NCERT Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 8Aldehydes, Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल)

📘 यहाँ आपको Class 12 Chemistry Chapter 8 NCERT Solutions (Hindi + English Medium) में सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सटीक उत्तर और Step-by-Step Explanation मिलेंगे। इस chapter में IUPAC nomenclature, Nucleophilic addition reactions, Aldol condensation, Cannizzaro reaction, Acidity of carboxylic acids, Named reactions (Rosenmund, Clemmensen, Wolff-Kishner), और Tests & distinctions को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपकी board exam preparation के साथ JEE/NEET foundation भी मजबूत हो। ✅

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NCERT Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 8 – Aldehydes, Ketones and Carboxylic Acids (ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल)
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Q. 2: निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए —
(i) CH3CH(CH3)CH2CH2CHO
(ii) CH3CH2COCH(C2H5)CH2CH2Cl
(iii) CH3CH=CHCHO
(iv) CH3COCH2COCH3
(v) CH3CH(CH3)CH2C(CH3)2COCH3
(vi) (CH3)3CCH2COOH
(vii) OHC–C6H4–CHO (p)
Answer (उत्तर)
✅ (i) 4-मेथिलपेन्टानल
✅ (ii) 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सान-3-ओन
✅ (iii) ब्यूट-2-एनल
✅ (iv) पेन्टेन-2,4-डायोन
✅ (v) 4,4,6-ट्राइमेथिलहेप्टान-2-ओन
✅ (vi) 3,3-डाइमेथिलब्यूटेनोइक अम्ल
✅ (vii) बेंजीन-1,4-डाइकार्बैल्डिहाइड (सामान्य नाम: टेरेफ्थैल्डिहाइड)
Explanation (व्याख्या – चरणबद्ध)
👉 सबसे पहले मुख्य क्रियात्मक समूह (functional group) पहचानते हैं:
–CHO होने पर यौगिक ऐल्डिहाइड होता है
>C=O (श्रृंखला के बीच) होने पर कीटोन होता है
–COOH होने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल होता है

👉 अब ऐसी सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनते हैं जिसमें मुख्य क्रियात्मक समूह शामिल हो।
👉 क्रमांकन (numbering) हमेशा उस सिरे से करते हैं जहाँ मुख्य क्रियात्मक समूह को सबसे छोटा स्थानांक (locant) मिले।

(i) CH3CH(CH3)CH2CH2CHO
👉 –CHO कार्बन को C-1 माना जाएगा।
👉 कुल 5 कार्बन की मुख्य श्रृंखला है, इसलिए मूल नाम पेन्टानल।
👉 C-4 पर एक मेथिल उपस्थापी है।
✅ नाम: 4-मेथिलपेन्टानल

(ii) CH3CH2COCH(C2H5)CH2CH2Cl
👉 सबसे लंबी श्रृंखला 6 कार्बन की है।
👉 कीटोन समूह को छोटा स्थानांक देने पर कार्बोनिल C-3 पर आता है।
👉 C-4 पर एथिल और C-6 पर क्लोरो उपस्थापी मिलता है।
✅ नाम: 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सान-3-ओन

(iii) CH3CH=CHCHO
👉 –CHO वाला कार्बन C-1 होगा।
👉 कुल 4 कार्बन श्रृंखला: ब्यूटेनल आधार।
👉 द्वि-बंध C-2 पर है।
✅ नाम: ब्यूट-2-एनल

(iv) CH3COCH2COCH3
👉 कुल 5 कार्बन श्रृंखला।
👉 दो कीटोन समूह C-2 और C-4 पर उपस्थित हैं।
✅ नाम: पेन्टेन-2,4-डायोन

(v) CH3CH(CH3)CH2C(CH3)2COCH3
👉 कीटोन सहित सबसे लंबी श्रृंखला 7 कार्बन की मिलती है।
👉 कार्बोनिल को न्यूनतम स्थानांक देने पर वह C-2 पर आता है।
👉 मेथिल उपस्थापी C-4, C-4 और C-6 पर हैं।
✅ नाम: 4,4,6-ट्राइमेथिलहेप्टान-2-ओन

(vi) (CH3)3CCH2COOH
👉 –COOH कार्बन को C-1 लेते हैं।
👉 मुख्य श्रृंखला 4 कार्बन की बनती है: ब्यूटेनोइक अम्ल।
👉 C-3 पर दो मेथिल उपस्थापी हैं।
✅ नाम: 3,3-डाइमेथिलब्यूटेनोइक अम्ल

(vii) OHC–C6H4–CHO (para)
👉 बेंजीन वलय पर दो formyl (–CHO) समूह para (1,4) स्थिति पर हैं।
✅ नाम: बेंजीन-1,4-डाइकार्बैल्डिहाइड
✅ प्रचलित नाम: टेरेफ्थैल्डिहाइड
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
IUPAC नामकरण में सबसे आम गलती यह होती है कि विद्यार्थी मुख्य श्रृंखला सही नहीं चुनते

✅ ऐल्डिहाइड में –CHO कार्बन हमेशा श्रृंखला का अंतिम कार्बन होता है, इसलिए क्रमांकन उसी ओर से शुरू किया जाता है।

✅ जब –CHO सीधे वलय (ring) से जुड़ा हो, तो कई यौगिकों में कार्बाल्डिहाइड शब्द प्रयोग होता है।

✅ कीटोन वाले यौगिकों में नाम लिखते समय यह अवश्य जाँचें कि कार्बोनिल कार्बन को सबसे छोटा स्थानांक मिला है या नहीं।
Q.20: यद्यपि फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक होती हैं, फिर भी कार्बोक्सिलिक अम्ल फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल होते हैं। क्यों?
Answer (उत्तर)
✅ कार्बोक्सिलिक अम्ल के संयुग्मी क्षार (कार्बोक्सिलेट आयन, RCOO) में ऋणावेश दो विद्युतऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर समान रूप से विस्थानित (delocalized) हो जाता है।

✅ फीनॉल के संयुग्मी क्षार (फीनॉक्साइड आयन, C6H5O) में अनुनाद तो अधिक संरचनाएँ देता है, लेकिन ऋणावेश का बड़ा भाग ऑक्सीजन से हटकर कम विद्युतऋणात्मक कार्बन परमाणुओं पर चला जाता है, जो उतना स्थिरीकरण नहीं देता।

✅ इसलिए कार्बोक्सिलेट आयन फीनॉक्साइड आयन से अधिक स्थिर होता है, और परिणामस्वरूप कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल से अधिक प्रबल अम्ल होते हैं।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
👉 अम्ल की प्रबलता मुख्यतः उसके संयुग्मी क्षार की स्थिरता पर निर्भर करती है।
जिसका संयुग्मी क्षार जितना स्थिर, उसका अम्ल उतना प्रबल।

👉 कार्बोक्सिलिक अम्ल से H+ निकलने पर RCOO (कार्बोक्सिलेट आयन) बनता है।
इसमें ऋणावेश दोनों ऑक्सीजन पर बाँटा जाता है।

👉 ऑक्सीजन बहुत अधिक विद्युतऋणात्मक होती है, इसलिए वह ऋणावेश को अच्छी तरह स्थिर कर लेती है।

👉 फीनॉल से H+ निकलने पर C6H5O (फीनॉक्साइड आयन) बनता है।
इसमें अनुनाद के कारण ऋणावेश रिंग के ऑर्थो/पैरा कार्बनों पर भी जाता है।

👉 कार्बन, ऑक्सीजन जितना विद्युतऋणात्मक नहीं है, इसलिए कार्बन पर गया ऋणावेश उतना स्थिर नहीं होता।

👉 इसी कारण “अनुनादी संरचनाओं की संख्या अधिक” होना अकेला मानदंड नहीं है; ऋणावेश कहाँ स्थित है और कितनी प्रभावी स्थिरता मिल रही है, यह अधिक महत्वपूर्ण है।

👉 इसलिए अंतिम निष्कर्ष:
कार्बोक्सिलेट आयन > फीनॉक्साइड आयन (स्थिरता)
अतः कार्बोक्सिलिक अम्ल > फीनॉल (अम्लीय प्रबलता)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ सामान्यतः कार्बोक्सिलिक अम्ल का pKa लगभग 4–5 के आसपास होता है, जबकि फीनॉल का pKa लगभग 10 होता है।

pKa जितना कम, अम्ल उतना अधिक प्रबल।

✅ इसी कारण एसीटिक अम्ल जैसे कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल की तुलना में बहुत अधिक अम्लीय व्यवहार दिखाते हैं।
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