Hindi + English Medium) में सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सटीक उत्तर और Step-by-Step Explanation मिलेंगे। इस chapter में Oxidation number method, Balancing redox equations, Oxidising & Reducing agents, Disproportionation, Equivalent mass concept और electron transfer approach को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपकी board exam के साथ JEE/NEET preparation भी मजबूत हो। ✅
👉 किसी भी question को जल्दी ढूंढने के लिए नीचे दिए गए Search Box में Q. नंबर (जैसे Q.3, Q.14) या question का keyword (जैसे redox, oxidation number, oxidising agent, reducing agent, disproportionation, electron transfer) टाइप करें। ✅
- Example: Search में लिखें: Q.10 या Oxidation number या Redox balance
- Tip: 2–3 keyword से सही question जल्दी मिल जाता है।
- Mobile: Browser का Find in page (Chrome: Menu → Find in page) भी use कर सकते हैं।
(क) NaH2PO4
(ख) NaHSO4
(ग) H4P2O7
(घ) K2MnO4
(ङ) CaO2
(च) NaBH4
(छ) H2S2O7
(ज) KAl(SO4)2·12H2O
✅ (ख) NaHSO4 में S = +6
✅ (ग) H4P2O7 में P = +5
✅ (घ) K2MnO4 में Mn = +6
✅ (ङ) CaO2 में O = −1 (peroxide oxygen)
✅ (च) NaBH4 में B = +3
✅ (छ) H2S2O7 में S = +6
✅ (ज) KAl(SO4)2·12H2O में S = +6
Extra: इसी यौगिक में Al = +3, K = +1
👉 H प्रायः +1
👉 O प्रायः −2 (लेकिन peroxide में −1)
👉 क्षार धातु (Na, K) = +1
👉 कुल योग: neutral यौगिक के लिए 0, ion के लिए ion का आवेश
(क) NaH2PO4 में P
मान लें P = x
(+1)+2(+1)+x+4(−2)=0
1+2+x−8=0
⇒ x=+5
✅ P = +5
(ख) NaHSO4 में S
मान लें S = x
(+1)+(+1)+x+4(−2)=0
2+x−8=0
⇒ x=+6
✅ S = +6
(ग) H4P2O7 में P
मान लें प्रत्येक P = x
4(+1)+2x+7(−2)=0
4+2x−14=0
⇒ 2x=10
⇒ x=+5
✅ P = +5
(घ) K2MnO4 में Mn
मान लें Mn = x
2(+1)+x+4(−2)=0
2+x−8=0
⇒ x=+6
✅ Mn = +6
(ङ) CaO2 में O
यह peroxide है, इसलिए O की oxidation number −2 नहीं, बल्कि −1 होती है।
जांच: Ca=+2, 2(O)=−2 ⇒ O=−1
✅ O = −1
(च) NaBH4 में B
इसे Na+ और BH4− की तरह देखें।
अगर H = +1 लें, तो x+4(+1)=−1 ⇒ x=−5 (यह यहाँ उपयुक्त नहीं)।
BH4− में H hydride प्रकृति का होता है, इसलिए H = −1 लें:
x+4(−1)=−1
⇒ x=+3
✅ B = +3
(छ) H2S2O7 में S
मान लें प्रत्येक S = x
2(+1)+2x+7(−2)=0
2+2x−14=0
⇒ 2x=12
⇒ x=+6
✅ S = +6
(ज) KAl(SO4)2·12H2O में S
sulfate आयन SO42− में S निकालें:
x+4(−2)=−2
⇒ x=+6
✅ S = +6
Extra check: K=+1, Al=+3, दो sulfate = −4, कुल योग = 0
👉 Sulfate SO42− में S सामान्यतः +6 आता है।
👉 Phosphate PO43− में P सामान्यतः +5 होता है।
(क) KI3
(ख) H2S4O6
(ग) Fe3O4
(घ) CH3CH2OH
(ङ) CH3COOH
(संरचनात्मक रूप से: I2 भाग में I = 0, और I− में I = −1)
✅ (ख) H2S4O6 में S की औसत ऑक्सीकरण संख्या = +5/2 (या +2.5)
(वास्तविक संरचना में 2 S = +5 और 2 S = 0)
✅ (ग) Fe3O4 में Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या = +8/3
(वास्तव में यह FeO·Fe2O3 है, यानी 1 Fe2+ और 2 Fe3+)
✅ (घ) CH3CH2OH में
• CH3 वाला C = −3
• CH2OH वाला C = −1
(औसत C = −2)
✅ (ङ) CH3COOH में
• CH3 वाला C = −3
• COOH वाला (कार्बॉक्सिल) C = +3
(दोनों C का औसत = 0)
👉 H = +1 (अधिकांश यौगिकों में)
👉 O = −2 (सामान्यतः)
👉 कुल योग = उदासीन अणु के लिए 0, आयन के लिए आयनिक charge
(क) KI3 में I
KI3 को K+[I3]− की तरह लें।
K = +1, इसलिए I3− पर कुल −1 charge होगा।
3x = −1
⇒ x = −1/3
✅ औसत I = −1/3
लेकिन यह fractional मान औसत है। संरचना I2···I− जैसी मानी जाती है:
👉 I2 में I = 0
👉 I− में I = −1
(ख) H2S4O6 में S
मान लें S की औसत ऑक्सीकरण संख्या x है:
2(+1)+4x+6(−2)=0
2+4x−12=0
⇒ 4x=10
⇒ x=+5/2
✅ औसत S = +2.5
परंतु टेट्राथियोनिक अम्ल की संरचना में सभी S समान नहीं होते:
👉 अंतिम दो S (SO3 से जुड़े) = +5
👉 बीच के दो S (S–S) = 0
(ग) Fe3O4 में Fe
मान लें Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या x:
3x+4(−2)=0
3x−8=0
⇒ x=+8/3
✅ औसत Fe = +8/3
यह mixed oxide है: FeO·Fe2O3
अर्थात् 1 Fe2+ और 2 Fe3+
(घ) CH3CH2OH में C
एक-एक C का मान अलग से निकालें।
C(1) = CH3−
👉 3 C–H bonds ⇒ C को −3 योगदान
👉 1 C–C bond ⇒ 0 योगदान
⇒ C(1) = −3
C(2) = −CH2OH
👉 2 C–H ⇒ −2
👉 1 C–O ⇒ +1 (O अधिक विद्युतऋणात्मक)
👉 1 C–C ⇒ 0
⇒ C(2) = −1
(ङ) CH3COOH में C
Methyl carbon (CH3):
👉 3 C–H ⇒ −3
👉 1 C–C ⇒ 0
⇒ C = −3
Carboxyl carbon (COOH):
👉 1 C=O (double bond) ⇒ +2
👉 1 C–O (single bond) ⇒ +1
👉 1 C–C ⇒ 0
⇒ C = +3
📌 Organic compounds में C की oxidation state निकालने का आसान नियम:
👉 C–H bond: carbon को −1
👉 C–O / C–N / C–X (halogen): carbon को +1
👉 C–C bond: 0
(क) CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2B2H6(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2KF(s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
👉 CuO में Cu = +2, उत्पाद में Cu = 0
⇒ Cu का अपचयन (reduction)
👉 H2 में H = 0, H2O में H = +1
⇒ H का ऑक्सीकरण (oxidation)
✅ अतः यह redox अभिक्रिया है।
(ख) Fe2O3 + 3CO → 2Fe + 3CO2
👉 Fe2O3 में Fe = +3, उत्पाद Fe में 0
⇒ Fe का अपचयन
👉 CO में C = +2, CO2 में C = +4
⇒ C का ऑक्सीकरण
✅ अतः यह redox अभिक्रिया है।
(ग) 4BCl3 + 3LiAlH4 → 2B2H6 + 3LiCl + 3AlCl3
मुख्य बदलाव B और H पर देखें:
👉 BCl3 में B = +3
👉 B2H6 में H को +1 मानने पर B = −3
(2x + 6(+1)=0 ⇒ x=−3)
⇒ B: +3 से −3, अपचयन
👉 LiAlH4 में H = −1 (metal hydride)
👉 B2H6 में H = +1
⇒ H: −1 से +1, ऑक्सीकरण
✅ अतः यह redox अभिक्रिया है।
(घ) 2K + F2 → 2KF
👉 K (मुक्त अवस्था) = 0, KF में K = +1
⇒ K का ऑक्सीकरण
👉 F2 में F = 0, KF में F = −1
⇒ F का अपचयन
✅ अतः यह redox अभिक्रिया है।
(ङ) 4NH3 + 5O2 → 4NO + 6H2O
👉 NH3 में N = −3
👉 NO में N = +2
⇒ N: −3 से +2, ऑक्सीकरण
👉 O2 में O = 0
👉 H2O/NO में O = −2
⇒ O: 0 से −2, अपचयन
✅ अतः यह redox अभिक्रिया है।
| अभिक्रिया | ऑक्सीकरण (Oxidation) | अपचयन (Reduction) |
|---|---|---|
| (क) CuO + H2 | H: 0 → +1 | Cu: +2 → 0 |
| (ख) Fe2O3 + CO | C: +2 → +4 | Fe: +3 → 0 |
| (ग) BCl3 + LiAlH4 | H: −1 → +1 | B: +3 → −3 |
| (घ) K + F2 | K: 0 → +1 | F: 0 → −1 |
| (ङ) NH3 + O2 | N: −3 → +2 | O: 0 → −2 |
• सभी मुख्य तत्त्वों की oxidation number लिखो
• जो बढ़े = oxidation
• जो घटे = reduction
• दोनों साथ हों तो reaction redox है ✅
👉 मुक्त अवस्था वाले तत्त्व (K, F2, O2, H2, Fe) की ऑक्सीकरण संख्या हमेशा 0 होती है।
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
इस अभिक्रिया का ऑक्सीकरण-अपचयन (redox) औचित्य स्थापित कीजिए।
✅ इसमें F2 का F, 0 से −1 में जाता है, इसलिए F का अपचयन होता है।
✅ H2O का O, −2 से 0 में जाता है (HOF में), इसलिए O का ऑक्सीकरण होता है।
✅ अतः यह redox reaction है।
H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g)
Step 2: सभी संबंधित तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या (oxidation number) लिखें
👉 H2O में: H = +1, O = −2
👉 F2 में: F = 0
👉 HF में: H = +1, F = −1
👉 HOF में: F = −1 (fluorine अधिक विद्युतऋणात्मक होने से)
अब HOF में O का मान x मानकर:
(+1) + x + (−1) = 0 ⇒ x = 0
अर्थात HOF में:
👉 H = +1
👉 O = 0
👉 F = −1
Step 3: oxidation और reduction पहचानें
👉 Fluorine:
F: 0 → −1
⇒ अपचयन (Reduction)
👉 Oxygen:
O: −2 → 0
⇒ ऑक्सीकरण (Oxidation)
👉 Hydrogen:
H: +1 → +1
⇒ कोई परिवर्तन नहीं
Step 4: निष्कर्ष
एक पदार्थ (oxygen) का आक्सीकरण और दूसरें पदार्थ (F) का अपचयन साथ-साथ हो रहा है, इसलिए: ✅ यह अभिक्रिया redox अभिक्रिया है।
👉 इस reaction में fluorine oxidizing agent की तरह काम करता है और स्वयं reduced हो जाता है।
👉 याद रखने का rule: Redox में कम-से-कम एक तत्त्व का oxidation number बढ़ना और एक का घटना जरूरी है।
✅ Cr2O72− में Cr = +6
✅ NO3− में N = +5
❌ गलत तरीका (Fallacy वाला)
सभी O को −2 मान लिया:
2(+1) + x + 5(−2) = 0
⇒ x = +8
यह असंभव है (S सामान्यतः +6 से ऊपर नहीं जाता)।
✅ सही तरीका (Structure-based)
H2SO5 (Caro’s acid) में पेरोक्सी बॉन्ड (−O−O−) होता है:
HO−S(=O)2−O−OH
यहाँ:
👉 3 O का O.S. = −2
👉 2 O (peroxo) का O.S. = −1
👉 H = +1
अब:
2(+1) + x + 3(−2) + 2(−1) = 0
2 + x − 6 − 2 = 0
⇒ x = +6
✅ इसलिए S की सही O.S. = +6
(ii) Cr2O72− में Cr की O.S.
2x + 7(−2) = −2
2x − 14 = −2
⇒ 2x = 12
⇒ x = +6
✅ Cr = +6
संरचना विचार: दो CrO4 इकाइयाँ एक −O− से जुड़ी होती हैं:
O3Cr−O−CrO32−
(iii) NO3− में N की O.S.
x + 3(−2) = −1
x − 6 = −1
⇒ x = +5
✅ N = +5
(NO3− में resonance होता है, पर oxidation number +5 ही रहता है।)
Fallacy (हेत्वाभास) का स्पष्ट निष्कर्ष
👉 Fallacy मुख्यतः H2SO5 में आती है, जब सभी O को −2 मान लेते हैं।
👉 पेरोक्सो ऑक्सीजन की पहचान करते ही O.S. सही निकलती है और S = +6 आता है।
👉 Cr2O72− और NO3− में सामान्य गणना सीधे सही परिणाम देती है।
✅ अनुनाद वाले ion (जैसे NO3−) में बंध कोटि बदल सकती है, oxidation number नहीं।
(क) मरक्यूरिक (II) क्लोराइड
(ख) निकेल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (III) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड
✅ (ख) NiSO4
✅ (ग) SnO2
✅ (घ) Tl2SO4
✅ (ङ) Fe2(SO4)3
✅ (च) Cr2O3
👉 Hg(II) = Hg2+
👉 Cl− का आवेश = −1
👉 आवेश संतुलन के लिए 2 Cl− चाहिए
Hg2+ + 2Cl− → HgCl2
(ख) निकेल (II) सल्फेट
👉 Ni(II) = Ni2+
👉 SO42−
👉 1:1 अनुपात में आवेश संतुलित
Ni2+ + SO42− → NiSO4
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
👉 Sn(IV) = Sn4+
👉 O2−
👉 1 Sn4+ को संतुलित करने हेतु 2 O2−
Sn4+ + 2O2− → SnO2
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
👉 Tl(I) = Tl+
👉 SO42−
👉 2 Tl+ चाहिए
2Tl+ + SO42− → Tl2SO4
(ङ) आयरन (III) सल्फेट
👉 Fe(III) = Fe3+
👉 SO42−
👉 LCM(3,2)=6 ⇒ 2 Fe3+ (+6) और 3 SO42− (−6)
2Fe3+ + 3SO42− → Fe2(SO4)3
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड
👉 Cr(III) = Cr3+
👉 O2−
👉 LCM(3,2)=6 ⇒ 2 Cr3+ और 3 O2−
2Cr3+ + 3O2− → Cr2O3
👉 सूत्र लिखने का fastest तरीका: पहले ion का charge लिखो, फिर cross-multiply करके सबसे छोटे whole-number ratio में लिखो।
👉 Polyatomic ion (जैसे SO42−) एक से अधिक हों तो bracket लगाते हैं, जैसे Fe2(SO4)3।
| कार्बन की O.S. | यौगिक (उदाहरण) |
|---|---|
| −4 | CH4 |
| −3 | CH3—CH3 |
| −2 | CH3Cl |
| −1 | CH≡CH |
| 0 | CH2Cl2 |
| +2 | CHCl3 |
| +4 | CCl4 |
| नाइट्रोजन की O.S. | यौगिक (उदाहरण) |
|---|---|
| −3 | NH3 |
| −2 | NH2—NH2 |
| −1 | NH2OH |
| 0 | N2 |
| +1 | N2O |
| +2 | NO |
| +3 | N2O3 |
| +4 | NO2 |
| +5 | N2O5 |
📌 कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था
👉 C–H bond में carbon अधिकतर negative O.S. की तरफ जाता है (जैसे CH4 में −4)।
👉 जैसे-जैसे halogen/oxygen जैसे अधिक electronegative atoms जुड़ते हैं, carbon की O.S. बढ़ती जाती है।
👉 इसलिए CH4 से CCl4 तक जाने पर C की O.S. −4 से +4 तक cover हो जाती है।
📌 नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण अवस्था
👉 NH3 में N सबसे कम (−3) पर होता है।
👉 oxides में O की मात्रा बढ़ने पर N की O.S. बढ़ती जाती है।
👉 इसलिए NH3 से N2O5 तक N की O.S. −3 से +5 तक मिल जाती है।
👉 Nitrogen की wide range (−3 to +5) की वजह से ही nitrogen compounds biology, उद्योग और वातावरण में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
✅ O3 और HNO3 में संबंधित तत्व ऐसी अवस्था में होते हैं जहाँ वे सामान्यतः अपनी oxidation state केवल घटाते हैं, बढ़ा नहीं पाते; इसलिए ये केवल ऑक्सीकारक की तरह कार्य करते हैं।
• SO2 में S की O.S. = +4
• S की सामान्य range: −2 से +6
• इसलिए S:
○ +4 → +6 जा सकता है (oxidation) ⇒ SO2 acts as अपचायक
○ +4 → lower value (जैसे 0, −2) जा सकता है (reduction) ⇒ SO2 acts as ऑक्सीकारक
✅ इसलिए SO2 दोनों roles दिखाता है।
2) H2O2 क्यों दोनों तरह से काम करता है?
• H2O2 में O की O.S. = −1 (peroxide oxygen)
• O सामान्यतः −2 तक घट सकता है और 0 तक बढ़ सकता है
• इसलिए O(−1):
○ −1 → −2 (reduction of oxygen in peroxide) ⇒ H2O2 as ऑक्सीकारक
○ −1 → 0 (oxidation of oxygen in peroxide) ⇒ H2O2 as अपचायक
✅ इसलिए H2O2 भी dual behavior दिखाता है।
3) O3 केवल oxidizing agent क्यों?
• O3 में O की O.S. = 0
• O की O.S. 0 से आमतौर पर कम होकर −1/−2 होती है
• यानी O3 स्वयं reduce होता है और सामने वाले को oxidize करता है
✅ इसलिए O3 मुख्यतः केवल ऑक्सीकारक है।
4) HNO3 केवल oxidizing agent क्यों?
• HNO3 में N की O.S. = +5
• N की यह उच्चतम सामान्य O.S. है
• अब N की O.S. बढ़ नहीं सकती, केवल घट सकती है
• इसलिए HNO3 स्वयं reduce होता है और दूसरे पदार्थ का oxidation कराता है
✅ इसलिए HNO3 केवल ऑक्सीकारक है।
| पदार्थ | प्रमुख तत्व की O.S. | आगे परिवर्तन की संभावना | व्यवहार |
|---|---|---|---|
| SO2 | S = +4 | बढ़ भी सकती, घट भी सकती | ऑक्सीकारक + अपचायक दोनों |
| H2O2 | O = −1 | 0 तक बढ़, −2 तक घट | ऑक्सीकारक + अपचायक दोनों |
| O3 | O = 0 | मुख्यतः घटती है | केवल ऑक्सीकारक |
| HNO3 | N = +5 | केवल घटती है | केवल ऑक्सीकारक |
ऑक्सीकरण अवस्था अगर बीच में है → दोनों roles संभव।
ऑक्सीकरण अवस्था अगर बहुत high (max) या बहुत low (min) है → आमतौर पर single role dominate करता है।
👉 H2O2 bleaching में ऑक्सीकारक की तरह बहुत उपयोगी है, लेकिन कुछ reactions में यह अपचायक भी बन जाता है।
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
बताइए कि इन्हें निम्न प्रकार से लिखना अधिक उपयुक्त क्यों है—
(क) 6CO2(g) + 12H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + O2(g) + O2(g)
उपरोक्त अपचयोपचय अभिक्रियाओं (क) तथा (ख) के अन्वेषण की विधि सुझाइए।
✅ (क) प्रकाश-संश्लेषण में बनने वाला O2 पानी (H2O) से आता है, CO2 से नहीं। इसलिए 12H2O लेकर 6H2O वापस दिखाना mechanistic clarity देता है।
✅ (ख) O3 + H2O2 अभिक्रिया में बनने वाले 2 O2 अणु एक जैसे दिखते हैं, पर उनकी उत्पत्ति अलग हो सकती है। O2 + O2 लिखने से source-tracking आसान होता है।
✅ इनका अन्वेषण isotopic tracer technique (विशेषकर 18O labeling) से किया जाता है।
सामान्य रूप:
6CO2 + 6H2O → C6H12O6 + 6O2
यह net equation है, पर source नहीं बताती।
ज़्यादा informative रूप:
6CO2 + 12H2O → C6H12O6 + 6H2O + 6O2
यह दिखाता है कि:
👉 कुछ पानी अभिक्रिया करता है
👉 कुछ पानी उत्पाद के रूप में पुनः प्राप्त होता है
👉 और O2 का वास्तविक स्रोत H2O होता है
इसलिए redox path समझाने के लिए expanded form बेहतर है।
(ख) O3 + H2O2 अभिक्रिया
सामान्य रूप:
O3 + H2O2 → H2O + 2O2
अधिक स्पष्ट रूप:
O3 + H2O2 → H2O + O2 + O2
यह लेखन यह संकेत देता है कि बने हुए दोनों O2 molecules की origin tracing की जा सकती है (एक O3 से, दूसरा H2O2 से, reaction pathway के अनुसार)।
अन्वेषण की सुझाई गई विधि (Tracer Technique)
1) अभिक्रिया (क): प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
👉 H218O का उपयोग करें (labeled water)
👉 यदि O2 में 18O मिलता है, तो सिद्ध होता है कि O2 पानी से आया
(इसी तरह C18O2 से comparative test भी किया जा सकता है)
2) अभिक्रिया (ख): O3 + H2O2
👉 या तो 18O-labeled O3 लें, या H218O2 लें
👉 उत्पाद O2 का isotopic analysis (mass spectrometry) करें
👉 समस्थानिक वितरण से पता चल जाएगा कि कौन-सा O2 किस क्रियाकारक से आया
👉 कई बार रासायनिक समीकरण सही होते हैं, लेकिन वे यह नहीं बताते कि कौन-सा परमाणु किस पदार्थ से आया।
👉 यह पता करने के लिए वैज्ञानिक ट्रेसर तकनीक (जैसे 18O वाला ऑक्सीजन) का उपयोग करते हैं।
👉 इसलिए इस प्रश्न में अभिक्रिया को अलग तरीके से लिखना अधिक सही माना जाता है, क्योंकि इससे O2 के स्रोत को समझना आसान हो जाता है।
✅ Ag2+ आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Ag+ (अधिक स्थिर अवस्था) में बदलना चाहता है।
✅ इसलिए AgF2 दूसरे पदार्थों से इलेक्ट्रॉन खींच लेता है, और इस कारण यह बहुत प्रबल ऑक्सीकारक (oxidizing agent) की तरह व्यवहार करता है।
AgF2 में प्रत्येक F का O.S. = −1 होता है।
तो Ag का O.S. = +2 होगा।
x + 2(−1) = 0
⇒ x = +2
Step 2: स्थिरता की तुलना
👉 Ag के लिए +1 अवस्था सामान्यतः ज्यादा स्थिर मानी जाती है।
👉 +2 अवस्था अपेक्षाकृत अस्थिर होती है।
Step 3: इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृति
Ag2+ का tendency:
Ag2+ + e− → Ag+
यह अपचयन आसानी से होता है।
Step 4: ऑक्सीकारक की भाँति क्यों?
जो पदार्थ स्वयं अपचयित होने के लिए तैयार हो, वह दूसरी पदार्थ का ऑक्सीकरण करता है (उससे e− लेती है)।
इसीलिए AgF2 बहुत शक्तिशाली ऑक्सीकारक की तरह काम करता है।
👉 +2 अवस्था पाने पर Ag “जल्दी से” +1 में वापस आना चाहता है।
👉 यही कारण है कि AgF2 इलेक्ट्रॉन लेने में बहुत तेज होता है और प्रबल ऑक्सीकारक माना जाता है।
✅ यदि reducing agent (अपचायक) अधिक हो, तो उत्पाद में तत्व अपेक्षाकृत निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था में मिलता है।
✅ यदि oxidising agent (ऑक्सीकारक) अधिक हो, तो वही तत्व उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था तक ऑक्सीकृत हो जाता है।
नीचे 3 उदाहरण:
(i) C की अधिकता (अपचायक की अधिकता में):
2C(s) + O2(g) → 2CO(g)
यहाँ C की O.S. in CO = +2 (lower)
(ii) O2 की अधिकता (ऑक्सीकारक की अधिकता में):
C(s) + O2(g) → CO2(g)
यहाँ C की O.S. in CO2 = +4 (higher)
✅ निष्कर्ष: oxidising agent बढ़ने पर C की oxidation state +2 से +4 तक बढ़ गई।
उदाहरण 2: Na और O2
(i) Na की अधिकता (अपचायक की अधिकता में):
4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
Na2O में O की O.S. = −2 (lower)
(ii) O2 की अधिकता (ऑक्सीकारक की अधिकता में):
2Na(s) + O2(g) → Na2O2(s)
Na2O2 में O की O.S. = −1 (higher)
✅ निष्कर्ष: oxidising conditions में oxygen higher oxidation state (−1) वाले peroxide में मिलती है।
उदाहरण 3: P और Cl2
(i) P की अधिकता (अपचायक की अधिकता में):
P4(s) + 6Cl2(g) → 4PCl3(l)
PCl3 में P की O.S. = +3 (lower)
(ii) Cl2 की अधिकता (ऑक्सीकारक की अधिकता में):
P4(s) + 10Cl2(g) → 4PCl5(s)
PCl5 में P की O.S. = +5 (higher)
✅ निष्कर्ष: oxidising agent की अधिकता में P +3 से +5 तक जाता है。
Final निष्कर्ष
ऊपर के तीनों उदाहरण स्पष्ट करते हैं:
👉 अपचायक अधिक ⟶ lower oxidation state वाला उत्पाद
👉 ऑक्सीकारक अधिक ⟶ higher oxidation state वाला उत्पाद
इसलिए दिया गया कथन पूर्णतः उचित है।
👉 यही सिद्धांत metallurgy, combustion control और industrial oxidation processes में बहुत उपयोगी है।
👉 Competitive exams में “excess reagent” देखकर product predict करना एक बहुत important trick है।
(क) यद्यपि क्षारीय तथा अम्लीय KMnO4 दोनों ऑक्सीकारक हैं, फिर भी टॉल्यून से बेंजोइक अम्ल बनाने के लिए प्रायः क्षारीय/अल्कलाइन KMnO4 का उपयोग क्यों किया जाता है? इस अभिक्रिया के लिए संतुलित अपचयोपचय (redox) समीकरण दीजिए।
(ख) क्लोराइड युक्त मिश्रण में सान्द्र H2SO4 डालने पर HCl गैस मिलती है, पर यदि मिश्रण में ब्रोमाइड भी हो, तो ब्रोमीन के लाल वाष्प क्यों मिलते हैं?
C6H5CH3 + 2KMnO4 → C6H5COOH + 2MnO2 + 2KOH
(ख) सान्द्र H2SO4 क्लोराइड लवण के साथ HCl गैस निकाल देता है:
2NaCl + H2SO4 → 2NaHSO4 + 2HCl↑
HCl दुर्बल अपचायक है, इसलिए यह H2SO4 को SO2 तक reduce नहीं कर पाता।
लेकिन अगर bromide हो, तो पहले HBr बनता है:
2NaBr + H2SO4 → 2NaHSO4 + 2HBr
HBr मजबूत/प्रबल अपचायक है, इसलिए यह H2SO4 को reduce कर देता है और खुद oxidize होकर Br2 बनाता है:
2HBr + H2SO4 → Br2 + SO2 + 2H2O
इसलिए लाल-भूरे ब्रोमीन वाष्प दिखाई देते हैं।
👉 टॉलूईन में -CH3 group benzylic position पर होता है।
👉 Oxidation में यही group -COOH में बदलता है।
👉 बहुत प्रबल क्षारीय अथवा अम्लीय माध्यम में अवांछित सह-अभिक्रियाएँ बढ़ सकती हैं।
👉 इसलिए ऐल्कोहॉलिक KMnO4 को वरीयता दी जाती है।
(ख) Chloride vs Bromide with conc. H2SO4
👉 Chloride case: HCl gas निकलती है (acid displacement)।
👉 HCl दुर्बल अपचायक है, इसलिए आगे redox नहीं करता।
👉 Bromide case: पहले HBr बनता है।
👉 HBr प्रबल अपचायक है, इसलिए H2SO4 को SO2 में reduce करता है।
👉 खुद HBr oxidize होकर Br2 देता है, जो लाल-भूरे fumes देता है।
• Cl− → mostly HCl
• Br− → Br2 (red-brown vapours)
👉 यही कारण है कि lab में bromide की पहचान में ब्रोमीन के लाल-भूरे धुएँ बहुत useful clue होते हैं।
👉 Organic oxidation में solvent/medium बदलने से product selectivity और yield पर बड़ा असर पड़ता है।
(क) 2AgBr(s) + C6H6O2(aq) → 2Ag(s) + 2HBr(aq) + C6H4O2(aq)
(ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH−(aq) → 2Ag(s) + HCOO−(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
(ग) HCHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH−(aq) → Cu2O(s) + HCOO−(aq) + 3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O2(l) → N2(g) + 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)
| क्रम | ऑक्सीकारित पदार्थ | अपचयित पदार्थ | ऑक्सीकारक | अपचायक |
|---|---|---|---|---|
| (क) | C6H6O2(aq) | AgBr(s) | AgBr(s) | C6H6O2(aq) |
| (ख) | HCHO(l) | [Ag(NH3)2]+(aq) | [Ag(NH3)2]+(aq) | HCHO(l) |
| (ग) | HCHO(l) | Cu2+(aq) | Cu2+(aq) | HCHO(l) |
| (घ) | N2H4(l) | H2O2(l) | H2O2(l) | N2H4(l) |
| (ङ) | Pb(s) | PbO2(s) | PbO2(s) | Pb(s) |
👉 AgBr में Ag: +1 → Ag(s) में 0 ⇒ reduction
👉 C6H6O2 → C6H4O2 (H कम हुआ) ⇒ oxidation
(ख) (Tollens type)
👉 HCHO → HCOO− ⇒ C की O.S. बढ़ती है ⇒ oxidation
👉 [Ag(NH3)2]+ का Ag(+1) → Ag(0) ⇒ reduction
(ग) (Fehling/Benedict type)
👉 HCHO → HCOO− ⇒ oxidation
👉 Cu2+ → Cu2O (Cu+) ⇒ reduction
(घ)
👉 N2H4 में N: −2 → N2 में 0 ⇒ oxidation
👉 H2O2 में O: −1 → H2O में −2 ⇒ reduction
(ङ) (Lead-acid battery reaction)
👉 Pb(0) → PbSO4 में Pb(+2) ⇒ oxidation
👉 PbO2 में Pb(+4) → PbSO4 में Pb(+2) ⇒ reduction
• जो खुद अपचयित होती है, वही ऑक्सीकारक पदार्थ होती है।
• जो खुद ऑक्सीकृत होती है, वही अपचायक पदार्थ होती है।
👉 HCHO दोनों tests में अपचायक पदार्थ की तरह काम करता है:
• Tollens’ reagent (Ag mirror)
• Cu2+ reagent (Cu2O precipitate)
👉 Pb और PbO2 वाली अभिक्रिया lead-acid battery के discharge process की मुख्य redox अभिक्रिया है।
2S2O32−(aq) + I2(s) → S4O62−(aq) + 2I−(aq)
S2O32−(aq) + 2Br2(l) + 5H2O(l) → 2SO42−(aq) + 4Br−(aq) + 10H+(aq)
जबकि I2 अपेक्षाकृत दुर्बल ऑक्सीकारक है, इसलिए यह S2O32− को केवल टेट्राथायोनेट S4O62− (S की औसत O.S. = +2.5) तक ही ऑक्सीकारित करता है।
इसी कारण एक ही अपचायक S2O32−, Br2 और I2 के साथ अलग-अलग उत्पाद देता है।
2S2O32− + I2 → S4O62− + 2I−
S2O32− + 2Br2 + 5H2O → 2SO42− + 4Br− + 10H+
Step 2: Sulfur की oxidation state compare करें
👉 S2O32− में S (औसत) = +2
👉 S4O62− में S (औसत) = +2.5
👉 SO42− में S = +6
मतलब:
👉 I2 के साथ oxidation कम degree तक होता है (+2 → +2.5)
👉 Br2 के साथ oxidation बहुत आगे तक जाता है (+2 → +6)
Step 3: कारण
ऑक्सीकारक की शक्ति अलग है:
Br2 > I2
इसलिए Br2 ज़्यादा गहरा (deep) oxidation कराता है, जबकि I2 हल्का oxidation कराता है।
Step 4: निष्कर्ष
एक ही reducing agent होने के बावजूद product oxidizing agent की strength पर निर्भर करता है।
इसलिए S2O32− का Br2 और I2 के साथ behavior अलग दिखता है।
👉 Oxidizing agent जितना मजबूत होगा, oxidation उतना आगे तक जाएगा।
👉 Product देखकर कई बार oxidizing strength का अनुमान लगाया जा सकता है (जैसे यहाँ tetrathionate vs sulfate)।
F2 > Cl2 > Br2 > I2
अतः F2 सबसे प्रबल ऑक्सीकारक है।
✅ हाइड्रोजैलिक अम्लों (HX) की अपचायक क्षमता का क्रम:
HI > HBr > HCl > HF
अतः HI सबसे प्रबल अपचायक है।
यदि कोई हैलोजन दूसरे हैलाइड आयन (X−) को ऑक्सीकृत कर दे, तो वह उससे प्रबल oxidant है।
F2 की अभिक्रियाएँ
F2 + 2Cl− → 2F− + Cl2
F2 + 2Br− → 2F− + Br2
F2 + 2I− → 2F− + I2
F2 तीनों (Cl−, Br−, I−) को oxidize कर देता है।
इसलिए F2 सबसे प्रबल oxidizing agent है।
Cl2 और Br2 की तुलना
Cl2 + 2Br− → 2Cl− + Br2
Cl2 + 2I− → 2Cl− + I2
Cl2, Br− और I− को oxidize करता है, पर Cl− को नहीं।
Br2 + 2I− → 2Br− + I2
Br2 केवल I− को oxidize करता है।
I2 किसी बड़े halide को oxidize नहीं कर पाता।
इससे क्रम स्पष्ट: F2 > Cl2 > Br2 > I2
2) HI श्रेष्ठ अपचायक क्यों?
HX में अपचायक प्रवृत्ति मुख्यतः X− की electron देने की क्षमता पर निर्भर करती है। I− सबसे आसानी से ऑक्सीकृत होता है, इसलिए HI प्रबल अपचायक acid है।
H2SO4 के साथ
2HBr + H2SO4 → Br2 + SO2 + 2H2O
2HI + H2SO4 → I2 + SO2 + 2H2O
यह दिखाता है कि HBr और HI, H2SO4 को reduce कर सकते हैं; HI अधिक प्रबल है।
HCl बनाम HF (उदाहरण)
MnO2 + 4HCl → MnCl2 + Cl2 + 2H2O
MnO2 + 4HF → कोई अभिक्रिया नहीं
यह बताता है कि HF की reducing power बहुत कमजोर है।
इसलिए HX का reducing क्रम:
HI > HBr > HCl > HF
👉 Hydrohalic acids में reducing power नीचे जाते हुए बढ़ती है, इसलिए HI सबसे strong reducing acid है।
👉 यही trend lab displacement reactions और redox prediction में बहुत काम आता है।
XeO64−(aq) + 2F−(aq) + 6H+(aq) → XeO3(s) + F2(g) + 3H2O(l)
यौगिक Na4XeO6 (जिसमें XeO64− उपस्थित है) के बारे में इस अभिक्रिया से क्या निष्कर्ष निकलता है?
👉 XeO64− में Xe की O.S. +8 से XeO3 में +6 हो जाती है ⇒ अपचयन
👉 F− में F की O.S. −1 से F2 में 0 हो जाती है ⇒ ऑक्सीकरण
चूँकि F− का ऑक्सीकरण होकर F2 बन रहा है, इसका मतलब XeO64− बहुत प्रबल ऑक्सीकारक है।
अतः Na4XeO6 (जिसमें XeO64− आयन है) को एक प्रबल oxidizing agent माना जाएगा।
👉 XeO64− के लिए:
x + 6(−2) = −4
⇒ x = +8
👉 XeO3 में Xe = +6
👉 F− में F = −1
👉 F2 में F = 0
Step 2: कौन oxidize, कौन reduce?
👉 Xe: +8 → +6 ⇒ reduction
👉 F: −1 → 0 ⇒ oxidation
Step 3: Reaction की driving force
जो species दूसरे को oxidize कर दे, वह खुद reduce होती है और oxidizing agent कहलाती है।
यहाँ XeO64−, F− जैसी species को भी oxidize कर रहा है, इसलिए इसकी oxidizing strength बहुत अधिक है।
Step 4: Na4XeO6 पर निष्कर्ष
Na4XeO6 में active redox species XeO64− है।
इसलिए:
✅ Na4XeO6 एक बहुत प्रबल ऑक्सीकारक यौगिक है।
👉 F− को F2 में oxidize कर पाना आसान नहीं होता, इसलिए यह reaction oxidizing power का strong evidence है।
👉 Noble gas compounds (जैसे xenon compounds) inert गैसों की chemistry का शानदार उदाहरण हैं।
(क) H3PO2(aq) + 4AgNO3(aq) + 2H2O(l) → H2PO4(aq) + 4Ag(s) + 4HNO3(aq)
(ख) H3PO2(aq) + 2CuSO4(aq) + 2H2O(l) → H3PO4(aq) + 2Cu(s) + 2H2SO4(aq)
(ग) C6H5CHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH−(aq) → C6H5COO−(aq) + 2Ag(s) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
(घ) C6H5CHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH−(aq) → कोई परिवर्तन नहीं
इन अभिक्रियाओं से Ag+ तथा Cu2+ के व्यवहार के विषय में निष्कर्ष निकालिए।
✅ Ag+ और Cu2+ दोनों ऑक्सीकारक हैं, क्योंकि दोनों H3PO2 को H3PO4 में ऑक्सीकृत कर देते हैं।
✅ लेकिन Ag+, Cu2+ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है।
क्योंकि [Ag(NH3)2]+ बेंज़ाल्डिहाइड (C6H5CHO) को C6H5COO− (या benzoic acid form) तक ऑक्सीकृत कर देता है, जबकि Cu2+ ऐसा नहीं कर पाता।
H3PO2 → H3PO4
यह oxidation है (P की oxidation state बढ़ती है)।
👉 (क) में Ag+ reduce होकर Ag(s) बनता है
👉 (ख) में Cu2+ reduce होकर Cu(s) बनता है
इसलिए दोनों ions oxidizing agents हैं।
Step 2: अभिक्रिया (ग) क्या बताती है?
C6H5CHO → C6H5COO−
यह भी oxidation है।
यह reaction [Ag(NH3)2]+ के साथ हो जाती है, यानी silver complex पर्याप्त strong oxidant है।
Step 3: अभिक्रिया (घ) क्या बताती है?
C6H5CHO + Cu2+ + OH− → कोई परिवर्तन नहीं
मतलब Cu2+ की oxidizing शक्ति इतनी नहीं है कि वह benzaldehyde को oxidize कर सके।
Final निष्कर्ष
👉 दोनों oxidants हैं: Ag+, Cu2+
👉 लेकिन तुलनात्मक रूप से:
Ag+ > Cu2+ (oxidizing strength)
यानी Ag+ अधिक प्रबल ऑक्सीकारक है।
👉 हर aldehyde Cu2+ वाले reagent से आसानी से oxidize नहीं होता; aromatic aldehydes (जैसे benzaldehyde) अक्सर milder conditions में react नहीं करते।
👉 इसलिए qualitative analysis में Ag+ और Cu2+ reagents का उपयोग अलग-अलग sensitivity के लिए किया जाता है।
(क) MnO4−(aq) + I−(aq) → MnO2(s) + I2(s) (क्षारीय माध्यम)
(ख) MnO4−(aq) + SO2(g) → Mn2+(aq) + HSO4−(aq) (अम्लीय माध्यम)
(ग) H2O2(aq) + Fe2+(aq) → Fe3+(aq) + H2O(l) (अम्लीय माध्यम)
(घ) Cr2O72−(aq) + SO2(g) → Cr3+(aq) + SO42−(aq) (अम्लीय माध्यम)
2MnO4−(aq) + 6I−(aq) + 4H2O(l) → 2MnO2(s) + 3I2(s) + 8OH−(aq)
(ख) अम्लीय माध्यम
2MnO4−(aq) + 5SO2(g) + 2H2O(l) + H+(aq) → 2Mn2+(aq) + 5HSO4−(aq)
(ग) अम्लीय माध्यम
H2O2(aq) + 2Fe2+(aq) + 2H+(aq) → 2Fe3+(aq) + 2H2O(l)
(घ) अम्लीय माध्यम
Cr2O72−(aq) + 3SO2(g) + 2H+(aq) → 2Cr3+(aq) + 3SO42−(aq) + H2O(l)
Oxidation half:
2I− → I2 + 2e−
Reduction half (basic):
MnO4− + 2H2O + 3e− → MnO2 + 4OH−
LCM = 6, oxidation ×3 और reduction ×2; जोड़ने पर:
2MnO4− + 6I− + 4H2O → 2MnO2 + 3I2 + 8OH−
(ख) MnO4− + SO2 → Mn2+ + HSO4− (acidic)
Reduction half:
MnO4− + 8H+ + 5e− → Mn2+ + 4H2O
Oxidation half:
SO2 + 2H2O → HSO4− + 3H+ + 2e−
LCM = 10, reduction ×2 और oxidation ×5; सरल करने पर:
2MnO4− + 5SO2 + 2H2O + H+ → 2Mn2+ + 5HSO4−
(ग) H2O2 + Fe2+ → Fe3+ + H2O (acidic)
Oxidation half:
Fe2+ → Fe3+ + e−
Reduction half:
H2O2 + 2H+ + 2e− → 2H2O
Fe half ×2; जोड़ने पर:
H2O2 + 2Fe2+ + 2H+ → 2Fe3+ + 2H2O
(घ) Cr2O72− + SO2 → Cr3+ + SO42− (acidic)
Reduction half:
Cr2O72− + 14H+ + 6e− → 2Cr3+ + 7H2O
Oxidation half:
SO2 + 2H2O → SO42− + 4H+ + 2e−
Oxidation ×3; जोड़कर सरल करने पर:
Cr2O72− + 3SO2 + 2H+ → 2Cr3+ + 3SO42− + H2O
• half-reactions अलग करो
• O को H2O से balance करो
• H को acidic में H+, basic में OH− से balance करो
• charge को e− से balance करो
• electrons equal करके जोड़ दो
👉 Basic medium वाले सवालों में पहले acidic balance करके अंत में OH− जोड़कर convert करना बहुत आसान ट्रिक है।
(CN)2(g) + 2OH−(aq) → CN−(aq) + CNO−(aq) + H2O(l)
✅ यह असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रिया है।
✅ (CN)2 का एक भाग अपचयित होकर CN− बनता है।
✅ (CN)2 का दूसरा भाग ऑक्सीकारित होकर CNO− बनता है।
✅ अभिक्रिया क्षारीय माध्यम (OH−) में होती है।
एक ही reactant (CN)2 से दो अलग products बन रहे हैं:
👉 CN− (reduced form)
👉 CNO− (oxidized form)
यानी same species का oxidation और reduction दोनों हो रहा है।
Step 2: क्यों disproportionation?
असमानुपातन (Disproportionation) की पहचान यही है कि:
👉 एक ही पदार्थ simultaneously oxidize भी हो और reduce भी।
यहाँ (CN)2 यही कर रहा है।
Step 3: Medium की जानकारी
LHS में OH− और RHS में H2O है, इसलिए अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में है।
👉 क्षारीय माध्यम पहचानने का आसान संकेत: reactant side पर OH− और product side पर H2O।
(क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(घ) न ऋणात्मक और न ही धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है।
(क) केवल ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है
✅ F (फ्लोरीन)
यह सबसे अधिक वैद्युतऋणात्मक तत्त्व है, इसलिए सामान्यतः केवल −1 ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है।
(ख) केवल धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है
✅ Cs (सीज़ियम)
यह क्षार धातु है और बहुत अधिक वैद्युतधनात्मक है, इसलिए सामान्यतः केवल +1 ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है।
(ग) ऋणात्मक तथा धनात्मक दोनों ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दिखाता है
✅ I (आयोडीन)
यह हैलोजन है, इसलिए −1 अवस्था दिखाता है।
साथ ही यह +1, +3, +5, +7 जैसी धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ भी दिखा सकता है।
(घ) न ऋणात्मक, न धनात्मक ऑक्सीकरण अवस्था दिखाता है
✅ Ne (नीऑन)
यह noble gas (उत्कृष्ट गैस) है और सामान्यतः अभिक्रिया नहीं करता, इसलिए ऑक्सीकरण अवस्था practically 0 ही रहती है।
2. Cs इलेक्ट्रॉन बहुत आसानी से त्यागता (छोड़ता) है, इसलिए +1 में स्थिर रहता है।
3. I कभी इलेक्ट्रॉन लेता है (−1), कभी कुछ यौगिकों में साझा/त्यागकर + oxidation states भी दिखाता है।
4. Ne का outer shell पूरा भरा होता है, इसलिए यह बहुत कम क्रियाशील है।
👉 Alkali metals (जैसे Cs) लगभग हमेशा +1 oxidation state में मिलते हैं।
👉 Noble gases में से Ne सबसे कम reactive गैसों में से एक है।
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2Cl− + SO42− + 4H+
यही अभिक्रिया बताती है कि:
👉 Cl2 का अपचयन होकर Cl− बनता है
👉 SO2 का ऑक्सीकरण होकर SO42− बनता है
Cl2 + SO2 → Cl− + SO42−
Step 2: दो अर्द्ध-अभिक्रियाएँ बनाएं
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया (SO2 to SO42−):
SO2 + 2H2O → SO42− + 4H+ + 2e−
अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया (Cl2 to Cl−):
Cl2 + 2e− → 2Cl−
Step 3: दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाएँ जोड़ें
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2Cl− + SO42− + 4H+
(यहाँ 2e− कट जाते हैं)
Step 4: अंतिम संतुलित समीकरण
Cl2 + SO2 + 2H2O → 2Cl− + SO42− + 4H+
👉 SO2 क्लोरीन को क्लोराइड आयन (Cl−) में बदल देता है, इसलिए इसका उपयोग डी-क्लोरीनेशन (dechlorination) में किया जाता है।
👉 इस अभिक्रिया में क्लोरीन ऑक्सीकारक (oxidizing agent) और सल्फर डाइऑक्साइड अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करते हैं।
(क) संभावित अधातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन (disproportionation) की अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
(ख) किन्हीं तीन धातुओं के नाम बताइए, जो असमानुपातन अभिक्रिया प्रदर्शित कर सकती हों।
✅ फॉस्फोरस (P4), क्लोरीन (Cl2), सल्फर (S)
(ख) तीन धातुएँ
✅ ताँबा (Cu), गैलियम (Ga), इंडियम (In)
👉 बढ़ती भी है (oxidation)
👉 और घटती भी है (reduction)
इसलिए ऐसे तत्व/आयन चाहिए जिनकी एक से अधिक oxidation states संभव हों।
(1) अधातु क्यों?
👉 P, Cl, S कई oxidation states दिखाते हैं, इसलिए इनमें disproportionation संभव है।
👉 उदाहरण:
Cl2 + 2OH− → Cl− + ClO− + H2O
(यहाँ Cl: 0 से −1 और +1)
(2) धातु क्यों?
Cu, Ga, In में +1 अवस्था अक्सर स्थायी होती है और disproportionation कर सकती है:
2Cu+ → Cu2+ + Cu
3Ga+ → Ga3+ + 2Ga
3In+ → In3+ + 2In
(3) Oxidation states
👉 Cu: +2, +1, 0
👉 Ga: +3, +1, 0
👉 In: +3, +1, 0
इसी वजह से, जब कोई तत्त्व अलग-अलग oxidation state में रह सकता है, तो एक ही reaction में उसका कुछ हिस्सा oxidation और कुछ हिस्सा reduction कर लेता है। इसी को ‘असमानुपातन’ कहते हैं।
👉 p-block के कई अधातु (जैसे Cl, S, P) इस प्रकार की reactions देने के लिए प्रसिद्ध हैं।
यदि 10.0 g NH3 और 20.00 g O2 लिए जाएँ, तो NO की अधिकतम कितनी मात्रा प्राप्त हो सकती है?
4NH3 + 5O2 → 4NO + 6H2O
इससे clear है:
👉 4 mol NH3 को 5 mol O2 चाहिए
👉 यानी O2 ज्यादा consume होता है
Mass basis पर:
👉 4 × 17 = 68 g NH3
👉 5 × 32 = 160 g O2
👉 4 × 30 = 120 g NO
अब check करें सीमांत अभिकर्मक:
10.0 g NH3 के लिए O2 चाहिए:
(160/68) × 10.0 = 23.53 g O2
लेकिन उपलब्ध O2 सिर्फ 20.00 g है, इसलिए O2 limiting reagent है।
अब NO की अधिकतम मात्रा O2 से निकलेगी:
160 g O2 → 120 g NO
20.00 g O2 → (120/160) × 20.00 = 15.00 g NO
∵ 160 g O2 से प्राप्त होती है NO = 120 g
∴ 20.00 g O2 से प्राप्त होगी NO = (120/160) × 20.00 = 15.00 g
✅ अधिकतम मात्रा NO = 15.00 g
👉 Ostwald process में NO पहले oxidize होकर NO2 बनाता है, और आगे चलकर HNO3 (नाइट्रिक अम्ल) बनता है।
(क) Fe3+ तथा I−(aq)
(ख) Ag+ तथा Cu(s)
(ग) Fe3+(aq) तथा Br−(aq)
(घ) Ag(s) तथा Fe3+(aq)
(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+(aq)
2Fe3+(aq) + 2I−(aq) → 2Fe2+(aq) + I2(s)
✅ (ख) संभव
Cu(s) + 2Ag+(aq) → Cu2+(aq) + 2Ag(s)
❌ (ग) असंभव
❌ (घ) असंभव
✅ (ङ) संभव
Br2(aq) + 2Fe2+(aq) → 2Br−(aq) + 2Fe3+(aq)
Ecell∘ = Ecathode∘ − Eanode∘
अगर Ecell∘ > 0, तो अभिक्रिया संभव मानी जाती है।
(क) Fe3+ तथा I−
Ecell∘ = 0.77 − 0.54 = +0.23 V
इसलिए अभिक्रिया संभव है।
(ख) Ag+ तथा Cu(s)
Ecell∘ = 0.80 − 0.34 = +0.46 V
इसलिए अभिक्रिया संभव है।
(ग) Fe3+(aq) तथा Br−(aq)
Ecell∘ = 0.77 − 1.09 = −0.32 V
इसलिए अभिक्रिया असंभव है।
यहाँ Fe3+, Br− को oxidize नहीं कर पाता क्योंकि Br2/Br− couple का E∘ अधिक है।
(घ) Ag(s) तथा Fe3+(aq)
Ecell∘ = 0.77 − 0.80 = −0.03 V
इसलिए अभिक्रिया असंभव है।
(ङ) Br2(aq) तथा Fe2+(aq)
Ecell∘ = 1.09 − 0.77 = +0.32 V
इसलिए अभिक्रिया संभव है।
Final निष्कर्ष
✅ (क), (ख), (ङ) संभव
❌ (ग), (घ) असंभव
👉 Halogen couples में Br2/Br− का potential काफी high होता है, इसलिए हर oxidant Br− को Br2 में नहीं बदल पाता।
(क) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
(ख) प्लेटिनम इलेक्ट्रोड के साथ AgNO3 का जलीय विलयन
(ग) प्लेटिनम इलेक्ट्रोड के साथ H2SO4 का तनु विलयन
(घ) प्लेटिनम इलेक्ट्रोड के साथ CuCl2 का जलीय विलयन
👉 कैथोड: Ag(s) जमा होती है
👉 ऐनोड: Ag(s) घुलकर Ag+ बनाता है
(यानी anode dissolves)
(ख) Pt electrodes + AgNO3(aq)
👉 कैथोड: Ag(s) जमा होती है
👉 ऐनोड: O2(g) निकलती है
(ग) Pt electrodes + dilute H2SO4(aq)
👉 कैथोड: H2(g)
👉 ऐनोड: O2(g)
(घ) Pt electrodes + CuCl2(aq)
👉 कैथोड: Cu(s) जमा होता है
👉 ऐनोड:
🤔 विलयन सान्द्र हो तो Cl2(g)
🤔 बहुत dilute हो तो O2(g) भी मिल सकती है
(प्रैक्टिकल/सान्द्र CuCl2 में सामान्यतः Cl2 मिलता है)
👉 विद्युतअपघट्य में कौन-से ions हैं
👉 विद्युतअपघट्य अक्रिय (inert) है या सक्रिय (active)
(क) सक्रिय ऐनोड (Ag)
👉 कैथोड पर reduction: Ag+ + e− → Ag
👉 ऐनोड पर Ag खुद ऑक्सीकरण होता है: Ag → Ag+ + e−
इसलिए ऐनोड ‘घुलना’ करता है।
(ख) अक्रिय ऐनोड (Pt) AgNO3 के साथ
👉 कैथोड: Ag+ आसानी से reduce होकर Ag देता है
👉 ऐनोड: nitrate usually oxidize नहीं होता, इसलिए water oxidize होकर O2 देता है
(ग) अक्रिय इलेक्ट्रोड के साथ तनु अम्ल
👉 कैथोड: 2H+ + 2e− → H2
👉 ऐनोड: जल के ऑक्सीकरण से O2
(घ) CuCl2 with Pt
👉 कैथोड: Cu2+ का निक्षेपित (मुक्त) होकर Cu धातु बनता है।
👉 ऐनोड: Cl− की सान्द्रता अधिक हो तो Cl− → Cl2 बनेगा।
👉 बहुत dilute में पानी से O2 भी संभव।
👉 Electrorefining में यही principle use होता है: impure metal ऐनोड से dissolve होकर pure metal कैथोड पर जमा होता है।
👉 Aqueous विद्युत-अपघटन में ऐनोड product कई बार concentration पर depend करता है (खासकर halide solutions में)।
Al, Cu, Fe, Mg तथा Zn
Mg > Al > Zn > Fe > Cu
👉 जो धातु ज्यादा reactive होती है, वह कम reactive धातु को उसके salt solution से बाहर निकाल देती है।
👉 इसलिए active metal ऊपर आता है, less reactive नीचे।
दिए गए metals में:
👉 Mg सबसे ज्यादा reactive
👉 फिर Al
👉 फिर Zn
👉 फिर Fe
👉 और Cu सबसे कम reactive
इसलिए final order:
Mg > Al > Zn > Fe > Cu
👉 Copper (Cu) least reactive होने की वजह से corrosion-resistant applications में useful है।
👉 Magnesium बहुत reactive होने के कारण sacrificial anode के रूप में भी use होता है।
K+/K = -2.93V, Ag+/Ag = +0.80V, Hg2+/Hg = +0.79V, Mg2+/Mg = -2.37V, Cr3+/Cr = -0.74V
Ag < Hg < Cr < Mg < K
👉 जितना E∘ ज्यादा ऋणात्मक होगा, धातु उतनी प्रबल अपचायक (reducing agent) होगी।
👉 जितना E∘ धनात्मक/कम ऋणात्मक होगा, अपचायक क्षमता उतनी कम होगी।
अब दिए गए मान देखें:
👉 Ag: +0.80V
👉 Hg: +0.79V
👉 Cr: -0.74V
👉 Mg: -2.37V
👉 K: -2.93V
ऋणात्मकता बढ़ने के साथ अपचायक क्षमता बढ़ती है, इसलिए final order:
Ag < Hg < Cr < Mg < K
👉 Ag और Hg noble character के करीब होते हैं, इसलिए उनकी reducing power काफी कम होती है।
👉 Electrochemistry में metal reactivity predict करने का सबसे तेज तरीका E∘ values compare करना है।
Zn(s) + 2Ag+(aq) → Zn2+(aq) + 2Ag(s)
अब बताइए कि—
(क) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है?
(ख) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन हैं?
(ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ क्या हैं?
Zn(s) ∣ Zn2+(aq) ∣∣ Ag+(aq) ∣ Ag(s)
(क) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित है?
✅ Zn इलेक्ट्रोड (anode) ऋण आवेशित होता है।
क्योंकि Zn का ऑक्सीकरण होता है और यह इलेक्ट्रॉन छोड़ता है।
(ख) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन हैं?
✅ बाहरी तार में: इलेक्ट्रॉन (e−)
✅ विलयन/सॉल्ट ब्रिज में: आयन (cation + anion)
👉 बाहरी परिपथ: e−, Zn से Ag की ओर जाते हैं।
👉 आंतरिक परिपथ: सॉल्ट ब्रिज के आयन (जैसे K+, NO3−) तथा घोल के आयन charge balance बनाए रखते हैं।
(ग) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर अभिक्रियाएँ
ऐनोड पर (ऑक्सीकरण, Zn):
Zn(s) → Zn2+(aq) + 2e−
कैथोड पर (अपचयन, Ag):
2Ag+(aq) + 2e− → 2Ag(s)
👉 ऑक्सीकरण हमेशा ऐनोड पर होती है, इसलिए Zn = ऐनोड।
👉 Zn इलेक्ट्रॉन त्यागता है, इसलिए Zn इलेक्ट्रोड ऋणावेशित होता है (galvanic cell में)।
👉 Ag+ ions इलेक्ट्रॉन लेकर Ag metal बनाते हैं, इसलिए Ag कैथोड है।
👉 आवेश उदासीन बनाए रखने के लिए विलयन में आयन गति करते हैं।
👉 Electrolytic cell में इसका sign उल्टा हो सकता है (external battery की वजह से)।
👉 Zn-Ag cell का Ecell∘ positive आता है, इसलिए reaction spontaneous होती है।
📘 Class 11 Chemistry Chapter 8 Redox Reactions FAQs (Hindi Medium)
NCERT आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न, आसान भाषा में उत्तर, exam-focused concepts, oxidation number tricks, electrochemistry basics और redox balancing methods.
Quick rules: H = +1, O = −2 (peroxide में O = −1), alkali metals = +1. Neutral compound में कुल योग 0 और ion में कुल योग ion charge के बराबर होता है।
Oxidizing agent खुद reduce होता है और दूसरे को oxidize करता है।
Reducing agent खुद oxidize होता है और दूसरे को reduce करता है।
जब एक ही तत्व एक ही reaction में simultaneously oxidation और reduction दोनों दिखाए, उसे disproportionation कहते हैं। उदाहरण: Cl2 + 2OH− → Cl− + ClO− + H2O
Half-reaction method use करें: पहले O को H2O से balance करें, फिर H को acidic में H+ और basic में OH− से। अंत में charge balance के लिए e− जोड़ें और half reactions combine करें।
Formula: E°cell = E°cathode − E°anode
अगर E°cell > 0, reaction spontaneous मानी जाती है।
Galvanic cell में anode पर oxidation और cathode पर reduction होती है। सामान्यतः galvanic cell में anode negative और cathode positive होता है।
KMnO4 की reduction medium पर depend करती है। acidic में Mn(+7) अक्सर Mn2+ तक आता है, जबकि basic/neutral medium में MnO2 बन सकता है।
Halogens में F2 strongest oxidizing agent माना जाता है। सामान्य trend: F2 > Cl2 > Br2 > I2
पहले oxidation number rules याद करें, फिर oxidizing/reducing agent पहचानें, उसके बाद half-reaction balancing daily practice करें। NCERT exercise + previous year numericals + E°cell based prediction पर focus करें।
