Class 11 Chemistry Chapter 7 NCERT SolutionsEquilibrium (साम्यावस्था)

📘 यहां आपको Class 11 Chemistry Chapter 7 Equilibrium NCERT Solutions (English + Hindi Medium) में NCERT के सभी प्रश्न-उत्तर और Step-by-Step Explanation मिलेंगे। इस chapter में Equilibrium constant (Kc, Kp), Reaction quotient (Q), Le Chatelier’s Principle, Ionic equilibrium, pH, pKa, Buffer solution, Solubility product (Ksp), Acid–Base और Common ion effect जैसे topics को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपकी Board परीक्षा के साथ JEE/NEET तैयारी भी मजबूत हो। ✅

🔎 Question Search कैसे करें?

👉 किसी भी question को जल्दी ढूंढने के लिए नीचे दिए गए Search Box में Q. नंबर (जैसे Q.5, Q.18) या question का कोई keyword (जैसे equilibrium constant, Kc, Kp, Le Chatelier, pH, buffer, Ksp) टाइप करें। ✅

  • Example: Search में लिखें: Q.12 या Kc या pH
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Class 11 Chemistry Chapter 2 NCERT Solutions – Structure of Atom (परमाणु की संरचना)
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Q.1: एक द्रव को सीलबंद पात्र में निश्चित ताप पर उसके वाष्प के साथ साम्य में रखा जाता है। पात्र का आयतन अचानक बढ़ा दिया जाता है।

(क) वाष्प-दाब परिवर्तन का प्रारम्भिक परिणाम क्या होगा?
(ख) प्रारम्भ में वाष्पन तथा संघनन की दर कैसे बदलेगी?
(ग) जब साम्य पुनः अंतिम रूप से स्थापित हो जाएगा तब अंतिम वाष्प-दाब क्या होगा?
उत्तर
✅ (क) प्रारम्भ में वाष्प-दाब घट जाएगा।
✅ (ख) वाष्पन की दर लगभग समान रहेगी, पर संघनन की दर प्रारम्भ में घट जाएगी।
✅ (ग) नया साम्य बनने पर अंतिम वाष्प-दाब पहले जितना ही रहेगा।
व्याख्या – Step by Step
(क) प्रारम्भ में वाष्प-दाब क्यों घटता है?
आयतन अचानक बढ़ने पर वही वाष्प (लगभग वही mol) बड़े आयतन में फैल जाती है, इसलिए उसका दाब तुरंत कम हो जाता है।

(ख) वाष्पन और संघनन की दर का क्या होगा?
वाष्पन (evaporation) मुख्यतः द्रव की सतह और ताप पर निर्भर करता है, इसलिए नियत ताप पर इसकी दर लगभग स्थिर रहती है।
संघनन (condensation) वाष्प के कणों की संख्या/दाब पर निर्भर करता है। दाब घटते ही सतह पर टकराने वाले कण कम हो जाते हैं, इसलिए संघनन की दर घट जाती है।

👉 इसलिए शुरू में वाष्पन > संघनन हो जाएगा और अधिक वाष्प बनेगी।

(ग) अंतिम वाष्प-दाब वही क्यों रहता है?
कुछ समय बाद और वाष्प बनकर दाब बढ़ाती है, जब तक कि फिर से:
वाष्पन की दर = संघनन की दर

और नियत ताप पर द्रव का संतृप्त वाष्प-दाब (saturated vapour pressure) एक निश्चित मान होता है, जो केवल ताप पर निर्भर करता है।
✅ इसलिए अंतिम वाष्प-दाब पहले जैसा ही हो जाता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 संतृप्त वाष्प दाब का सबसे आसान rule:

✅ नियत ताप पर यह केवल ताप पर निर्भर करता है, पात्र के आयतन पर नहीं।

बस equilibrium तक पहुँचने में समय लग सकता है।
Q.2: निम्न साम्य के लिए Kc क्या होगा, यदि साम्य पर प्रत्येक पदार्थ की सान्द्रता है:
[SO2] = 0.60 M, [O2] = 0.82 M, [SO3] = 1.90 M

2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
उत्तर
Kc = 12.23 L mol−1 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Kc का सूत्र लिखें
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)

\( K_c=\frac{[SO_3]^2}{[SO_2]^2\,[O_2]} \)

Step 2: मान रखकर गणना करें
👉 [SO3]2 = (1.90)2 = 3.61
👉 [SO2]2 = (0.60)2 = 0.36
👉 नीचे = 0.36 × 0.82 = 0.2952

अब,
Kc = 3.61 / 0.2952 = 12.229…
✅ इसलिए Kc ≈ 12.23 L mol−1
क्या आप जानते हैं?
👉 Kc की unit reaction की Δn पर depend करती है।

इस reaction में Δn = (2) − (2+1) = −1, इसलिए Kc की unit L mol−1 आती है।
Q.3: एक निश्चित ताप एवं कुल दाब 105 Pa पर आयोडीन वाष्प में आयतनानुसार 40% आयोडीन परमाणु होते हैं।
I2(g) ⇌ 2I(g)
साम्य के लिए Kp की गणना कीजिए।
उत्तर
Kp = 2.67 × 104 Pa (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: आयतन % = आंशिक दाब का % (ideal gas में)
कुल दाब P = 105 Pa

👉 I का प्रतिशत = 40%PI = (40/100) × 105 = 0.40 × 105 Pa
👉 I2 का प्रतिशत = 60%PI2 = (60/100) × 105 = 0.60 × 105 Pa

Step 2: Kp का सूत्र लिखें
I2(g) ⇌ 2I(g)

\( K_p=\frac{(P_I)^2}{P_{I_2}} \)
Step 3: मान रखकर गणना करें

\( K_p=\frac{(0.40\times10^5)^2}{0.60\times10^5} \)

\( =\frac{0.16\times10^{10}}{0.60\times10^5} \)

\( =\left(\frac{0.16}{0.60}\right)\times10^5 \)

\( =0.2667\times10^5

=2.67\times10^4\ \text{Pa} \)

= 2.67 × 104 Pa

✅ इसलिए Kp ≈ 2.67 × 104 Pa
क्या आप जानते हैं?
👉 गैस मिश्रण में “volume %” अक्सर सीधे mole fraction जैसा behave करता है, और ideal gas में:

Pi = xi × P(total)

इसलिए ऐसे सवाल super fast हो जाते हैं।
Q.4: निम्नलिखित में से प्रत्येक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक Kc का व्यंजक लिखिए—

(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g)
(ii) 2Cu(NO3)2(s) ⇌ 2CuO(s) + 4NO2(g) + O2(g)
(iii) CH3COOC2H5(aq) + H2O(l) ⇌ CH3COOH(aq) + C2H5OH(aq)
(iv) Fe3+(aq) + 3OH(aq) ⇌ Fe(OH)3(s)
(v) I2(s) + 5F2(g) ⇌ 2IF5(g)
उत्तर
✅ (i)
\( K_c=\frac{[NO]^2[Cl_2]}{[NOCl]^2} \)
✅ (ii)
\( K_c=[NO_2]^4[O_2] \)
✅ (iii)
\( K_c=\frac{[CH_3COOH][C_2H_5OH]}{[CH_3COOC_2H_5]} \)
✅ (iv)
\( K_c=\frac{1}{[Fe^{3+}][OH^-]^3} \)
✅ (v)
\( K_c=\frac{[IF_5]^2}{[F_2]^5} \)
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम):
👉 Kc लिखते समय ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) को नहीं लिखते, क्योंकि उनकी activity ≈ 1 मानी जाती है।
और गैस/aq species की सांद्रता को स्टोइकोमेट्रिक घातांक में लिखते हैं।

(i) गैसों के लिए सीधे सांद्रता लिख दी।
(ii) Cu(NO3)2(s) और CuO(s) ठोस हैं, इसलिए हट गए; बचे गैसों NO2 और O2
(iii) H2O(l) शुद्ध द्रव है, इसलिए हट गया।
(iv) Fe(OH)3(s) solid है, इसलिए numerator में नहीं आएगा; ions denominator में आएँगे।
(v) I2(s) solid है, इसलिए हट गया; F2 और IF5 gases हैं।
क्या आप जानते हैं?
👉 Kc/Kp expressions में सबसे सामान्य गलती यही होती है:
ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) को लिख देना
✅ याद रखो: (s) और (l) = 1 (साम्य व्यंजक में नहीं आते)।
Q.5: Kp के मान से निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए—

(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g); Kp = 1.8 × 10−2 at 500 K
(ii) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g); Kp = 167 at 1073 K

(मानिए R = 0.0831 L bar mol−1 K−1)
उत्तर
✅ (i) Kc = 4.33 × 10−4
✅ (ii) Kc = 1.87 (लगभग)
व्याख्या – Step by Step
(i) 2NOCl(g) ⇌ 2NO(g) + Cl2(g)
Step 1: Δng निकालें
उत्पादों के गैस मोल = 2 + 1 = 3
अभिकारकों के गैस मोल = 2
Δng = 3 − 2 = 1

Step 2: Relation लगाएँ
\( K_p = K_c(RT)^{\Delta n} \)
\( \Delta n = 1 \Rightarrow K_p = K_c(RT) \)
\( K_c=\frac{K_p}{RT} \)
Step 3: मान रखें
\( K_c=\frac{1.8\times10^{-2}}{0.0831\times500} \)
\( =\frac{1.8\times10^{-2}}{41.55} \)
\( =4.33\times10^{-4} \)
✅ इसलिए (i) के लिए Kc = 4.33 × 10−4


(ii) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g)
Step 1: Δng निकालें
Products gas = 1 (CO2)
Reactants gas = 0 (solid है)
Δng = 1 − 0 = 1

Step 2: Relation लगाएँ
\( K_p = K_c(RT)^{\Delta n} \)
\( \Delta n = 1 \Rightarrow K_c=\frac{K_p}{RT} \)
Step 3: मान रखें
\( K_c=\frac{167}{0.0831\times1073} \)
\( =\frac{167}{89.1963} \)
\( =1.873\approx1.87 \)
✅ इसलिए (ii) के लिए Kc = 1.87 (लगभग)
क्या आप जानते हैं?
👉 Kp और Kc के बीच सबसे जरूरी चीज है Δng:

• अगर Δng = 0, तो ✅ Kp = Kc
• अगर Δng ≠ 0, तो ✅ (RT)Δn factor जरूर लगेगा।
Q.6: साम्य अभिक्रिया NO(g) + O3(g) ⇌ NO2(g) + O2(g) के लिए 1000 K पर Kc = 6.3 × 1014 है। यदि आगे (forward) और प्रतिलोम (reverse) दोनों अभिक्रियाएँ प्राथमिक (elementary) हैं, तो प्रतिलोम अभिक्रिया के लिए Kc ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ प्रतिलोम अभिक्रिया: NO2(g) + O2(g) ⇌ NO(g) + O3(g)

\( K_c(\text{reverse})=\frac{1}{K_c(\text{forward})} \)
\( =\frac{1}{6.3\times10^{14}} \)
\( =1.59\times10^{-15} \)
Kc(reverse) = 1.59 × 10−15
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम)
👉 किसी भी साम्य अभिक्रिया को उल्टा करने पर साम्य स्थिरांक का मान उल्टा (reciprocal) हो जाता है:

\( K_c(\text{reverse})=\frac{1}{K_c(\text{forward})} \)
Step 1: दिए गए मान लिखिए
Kc(forward) = 6.3 × 1014

Step 2: प्रतिलोम के लिए Kc निकालिए
\( K_c(\text{reverse})=\frac{1}{6.3\times10^{14}} \)
\( =\left(\frac{1}{6.3}\right)\times10^{-14} \)
\( \approx0.1587\times10^{-14} \)
\( =1.587\times10^{-15}\approx1.59\times10^{-15} \)
✅ इसलिए Kc(reverse) ≈ 1.59 × 10−15
क्या आप जानते हैं?
👉 Forward K बहुत बड़ा (जैसे 1014) होने का मतलब है कि साम्य पर उत्पाद (NO2 और O2) ज्यादा बनते हैं।

इसलिए Reverse K बहुत छोटा (जैसे 10−15) आता है।
Q.7: साम्य स्थिरांक (K) का व्यंजक लिखते समय शुद्ध द्रव (pure liquid) और शुद्ध ठोस (pure solid) को उपेक्षित (ignore) क्यों किया जाता है? समझाइए।
उत्तर
✅ शुद्ध ठोस और शुद्ध द्रव की activity (सक्रियता) स्थिर मानी जाती है (लगभग 1)।
✅ इसलिए K के व्यंजक में उन्हें शामिल नहीं करते, क्योंकि उनका मान बदलता नहीं है।
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम)
👉 K = उत्पादों की सांद्रता / अभिकारकों की सांद्रता
लेकिन शुद्ध ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l) की activity = 1 मानी जाती है, इसलिए वे K के व्यंजक में नहीं आते।
अतः सामान्यतः शुद्ध ठोस एवं शुद्ध द्रव को साम्य-स्थिरांक के व्यंजक में नहीं लिखा जाता।


Step 1: शुद्ध ठोस/द्रव की सांद्रता स्थिर क्यों रहती है?
शुद्ध पदार्थों में:
👉 घनत्व (density) निश्चित होता है
👉 मोलर द्रव्यमान (molar mass) निश्चित होता है
इसलिए उनकी मोलर सांद्रता स्थिर रहती है।

मोलरता = मोल / आयतन (L)
और, मोल = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान

मोलरता = (द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान) × (1 / आयतन)
लेकिन, द्रव्यमान / आयतन = घनत्व
अतः मोलरता = घनत्व / मोलर द्रव्यमान
✅ चूंकि घनत्व और मोलर द्रव्यमान शुद्ध ठोस/द्रव के लिए नियत (fixed) होते हैं, इसलिए उनकी मोलरता भी नियत रहती है।


Step 2: K में क्यों नहीं लिखते?
👉 K के व्यंजक में केवल वही species लिखते हैं जिनकी प्रभावी सांद्रता बदल सकती है:
✅ गैसें (g) और विलयन में आयन/अणु (aq)
❌ शुद्ध ठोस (s) और शुद्ध द्रव (l)

क्योंकि उनकी activity = 1 होती है, और 1 से गुणा/भाग करने पर मान नहीं बदलता।
क्या आप जानते हैं?
👉 सबसे common गलती यही होती है:
❌ K का व्यंजक लिखते समय (s) और (l) को भी शामिल कर देना
✅ याद रखो: (s) और (l) की activity = 1 होती है, इसलिए K में नहीं आते।
Q.8: N2 और O2 के बीच अभिक्रिया
2N2(g) + O2(g) ⇌ 2N2O(g)
होती है। यदि 10 L पात्र में प्रारम्भ में 0.482 mol N2 और 0.933 mol O2 लिए जाएँ, तथा उस ताप पर साम्य स्थापित हो जहाँ Kc = 2.0 × 10−37 है, तो साम्य मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए।
उत्तर
[N2]eq ≈ 0.0482 mol L−1
[O2]eq ≈ 0.0933 mol L−1
[N2O]eq = 6.6 × 10−21 mol L−1

(मोल में: N2 ≈ 0.482, O2 ≈ 0.933, N2O ≈ 6.6 × 10−20 mol)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: ICE setup (moles में)
2N2 + O2 ⇌ 2N2O
मान लें साम्य तक x mol N2O बना।
N2: 0.482 − x
O2: 0.933 − x/2
N2O: x

आयतन = 10 L, इसलिए
\( [N_2]=\frac{0.482-x}{10},\quad [O_2]=\frac{0.933-\frac{x}{2}}{10},\quad [N_2O]=\frac{x}{10} \)
Step 2: Kc का व्यंजक
\( K_c=\frac{[N_2O]^2}{[N_2]^2[O_2]}=2.0\times10^{-37} \)
चूँकि Kc बहुत ही छोटा है, x अत्यल्प होगा:
[N2] ≈ 0.482/10 = 0.0482
[O2] ≈ 0.933/10 = 0.0933

अब
\( [N_2O]^2=K_c\,[N_2]^2[O_2] \)
\( [N_2O]=\sqrt{(2.0\times10^{-37})(0.0482)^2(0.0933)} \)
\( =6.6\times10^{-21}\ \text{mol L}^{-1} \)
\( x=10[N_2O]=6.6\times10^{-20}\ \text{mol} \)
इसलिए x बहुत छोटा है, तो N2 और O2 की साम्य सांद्रताएँ लगभग प्रारम्भिक जैसी ही रहेंगी।
क्या आप जानते हैं?
👉 जब Kc ≪ 1 होता है, तो साम्य पर उत्पाद बहुत कम बनते हैं।

इसीलिए ऐसे सवालों में x को नगण्य (approximation) मानकर गणना बहुत आसान हो जाती है।
Q.9: निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड, ब्रोमीन से अभिक्रिया करके नाइट्रोसिल ब्रोमाइड बनाती है:
2NO(g) + Br2(g) ⇌ 2NOBr(g)

यदि स्थिर ताप पर बंद पात्र में प्रारम्भ में 0.087 mol NO और 0.0437 mol Br2 मिलाए जाएँ, तथा साम्य पर 0.0518 mol NOBr प्राप्त हो, तो साम्य पर NO और Br2 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
उत्तर
✅ साम्य पर NO = 0.0352 mol
✅ साम्य पर Br2 = 0.0178 mol
व्याख्या – Step by Step
Step 1: स्टॉइकोमेट्रिक अनुपात
2NO + Br2 → 2NOBr
यहाँ 2 mol NOBr बनने पर:
👉 2 mol NO खर्च होता है
👉 1 mol Br2 खर्च होता है

अर्थात
👉 NOBr : NO = 1 : 1
👉 NOBr : Br2 = 2 : 1
⇒ Br2 ग्रहण किया हुआ = NOBr/2


Step 2: NOBr के आधार पर क्रियाकारक की खपत
दिया है: NOBr बनाया = 0.0518 mol

तो,
NO ग्रहण किया हुआ = 0.0518 mol
Br2 ग्रहण किया हुआ =
\( \frac{0.0518}{2}=0.0259\ \text{mol} \)

Step 3: साम्य पर बची हुई मात्रा
\( NO_{eq}=0.087-0.0518=0.0352\ \text{mol} \)
\( Br_{2\,(eq)}=0.0437-0.0259=0.0178\ \text{mol} \)
✅ इसलिए साम्य पर NO = 0.0352 mol और Br2 = 0.0178 mol
क्या आप जानते हैं?
👉 ऐसे प्रश्नों में अगर उत्पाद की बनी हुई मात्रा दी हो, तो सीधे स्टोइकोमेट्रिक मोल संबंध से क्रियाकारक की खपत (ग्रहण किया हुआ) मात्रा निकालना सबसे तेज तरीका है।
Q.10: साम्य अभिक्रिया
2SO2(g) + O2(g) ⇌ 2SO3(g)
के लिए 450 K पर Kp = 2.0 × 1010 bar−1 है। इस ताप पर Kc का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
Kc = 7.48 × 1011 L mol−1
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Δng निकालें
Δng = (गैसीय उत्पाद मोल) − (गैसीय क्रियाकारक मोल)
\( \Delta n_g = 2-(2+1)=2-3=-1 \)
Step 2: Kp और Kc का संबंध
\( K_p=K_c(RT)^{\Delta n_g} \)
\( K_c=K_p(RT)^{-\Delta n_g} \)
\( \Delta n_g=-1 \Rightarrow K_c=K_p(RT)^1=K_p(RT) \)
Step 3: मान रखें
\( K_c=(2.0\times10^{10}\ \text{bar}^{-1})(0.0831\ \text{L bar K}^{-1}\text{mol}^{-1})(450\ \text{K}) \)
पहले RT:
\( 0.0831\times450=37.395\ \text{L bar mol}^{-1} \)
अब:
\( K_c=(2.0\times10^{10})(37.395) \)
\( =74.79\times10^{10} \)
\( =7.479\times10^{11} \)
\( \therefore\ K_c\approx7.48\times10^{11}\ \text{L mol}^{-1} \)
✅ इसलिए Kc = 7.48 × 1011 L mol−1
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर Δng < 0, तो अक्सर Kc का मान Kp से बड़ा निकलता है (जब RT > 1 उचित इकाइयों में लिया जाए)।
Q.11: HI(g) का एक नमूना 0.2 atm दाब पर फ्लास्क में रखा जाता है। साम्य पर HI का आंशिक दाब 0.04 atm है। अभिक्रिया
2HI(g) ⇌ H2(g) + I2(g)
के लिए Kp का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
Kp = 4.0
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रारम्भिक और साम्य दाब
👉 प्रारम्भिक दाब: PHI = 0.2 atm, PH2 = 0, PI2 = 0
👉 साम्य पर: PHI = 0.04 atm

तो HI के दाब में कमी:
\( 0.2-0.04=0.16\ \text{atm} \)
Step 2: स्टॉइकोमेट्री से H2 और I2 का दाब
2HI → H2 + I2
2 mol HI घटने पर 1 mol H2 और 1 mol I2 बनते हैं।

अतः,
\( P_{H_2}=P_{I_2}=\frac{0.16}{2}=0.08\ \text{atm} \)
Step 3: Kp का व्यंजक
\( K_p=\frac{P_{H_2}\,P_{I_2}}{(P_{HI})^2} \)

\( K_p=\frac{(0.08)(0.08)}{(0.04)^2} \)

\( K_p=\frac{0.0064}{0.0016} \)

\( K_p=4.0 \)
✅ इसलिए Kp = 4.0
क्या आप जानते हैं?
👉 इस अभिक्रिया में Δng = 0 है, इसलिए सामान्यतः Kp = Kc होता है।

इसलिए कई बार दाब आधारित डेटा से K निकालना बहुत आसान हो जाता है।
Q.12: 500 K ताप पर 20 L पात्र में N2 के 1.57 mol, H2 के 1.92 mol और NH3 के 8.13 mol का मिश्रण लिया गया है। अभिक्रिया
N2(g) + 3H2(g) ⇌ 2NH3(g)
के लिए Kc = 1.7 × 102 है। क्या मिश्रण साम्य में है? यदि नहीं, तो नेट अभिक्रिया की दिशा क्या होगी?
उत्तर
✅ मिश्रण साम्य में नहीं है।
Qc = 2.38 × 103
और Qc > Kc (2.38 × 103 > 1.7 × 102)
इसलिए नेट अभिक्रिया पश्च (reverse) दिशा में होगी (अर्थात NH3 टूटकर N2 और H2 बनेगा)।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रारम्भिक सांद्रताएँ (20 L में)
\( [N_2]=\frac{1.57}{20}=0.0785\ \text{M} \)
\( [H_2]=\frac{1.92}{20}=0.096\ \text{M} \)
\( [NH_3]=\frac{8.13}{20}=0.4065\ \text{M} \)
Step 2: Qc लिखें
\( Q_c=\frac{[NH_3]^2}{[N_2][H_2]^3} \)
\( Q_c=\frac{(0.4065)^2}{(0.0785)(0.096)^3} \)
अब गणना:
\( (0.4065)^2=0.16524225 \)
\( (0.096)^3=0.000884736 \)
\( (0.0785)(0.000884736)=0.000069451776 \)
\( Q_c=\frac{0.16524225}{0.000069451776}\approx2.38\times10^3 \)
Step 3: Qc और Kc की तुलना
Qc = 2.38 × 103, Kc = 1.7 × 102
Qc > Kc

इसका अर्थ: उत्पाद (NH3) अपेक्षाकृत अधिक हैं, इसलिए सिस्टम उन्हें कम करने के लिए विपरीत दिशा में शिफ्ट करेगा।
क्या आप जानते हैं?
📌 निर्णय का शॉर्टकट:
👉 Q < K ⇒ आगे की दिशा
👉 Q > K ⇒ विपरीत दिशा
👉 Q = K ⇒ साम्य पर
Q.13: एक गैसीय अभिक्रिया के लिए

\( K_c=\frac{[NH_3]^4[O_2]^5}{[NO]^4[H_2O]^6} \)
दिया है। इस व्यंजक के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
✅ संतुलित अभिक्रिया:
4NO(g) + 6H2O(g) ⇌ 4NH3(g) + 5O2(g)
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम)
📌 Kc में:
👉 अंश (Numerator) = उत्पाद (products)
👉 भाजक (Denominator) = अभिकारक (reactants)
👉 प्रत्येक का घातांक = समीकरण में उसका स्टोइकोमेट्रिक गुणांक

दिए गए Kc से पढ़ें:
👉 उत्पाद: NH3 का गुणांक 4, O2 का गुणांक 5
👉 अभिकारक: NO का गुणांक 4, H2O का गुणांक 6

इसलिए अभिक्रिया:
\( 4NO+6H_2O\rightleftharpoons4NH_3+5O_2 \)
Atom check:
👉 N: 4 = 4
👉 H: 12 = 12
👉 O: 4 + 6 = 10, RHS = 10 ✅
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर किसी समीकरण के सभी गुणांक को n से गुणा कर दें, तो नया साम्य स्थिरांक Kn हो जाता है।

इसलिए K और स्टोइकोमेट्रिक गुणांक का सीधा, बहुत महत्वपूर्ण संबंध है।
Q.13: एक गैसीय अभिक्रिया के लिए

\( K_c=\frac{[NH_3]^4[O_2]^5}{[NO]^4[H_2O]^6} \)
दिया है। इस व्यंजक के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
उत्तर
✅ संतुलित अभिक्रिया:
4NO(g) + 6H2O(g) ⇌ 4NH3(g) + 5O2(g)
व्याख्या – Step by Step
Rule (मुख्य नियम)
📌 Kc में:
👉 अंश (Numerator) = उत्पाद (products)
👉 भाजक (Denominator) = अभिकारक (reactants)
👉 प्रत्येक का घातांक = समीकरण में उसका स्टोइकोमेट्रिक गुणांक

दिए गए Kc से पढ़ें:
👉 उत्पाद: NH3 का गुणांक 4, O2 का गुणांक 5
👉 अभिकारक: NO का गुणांक 4, H2O का गुणांक 6

इसलिए अभिक्रिया:
\( 4NO+6H_2O\rightleftharpoons4NH_3+5O_2 \)
Atom check:
👉 N: 4 = 4
👉 H: 12 = 12
👉 O: 4 + 6 = 10, RHS = 10 ✅
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर किसी समीकरण के सभी गुणांक को n से गुणा कर दें, तो नया साम्य स्थिरांक Kn हो जाता है।

इसलिए K और स्टोइकोमेट्रिक गुणांक का सीधा, बहुत महत्वपूर्ण संबंध है।
Q.14: 725 K पर 10 L पात्र में H2O(g) का 1 mol और CO(g) का 1 mol लिया जाता है। साम्य पर 40% H2O, CO के साथ अभिक्रिया करता है:
H2O(g) + CO(g) ⇌ H2(g) + CO2(g)

अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर
Kc = 0.444 (≈ 0.44)
व्याख्या – Step by Step
Step 1: प्रारम्भिक मोल
👉 H2O = 1 mol
👉 CO = 1 mol
👉 H2 = 0, CO2 = 0

Step 2: 40% H2O अभिक्रिया कर चुका है
अभिक्रियित H2O = 1 mol का 40% = 0.40 mol
स्टॉइकोमेट्री 1:1:1:1 है, इसलिए:
👉 ग्रहण किया हुआ CO = 0.40 mol
👉 H2 की प्राप्त मात्रा = 0.40 mol
👉 CO2 की प्राप्त मात्रा = 0.40 mol

Step 3: साम्य पर मोल
👉 H2O = 1 − 0.40 = 0.60 mol
👉 CO = 1 − 0.40 = 0.60 mol
👉 H2 = 0.40 mol
👉 CO2 = 0.40 mol

Step 4: साम्य सांद्रता (Volume = 10 L)
\( [H_2O]=\frac{0.60}{10}=0.06\ \text{M} \)
\( [CO]=\frac{0.60}{10}=0.06\ \text{M} \)
\( [H_2]=\frac{0.40}{10}=0.04\ \text{M} \)
\( [CO_2]=\frac{0.40}{10}=0.04\ \text{M} \)
Step 5: Kc निकालें
\( K_c=\frac{[H_2][CO_2]}{[H_2O][CO]} \)
\( K_c =\frac{(0.04)(0.04)}{(0.06)(0.06)} \)
\( K_c =\frac{0.0016}{0.0036} \)
\( K_c =0.444 \)
✅ इसलिए Kc = 0.444 (≈ 0.44)
क्या आप जानते हैं?
👉 जब अभिक्रिया aA + bB ⇌ cC + dD में सभी गुणांक 1 हों, तो ICE table (प्रारंभिक, परिवर्तन, साम्य) बहुत जल्दी बन जाती है और Kc गणना सीधी हो जाती है।
Q.15: 700 K पर अभिक्रिया
H2(g) + I2(g) ⇌ 2HI(g)
के लिए Kc = 54.8 है। यदि शुरू में केवल HI(g) लिया गया हो और साम्य पर [HI] = 0.5 mol L−1 हो, तो साम्य पर [H2] और [I2] क्या होंगे?
उत्तर
[H2]eq = [I2]eq = 0.068 mol L−1
व्याख्या – Step by Step
Step 1: दी गई अभिक्रिया के उल्टे के लिए K
दी गई अभिक्रिया:
H2 + I2 ⇌ 2HI,   Kc = 54.8

लेकिन यहाँ शुरुआत केवल HI से है, इसलिए नेट दिशा उल्टी होगी:
2HI ⇌ H2 + I2

उल्टी अभिक्रिया के लिए:
\( K'=\frac{1}{54.8}=1.82\times10^{-2} \)

Step 2: मान लेते हैं
साम्य पर:
[H2] = [I2] = x
(क्योंकि 2HI → H2 + I2 में H2 और I2 बराबर बनते हैं)

दिया है:
[HI] = 0.5 mol L−1

उल्टी अभिक्रिया के लिए:
\( K'=\frac{[H_2][I_2]}{[HI]^2} \)
\( 1.82\times10^{-2}=\frac{x^2}{(0.5)^2} \)
\( x^2=(1.82\times10^{-2})(0.25) \)
\( x^2=4.55\times10^{-3} \)
\( x=\sqrt{4.55\times10^{-3}}=0.06745\approx0.068 \)
अतः:
[H2] = [I2] = 0.068 mol L−1
क्या आप जानते हैं?
👉 जब प्रश्न में “केवल उत्पाद शुरू में” दिया हो, तो अक्सर उसी अभिक्रिया को उल्टा लिखकर K का व्युत्क्रम (1/K) लेना सबसे आसान तरीका होता है।
Q.16: ICl की प्रारम्भिक सांद्रता 0.78 M है। यदि इसे साम्य तक आने दिया जाए, तो अभिक्रिया
2ICl(g) ⇌ I2(g) + Cl2(g),  Kc = 0.14
के लिए प्रत्येक की साम्य पर सान्द्रताएँ क्या होंगी?
उत्तर
[I2]eq = [Cl2]eq = 0.167 M
[ICl]eq = 0.446 M
व्याख्या – Step by Step
Step 1: ICE setup (प्रारम्भिक, परिवर्तन, साम्य)
2ICl ⇌ I2 + Cl2

प्रारम्भिक:
[ICl] = 0.78, [I2] = 0, [Cl2] = 0

मान लें साम्य पर:
[I2] = [Cl2] = x
तो 2ICl ग्रहण किया होगा 2x:
[ICl]eq = 0.78 − 2x


Step 2: Kc का व्यंजक
\( K_c=\frac{[I_2][Cl_2]}{[ICl]^2} =\frac{x\cdot x}{(0.78-2x)^2} \)
दिया है Kc = 0.14, इसलिए
\( 0.14=\frac{x^2}{(0.78-2x)^2} \)
\( \frac{x}{0.78-2x}=\sqrt{0.14}=0.374 \)
\( x=0.374(0.78-2x) \)
\( x=0.292-0.748x \)
\( 1.748x=0.292 \)
\( x=0.167 \)

Step 3: साम्य सांद्रताएँ
[I2] = [Cl2] = x = 0.167 M
[ICl] = 0.78 − 2x = 0.78 − 0.334 = 0.446 M
क्या आप जानते हैं?
👉 जब Kc मध्यम (na बहुत छोटा, na बहुत बड़ा) हो, तब x का approximation लेने के बजाय सटीक बीजगणितीय हल बेहतर रहता है।
Q.17: नीचे दर्शाए गए साम्य में 899 K पर Kp का मान 0.04 atm है। C2H6 की साम्य पर सान्द्रता क्या होगी यदि 4.0 atm दाब पर C2H6 को एक फ्लास्क में रखा गया है एवं साम्यावस्था पर आने दिया जाता है?
C2H6(g) ⇌ C2H4(g) + H2(g)
उत्तर
P(C2H6, eq) = 3.60 atm
व्याख्या – Step by Step
Step 1: ICE (आंशिक दाब) setup
प्रारम्भिक:
PC2H6 = 4.0, PC2H4 = 0, PH2 = 0

मान लें साम्य पर C2H4 और H2 का दाब p atm बनता है।
तो:
PC2H6 = 4.0 - p,; PC2H4 = p,; PH2 = p

Step 2: Kp का व्यंजक
\( K_p=\frac{P_{C_2H_4}\,P_{H_2}}{P_{C_2H_6}} =\frac{p^2}{4.0-p} \)
दिया है Kp = 0.04, अतः
\( 0.04=\frac{p^2}{4.0-p} \)
\( p^2=0.04(4.0-p) \)
\( p^2=0.16-0.04p \)
\( p^2+0.04p-0.16=0 \)
Step 3: quadratic solve
\( p=\frac{-0.04\pm\sqrt{(0.04)^2+4(0.16)}}{2} \)
\( =\frac{-0.04\pm\sqrt{0.6416}}{2} \)
\( =\frac{-0.04\pm0.801}{2} \)
धनात्मक मान:
p = 0.761/2 ≈ 0.38 atm
(राउंडिंग के साथ अक्सर p ≈ 0.40 atm लिया जाता है)

Step 4: C2H6 का साम्य दाब
\( P_{C_2H_6,\;eq}=4.0-p \)
\( \approx4.0-0.40 \)
\( =3.60\ \text{atm} \)
✅ इसलिए P(C2H6, eq) = 3.60 atm
क्या आप जानते हैं?
👉 जब Kp छोटा हो, तो आगे का विघटन सीमित होता है, इसलिए reactant (C2H6) का दाब साम्य पर भी काफी अधिक रहता है।
Q.18: एथेनॉल और एसीटिक अम्ल की अभिक्रिया से एथिल एसीटेट बनता है:
CH3COOH(l) + C2H5OH(l) ⇌ CH3COOC2H5(l) + H2O(l)

(i) इस अभिक्रिया के लिए सांद्रता अनुपात (reaction quotient/Qc) लिखिए।
(ii) 293 K पर प्रारम्भ में 1.00 mol एसीटिक अम्ल और 0.18 mol एथेनॉल लिए गए। साम्य पर 0.171 mol एथिल एसीटेट मिला। Kc ज्ञात कीजिए।
(iii) 293 K पर 1.0 mol एसीटिक अम्ल और 0.5 mol एथेनॉल से शुरू करके, कुछ समय बाद 0.214 mol एथिल एसीटेट पाया गया। क्या साम्य स्थापित हो गया है?
उत्तर
✅ (i) \( Q_c=\frac{[CH_3COOC_2H_5][H_2O]}{[CH_3COOH][C_2H_5OH]} \)
✅ (ii) Kc = 3.92
✅ (iii) Qc = 0.204
और Qc ≠ Kc (साथ ही Qc < Kc), इसलिए साम्य स्थापित नहीं हुआ है; नेट अभिक्रिया अग्र (forward) दिशा में जाएगी।
व्याख्या – Step by Step
(i) Qc/Kc का व्यंजक
यहाँ सभी द्रव अवस्था में दी गई हैं और प्रश्न में पानी अतिरिक्त विलायक नहीं माना गया है, इसलिए सभी species को समीकरण में शामिल करेंगे:
\( Q_c=\frac{[CH_3COOC_2H_5][H_2O]}{[CH_3COOH][C_2H_5OH]} \)

(ii) Kc की गणना (293 K)
अभिक्रिया: CH3COOH + C2H5OH ⇌ CH3COOC2H5 + H2O

प्रारम्भिक मोल:
👉 अम्ल = 1.00
👉 अल्कोहल = 0.18
👉 एस्टर = 0
👉 जल = 0

साम्य पर एस्टर = 0.171 mol बना ⇒ जल भी 0.171 mol बनेगा, और अभिकारक उतने ही घटेंगे।
साम्य मोल:
👉 अम्ल = 1.00 − 0.171 = 0.829
👉 अल्कोहल = 0.18 − 0.171 = 0.009
👉 एस्टर = 0.171
👉 जल = 0.171

यदि आयतन V L हो, तो:
\( K_c=\frac{\left(\frac{0.171}{V}\right)\left(\frac{0.171}{V}\right)} {\left(\frac{0.829}{V}\right)\left(\frac{0.009}{V}\right)} \)
\( K_c=\frac{(0.171)^2}{0.829\times0.009} \)
\( K_c=3.92 \)

(iii) क्या साम्य स्थापित है?
नई स्थिति (293 K):
👉 प्रारम्भिक: अम्ल = 1.0, अल्कोहल = 0.5, एस्टर = 0, जल = 0
👉 किसी समय पर एस्टर = 0.214 mol

तो उसी समय:
👉 अम्ल = 1.0 − 0.214 = 0.786
👉 अल्कोहल = 0.5 − 0.214 = 0.286
👉 एस्टर = 0.214
👉 जल = 0.214

\( Q_c=\frac{\left(\frac{0.214}{V}\right)\left(\frac{0.214}{V}\right)} {\left(\frac{0.786}{V}\right)\left(\frac{0.286}{V}\right)} \)
\( Q_c=\frac{(0.214)^2}{0.786\times0.286} \)
\( Q_c=0.204 \)
तुलना:
Qc = 0.204, Kc = 3.92
Qc < Kc

अतः मिश्रण अभी साम्य पर नहीं है; उत्पाद बढ़ाने के लिए अभिक्रिया आगे जाएगी।
क्या आप जानते हैं?
📌 Q और K की तुलना अभिक्रिया की दिशा बताने का सबसे तेज तरीका है:
👉 Q < K: forward
👉 Q > K: reverse
👉 Q = K: equilibrium
Q.19: 437 K ताप पर निर्वात में PCl5 का एक नमूना एक फ्लास्क में लिया गया। साम्य स्थापित होने पर PCl5 की सांद्रता 0.5 × 10−1 mol L−1 पाई गई। यदि Kc = 8.3 × 10−3 है, तो साम्य पर PCl3 एवं Cl2 की सांद्रताएँ क्या होंगी?
PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
उत्तर
[PCl3]eq = [Cl2]eq = 2.04 × 10−2 M (≈ 0.02 M)
व्याख्या – Step by Step
दिया है:
\( [PCl_5]_{eq}=0.5\times10^{-1}=0.05\ \text{M} \)
\( K_c=8.3\times10^{-3} \)
मान लें साम्य पर: [PCl3] = x, [Cl2] = x

तब
\( K_c=\frac{[PCl_3][Cl_2]}{[PCl_5]} =\frac{x^2}{0.05} =8.3\times10^{-3} \)
\( x^2=(8.3\times10^{-3})(0.05)=4.15\times10^{-4} \)
\( x=\sqrt{4.15\times10^{-4}}=2.04\times10^{-2}\ \text{M} \)
अतः: [PCl3]eq = [Cl2]eq = 2.04 × 10−2 M (≈ 0.02 M)
क्या आप जानते हैं?
👉 ऐसे 1:1 विघटन में अगर PCl3 और Cl2 शुरू में शून्य हों, तो साम्य पर दोनों की सांद्रता हमेशा बराबर आती है।
Q.20: लौह अयस्क से स्टील बनाते समय होने वाली अभिक्रिया में Iron(II) oxide का CO द्वारा अपचयन होता है:
FeO(s) + CO(g) ⇌ Fe(s) + CO2(g) ; Kp = 0.265 atm at 1050K
1050 K पर Kp = 0.265 है। यदि प्रारम्भिक आंशिक दाब pCO = 1.4 atm और pCO2 = 0.80 atm हों, तो साम्य पर CO और CO2 के आंशिक दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर
pCO,eq = 1.739 atm
pCO2,eq = 0.461 atm
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Qp से दिशा जाँचें
इस अभिक्रिया के लिए:
\( K_p=\frac{p_{CO_2}}{p_{CO}} \)
(ठोस FeO और Fe समीकरण में नहीं आते)

प्रारम्भिक Qp:
\( Q_p=\frac{0.80}{1.4}=0.571 \)
Qp (0.571) > Kp (0.265)
अतः नेट अभिक्रिया पश्च दिशा में जाएगी, यानी CO2 घटेगा और CO बढ़ेगा।

Step 2: परिवर्तन मानें
मान लें पश्च दिशा के कारण दाब में परिवर्तन p atm है:
pCO2,eq = 0.80 − p, pCO,eq = 1.4 + p

अब Kp लगाएँ:
\( 0.265=\frac{0.80-p}{1.4+p} \)
\( 0.265(1.4+p)=0.80-p \)
\( 0.371+0.265p=0.80-p \)
\( 1.265p=0.429 \)
\( p=\frac{0.429}{1.265}=0.339\ \text{atm} \)
Step 3: साम्य दाब
\( p_{CO,eq}=1.4+0.339=1.739\ \text{atm} \)
\( p_{CO_2,eq}=0.80-0.339=0.461\ \text{atm} \)
क्या आप जानते हैं?
📌 Qp और Kp की तुलना से बिना ICE table के भी दिशा तुरंत पता चल जाती है:
👉 Qp > Kp: reverse
👉 Qp < Kp: forward
Q.21: अभिक्रिया N2(g) + 3H2(g) ⇌ 2NH3(g) के लिए 500 K पर Kc = 0.061 है। एक समय पर मिश्रण की सांद्रताएँ हैं: [N2] = 3.0 mol L−1, [H2] = 2.0 mol L−1, [NH3] = 0.5 mol L−1। क्या अभिक्रिया साम्य में है? यदि नहीं, तो साम्य स्थापित करने हेतु अभिक्रिया किस दिशा में जाएगी?
उत्तर
✅ अभिक्रिया साम्य में नहीं है।
Qc = 0.0104
और Qc < Kc (0.0104 < 0.061)
अतः अभिक्रिया अग्र दिशा (forward) में जाएगी (NH3 बनने की दिशा में)।
व्याख्या – Step by Step
Step 1: Qc लिखें
\( Q_c=\frac{[NH_3]^2}{[N_2][H_2]^3} \)
Step 2: मान रखें
\( Q_c=\frac{(0.5)^2}{(3.0)(2.0)^3} \)
\( =\frac{0.25}{3.0\times8.0} \)
\( =\frac{0.25}{24} \)
\( =0.0104 \)
Step 3: Qc और Kc की तुलना
Qc = 0.0104, Kc = 0.061
Qc < Kc

इसका मतलब उत्पाद (NH3) अभी कम है, इसलिए सिस्टम आगे बढ़कर अधिक NH3 बनाएगा।
क्या आप जानते हैं?
👉 साम्य जाँचने का सबसे तेज नियम:
Q = K → साम्य
Q < K → forward
Q > K → reverse
Q.22: ब्रोमीन मोनोक्लोराइड BrCl विघटित होकर ब्रोमीन और क्लोरीन देता है:
2BrCl(g) ⇌ Br2(g) + Cl2(g)
इसके लिए 500 K पर Kc = 32 है। यदि प्रारम्भ में [BrCl] = 3.3 × 10−3 mol L−1 हो, तो साम्य पर [BrCl] ज्ञात कीजिए।
उत्तर
[BrCl]eq = 3.0 × 10−4 mol L−1
व्याख्या – Step by Step
Step 1: ICE मान लें
प्रारम्भिक:
[BrCl] = 3.3 × 10−3, [Br2] = 0, [Cl2] = 0

मान लें BrCl की x मात्रा विघटित होती है, तो:
[BrCl]eq = 3.3 × 10−3 − x
[Br2]eq = [Cl2]eq = x/2
(क्योंकि 2BrCl से 1 Br2 और 1 Cl2 बनते हैं)

Step 2: Kc लगाएँ
\( K_c=\frac{[Br_2][Cl_2]}{[BrCl]^2} =\frac{(x/2)(x/2)}{(3.3\times10^{-3}-x)^2} =32 \)
\( \frac{x^2}{4(3.3\times10^{-3}-x)^2}=32 \)
\( \frac{x}{2(3.3\times10^{-3}-x)}=\sqrt{32}\approx5.66 \)
\( \frac{x}{3.3\times10^{-3}-x}=11.32 \)
\( x=11.32(3.3\times10^{-3}-x) \)
\( x\approx3.03\times10^{-3} \)
Step 3: [BrCl]eq निकालें
\( [BrCl]_{eq}=3.3\times10^{-3}-3.03\times10^{-3} \approx2.7\times10^{-4}\ \text{M} \)
राउंडिंग के साथ:
[BrCl]eq ≈ 3.0 × 10−4 mol L−1
क्या आप जानते हैं?
👉 Kc = 32 (काफी बड़ा) होने से उत्पाद-पक्ष अनुकूल होता है, इसलिए BrCl की साम्य सांद्रता प्रारम्भिक मान से बहुत कम बचती है।
Q.23: 1127 K तथा 1 atm दाब पर CO और CO2 के गैसीय मिश्रण में साम्यावस्था पर CO का द्रव्यमान प्रतिशत 90.55% है।
C(s) + CO2(g) ⇌ 2CO(g)
उपरोक्त ताप पर अभिक्रिया के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर
Kc = 0.153
व्याख्या – Step by Step
Step 1: द्रव्यमान से मोल निकालें
सुविधा के लिए कुल गैसीय मिश्रण (CO + CO2) का द्रव्यमान 100 g मानते हैं।
👉 CO = 90.55 g
👉 CO2 = 9.45 g

मोल:
\( n_{CO}=\frac{90.55}{28}=3.234 \)
\( n_{CO_2}=\frac{9.45}{44}=0.215 \)
\( n_{\text{tot}}=3.234+0.215=3.449 \)

Step 2: 1 atm पर आंशिक दाब
\( p_{CO}=\frac{n_{CO}}{n_{\text{tot}}}\times1 =\frac{3.234}{3.449}=0.938\ \text{atm} \)
\( p_{CO_2}=\frac{n_{CO_2}}{n_{\text{tot}}}\times1 =\frac{0.215}{3.449}=0.062\ \text{atm} \)

Step 3: Kp निकालें
अभिक्रिया: C(s) + CO2(g) ⇌ 2CO(g)
\( K_p=\frac{(p_{CO})^2}{p_{CO_2}} =\frac{(0.938)^2}{0.062} =14.19 \)

Step 4: Kp से Kc
Δng = 2 − 1 = 1
\( K_p=K_c(RT)^{\Delta n_g} \)
\( K_p=K_c(RT) \)
\( K_c=\frac{K_p}{RT} \)
\( K_c=\frac{14.19}{(0.0821)(1127)} =\frac{14.19}{92.5367} =0.153 \)
Kc = 0.153
क्या आप जानते हैं?
👉 ठोस कार्बन विषमांगी साम्य के K-expression में नहीं आता, क्योंकि उसकी activity को 1 माना जाता है।
Q.24: 298 K पर अभिक्रिया
NO(g) + 1/2 O2(g) ⇌ NO2(g)
के लिए (क) ΔrG तथा (ख) साम्य स्थिरांक K ज्ञात कीजिए।
दिया है:
ΔfG(NO2) = 52.0 kJ mol−1, ΔfG(NO) = 87.0 kJ mol−1, ΔfG(O2) = 0
उत्तर
ΔrG = −35.0 kJ mol−1
K = 1.36 × 106
व्याख्या – Step by Step
Step 1: ΔrG निकालें
\( \Delta_r G^\circ=\sum \nu \Delta_f G^\circ(\text{products})-\sum \nu \Delta_f G^\circ(\text{reactants}) \)
\( \Delta_r G^\circ=\Delta_f G^\circ(NO_2)-\left[\Delta_f G^\circ(NO)+\frac{1}{2}\Delta_f G^\circ(O_2)\right] \)
\( =52.0-\left[87.0+\frac{1}{2}(0)\right] \)
\( =52.0-87.0=-35.0\ \text{kJ mol}^{-1} \)

Step 2: ΔrG से K
\( \Delta_r G^\circ=-2.303RT\log K \)
\( \log K=\frac{-\Delta_r G^\circ}{2.303RT} \)
\( =\frac{35.0}{2.303\times(8.314\times10^{-3})\times298} \)
हर चरण:
\( 8.314\times10^{-3}\times298=2.4776 \)
\( 2.303\times2.4776=5.7059 \)
\( \log K=\frac{35.0}{5.7059}=6.134 \)
\( K=\text{antilog}(6.134)=1.36\times10^6 \)
क्या आप जानते हैं?
👉 जब ΔrG negative होता है, तो K > 1 आता है, यानी साम्य पर उत्पाद (NO2) ज्यादा बनते हैं।
Q.25: निम्नलिखित प्रत्येक साम्य में, जब आयतन बढ़ाकर दाब कम किया जाता है, तो बताइए कि उत्पादों के मोलों की संख्या बढ़ेगी, घटेगी या समान रहेगी:
(क) PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
(ख) CaO(s) + CO2(g) ⇌ CaCO3(s)
(ग) 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇌ Fe3O4(s) + 4H2(g)
उत्तर
✅ (क) बढ़ेगी
✅ (ख) घटेगी
✅ (ग) समान रहेगी
व्याख्या – Step by Step
Rule (Le Chatelier सिद्धान्त)
👉 दाब कम करने (या आयतन बढ़ाने) पर साम्य उस दिशा में शिफ्ट होता है जहाँ गैसीय मोल अधिक हों।
👉 ठोस (s) के मोल दाब-शिफ्ट में नहीं माने जाते।


(क) PCl5(g) ⇌ PCl3(g) + Cl2(g)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 1
👉 दाएँ गैसीय मोल = 2
दाब कम करने पर दाएँ शिफ्ट होगा ⇒ उत्पादों के मोल बढ़ेंगे
(ख) CaO(s) + CO2(g) ⇌ CaCO3(s)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 1 (CO2)
👉 दाएँ गैसीय मोल = 0
दाब कम करने पर साम्य बाएँ शिफ्ट होगा ⇒ उत्पाद CaCO3 कम बनेगा ⇒ उत्पादों के मोल घटेंगे
(ग) 3Fe(s) + 4H2O(g) ⇌ Fe3O4(s) + 4H2(g)
👉 बाएँ गैसीय मोल = 4
👉 दाएँ गैसीय मोल = 4
दोनों तरफ गैसीय मोल समान हैं, इसलिए दाब बदलने से साम्य शिफ्ट नहीं होगा ⇒ उत्पादों के मोल समान रहेंगे
क्या आप जानते हैं?
👉 दाब परिवर्तन का असर तभी स्पष्ट होता है जब Δng ≠ 0 हो (गैसीय मोलों का अंतर शून्य न हो)।
Q.26: निम्नलिखित में से दाब बढ़ाने पर कौन-कौन सी अभिक्रियाएँ प्रभावित होंगी? यह भी बताइए कि दाब परिवर्तन करने पर अभिक्रिया अग्र (forward) या पश्च (reverse) दिशा में जाएगी:
(i) COCl2(g) ⇌ CO(g) + Cl2(g)
(ii) CH4(g) + 2S2(g) ⇌ CS2(g) + 2H2S(g)
(iii) CO2(g) + C(s) ⇌ 2CO(g)
(iv) 2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)
(v) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g)
(vi) 4NH3(g) + 5O2(g) ⇌ 4NO(g) + 6H2O(g)
उत्तर
✅ दाब बढ़ाने पर प्रभावित अभिक्रियाएँ: (i), (iii), (iv), (v), (vi)
✅ अप्रभावित: (ii)

दिशा:
(i) पश्च दिशा
(ii) कोई प्रभाव नहीं
(iii) पश्च दिशा
(iv) अग्र दिशा
(v) पश्च दिशा
(vi) पश्च दिशा
व्याख्या – Step by Step
Rule (Le Chatelier सिद्धान्त)
👉 दाब बढ़ाने पर साम्य उस दिशा में जाता है जहाँ गैसीय मोल कम हों।
👉 केवल गैसों के मोल गिने जाते हैं; ठोस (s) नहीं गिने जाते।


(i) COCl2(g) ⇌ CO(g) + Cl2(g)
👉 Reactant गैसीय मोल nr = 1
👉 Product गैसीय मोल np = 2
👉 np > nr ⇒ दाब बढ़ाने पर कम मोल वाली तरफ (बाएँ)
पश्च दिशा
(ii) CH4(g) + 2S2(g) ⇌ CS2(g) + 2H2S(g)
👉 nr = 3, np = 3
👉 दोनों बराबर ⇒ दाब परिवर्तन का असर नहीं
अप्रभावित
(iii) CO2(g) + C(s) ⇌ 2CO(g)
👉 C(s) नहीं गिनेंगे
👉 nr = 1, np = 2
👉 np > nr
पश्च दिशा
(iv) 2H2(g) + CO(g) ⇌ CH3OH(g)
👉 nr = 3, np = 1
👉 np < nr, दाब बढ़ाने पर दाएँ शिफ्ट
अग्र दिशा
(v) CaCO3(s) ⇌ CaO(s) + CO2(g)
👉 solids नहीं गिनेंगे
👉 nr = 0, np = 1
👉 np > nr
पश्च दिशा
(vi) 4NH3(g) + 5O2(g) ⇌ 4NO(g) + 6H2O(g)
👉 nr = 9, np = 10
👉 np > nr
पश्च दिशा
क्या आप जानते हैं?
👉 अगर Δng = 0 (जैसे प्रश्न (ii) में), तो दाब परिवर्तन से साम्य नहीं बदलती।
Q.27: निम्नलिखित अभिक्रिया के लिए 1024 K पर साम्य स्थिरांक Kp = 1.6 × 105 है:
H2(g) + Br2(g) ⇌ 2HBr(g)
यदि HBr को 10.0 bar वाले बंद पात्र में रखा जाए, तो 1024 K पर सभी गैसों के साम्य दाब ज्ञात कीजिए।
उत्तर
pH₂ = pBr₂ = 2.5 × 10−2 bar (≈ 0.0249 bar)
pHBr = 10 − p ≈ 9.95 bar
व्याख्या – Step by Step
Step 1: शुरुआत केवल HBr से है
अग्र अभिक्रिया का Kp दिया है: Kp(forward) = 1.6 × 105
लेकिन system में शुरुआत में केवल HBr है, इसलिए net प्रक्रिया उल्टी होगी:
2HBr ⇌ H2 + Br2

\( K_p(\text{reverse})=\frac{1}{1.6\times10^5} \)

Step 2: दाब परिवर्तन मान लें
मान लें साम्य तक HBr के दाब में p bar की कमी होती है। तब:
pHBr = 10 − p,
pH₂ = pBr₂ = p/2

प्रतिप अभिक्रिया के लिए:
\( K_p(\text{reverse})=\frac{p_{H_2}\,p_{Br_2}}{(p_{HBr})^2} =\frac{(p/2)(p/2)}{(10-p)^2} =\frac{1}{1.6\times10^5} \)
\( \frac{p^2}{4(10-p)^2}=\frac{1}{1.6\times10^5} \)
दोनों तरफ वर्गमूल:
\( \frac{p}{2(10-p)}=\frac{1}{4\times10^2} \)
\( 400p=2(10-p) \)
\( 400p=20-2p \)
\( 402p=20 \)
\( p=\frac{20}{402}=4.98\times10^{-2}\ \text{bar} \)

Step 3: अंतिम साम्य दाब
\( p_{H_2}=p_{Br_2}=\frac{p}{2} =\frac{4.98\times10^{-2}}{2} =2.49\times10^{-2}\ \text{bar} \approx2.5\times10^{-2}\ \text{bar} \)
\( p_{HBr}=10-p =10-0.0498 =9.9502\ \text{bar} \approx9.95\ \text{bar} \)
क्या आप जानते हैं?
👉 बहुत बड़ा Kp (forward) होने का मतलब है कि H2 + Br2 → 2HBr बहुत अनुकूल है, इसलिए केवल HBr से शुरू करने पर भी उसका विघटन बहुत कम होता है।
Q.28: निम्नलिखित ऊष्माशोषी अभिक्रिया के अनुसार भाप अपचयन द्वारा डाइहाइड्रोजन गैस प्राकृतिक गैस से प्राप्त की जाती है:
CH4(g) + H2O(g) ⇌ CO(g) + 3H2(g)
(क) उपरोक्त अभिक्रिया के लिए Kp का व्यंजक लिखिए।
(ख) Kp तथा साम्य मिश्रण के संघटन पर क्या प्रभाव होगा, यदि:
(i) दाब बढ़ा दिया जाए
(ii) ताप बढ़ा दिया जाए
(iii) उत्प्रेरक प्रयुक्त किया जाए
उत्तर
(क) Kp का व्यंजक
K_p=\dfrac{p_{CO}\,(p_{H_2})^3}{p_{CH_4}\,p_{H_2O}}

(ख) प्रभाव
(i) दाब बढ़ाने पर
✅ गैसीय मोल: बाएँ 2, दाएँ 4
✅ दाब बढ़ाने पर साम्य बाईं दिशा (कम मोल वाली तरफ) शिफ्ट होगा।
Kp: नहीं बदलता (क्योंकि Kp केवल ताप पर निर्भर है)।

(ii) ताप बढ़ाने पर (अभिक्रिया ऊष्माशोषी है)
✅ साम्य अग्र दिशा में शिफ्ट होगा।
Kp: बढ़ेगा (endothermic reaction के लिए)।

(iii) उत्प्रेरक डालने पर
✅ साम्य की स्थिति (equilibrium composition) नहीं बदलती।
Kp: नहीं बदलता
✅ केवल साम्य तक पहुँचने की गति बढ़ती है (forward और reverse दोनों rates बढ़ती हैं)।
व्याख्या – Step by Step
Rule 1:
👉 Kp का expression लिखते समय हर गैस का partial pressure लेते हैं।
👉 और जिस पदार्थ का coefficient जितना होता है, pressure पर उतनी power लगती है।

Rule 2:
👉 Pressure बदलने से equilibrium की direction (left/right) बदल सकती है।
👉 लेकिन Kp की value नहीं बदलती, अगर temperature same रहे।

Rule 3:
👉 अगर reaction endothermic है, तो temperature बढ़ाने पर forward reaction ज़्यादा चलती है।
👉 यानी products ज़्यादा बनते हैं।

Rule 4:
👉 Catalyst Kp नहीं बदलता।
👉 Catalyst equilibrium पर amounts भी नहीं बदलता।
👉 बस equilibrium जल्दी achieve हो जाता है।
क्या आप जानते हैं?
👉 Industry में hydrogen बनाने की process (steam reforming) में अक्सर high temperature रखा जाता है।
👉 क्योंकि forward reaction endothermic होती है, इसलिए high temperature पर H2 की yield बढ़ जाती है
Q.29: साम्य 2H2 (g) + CO(g) ⇌ CH3 OH(g) पर निम्न परिवर्तन का प्रभाव बताइए:
(क) H2 मिलाने पर
(ख) CH3 OHमिलाने पर
(ग) CO हटाने पर
(घ) CH3 OH हटाने पर
Answer (उत्तर)
(क) साम्य अग्र दिशा में विस्थापित होगा।
(ख) साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होगा।
(ग) साम्य पश्च दिशा में विस्थापित होगा।
(घ) साम्य अग्र दिशा में विस्थापित होगा।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
ला-शातेलिए सिद्धान्त के अनुसार सिस्टम दिए गए परिवर्तन का विरोध करता है:
👉 क्रियाकारक बढ़ाओक्रियाकारक को काम में लेने के लिए अभिक्रिया अग्र दिशा मे बढती है।
👉 उत्पाद बढ़ाओउत्पाद को काम में लेने के लिए अभिक्रिया पश्च दिशा मे बढती है।
👉 क्रियाकारक घटाओक्रियाकारक को बनाने के लिए अभिक्रिया पश्च दिशा मे बढती है।
👉 उत्पाद घटाओउत्पाद को बनाने के लिए अभिक्रिया अग्र दिशा मे बढती है।
इसी से:
👉 H2 जोड़ने परअग्र दिशा मे
👉 CH3 OH जोड़ने परपश्च दिशा मे
👉 CO हटाने परपश्च दिशा मे
👉 CH3 OH हटाने परअग्र दिशा मे
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 सान्द्रता /आंशिक दाब बदलने पर साम्य स्थिति बदलती है, लेकिन K का मान नहीं बदलता (जब तक ताप स्थिर रहे)।
Q.30: 473 K पर फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड \(PCl_5\) के विघटन के लिए \(K_c\) का मान \(8.3\times10^{-3}\) है। यदि अभिक्रिया इस प्रकार है:
\(PCl_5(g)\rightleftharpoons PCl_3(g)+Cl_2(g),\ \Delta_r H^\circ=+124.0\ \text{kJ mol}^{-1}\)

(क) अभिक्रिया के लिए \(K_c\) का व्यंजक लिखिए।
(ख) प्रतिगामी अभिक्रिया के लिए समान ताप पर \(K_c\) का मान क्या होगा?
(ग) यदि
(i) और अधिक \(PCl_5\) मिलाया जाए,
(ii) दाब बढ़ाया जाए, तथा
(iii) ताप बढ़ाया जाए,
तो \(K_c\) पर क्या प्रभाव होगा?
Answer (उत्तर)
✅ (क)
\( K_c=\dfrac{[PCl_3][Cl_2]}{[PCl_5]} \)

✅ (ख) प्रतीप अभिक्रिया के लिए
\( K_c'=\dfrac{1}{K_c}=\dfrac{1}{8.3\times10^{-3}}=120.48 \) (लगभग)

✅ (ग) \(K_c\) पर प्रभाव:
👉 (i) \(PCl_5\) मिलाने पर: \(K_c\) पर कोई प्रभाव नहीं
👉 (ii) दाब बढ़ाने पर: \(K_c\) पर कोई प्रभाव नहीं
👉 (iii) ताप बढ़ाने पर: अभिक्रिया ऊष्माशोषी है, इसलिए \(K_c\) बढ़ेगा
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
👉 \(K_c\) केवल ताप पर निर्भर करता है, सान्द्रता या दाब बदलने से नहीं।

👉 दी गई अभिक्रिया:
\( PCl_5(g)\rightleftharpoons PCl_3(g)+Cl_2(g) \)

इसका साम्य व्यंजक होगा:
\( K_c=\dfrac{[PCl_3][Cl_2]}{[PCl_5]} \)

👉 प्रतीप अभिक्रिया के लिए संतुलन स्थिरांक उल्टा हो जाता है:
\( K_c'=\dfrac{1}{K_c} \)

👉 (i) अभिकारक \(PCl_5\) बढ़ाने से साम्य स्थिति बदलेगी, लेकिन \(K_c\) नहीं बदलेगा।
👉 (ii) दाब बढ़ाने से भी साम्य की स्थिति प्रभावित हो सकती है, पर \(K_c\) वही रहेगा (जब तक ताप स्थिर है)।
👉 (iii) ताप बढ़ाने पर क्योंकि \(\Delta_r H^\circ>0\) (ऊष्माशोषी), अग्र अभिक्रिया को बढ़ावा मिलता है, इसलिए \(K_c\) का मान बढ़ता है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 किसी भी रासायनिक साम्य में साम्य स्थिरांक \(K\) का मान केवल तापमान बदलने पर ही बदलता है।
👉 सान्द्रता, दाब, उत्प्रेरक आदि साम्य की स्थिति बदलते हैं, \(K\) का मान नहीं (स्थिर ताप पर)।
Q.31: हैबर विधि में प्रयुक्त हाइड्रोजन को प्रायः प्राकृतिक गैस से प्राप्त मेथेन को उच्च ताप पर भाप के साथ अभिक्रिया कर बनाते हैं। दो-चरणीय अभिक्रिया में प्रथम चरण में CO एवं \(H_2\) बनते हैं। दूसरे चरण में प्रथम चरण में बनी CO, अतिरिक्त भाप के साथ अभिक्रिया करती है:
\(CO(g)+H_2O(g)\rightleftharpoons CO_2(g)+H_2(g)\)
यदि \(400^\circ C\) पर अभिक्रिया पात्र में CO तथा \(H_2O\) का सममोलर मिश्रण इस प्रकार लिया जाए कि
\(p_{CO}=p_{(H_2O)}=4.0\ \text{bar}\)
तो साम्यावस्था पर \(H_2\) का आंशिक दाब क्या होगा?
दिया है: \(K_p=0.1\ (\text{at }400^\circ C)\)
Answer (उत्तर)
✅ साम्यावस्था पर \(H_2\) का आंशिक दाब:
\(\left(p_{(H_2)}\right)_{eq}\approx 0.96\ \text{bar}\)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
मान लेते हैं कि साम्य पर \(H_2\) का आंशिक दाब \(=p\ \text{bar}\) है।
तब अभिक्रिया:
\(CO(g)+H_2O(g)\rightleftharpoons CO_2(g)+H_2(g)\)

प्रारंभिक दाब (bar):
\(p_{CO}=4,\)
\( \ p_{(H_2O)}=4,\)
\( \ p_{(CO_2)}=0,\)
\( \ p_{(H_2)}=0\)

साम्य पर दाब (bar):
\(p_{CO}=(4-p),\)
\( \ p_{(H_2O)}=(4-p),\)
\( \ p_{(CO_2)}=p,\)
\( \ p_{(H_2)}=p\)

अब,
\( K_p=\frac{p_{(CO_2)}\,p_{(H_2)}}{p_{CO}\,p_{(H_2O)}}=\frac{p^2}{(4-p)^2} \) दिया है \(K_p=0.1\), इसलिए
\( \frac{p^2}{(4-p)^2}=0.1 \)
\( \frac{p}{4-p}=\sqrt{0.1}=0.316 \)
\( p=0.316(4-p)=1.264-0.316p \)
\( 1.316p=1.264 \)
\( p=\frac{1.264}{1.316}=0.960\ \text{bar}\ (\text{लगभग}) \)
अतः,
\(\left(p_{(H_2)}\right)_{eq}\approx 0.96\ \text{bar}\)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 इस अभिक्रिया में गैस के कुल मोल दोनों ओर समान हैं \((\Delta n_g=0)\), इसलिए \(K_p\) का दाब-निर्भर रूप सरल रहता है।
👉 \(CO+H_2O\rightleftharpoons CO_2+H_2\) को जल-गैस शिफ्ट अभिक्रिया कहा जाता है, जो औद्योगिक \(H_2\) उत्पादन में बहुत महत्वपूर्ण है।
Q.32: बताइए कि निम्नलिखित में से किस अभिक्रिया में अभिकारकों एवं उत्पादों की सांद्रता सुप्रेक्ष्य (appreciable) होगी?
(क) Cl2(g) ⇌ 2Cl(g),   Kc = 5×10-39
(ख) Cl2(g) + 2NO(g) ⇌ 2NOCl(g),   Kc = 3.7×108
(ग) Cl2(g) + 2NO2(g) ⇌ 2NO2Cl(g),   Kc = 1.8
Answer (उत्तर)
अभिक्रिया (ग) में अभिकारकों और उत्पादों दोनों की सांद्रता सुप्रेक्ष्य होगी।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
ला-शातेलिए/साम्य स्थिरांक की समझ के अनुसार:
👉 यदि Kc ≪ 1, तो साम्य पर अभिक्रिया बाईं ओर (अभिकारक) अधिक रहती है, उत्पाद बहुत कम बनते हैं।
(क) में Kc = 5×10-39 बहुत ही छोटा है, इसलिए उत्पाद की सांद्रता नगण्य होगी।

👉 यदि Kc ≫ 1, तो साम्य पर अभिक्रिया दाईं ओर (उत्पाद) अधिक रहती है, अभिकारक बहुत कम बचते हैं।
(ख) में Kc = 3.7×108 बहुत बड़ा है, इसलिए अभिकारकों की सांद्रता नगण्य होगी।

👉 यदि Kc ≈ 1, तो अभिकारक और उत्पाद दोनों ही उल्लेखनीय मात्रा में मौजूद रहते हैं।
(ग) में Kc = 1.8, जो 1 के आसपास है, इसलिए दोनों पक्षों की सांद्रता सुप्रेक्ष्य होगी।

इसलिए सही विकल्प: (ग)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 साम्य स्थिरांक का मान सिर्फ यह बताता है कि साम्य पर किस पक्ष का प्रभुत्व है, अभिक्रिया की गति नहीं।
👉 Kc का मान तापमान बदलने पर बदलता है, लेकिन एक निश्चित ताप पर स्थिर रहता है।
Q.33: 25C पर अभिक्रिया 3O2(g) ⇌ 2O3(g) के लिए Kc = 2.0×10-50 है। यदि वायु में 25C पर O2 की साम्यावस्था सांद्रता 1.6×10-2 M है, तो O3 की सांद्रता क्या होगी?
Answer (उत्तर)
[O3] = 2.86×10-28 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
दी गई अभिक्रिया:
3O2(g) ⇌ 2O3(g)

इसका साम्य व्यंजक:
Kc = [O3]2 / [O2]3

दिया है:
Kc = 2.0×10-50,
[O2] = 1.6×10-2 M

अब मान रखकर:
2.0×10-50 = [O3]2 / (1.6×10-2)3
[O3]2 = (2.0×10-50)(1.6×10-2)3
यहाँ (1.6×10-2)3हो जायेगा = 4.096×10-6
[O3]2 = (2.0×10-50)(4.096×10-6)
= 8.192×10-56

अब वर्गमूल:
[O3] = √(8.192×10-56)
= 2.86×10-28 M

अतः, [O3] = 2.86×10-28 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 Kc का बहुत छोटा मान बताता है कि साम्य पर O3 की मात्रा बहुत कम होगी।
👉 यही कारण है कि सामान्य परिस्थितियों में O2 अधिक स्थिर है, जबकि O3 की सांद्रता बहुत कम मिलती है।
Q.34: अभिक्रिया CO(g)+3H2(g)⇌CH4(g)+H2O(g) एक 1 L फ्लास्क में 1300 K पर साम्यावस्था में है। मिश्रण में CO के 0.30 मोल, H2 के 0.10 मोल, H2O के 0.02 मोल तथा CH4 की अज्ञात मात्रा है। दिए गए ताप पर Kc=3.90 है। मिश्रण में CH4 की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
[CH4]=5.85×10-2 M
✅ 1 L फ्लास्क होने के कारण:
n(CH4)=5.85×10-2 mol
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अभिक्रिया: CO+3H2⇌CH4+H2O

साम्य स्थिरांक व्यंजक:
Kc=[CH4][H2O]/([CO][H2]3)

दिया है:
Kc=3.90,
[CO]=0.30,
[H2]=0.10,
[H2O]=0.02
(क्योंकि आयतन 1 L है, इसलिए मोलरता = मोल)

अब,
\( 3.90=\dfrac{[CH_4](0.02)}{(0.30)(0.10)^3} \)
\( [CH_4]=\dfrac{3.90\times(0.30)\times(0.10)^3}{0.02} \)
\( (0.10)^3=0.001,\quad 0.30\times0.001 \)
\( (0.10)^3\times0.30=3.0\times10^{-4} \)
\( 3.90\times3.0\times10^{-4}=1.17\times10^{-3} \)
\( [CH_4]=\dfrac{1.17\times10^{-3}}{0.02} \)
\( [CH_4]=5.85\times10^{-2}\ \text{M} \)

\( \therefore\ [CH_4]=5.85\times10^{-2}\ \text{M} \)

और 1 L में CH4 के मोल:
n(CH4)=5.85×10-2 mol
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 1 L पात्र में किसी गैस की मोलरता का संख्यात्मक मान उसके मोल के बराबर होता है।
👉 CO+3H2→CH4+H2O प्रकार की अभिक्रिया औद्योगिक गैस-साम्य समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Q.35: संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) का क्या अर्थ है? निम्नलिखित स्पीशीज़ के लिए संयुग्मी अम्ल/क्षार बताइए: HNO2, CN-, HClO4, F-, OH-, CO32-, S2-
Answer (उत्तर)
संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म वे दो स्पीशीज़ होते हैं जिनमें एक प्रोटॉन (H+) का अंतर होता है।
दिए गए कणों के संयुग्मी युग्म:
दिए गए कणों के संयुग्मी युग्म (Conjugate Acid-Base Pairs)
क्रमांक दिया गया कण प्रकृति संयुग्मी युग्म
1 HNO2 अम्ल NO2 (संयुग्मी क्षार)
2 CN क्षार HCN (संयुग्मी अम्ल)
3 HClO4 अम्ल ClO4 (संयुग्मी क्षार)
4 F क्षार HF (संयुग्मी अम्ल)
5 OH क्षार H2O (संयुग्मी अम्ल)
6 CO32− क्षार HCO3 (संयुग्मी अम्ल)
7 S2− क्षार HS (संयुग्मी अम्ल)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
📌 नियम बहुत सरल है:
👉 अम्ल H+ देता है, तो उसका संयुग्मी क्षार बनता है।
👉 क्षार H+ ग्रहण करता है, तो उसका संयुग्मी अम्ल बनता है।

अब एक-एक करके:
HNO2 → NO2- + H+
इसलिए NO2-, HNO2 का संयुग्मी क्षार है।

CN- + H+ → HCN
इसलिए HCN, CN- का संयुग्मी अम्ल है।

HClO4 → ClO4- + H+
इसलिए ClO4-, HClO4 का संयुग्मी क्षार है।

F- + H+ → HF
इसलिए HF, F- का संयुग्मी अम्ल है।

OH- + H+ → H2O
इसलिए H2O, OH- का संयुग्मी अम्ल है।

CO3(2-) + H+ → HCO3-
इसलिए HCO3-, CO3(2-) का संयुग्मी अम्ल है।

S(2-) + H+ → HS-
इसलिए HS-, S(2-) का संयुग्मी अम्ल है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 किसी भी संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म में केवल एक H+ का ही अंतर होता है।
👉 जितना मजबूत अम्ल होगा, उसका संयुग्मी क्षार उतना ही कमजोर होगा (और इसके विपरीत)।
Q.36: निम्नलिखित में से कौन-से लुईस अम्ल (Lewis acids) हैं?
H2O, BF3, H+, NH4+
Answer (उत्तर)
लुईस अम्ल हैं: BF3, H+, NH4+
H2O लुईस अम्ल नहीं है (यह सामान्यतः लुईस क्षार की तरह व्यवहार करता है)।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
👉 लुईस अम्ल (Lewis acid) वह होता है जो इलेक्ट्रॉन युग्म (electron pair) ग्राही |
👉 लुईस क्षार (Lewis base) वह होता है जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान करे।

अब दिए गए species देखें:

H2O:
ऑक्सीजन पर इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं, इसलिए यह इलेक्ट्रॉन युग्म दाता है → लुईस क्षार |

BF3:
बोरॉन के पास अपूर्ण अष्टक (6 electrons) होता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही → लुईस अम्ल|

H+:
इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर बंध बनाता है → लुईस अम्ल|

NH4+:
यह प्रोटॉन दान कर सकता है (Brønsted acid) और प्रजाति के रूप में electron pair स्वीकार करने की क्षमता के कारण इसे भी लुईस अम्ल माना जाता है।

इसलिए सही उत्तर: 👉 BF3, H+, NH4+
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 हर Brønsted acid, Lewis acid के रूप में भी काम कर सकता है।
👉 BF3 जैसा इलेक्ट्रॉन-अल्प (electron-deficient) अणु Lewis acid का क्लासिक उदाहरण है।
Q.37: निम्नलिखित ब्रॉन्स्टेड अम्लों के लिए संयुग्मी क्षारकों के सूत्र लिखिए:
HF, H2SO4, एवं HCO3
Answer (उत्तर)
HF का संयुग्मी क्षारक: F
H2SO4 का संयुग्मी क्षारक: HSO4
HCO3 का संयुग्मी क्षारक: CO32−
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
ब्रॉन्स्टेड अम्ल H+ देता है।
इसलिए संयुग्मी क्षारक = अम्ल − H+
👉 HF − H+ = F
👉 H2SO4 − H+ = HSO4
👉 HCO3 − H+ = CO32−
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 किसी भी संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म में सिर्फ एक H+ का अंतर होता है।
👉 HCO3 उभयधर्मी (amphiprotic) है, यानी यह H+ दे भी सकता है और ले भी सकता है।
Q.38: ब्रॉन्स्टेड क्षारकों NH2, NH3 तथा HCOO के संयुग्मी अम्ल लिखिए।
Answer (उत्तर)
NH2 का संयुग्मी अम्ल: NH3
NH3 का संयुग्मी अम्ल: NH4+
HCOO का संयुग्मी अम्ल: HCOOH
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
ब्रॉन्स्टेड क्षारक H+ ग्रहण करता है।
इसलिए संयुग्मी अम्ल = क्षारक + H+
👉 NH2 + H+ = NH3
👉 NH3 + H+ = NH4+
👉 HCOO + H+ = HCOOH
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 NH3/NH4+ एक बहुत प्रसिद्ध conjugate acid-base pair है।
👉 HCOO (formate ion) का conjugate acid, formic acid (HCOOH) होता है।
Q.39: स्पीशीज़ H2O, HCO3, HSO4 तथा NH3 ब्रॉन्स्टेड अम्ल तथा क्षारक, दोनों की भाँति व्यवहार करते हैं। प्रत्येक के संयुग्मी अम्ल तथा संयुग्मी क्षारक बताइए।
Answer (उत्तर)
✅ प्रत्येक स्पीशीज़ के लिए:
👉 H2O का संयुग्मी अम्ल: H3O+, संयुग्मी क्षारक: OH
👉 HCO3 का संयुग्मी अम्ल: H2CO3, संयुग्मी क्षारक: CO32−
👉 HSO4 का संयुग्मी अम्ल: H2SO4, संयुग्मी क्षारक: SO42−
👉 NH3 का संयुग्मी अम्ल: NH4+, संयुग्मी क्षारक: NH2
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
👉 यदि कोई स्पीशीज़ H+ ग्रहण करे, तो वह क्षारक की तरह कार्य करती है और उसका संयुग्मी अम्ल बनता है।
👉 यदि वही स्पीशीज़ H+ त्याग दे, तो वह अम्ल की तरह कार्य करती है और उसका संयुग्मी क्षारक बनता है।
इसी आधार पर ऊपर दिए गए सभी species amphiprotic/amphoteric व्यवहार दिखाते हैं।

Table (सारणी)
स्पीशीज़ संयुग्मी अम्ल
(जब ब्रॉन्स्टेड क्षारक की तरह कार्य करे)
संयुग्मी क्षारक
(जब ब्रॉन्स्टेड अम्ल की तरह कार्य करे)
H2O H3O+ OH
HCO3 H2CO3 CO32−
HSO4 H2SO4 SO42−
NH3 NH4+ NH2
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 ऐसे कण जो परिस्थिति के अनुसार अम्ल और क्षारक दोनों की तरह व्यवहार करते हैं, उन्हें amphiprotic कहा जाता है।
👉 HCO3 और HSO4 बफर रसायन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q.40: निम्नलिखित स्पीशीज़ को लुईस अम्ल तथा क्षारक में वर्गीकृत कीजिए तथा बताइए कि ये किस प्रकार लुईस अम्ल-क्षारक की तरह कार्य करते हैं:
(क) OH
(ख) F
(ग) H+
(घ) BCl3
Answer (उत्तर)
लुईस क्षारक (Lewis Base):
👉 OH
👉 F

लुईस अम्ल (Lewis Acid):
👉 H+
👉 BCl3
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
👉 Lewis base = जो इलेक्ट्रॉन युग्म (electron pair) दान करे।
👉 Lewis acid = जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करे।

अब एक-एक species:

1. OH
ऑक्सीजन पर lone pair होते हैं, यह electron pair दान कर सकता है।
इसलिए यह लुईस क्षारक है।

2. F
फ्लोराइड आयन पर अतिरिक्त electron pair होता है, यह pair दान करता है।
इसलिए यह लुईस क्षारक है।

3. H+
यह electron pair ग्रहण करके सहसंयोजक बंध बनाता है।
इसलिए यह लुईस अम्ल है।

4. BCl3
बोरॉन इलेक्ट्रॉन-अल्प (electron deficient) है, इसका octet अधूरा रहता है।
इसलिए यह electron pair ग्रहण करता है और लुईस अम्ल है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 BCl3 और BF3 लुईस अम्ल के क्लासिक उदाहरण हैं क्योंकि बोरॉन का octet अधूरा होता है।
👉 OH जैसे आयन कई अभिक्रियाओं में nucleophile (electron pair donor) की तरह भी काम करते हैं।
Q.41: एक मृदु पेय के नमूने में हाइड्रोजन आयन [H+] की सांद्रता 3.8×10-3 M है। उसकी pH परिकलित कीजिए।
Answer (उत्तर)
pH = 2.42
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
pH का सूत्र:
pH = -log[H+]

दिया है:
[H+] = 3.8×10-3

अब,
pH = -log(3.8×10-3)
= -(log 3.8 + log 10-3)
= -(0.58 - 3) = 2.42

अतः, pH = 2.42
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 pH का मान 7 से कम होने पर विलयन अम्लीय होता है।
👉 pH = 2.42 काफी अम्लीय पेय को दर्शाता है।
Q.42: सिरके के एक नमूने की pH = 3.76 है। इसमें हाइड्रोजन आयन [H+] की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
[H+] = 1.74×10-4 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
सूत्र:
pH = -log[H+]

दिया है:
pH = 3.76

तो,
-log[H+] = 3.76
log[H+] = -3.76

अब antilog लेने पर:
[H+] = 10-3.76
[H+] = 1.74×10-4 M

अतः, [H+] = 1.74×10-4 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 pH में 1 इकाई का बदलाव [H+] में 10 गुना बदलाव दर्शाता है।
👉 इसलिए pH स्केल logarithmic होता है, linear नहीं।
Q.43: 298 K पर HF, HCOOH तथा HCN के आयनीकरण स्थिरांक (Ka) क्रमशः 6.8×10-4, 1.8×10-4 तथा 4.8×10-9 हैं। इनके संगत संयुग्मी क्षारकों के आयनीकरण स्थिरांक (Kb) ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
F- के लिए:
Kb = 1.47×10-11 (लगभग 1.5×10-11)

HCOO- के लिए:
Kb = 5.56 × 10-11 (लगभग 5.6×10-11)

CN- के लिए:
Kb = 2.08×10-6
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
298 K पर:
Kw = 1.0×10-14

और संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म के लिए:
Ka × Kb = Kw
⇒ Kb = Kw / Ka

HF का संयुग्मी क्षारक F-:
Kb(F-) = 10-14 / (6.8×10-4) = 1.47×10-11

HCOOH का संयुग्मी क्षारक HCOO-:
Kb(HCOO-) = 10-14 / (1.8×10-4) = 5.56×10-11

HCN का संयुग्मी क्षारक CN-:
Kb(CN-) = 10-14 / (4.8×10-9) = 2.08×10-6
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 जिसका Ka बड़ा होता है, उसके संयुग्मी क्षारक का Kb छोटा होता है।
👉 इसलिए HF और HCOOH के conjugate bases कमजोर हैं, जबकि HCN बहुत कमजोर अम्ल होने से CN- तुलनात्मक रूप से ज्यादा मजबूत क्षारक है।
Q.44: फिनॉल का आयनन स्थिरांक Ka=1.0×10-10 है। 0.05 M फिनॉल के विलयन में फिनॉक्साइड (फिनोलेट) आयन की सांद्रता तथा 0.01 M सोडियम फिनॉक्साइड विलयन में उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
0.05 M फिनॉल में
[C6H5O-] = 2.24×10-6 M

0.01 M सोडियम फिनॉक्साइड में फिनॉल के आयनन की मात्रा (degree of ionization):
α = 1.0×10-8
(अर्थात आयनित सांद्रता y = 5.0×10-10 M)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
फिनॉल का साम्य:
C6H5OH ⇌ C6H5O- + H+
Ka = [C6H5O-][H+] / [C6H5OH]

(1) 0.05 M फिनॉल में [C6H5O-]
मान लें साम्य पर [C6H5O-] = x,
[H+] = x,
[C6H5OH] = 0.05 - x
Ka = x2/(0.05-x) = 1.0×10-10

क्योंकि Ka बहुत छोटा है, x ≪ 0.05, इसलिए:
x2/0.05 ≈ 1.0×10-10
x2 = 0.05×10-10 = 5.0×10-12
x = √(5.0×10-12) = 2.24×10-6 M

अतः,
[C6H5O-] = 2.24×10-6 M

(2) 0.01 M सोडियम फिनॉक्साइड में फिनॉल का आयनन
यहाँ प्रारंभ में [C6H5O-] = 0.01 M (common ion उपस्थित है)।
मान लें फिनॉल का आयनन = y:
[C6H5OH] = 0.05 - y,
[C6H5O-] = 0.01 + y,
[H+] = y
Ka = ((0.01+y)(y))/(0.05-y) = 1.0×10-10

क्योंकि y बहुत छोटा होगा:
0.01+y ≈ 0.01, 0.05-y ≈ 0.05
(0.01×y)/0.05 = 1.0×10-10
y = (1.0×10-10×0.05)/0.01
y = 5.0×10-10 M

अब आयनन की मात्रा:
α = आयनित सान्द्रता ÷ प्रारम्भिक सान्द्रता
α = y/0.05
α = (5.0×10-10)/0.05
α = 1.0×10-8
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 समआयन (C6H5O-) जोड़ने से फिनॉल का आयनन बहुत कम हो जाता है।
👉 इसे समआयन प्रभाव कहते हैं, जो दूर्बल अम्ल या दूर्बल क्षार साम्य में बहुत महत्वपूर्ण है।
Q.45: H2S का प्रथम आयनन स्थिरांक Ka1=9.1×10-8 है। इसके 0.1 M विलयन में HS- आयनों की सांद्रता की गणना कीजिए तथा बताइए कि यदि इसमें 0.1 M HCl भी उपस्थित हो, तो यह सांद्रता किस प्रकार प्रभावित होगी। यदि H2S का द्वितीय वियोजन स्थिरांक Ka2=1.2×10-13 हो, तो S2- आयनों की दोनों स्थितियों में सांद्रता की गणना कीजिए।
Answer (उत्तर)
स्थिति–1: केवल 0.1 M H2S
[HS-] = 9.54 × 10-5 M

स्थिति–2: 0.1 M H2S + 0.1 M HCl
[HS-] = 9.1×10-8 M
[S2-] ≈ 1.1×10-19 M

निष्कर्ष: 0.1 M HCl की उपस्थिति में [HS-] और [S2-] दोनों बहुत कम हो जाते हैं (समआयन प्रभाव, high [H+]).
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
(A) केवल 0.1 M H2S
पहला वियोजन:
H2S ⇌ H+ + HS-,  Ka1=9.1×10-8

मान लें [HS-] = x, तो
Ka1 = x2/(0.1-x) ≈ x2/0.1
x2 = 9.1×10-8×0.1 = 9.1×10-9
x = 9.54×10-5

अतः
[HS-] = 9.54×10-5 M,
[H+] ≈ 9.54×10-5 M

दूसरा वियोजन:
HS- ⇌ H+ + S2-,  Ka2=1.2×10-13
Ka2 = [H+][S2-]/[HS-]
⇒ [S2-] = Ka2[HS-]/[H+]

क्योंकि [HS-] ≈ [H+], इसलिए
[S2-] ≈ Ka2 = 1.2×10-13 M

(B) 0.1 M HCl की उपस्थिति में
यहाँ [H+] ≈ 0.1 M (प्रबल अम्ल से)।

पहला वियोजन:
Ka1 = [H+][HS-]/[H2S]
9.1×10-8 = ((0.1)×y)/0.1
⇒ y = 9.1×10-8

अतः
[HS-] = 9.1×10-8 M

दूसरा वियोजन:
Ka2 = [H+][S2-]/[HS-]
⇒ [S2-] = Ka2[HS-]/[H+]
[S2-] = 1.2×10-13×(9.1×10-8)/0.1
= 1.092×10-19 M
≈ 1.1×10-19 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 अम्लीय माध्यम ([H+] अधिक) में कमजोर अम्लों का आयनन बहुत दब जाता है।
👉 इसी कारण HCl की उपस्थिति में S2- आयन की मात्रा अत्यंत नगण्य हो जाती है।
Q.46: एसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक Ka = 1.74 × 10−5 है। इसके 0.05 M विलयन में वियोजन की मात्रा, एसीटेट आयन सांद्रता तथा pH का परिकलन कीजिए।
Answer (उत्तर)
वियोजन की मात्रा (α) = 0.018 (लगभग 1.8%)
[CH3COO] = 9.33 × 10−4 mol L−1
[H+] = 9.33 × 10−4 mol L−1
pH = 3.03
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अभिक्रिया:
CH3COOH ⇌ CH3COO + H+

प्रारम्भिक सांद्रता:
[CH3COOH] = 0.05 M,
[CH3COO] = 0,
[H+] = 0

मान लें साम्य पर x मोल प्रति लीटर वियोजित होता है। तब:
[CH3COOH] = 0.05 − x
[CH3COO] = x
[H+] = x

Ka = [CH3COO][H+] / [CH3COOH]
1.74 × 10−5 = x2 / (0.05 − x)

क्योंकि x बहुत छोटा होगा, इसलिए 0.05 − x ≈ 0.05 मानते हैं:
1.74 × 10−5 = x2 / 0.05
x2 = 1.74 × 10−5 × 0.05 = 8.7 × 10−7
x = √(8.7 × 10−7) = 9.33 × 10−4

अतः,
[CH3COO] = x = 9.33 × 10−4 mol L−1
[H+] = x = 9.33 × 10−4 mol L−1

वियोजन की मात्रा:
α = x/0.05 = (9.33 × 10−4)/0.05 = 0.01866 ≈ 0.018

pH = −log[H+]
= −log(9.33 × 10−4)
= 3.03
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 एसीटिक अम्ल एक कमजोर अम्ल है, इसलिए इसका आयनन आंशिक होता है।
👉 CH3COOH और CH3COO मिलकर buffer solution बनाने में बहुत उपयोगी conjugate pair हैं।
Q.47: 0.01 M कार्बनिक अम्ल (HA) के विलयन की pH = 4.15 है। इसके आयनन की सांद्रता, अम्ल का आयनन स्थिरांक तथा pKa का मान परिकलित कीजिए।
Answer (उत्तर)
[H+] = 7.08 × 10⁻5 M
[A] = 7.08 × 10⁻5 M
Ka = 5.01 × 10⁻7
pKa = 6.30 (लगभग)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अम्ल का आयनन:
HA ⇌ H+ + A

दिया है: pH = 4.15
इससे,
pH = −log[H+]
4.15 = −log[H+]
[H+] = 10−4.15 = 7.08 × 10⁻5 M

क्योंकि HA एक एक-प्रोटॉन अम्ल है, इसलिए
[A] = [H+] = 7.08 × 10⁻5 M

प्रारम्भिक [HA] = 0.01 M
और आयनन बहुत कम है, इसलिए साम्य पर [HA] ≈ 0.01 M लिया जा सकता है।

अब,
Ka = [H+][A]/[HA]
= (7.08 × 10⁻5)(7.08 × 10⁻5)/(0.01)
= 5.01 × 10⁻7

अब,
pKa = −log(Ka)
= −log(5.01 × 10⁻7)
= 6.30 (लगभग 6.3002)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 pH और pKa दोनों log scale पर होते हैं, इसलिए छोटे numerical बदलाव भी chemical behavior में बड़ा अंतर ला सकते हैं।
👉 pKa जितना कम, अम्ल उतना अधिक शक्तिशाली माना जाता है।
Q.48: पूर्ण वियोजन मानते हुए निम्नलिखित विलयनों का pH ज्ञात कीजिए:
(क) 0.003 M HCl
(ख) 0.005 M NaOH
(ग) 0.002 M HBr
(घ) 0.002 M KOH
Answer (उत्तर)
(क) 0.003 M HCl का pH = 2.52
(ख) 0.005 M NaOH का pH = 11.70
(ग) 0.002 M HBr का pH = 2.70
(घ) 0.002 M KOH का pH = 11.30
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
(क) 0.003 M HCl
HCl एक प्रबल अम्ल है, इसलिए
[H+] = 0.003 = 3 × 10⁻3 M
pH = −log(3 × 10⁻3) = 2.52

(ख) 0.005 M NaOH
NaOH एक प्रबल क्षार है, इसलिए
[OH] = 0.005 = 5 × 10⁻3 M
pOH = −log(5 × 10⁻3) = 2.30
pH = 14 − pOH = 14 − 2.30 = 11.70

(ग) 0.002 M HBr
HBr प्रबल अम्ल है, इसलिए
[H+] = 0.002 = 2 × 10⁻3 M
pH = −log(2 × 10⁻3) = 2.70

(घ) 0.002 M KOH
KOH प्रबल क्षार है, इसलिए
[OH] = 0.002 = 2 × 10⁻3 M
pOH = −log(2 × 10⁻3) = 2.70
pH = 14 − 2.70 = 11.30
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 प्रबल अम्ल/क्षार के dilute विलयनों में पूर्ण वियोजन मानना अच्छा approximation देता है।
👉 क्षार के लिए पहले pOH निकालकर pH = 14 − pOH भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
Q.49: निम्नलिखित विलयनों का pH ज्ञात कीजिए:
(क) 2 ग्राम TlOH को जल में घोलकर 2 लीटर विलयन बनाया जाए।
(ख) 0.3 ग्राम Ca(OH)2 को जल में घोलकर 500 mL विलयन बनाया जाए।
(ग) 0.3 ग्राम NaOH को जल में घोलकर 200 mL विलयन बनाया जाए।
(घ) 13.6 M HCl के 1 mL को जल से तनु करके कुल आयतन 1 लीटर किया जाए।
Answer (उत्तर)
(क) pH = 11.66
(ख) pH = 12.21
(ग) pH = 12.57
(घ) pH = 1.87
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
(क) 2 g TlOH in 2 L
TlOH का मोलर द्रव्यमान = 204 + 16 + 1 = 221 g mol−1
मोल = 2/221 = 0.0090498 mol
मोलरता = 0.0090498/2 = 4.52 × 10−3 M
TlOH प्रबल क्षार मानकर:
[OH] = 4.52 × 10−3 M
[H+] = 10−14 / (4.52 × 10−3) = 2.21 × 10−12 M
pH = −log(2.21 × 10−12) = 11.66

(ख) 0.3 g Ca(OH)2 in 500 mL
Ca(OH)2 का मोलर द्रव्यमान = 40 + 2(16+1) = 74 g mol−1
मोल = 0.3/74 = 0.004054 mol
आयतन = 0.5 L
[Ca(OH)2] = 0.004054/0.5 = 8.11 × 10−3 M
Ca(OH)2 → Ca2+ + 2OH
[OH] = 2 × 8.11 × 10−3 = 1.622 × 10−2 M
pOH = −log(1.622 × 10−2) = 1.79
pH = 14 − 1.79 = 12.21

(ग) 0.3 g NaOH in 200 mL
NaOH का मोलर द्रव्यमान = 40 g mol−1
मोल = 0.3/40 = 0.0075 mol
आयतन = 0.2 L
[NaOH] = [OH] = 0.0075/0.2 = 3.75 × 10−2 M
pOH = −log(3.75 × 10−2) = 1.43
pH = 14 − 1.43 = 12.57

(घ) 13.6 M HCl, 1 mL diluted to 1 L
Dilution formula: M1V1 = M2V2
M2 = (13.6 × 1 mL)/(1000 mL) = 1.36 × 10−2 M
HCl प्रबल अम्ल है, इसलिए [H+] = 1.36 × 10−2 M
pH = −log(1.36 × 10−2) = 1.87
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 प्रबल क्षारों के लिए पहले [OH] निकालकर pOH और फिर pH निकालना सबसे आसान तरीका है।
👉 25°C पर pH + pOH = 14 का संबंध बहुत उपयोगी shortcut है।
Q.50: ब्रोमोएसेटिक अम्ल की आयनन की मात्रा α = 0.132 है। 0.1 M अम्ल की pH तथा pKa का मान ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
pH = 1.88
pKa = 2.70 (लगभग)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अभिक्रिया:
CH2BrCOOH ⇌ CH2BrCOO + H+

दिया है:
प्रारम्भिक सांद्रता C = 0.1 M,
आयनन की मात्रा α = 0.132

साम्य पर:
[H+] = Cα = 0.1 × 0.132 = 1.32 × 10−2 M
[CH2BrCOO] = 1.32 × 10−2 M
[CH2BrCOOH] = C(1−α) = 0.1(1−0.132) = 0.0868 M

अब,
Ka = [CH2BrCOO][H+] / [CH2BrCOOH]
= (1.32×10−2)(1.32×10−2) / 0.0868
= 2.01×10−3

pKa = −log(Ka)
= −log(2.01 × 10−3)
= 2.70 (लगभग)

pH = −log[H+]
= −log(1.32 × 10−2)
= 1.88
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 α (आयनन की मात्रा) सीधे [H+] निकालने में मदद करती है: [H+] = Cα
👉 ब्रोमोएसेटिक अम्ल, एसीटिक अम्ल से अधिक अम्लीय होता है क्योंकि Br का −I प्रभाव conjugate base को स्थिर करता है।
Q.51: 0.005 M कोडीन (C18H21NO3) विलयन की pH = 9.95 है। इसका आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
Kb = 1.6×10−6
pKb = 5.80
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
कोडीन एक दूर्बल क्षार है:
कोडीन + H2O ⇌ कोडीनH+ + OH

दिया है:
pH = 9.95

पहले pOH निकालें:
pOH = 14 − pH = 14 − 9.95 = 4.05

अब,
[OH] = 10−pOH = 10−4.05 = 8.91 × 10−5 M

मान लें x = [OH] = [कोडीनH+] = 8.91 × 10−5 M
प्रारम्भिक [कोडीन] = 0.005 M
क्योंकि x बहुत छोटा है, इसलिए साम्य पर [कोडीन] ≈ 0.005 M

अब,
Kb = [कोडीनH+][OH] / [कोडीन]
= x2 / 0.005
= (8.91 × 10−5)2 / (5 × 10−3)
= 1.6 × 10−6

अब,
pKb = −log(Kb)
= −log(1.6 × 10−6)
= 5.80
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 दूर्बल क्षार के लिए pH दिया हो तो पहले pOH और फिर [OH] निकालना सबसे सही तरीका है।
👉 Kb छोटा होने का मतलब है कि क्षार का आयनन कम (आंशिक) है।
Q.52: 0.001 M एनीलीन (C6H5NH2) विलयन का pH क्या है? एनीलीन का आयनन स्थिरांक सारणी से Kb = 4.27×10−10 लें। इसके संयुग्मी अम्ल का आयनन स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
pH = 7.815 (लगभग 7.82)
एनीलीन के वियोजन की मात्रा α = 6.53×10−4
संयुग्मी अम्ल (C6H5NH3+) का Ka = 2.34×10−5 (लगभग 2.4×10−5)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
एनीलीन एक कमजोर क्षार है:
C6H5NH2 + H2O ⇌ C6H5NH3+ + OH

दिया है:
C = 0.001 M, Kb = 4.27×10−10

कमजोर क्षार के लिए,
[OH] = √(Kb⋅C)
[OH] = √((4.27×10−10)(0.001))
= √(4.27×10−13)
= 6.53×10−7 M

अब,
pOH = −log[OH]
pOH = −log(6.53×10−7)
pOH = 6.185
pH = 14 − pOH
pH = 14 − 6.185
pH = 7.815

इसलिए pH ≈ 7.82

वियोजन की मात्रा (α):
α = [OH]/C
= (6.53×10−7)/(10−3)
= 6.53×10−4

संयुग्मी अम्ल C6H5NH3+ के लिए:
Ka⋅Kb = Kw = 10−14
Ka = 10−14/(4.27×10−10)
Ka = 2.34×10−5
अतः Ka ≈ 2.34×10−5 (लगभग 2.4×10−5)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म के लिए हमेशा KaKb = 10−14 (25°C पर) होता है।
👉 एनीलीन aromatic amine होने के कारण अमोनिया से दूर्बल (कमजोर) क्षार होती है।
Q.53: यदि 0.05 M एसीटिक अम्ल के pKa = 4.74 है, तो आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि इसे
(क) 0.01 M HCl तथा
(ख) 0.1 M HCl विलयन में डाला जाए,
तो वियोजन की मात्रा किस प्रकार प्रभावित होती है?
Answer (उत्तर)
शुद्ध 0.05 M CH3COOH में वियोजन की मात्रा: α = 1.91×10−2

0.01 M HCl की उपस्थिति में वियोजन की मात्रा: α = 1.82×10−3

0.1 M HCl की उपस्थिति में वियोजन की मात्रा: α = 1.82×10−4

निष्कर्ष: HCl की सांद्रता बढ़ने पर एसीटिक अम्ल का आयनन बहुत घटता है।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
दिया है: pKa = 4.74
इससे,
Ka = 10−4.74 = 1.82 × 10−5

(1) शुद्ध 0.05 M एसीटिक अम्ल के लिए
दूर्बल अम्ल के लिए,
α = √(Ka/C)
α = √((1.82×10−5)/(5×10−2))
= √(3.64×10−4)
= 1.91×10−2

(2) 0.01 M HCl की उपस्थिति में
CH3COOH ⇌ CH3COO + H+
मान लें वियोजित मात्रा x है। तब
[H+] ≈ 0.01 (HCl से, क्योंकि x बहुत छोटा)
[CH3COOH] ≈ 0.05
Ka = [CH3COO][H+] / [CH3COOH]
≈ x(0.01)/0.05
x/0.05 = Ka/0.01
= (1.82×10−5)/10−2 = 1.82×10−3
α = x/0.05 = 1.82×10−3

(3) 0.1 M HCl की उपस्थिति में
इसी तरह, [H+] ≈ 0.1, [CH3COOH] ≈ 0.05
Ka ≈ y(0.1)/0.05
⇒ y/0.05 = Ka/0.1
= (1.82×10−5)/10−1 = 1.82×10−4
α = y/0.05 = 1.82×10−4

अतः H+ आयन बढ़ने से (common ion effect) एसीटिक अम्ल का वियोजन दब जाता है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 दूर्बल अम्ल के विलयन में बाहरी H+ (जैसे HCl से) जोड़ने पर उसका आयनन घटता है, इसे common ion effect कहते हैं।
👉 यही सिद्धांत buffer solutions की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है।
Q.54: डाइमिथाइल अमीन (CH3)2NH का आयनन स्थिरांक Kb = 5.4×10−4 है। इसके 0.02 M विलयन की आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए। यदि यह विलयन NaOH के प्रति 0.1 M हो, तो डाइमिथाइल अमीन का प्रतिशत आयनन क्या होगा?
Answer (उत्तर)
0.02 M (CH3)2NH के लिए आयनन की मात्रा:
α = 0.164
(लगभग 16.4%)

0.1 M NaOH की उपस्थिति में डाइमिथाइल अमीन का प्रतिशत आयनन:
% ionization = 0.54%
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अभिक्रिया:
(CH3)2NH + H2O ⇌ (CH3)2NH2+ + OH

(1) केवल 0.02 M डाइमिथाइल अमीन के लिए
कमजोर क्षार के लिए:
α = √(Kb/C)
α = √((5.4×10−4)/0.02)
= √(2.7×10−2) = 0.164
अर्थात प्रतिशत आयनन ≈ 16.4%

(2) 0.1 M NaOH की उपस्थिति में
मान लें डाइमिथाइल अमीन की वियोजित सांद्रता = x
साम्य पर:
[(CH3)2NH] ≈ 0.02
[(CH3)2NH2+] = x
[OH] = 0.1 + x ≈ 0.1

अब,
Kb = [(CH3)2NH2+][OH] / [(CH3)2NH]
≈ x(0.1)/0.02
5.4×10−4 = 0.1x/0.02
⇒ x = (5.4×10−4×0.02)/0.1 = 1.08×10−4 M

प्रतिशत आयनन:
% आयनन = (x/0.02)×100
= (1.08×10−4/0.02)×100 = 0.54%

इसलिए NaOH (common OH) की उपस्थिति में आयनन बहुत कम हो जाता है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 किसी दूर्बल क्षार में OH आयन पहले से मौजूद हो (जैसे NaOH से), तो उसका आयनन दब जाता है।
👉 इसे common ion effect कहते हैं, और यही कारण है कि 16.4% से घटकर आयनन केवल 0.54% रह गया।
Q.55: निम्नलिखित जैविक द्रवों, जिनमें pH दी गई है, की हाइड्रोजन आयन सांद्रता परिकलित कीजिए:
(क) मानव पेशीय द्रव, pH = 6.83
(ख) मानव उदर द्रव, pH = 1.2
(ग) मानव रक्त, pH = 7.38
(घ) मानव लार, pH = 6.4
Answer (उत्तर)
(क) [H+] = 1.48 × 10⁻7 M
(ख) [H+] = 6.3 × 10⁻2 M
(ग) [H+] = 4.17 × 10⁻8 M
(घ) [H+] = 3.98 × 10⁻7 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
सूत्र:
pH = −log[H+]
⇒ [H+] = 10−pH

(क) pH = 6.83
[H+] = 10−6.83 = 1.48 × 10⁻7 M

(ख) pH = 1.2
[H+] = 10−1.2 = 6.3 × 10⁻2 M

(ग) pH = 7.38
[H+] = 10−7.38 = 4.17 × 10⁻8 M

(घ) pH = 6.4
[H+] = 10−6.4 = 3.98 × 10⁻7 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 मानव रक्त का सामान्य pH लगभग 7.35–7.45 के बीच रहता है; इससे थोड़ा भी विचलन स्वास्थ्य के लिए गंभीर हो सकता है।
👉 उदर (gastric) द्रव का pH बहुत कम होता है, इसलिए उसमें [H+] बहुत अधिक होती है।
Q.56: दूध, कॉफी, टमाटर रस, नींबू रस तथा अंडे की सफेदी के pH का मान क्रमशः 6.8, 5.0, 4.2, 2.2 तथा 7.8 है। प्रत्येक के संगत H+ आयन की सांद्रता ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
दूध (pH 6.8): [H+] = 1.58 × 10⁻7 M
कॉफी (pH 5.0): [H+] = 1.00 × 10⁻5 M
टमाटर रस (pH 4.2): [H+] = 6.31 × 10⁻5 M
नींबू रस (pH 2.2): [H+] = 6.31 × 10⁻3 M
अंडे की सफेदी (pH 7.8): [H+] = 1.58 × 10⁻8 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
सूत्र:
pH = −log[H+]
⇒ [H+] = 10−pH

अब एक-एक करके:

1) दूध, pH = 6.8
[H+] = 10−6.8 = 1.58 × 10⁻7 M

2) कॉफी, pH = 5.0
[H+] = 10−5.0 = 1.00 × 10⁻5 M

3) टमाटर रस, pH = 4.2
[H+] = 10−4.2 = 6.31 × 10⁻5 M

4) नींबू रस, pH = 2.2
[H+] = 10−2.2 = 6.31 × 10⁻3 M

5) अंडे की सफेदी, pH = 7.8
[H+] = 10−7.8 = 1.58 × 10⁻8 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 pH में 1 unit कम होने का मतलब [H+] 10 गुना बढ़ना है।
👉 इसलिए नींबू रस (pH 2.2) कॉफी (pH 5.0) से लगभग 102.8 ≈ 630 गुना अधिक अम्लीय है।
Q.57: 298 K पर 0.561 g KOH को जल में घोलने पर प्राप्त 200 mL विलयन की pH तथा पोटैशियम, हाइड्रोजन और हाइड्रॉक्सिल आयनों की सांद्रताएँ ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
pH = 12.699 (लगभग 12.70)
[K+] = 0.05 M
[OH] = 0.05 M
[H+] = 2.0 × 10−13 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
दिया है:
KOH का द्रव्यमान = 0.561 g
आयतन = 200 mL = 0.200 L
KOH का मोलर द्रव्यमान = 56 g mol−1

Step 1: मोल KOH
n = 0.561/56 = 0.0100179 mol

Step 2: मोलरता
[KOH] = 0.0100179 / 0.200 = 0.0501 M ≈ 0.05 M

Step 3: पूर्ण वियोजन (Strong Base)
KOH → K+ + OH
[K+] = [OH] = 0.05 M

Step 4: [H+] निकालना
[H+][OH] = 10−14 (at 298 K)
[H+] = 10−14 / 0.05 = 2.0 × 10−13 M

Step 5: pH
pH = −log[H+]
= −log(2.0 × 10−13)
= 13 − 0.3010
= 12.699
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 298 K पर Kw = 10−14 का उपयोग करके [H+] और [OH] तुरंत निकाले जा सकते हैं।
👉 Strong base के dilute विलयन में [OH] ≈ base की molarity के बराबर होता है।
Q.59: प्रोपेनोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक Ka = 1.32×10−5 है। 0.05 M अम्ल विलयन के आयनन की मात्रा तथा pH ज्ञात कीजिए। यदि विलयन में 0.01 M HCl मिलाया जाए, तो उसके आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
0.05 M प्रोपेनोइक अम्ल के लिए:
α = 1.62×10−2
pH = 3.09 (लगभग)

0.01 M HCl की उपस्थिति में:
α = 1.32×10−3
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अम्ल:
CH3CH2COOH ⇌ CH3CH2COO + H+
दिया है: Ka = 1.32×10−5, C = 0.05 M

(1) 0.05 M अम्ल में आयनन की मात्रा (α)
कमजोर अम्ल के लिए:
α = √(Ka/C)
α = √((1.32×10−5)/0.05)
= √(2.64×10−4)
α = 1.62×10−2

(2) pH की गणना
[H+] = Cα = 0.05×1.62×10−2
[H+] = 8.10×10−4 M
pH = −log(8.10×10−4)
pH = 3.09

(3) 0.01 M HCl की उपस्थिति में आयनन
अब बाहरी H+ पहले से मौजूद है, इसलिए आयनन दबेगा (common ion effect)।
मान लें अम्ल का वियोजन x है। तब लगभग:
[H+] ≈ 0.01, [acid] ≈ C = 0.05, [conjugate base] = x
Ka = x(0.01)/0.05
⇒ x/0.05 = Ka/0.01
लेकिन x/0.05 = α, अतः
α = (1.32×10−5)/(10−2)
α = 1.32×10−3

अतः HCl की उपस्थिति में आयनन की मात्रा बहुत कम हो जाती है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 कमजोर अम्ल में strong acid (जैसे HCl) मिलाने पर उसका dissociation sharply घटता है।
👉 यह common ion effect qualitative और quantitative दोनों तरह के प्रश्नों में बहुत पूछा जाता है।
Q.60: यदि सायनिक अम्ल (HCNO) के 0.1 M विलयन की pH = 2.34 हो, तो अम्ल के आयनन स्थिरांक तथा आयनन की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
आयनन की मात्रा α = 0.0457 (लगभग 4.57%)
Ka = 2.1×10−4 (लगभग)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
अभिक्रिया:
HCNO ⇌ H+ + CNO

प्रारम्भिक सांद्रता C = 0.1 M
मान लें आयनन की मात्रा α है।
साम्य पर:
[HCNO] = 0.1(1 − α)
[H+] = 0.1α
[CNO] = 0.1α

Step 1: pH से [H+] निकालें
[H+] = 10−2.34 = 0.00457

लेकिन [H+] = 0.1α
0.1α = 0.00457
⇒ α = 0.00457 / 0.1 = 0.0457

Step 2: Ka की गणना
Ka = [H+][CNO] / [HCNO]
= ((0.1α)(0.1α)) / (0.1(1−α))
= (0.1α2)/(1−α)
α = 0.0457 रखने पर:
α2 = 0.002088,   1−α = 0.9543
Ka = (0.1×0.002088)/0.9543
= 2.19×10−4 ≈ 2.1×10−4

अतः α = 0.0457 और Ka ≈ 2.1×10−4
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 यदि किसी कमजोर अम्ल की pH और प्रारम्भिक सांद्रता दी हो, तो पहले [H+] निकालकर सीधे α निकाली जा सकती है।
👉 α प्रतिशत में चाहिए हो तो α×100 करते हैं (यहाँ 4.57%)।
Q.61: यदि नाइट्रस अम्ल का आयनन स्थिरांक Ka = 4.5×10−4 है, तो 0.04 M सोडियम नाइट्राइट (NaNO2) विलयन की pH तथा जल-अपघटन (hydrolysis) की मात्रा ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
pH = 7.975 (लगभग 7.98)
जल-अपघटन की मात्रा (h) = 2.36 × 10−5
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
NaNO2 = दूर्बल अम्ल (HNO2) + प्रबल क्षार (NaOH) का लवण है,
इसलिए विलयन क्षारीय होगा।

ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw + 1/2 pKa + 1/2 log C

दिया है:
Ka = 4.5 × 10−4, C = 0.04, pKw = 14

Step 1: pKa निकालें
pKa = −log(4.5 × 10−4) = 3.35 (लगभग)

Step 2: pH की गणना
pH = 1/2(14) + 1/2(3.35) + 1/2 log(0.04)
= 7 + 1.675 + 1/2(−1.398)
= 7 + 1.675 − 0.699
= 7.976 ≈ 7.975

Step 3: जल-अपघटन की मात्रा (h)
h = √(Kw/(Ka C))
h = √((1.0×10−14)/((4.5×10−4)(0.04)))
= √((1.0×10−14)/(1.8×10−5))
= √(5.56×10−10)
= 2.36×10−5

अतः pH ≈ 7.98 और h = 2.36×10−5
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 दूर्बल अम्ल + प्रबल क्षार के लवण का विलयन सामान्यतः क्षारीय (pH > 7) होता है।
👉 जल-अपघटन (hydrolysis) की मात्रा बहुत छोटी होने पर भी pH में स्पष्ट बदलाव आ सकता है।
Q.62: यदि पिरिडिनियम हाइड्रोक्लोराइड के 0.02 M विलयन का pH = 3.44 है, तो पिरिडिन का आयनन स्थिरांक (Kb) ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
पिरिडिन का Kb = 1.5×10−9 (लगभग)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
पिरिडिनियम हाइड्रोक्लोराइड (C5H5NH+Cl) = दूर्बल क्षार (पिरिडिन) + प्रबल अम्ल (HCl) का लवण।
ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw − 1/2 pKb − 1/2 log C

जहाँ:
pH = 3.44, pKw = 14, C = 0.02

Step 1: मान रखें
3.44 = 1/2(14) − 1/2 pKb − 1/2 log(0.02)
log(0.02) = −1.699

Step 2: सरल करें
3.44 = 7 − 1/2 pKb + 0.8495
3.44 = 7.8495 − 1/2 pKb
1/2 pKb = 7.8495 − 3.44 = 4.4095
pKb = 8.819 ≈ 8.82

Step 3: Kb निकालें
Kb = 10−pKb = 10−8.82
= 1.5 × 10−9 (लगभग)

अतः Kb ≈ 1.5×10−9
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 दूर्बल क्षार के संयुग्मी अम्ल के लवण का विलयन अम्लीय (pH < 7) होता है।
👉 pH से pKb निकालकर सीधे Kb प्राप्त करना salt hydrolysis के सवालों का standard तरीका है।
Q.63: निम्नलिखित लवणों के जलीय विलयनों की उदासीन, अम्लीय तथा क्षारीय प्रकृति बताइए:
NaCl, KBr, NaCN, NH4NO3, NaNO2 तथा KF
Answer (उत्तर)
उदासीन (Neutral): NaCl, KBr
अम्लीय (Acidic): NH4NO3
क्षारीय (Basic): NaCN, NaNO2, KF
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
लवण की प्रकृति उसके बनने वाले अम्ल और क्षार की शक्ति पर निर्भर करती है:

1) प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार → विलयन उदासीन
👉 NaCl (HCl + NaOH)
👉 KBr (HBr + KOH)

2) प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षार → विलयन अम्लीय
👉 NH4NO3 (HNO3 + NH4OH/NH3)

3) दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार → विलयन क्षारीय
👉 NaCN (HCN + NaOH)
👉 NaNO2 (HNO2 + NaOH)
👉 KF (HF + KOH)

इसलिए निष्कर्ष:
उदासीन: NaCl, KBr
अम्लीय: NH4NO3
क्षारीय: NaCN, NaNO2, KF
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 Salt hydrolysis में वही आयन प्रभावी होता है जो दुर्बल अम्ल/दुर्बल क्षार से आता है।
👉 NaCl जैसे salts में दोनों आयन (Na+, Cl) hydrolysis नहीं करते, इसलिए pH लगभग 7 रहता है।
Q.64: क्लोरोएसीटिक अम्ल का आयनन स्थिरांक Ka = 1.35×10−3 है। 0.1 M अम्ल तथा इसके 0.1 M सोडियम लवण के pH ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
0.1 M क्लोरोएसीटिक अम्ल का pH = 1.94
0.1 M सोडियम क्लोरोएसीटेट का pH = 7.94
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
(1) 0.1 M क्लोरोएसीटिक अम्ल
अभिक्रिया:
CH2ClCOOH ⇌ CH2ClCOO + H+
मान लें आयनन की मात्रा α है। तब,
👉 [CH2ClCOOH] = 0.1(1−α)
👉 [CH2ClCOO] = 0.1α
👉 [H+] = 0.1α

Ka = ((0.1α)(0.1α)) / 0.1(1−α) ≈ (0.1α)2 / 0.1
1.35×10−3 = (0.1α)2/0.1
⇒ α2 = 0.0135
⇒ α = 0.116
[H+] = 0.1×0.116 = 0.0116
pH = −log(0.0116)
pH = 1.94

(2) 0.1 M सोडियम क्लोरोएसीटेट (weak acid + strong base salt)
ऐसे लवण के लिए:
pH = 1/2 pKw + 1/2 pKa + 1/2 log C

जहाँ
pKw = 14
pKa = −log(1.35×10−3) = 2.87
C = 0.1 ⇒ log C = −1

pH = 14/2 + 2.87/2 + (−1)/2
pH = 7 + 1.435 − 0.5
pH = 7.935 ≈ 7.94

अतः:
👉 अम्ल का pH = 1.94
👉 उसके सोडियम लवण का pH = 7.94
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 कमजोर अम्ल का सोडियम लवण जल में क्षारीय विलयन देता है।
👉 क्लोरीन का −I प्रभाव क्लोरोएसीटिक अम्ल को एसीटिक अम्ल से अधिक अम्लीय बनाता है।
Q.65: 310 K पर जल का आयनिक गुणनफल Kw = 2.7×10−14 है। इसी तापक्रम पर उदासीन जल की pH ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
उदासीन जल की pH = 6.78 (लगभग)
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
उदासीन जल में:
[H+] = [OH]
और
Kw = [H+][OH] = [H+]2

Step 1: [H+] निकालें
[H+] = √(Kw)
= √(2.7×10−14)
= 1.643×10−7 M

Step 2: pH की गणना
pH = −log[H+]
pH = −log(1.643×10−7)
pH = 7 − log(1.643)
जहाँ log(1.643) = 0.2156
pH = 7 − 0.2156 = 6.7844

अतः: pH ≈ 6.78
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 25°C पर neutral pH = 7 होती है, लेकिन ताप बढ़ने पर Kw बढ़ता है और neutral pH 7 से कम हो जाती है।
👉 इसलिए 310 K पर pH = 6.78 होने के बावजूद जल अभी भी उदासीन है (क्योंकि [H+] = [OH])।
Q.66: निम्नलिखित मिश्रणों की pH परिकलित कीजिए:
(क) 0.2 M Ca(OH)2 का 10 mL + 0.1 M HCl का 25 mL
(ख) 0.01 M H2SO4 का 10 mL + 0.01 M Ca(OH)2 का 10 mL
(ग) 0.1 M H2SO4 का 10 mL + 0.1 M KOH का 10 mL
Answer (उत्तर)
(क) pH = 12.63
(ख) pH = 7.00
(ग) pH = 1.30
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
(क) 0.2 M Ca(OH)2 (10 mL) + 0.1 M HCl (25 mL)
मिलीमोल Ca(OH)2 = 0.2 × 10 = 2.0 mmol
मिलीमोल HCl = 0.1 × 25 = 2.5 mmol
अभिक्रिया: Ca(OH)2 + 2HCl → CaCl2 + 2H2O
1 mmol Ca(OH)2 को 2 mmol HCl चाहिए।
2.5 mmol HCl, Ca(OH)2 के 2.5/2 = 1.25 mmol को उदासीन करेगा।
शेष Ca(OH)2 = 2.0 − 1.25 = 0.75 mmol
कुल आयतन = 10 + 25 = 35 mL
[Ca(OH)2] (शेष) = 0.75/35 = 0.0214 M
[OH] = 2 × 0.0214 = 4.28 × 10−2 M
pOH = −log(4.28 × 10−2) = 1.37
pH = 14 − 1.37 = 12.63

(ख) 0.01 M H2SO4 (10 mL) + 0.01 M Ca(OH)2 (10 mL)
मिलीमोल H2SO4 = 0.01 × 10 = 0.1 mmol
मिलीमोल Ca(OH)2 = 0.01 × 10 = 0.1 mmol
अभिक्रिया: Ca(OH)2 + H2SO4 → CaSO4 + 2H2O
यह 1:1 अनुपात में पूरी तरह उदासीन हो जाते हैं।
कोई अतिरिक्त अम्ल/क्षार नहीं बचता।
अतः pH = 7.00

(ग) 0.1 M H2SO4 (10 mL) + 0.1 M KOH (10 mL)
मिलीमोल H2SO4 = 0.1 × 10 = 1.0 mmol
मिलीमोल KOH = 0.1 × 10 = 1.0 mmol
अभिक्रिया: H2SO4 + 2KOH → K2SO4 + 2H2O
1 mmol KOH, केवल 0.5 mmol H2SO4 उदासीन करेगा।
शेष H2SO4 = 1.0 − 0.5 = 0.5 mmol
कुल आयतन = 10 + 10 = 20 mL
[H2SO4] शेष = 0.5/20 = 0.025 M
H2SO4 से कुल [H+] ≈ 2 × 0.025 = 0.05 M
pH = −log(5 × 10−2) = 1.30
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 ऐसे मिश्रण प्रश्नों में सबसे पहले milli-mole method (M × mL) से limiting reagent निकालना सबसे तेज़ तरीका है।
👉 diprotic acid (H2SO4) और dibasic base (Ca(OH)2) में stoichiometry factor (2) ध्यान से लगाना जरूरी है।
Q.67: सिल्वर क्रोमेट, बेरियम क्रोमेट, फेरिक हाइड्रॉक्साइड, लेड क्लोराइड तथा मर्क्यूरस आयोडाइड के लिए सारणी में दिए गए विलेयता गुणनफल Ksp की सहायता से विलेयता तथा प्रत्येक आयन की मोलरता ज्ञात कीजिए।
दिया है:
Ksp(Ag2CrO4) = 1.1×10−12
Ksp(BaCrO4) = 1.2×10−10
Ksp(Fe(OH)3) = 1.0×10−38
Ksp(PbCl2) = 1.6×10−5
Ksp(Hg2I2) = 4.5×10−29
Answer (उत्तर)
Ag2CrO4:
👉 विलेयता s = 6.5×10−5 M
👉 [Ag+] = 1.3×10−4 M
👉 [CrO42−] = 6.5×10−5 M

BaCrO4:
👉 s = 1.095×10−5 M
👉 [Ba2+] = 1.095×10−5 M
👉 [CrO42−] = 1.095×10−5 M

Fe(OH)3:
👉 s = 1.39×10−10 M
👉 [Fe3+] = 1.39×10−10 M
👉 [OH] = 4.17×10−10 M

PbCl2:
👉 s = 1.59×10−2 M
👉 [Pb2+] = 1.59×10−2 M
👉 [Cl] = 3.17×10−2 M

Hg2I2:
👉 s = 2.24×10−10 M
👉 [Hg22+] = 2.24×10−10 M
👉 [I] = 4.48×10−10 M
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
Ag2CrO4
Ag2CrO4 ⇌ 2Ag+ + CrO42−
यदि विलेयता s हो, तो [Ag+] = 2s, [CrO42−] = s
Ksp = (2s)2(s) = 4s3
s = ((1.1×10−12)/4)1/3 = 6.5×10−5 M
[Ag+] = 2s = 1.3×10−4 M, [CrO42−] = s

BaCrO4
BaCrO4 ⇌ Ba2+ + CrO42−
[Ba2+] = [CrO42−] = s
Ksp = s2
s = √(1.2×10−10) = 1.095×10−5 M

Fe(OH)3
Fe(OH)3 ⇌ Fe3+ + 3OH
[Fe3+] = s, [OH] = 3s
Ksp = s(3s)3 = 27s4
s = ((1.0×10−38)/27)1/4 = 1.39×10−10 M
[OH] = 3s = 4.17×10−10 M

PbCl2
PbCl2 ⇌ Pb2+ + 2Cl
[Pb2+] = s, [Cl] = 2s
Ksp = s(2s)2 = 4s3
s = ((1.6×10−5)/4)1/3 = (4.0×10−6)1/3 = 1.59×10−2 M
[Cl] = 2s = 3.17×10−2 M

Hg2I2
Hg2I2 ⇌ Hg22+ + 2I
[Hg22+] = s, [I] = 2s
Ksp = s(2s)2 = 4s3
s = ((4.5×10−29)/4)1/3 = 2.24×10−10 M
[I] = 2s = 4.48×10−10 M
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 Ksp छोटा होने का मतलब सामान्यतः बहुत कम विलेयता होता है, लेकिन stoichiometry (जैसे AB, AB2, A2B, AB3) भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
👉 आयनों की मोलरता निकालते समय dissociation coefficients (1, 2, 3...) जरूर गुणा करें, वहीं से अक्सर calculation गलती होती है।
Q.68: Ag2CrO4 तथा AgBr के विलेयता गुणनफल क्रमशः 1.1×10−12 तथा 5.0×10−13 हैं। उनके संतृप्त विलयनों की मोलरता का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Answer (उत्तर)
संतृप्त विलयनों की मोलरता का अनुपात:
s(Ag2CrO4) / s(AgBr) = 91.9
(लगभग 92 : 1 )
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
1) Ag2CrO4 के लिए
Ag2CrO4 ⇌ 2Ag+ + CrO42−
यदि विलेयता = s, तो:
Ksp = [Ag+]2[CrO42−] = (2s)2(s) = 4s3
s = (Ksp/4)1/3
s = ((1.1×10−12)/4)1/3 = 6.5×10−5 M

2) AgBr के लिए
AgBr ⇌ Ag+ + Br
यदि विलेयता = s′, तो:
Ksp = s′2
s′ = √(Ksp)
s′ = √(5.0×10−13) = 7.1×10−7 M

3) अनुपात
s/s′ = (6.5×10−5)/(7.1×10−7) = 91.9
अतः संतृप्त मोलरताओं का अनुपात = 91.9 : 1 (लगभग 92 : 1)
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 सिर्फ Ksp की तुलना से हमेशा सीधे विलेयता की तुलना नहीं की जाती, क्योंकि वियोजन स्टोइकोमेट्री अलग हो सकती है।
👉 यही कारण है कि Ag2CrO4 के लिए 4s3 और AgBr के लिए s2 आता है।
Q.69: यदि 0.002 M सांद्रता वाले सोडियम आयोडेट तथा क्यूप्रिक क्रोमेट विलयन के समान आयतन मिलाए जाएँ, तो क्या कॉपर आयोडेट Cu(IO3)2 का अवक्षेपण होगा?
दिया है: Ksp(Cu(IO3)2) = 7.4×10−8
Answer (उत्तर)
नहीं, Cu(IO3)2 का अवक्षेपण नहीं होगा।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
संभावित अभिक्रिया:
2NaIO3 + CuCrO4 → Na2CrO4 + Cu(IO3)2

समान आयतन मिलाने पर दोनों विलयनों की सांद्रता आधी हो जाएगी:
[IO3] = 0.002/2 = 1.0×10−3 M
[Cu2+] = 0.002/2 = 1.0×10−3 M

अब ionic product (Qsp) निकालें:
Qsp = [Cu2+][IO3]2
Qsp = (1.0×10−3)(1.0×10−3)2
Qsp = 1.0×10−9

तुलना:
Qsp = 1.0×10−9
Ksp = 7.4×10−8

क्योंकि Qsp < Ksp , विलयन अभी असंतृप्त है।
इसलिए अवक्षेपण नहीं होगा।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
📌 अवक्षेपण के लिए नियम:
👉 Qsp > Ksp ⇒ अवक्षेपण होगा
👉 Qsp = Ksp ⇒ संतृप्त अवस्था
👉 Qsp < Ksp ⇒ अवक्षेपण नहीं होगा
Q.70: बेंजोइक अम्ल का आयनन स्थिरांक Ka = 6.46×10−5 तथा सिल्वर बेंजोएट का Ksp = 2.5×10−13 है। pH = 3.19 वाले बफर विलयन में सिल्वर बेंजोएट, जल की तुलना में कितने गुना अधिक विलेय होगा?
Answer (उत्तर)
बफर विलयन में सिल्वर बेंजोएट की विलेयता, जल की तुलना में 3.32 गुना होगी।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
संतुलन:
C6H5COOAg ⇌ C6H5COO + Ag+

(1) जल में विलेयता = s
Ksp = [Ag+][C6H5COO] = s2
s = √(2.5×10−13)
s = 5.0×10−7 mol L−1

(2) बफर (pH = 3.19) में
[H+] = 10−3.19 = 6.45×10−4 M

बेंजोइक अम्ल के लिए:
Ka = [H+][C6H5COO] / [C6H5COOH]
[C6H5COOH] / [C6H5COO] = [H+] / Ka
= (6.45×10−4) / (6.46×10−5) ≈ 10

मान लें बफर में नई विलेयता = s′
तब [Ag+] = s′
और कुल बेंजोएट-उत्पन्न species:
s′ = [C6H5COO] + [C6H5COOH]
अनुपात से: [C6H5COOH] = 10[C6H5COO]
s′ = 11[C6H5COO] ⇒ [C6H5COO] = s′/11

अब Ksp लगाएँ:
2.5×10−13 = [Ag+][C6H5COO] = s′(s′/11) = s′2/11
s′2 = 2.5×10−13 × 11 = 2.75×10−12
s′ = √(2.75×10−12) = 1.66×10−6 mol L−1

(3) गुना विलेयता
s′/s = (1.66×10−6)/(5.0×10−7) = 3.32
अतः बफर में विलेयता 3.32 गुना बढ़ जाती है।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 दूर्बल अम्लीय बफर में H+ की उपस्थिति बेंजोएट आयन को बेंजोइक अम्ल में बदलती है, जिससे salt अधिक घुलती है।
👉 इसे protonation-assisted solubility enhancement के रूप में समझ सकते हैं।
Q.71: फेरस सल्फेट तथा सोडियम सल्फाइड के सममोलर विलयनों की अधिकतम सांद्रता बताइए, ताकि उनके समान आयतन मिलाने पर आयरन सल्फाइड (FeS) का अवक्षेपण न हो।
दिया है: Ksp(FeS)=6.3×10−18
Answer (उत्तर)
दोनों सममोलर विलयनों की अधिकतम सांद्रता:
xmax = 5.02×10−9 mol L−1
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
मान लें दोनों विलयनों (FeSO4 और Na2S) की प्रारम्भिक मोलरता x M है।

समान आयतन मिलाने पर दोनों की सांद्रता आधी हो जाएगी:
[Fe2+] = x/2, [S2−] = x/2

FeS के लिए अवक्षेपण शुरू होने की सीमा पर:
Qsp = Ksp
[Fe2+][S2−] = 6.3×10−18
(x/2)(x/2) = 6.3×10−18
x2/4 = 6.3×10−18
x2 = 2.52×10−17
x = √(2.52×10−17) = 5.02×10−9 M

यही अधिकतम सांद्रता है जिस पर मिश्रण करते ही अवक्षेपण बनने की कगार पर होगा।
इससे अधिक सांद्रता पर FeS का अवक्षेपण होगा।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 “अधिकतम सांद्रता बिना अवक्षेपण” वाले सवालों में हमेशा Qsp = Ksp (boundary condition) लगाते हैं।
👉 equal-volume mixing में concentration आधी हो जाती है, यह step बहुत महत्वपूर्ण है।
Q.72: 1 ग्राम कैल्सियम सल्फेट (CaSO4) को घोलने के लिए कम-से-कम कितने आयतन जल की आवश्यकता होगी?
दिया है: Ksp(CaSO4) = 9.1×10−6
Answer (उत्तर)
1 g CaSO4 को घोलने के लिए न्यूनतम जल आयतन 2.43 L (लगभग) होगा।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
Step 1: विलेयता (s) निकालें
CaSO4 ⇌ Ca2+ + SO42−
यदि विलेयता = s (mol L−1), तो
Ksp = s2
s = √(9.1×10−6)
s = 3.0×10−3 mol L−1 (लगभग)

Step 2: g/L में बदलें
मोलर द्रव्यमान: M(CaSO4) = 40 + 32 + 64 = 136 g mol−1
g/L में विलेयता = s × M
= (3.0×10−3) × 136
= 0.411 g L−1

अर्थात 1 L जल में अधिकतम 0.411 g CaSO4 घुलेगा।

Step 3: 1 g घोलने के लिए आयतन
V = mass / (solubility in g L−1) = 1 / 0.411
V = 2.43 L (लगभग)

अतः न्यूनतम आवश्यक जल आयतन = 2.43 L
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 Ksp से पहले molar solubility (mol/L) निकालते हैं, फिर molar mass से g/L में convert करते हैं।
👉 “कम-से-कम जल आयतन” वाले प्रश्न में solution को संतृप्त माना जाता है।
Q.73: 0.1 M HCl में हाइड्रोजन सल्फाइड से संतृप्त विलयन में [S2−] = 1.0×10−19 M है। यदि इस विलयन के 10 mL को निम्नलिखित 0.04 M विलयनों के 5 mL में मिलाया जाए, तो किन विलयनों से अवक्षेप प्राप्त होगा?
FeSO4, MnCl2, ZnCl2, CdCl2
Answer (उत्तर)
ZnS और CdS का अवक्षेप प्राप्त होगा।
FeS तथा MnS का अवक्षेप नहीं होगा।
Explanation (व्याख्या – Step by Step)
Step 1: मिश्रण के बाद कुल आयतन
कुल आयतन = 10 + 5 = 15 mL

Step 2: नई सल्फाइड आयन सांद्रता
[S2−]new = 1.0×10−19 × (10/15)
[S2−]new = 6.67×10−20 M

Step 3: धातु आयन की नई सांद्रता
[M2+]new = 0.04 × (5/15)
[M2+]new = 1.33×10−2 M

Step 4: Ionic product (Q)
Q = [M2+][S2−] = (1.33×10−2)(6.67×10−20)
Q = 8.87×10−22

📌 नियम:
👉 Q > Ksp ⇒ अवक्षेप बनेगा
👉 Q < Ksp ⇒ अवक्षेप नहीं बनेगा

ZnS और CdS के Ksp बहुत छोटे होते हैं, इसलिए Q > Ksp होकर अवक्षेप बनता है।
FeS और MnS के लिए Ksp तुलनात्मक रूप से बड़ा होने से Q < Ksp रहता है, इसलिए अवक्षेप नहीं बनता।

अतः ZnCl2 और CdCl2 वाले विलयनों में क्रमशः ZnS और CdS के अवक्षेप मिलेंगे।
Did You Know? (क्या आप जानते हैं?)
👉 अम्लीय माध्यम (0.1 M HCl) में [S2−] बहुत कम होता है, इसलिए केवल बहुत कम Ksp वाले sulfides ही अवक्षेपित होते हैं।

📘 Chapter FAQs: Equilibrium, pH, Ksp, Acid-Base (Class 11 Chemistry)

Quick revision for NCERT Chemistry chapter questions on chemical equilibrium, ionic equilibrium, pH, buffer, hydrolysis, and solubility product.

Kc सांद्रता (mol L−1) के terms में लिखा जाता है, जबकि Kp गैसों के partial pressure के terms में। दोनों का संबंध है: Kp = Kc(RT)Δng जहाँ Δng = उत्पाद गैसीय मोल − अभिकारक गैसीय मोल।
नहीं। K का मान केवल तापमान पर निर्भर करता है। Pressure या concentration बदलने से equilibrium position बदल सकती है, लेकिन K नहीं बदलता (जब तक temperature constant हो)।
pH = −log[H+] और pOH = −log[OH]। 25°C पर pH + pOH = 14। Strong acid/base में पहले [H+] या [OH] निकालते हैं, फिर pH/pOH निकालते हैं।
Weak acid HA (initial concentration C) के लिए छोटे ionization पर approximation: α ≈ √(Ka/C)। और [H+] ≈ Cα। यही method acetic acid, propionic acid जैसे सवालों में बहुत useful है।
जब किसी weak electrolyte के solution में उसका common ion बाहर से add किया जाता है, तो उसका ionization दब जाता है। उदाहरण: CH3COOH में HCl मिलाने पर acetic acid का dissociation घटता है।
पहले dissolution stoichiometry लिखो। जैसे: AB → A+ + B ⇒ Ksp = s2
AB2 → A2+ + 2B ⇒ Ksp = 4s3
इसलिए Ksp compare करते समय stoichiometric factor जरूर consider करें।
यदि Qsp > Ksp तो precipitate बनेगा।
यदि Qsp = Ksp तो solution saturated है।
यदि Qsp < Ksp तो precipitate नहीं बनेगा।
Acidic buffer के लिए Henderson equation: pH = pKa + log([salt]/[acid])। Basic buffer के लिए pOH form use करते हैं। Buffer pH external acid/base के छोटे addition पर कम बदलता है।
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