NCERT Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9Biomolecules (जैव-अणु)

📘 यहाँ आपको Class 12 Chemistry Chapter 9 Biomolecules NCERT Solutions (Hindi + English Medium) में सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सटीक उत्तर और Step-by-Step Explanation मिलेंगे। इस chapter में Carbohydrates (mono, di, poly-saccharides), Proteins (peptide bond, primary/secondary structure, denaturation), Enzymes, Vitamins (A, C, K आदि), Nucleic acids (DNA, RNA, nucleoside, nucleotide), और Biological functions को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि आपकी board exam preparation के साथ NEET/JEE foundation भी मजबूत हो। ✅

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NCERT Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 9 – Biomolecules (जैव-अणु)
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Q.1: मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?
Answer (उत्तर)
✅ वे कार्बोहाइड्रेट जो जल-अपघटन (hydrolysis) करने पर और छोटे कार्बोहाइड्रेट अणुओं में नहीं टूटते, मोनोसैकेराइड कहलाते हैं।
✅ सरल शब्दों में: मोनोसैकेराइड, कार्बोहाइड्रेट की सबसे छोटी इकाई (simple sugar unit) होते हैं।
✅ उदाहरण: ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, गैलेक्टोज़
Explanation: व्याख्या (Step by Step)
👉 कार्बोहाइड्रेट को समझें
कार्बोहाइड्रेट ऐसे जैविक यौगिक हैं जो ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होते हैं।

👉 जल-अपघटन का मतलब
जब किसी यौगिक को पानी की उपस्थिति में तोड़ा जाता है, उसे जल-अपघटन कहते हैं।

👉 मोनोसैकेराइड की पहचान
अगर कोई शर्करा (sugar) जल-अपघटन के बाद भी और छोटी शर्करा में न टूटे, तो वह मोनोसैकेराइड है।

👉 क्यों महत्वपूर्ण है?
डाइसेकेराइड और पॉलीसैकेराइड अंततः टूटकर मोनोसैकेराइड ही बनाते हैं। यानी मोनोसैकेराइड कार्बोहाइड्रेट के “बेसिक बिल्डिंग ब्लॉक्स” हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ ग्लूकोज़ को अक्सर “ब्लड शुगर” कहा जाता है, क्योंकि यह रक्त में पाया जाने वाला प्रमुख शर्करा है।

✅ फ्रक्टोज़ प्राकृतिक रूप से फलों और शहद में अधिक मिलता है, इसलिए इसे “fruit sugar” भी कहते हैं।

✅ परीक्षा टिप:
“जो आगे hydrolysis से नहीं टूटे = मोनोसैकेराइड”
यह एक लाइन याद रखेंगे तो परिभाषा कभी नहीं भूलेगे।
Q.2: अपचायी शर्करा क्या होती है?
Answer (उत्तर)
✅ वे कार्बोहाइड्रेट जो टॉलेन अभिकर्मक (Tollens’ reagent) को अपचयित करते हैं और फेहलिंग विलयन (Fehling’s solution) के साथ लाल अवक्षेप (red precipitate) देते हैं, अपचायी शर्कराएँ कहलाती हैं।

✅ सामान्य नियम:
सभी मोनोसैकेराइड (ऐल्डोस व कीटोस) अपचायी होते हैं।

✅ डाइसैकेराइड में अधिकांश अपचायी होते हैं, लेकिन सुक्रोज़ (sucrose) अपचायी नहीं होता।
Explanation (व्याख्या)
👉 “अपचायी” का अर्थ है कि शर्करा स्वयं ऑक्सीकरण होकर सामने वाले अभिकर्मक को अपचयित कर दे।

👉 टॉलेन अभिकर्मक के साथ अपचायी शर्करा अभिक्रिया करके सिल्वर मिरर टेस्ट दे सकती है।

👉 फेहलिंग विलयन के साथ अपचायी शर्करा ईंट-लाल रंग का अवक्षेप (आमतौर पर Cu2O ) देती है।

👉 मोनोसैकेराइड अपचायी इसलिए माने जाते हैं क्योंकि वे अभिक्रिया की दशाओं में ऐसा रूप दे सकते हैं जो अपचयन कर सके।

👉 सुक्रोज़ अपचायी शर्करा नहीं है, क्योंकि इसमें दोनों एनोमेरिक कार्बन ग्लाइकोसिडिक बंध में जुड़े होने से मुक्त रूप उपलब्ध नहीं रहता।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ दोनों अपचायी शर्कराएँ हैं, इसलिए दोनों टॉलेन/फेहलिंग टेस्ट दे सकते हैं।

माल्टोज़ और लैक्टोज़ अपचायी डाइसैकेराइड हैं, जबकि सुक्रोज़ non-reducing है।

✅ एग्ज़ाम ट्रिक:
“Sucrose = non-reducing, बाकी common mono + कई di = reducing”
यह लाइन याद रखने से MCQ जल्दी हल होते हैं।
Q.3: पौधों में कार्बोहाइड्रेटों के दो मुख्य कार्य लिखिए।
Answer (उत्तर)
✅ (i) संरचनात्मक कार्य (Structural role) :
पौधों में कार्बोहाइड्रेट, विशेषकर सेलुलोज , पादप कोशिका भित्ति (plant cell wall) का प्रमुख संरचनात्मक पदार्थ होता है।

✅ (ii) ऊर्जा/जैव ईंधन का कार्य (Biofuel/Energy role) :
कार्बोहाइड्रेट जैसे ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़, शर्करा (sugars), स्टार्च आदि ऊर्जा के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं और जैव-क्रियाओं के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।

C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + 2880 kJ
Explanation (व्याख्या)
👉 पौधों की कोशिका भित्ति को मजबूती और आकार देने में सेलुलोज की बहुत बड़ी भूमिका होती है।
इसी वजह से पौधे खड़े रह पाते हैं और ऊतकों को यांत्रिक सहारा मिलता है।

👉 जब पौधों को ऊर्जा चाहिए होती है, तो कार्बोहाइड्रेट टूटकर ऊर्जा देते हैं
ग्लूकोज़ त्वरित ऊर्जा देता है, जबकि स्टार्च ऊर्जा का भंडारित रूप माना जाता है।

👉 इस तरह कार्बोहाइड्रेट पौधों में “बनावट + ऊर्जा” दोनों काम करते हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ पृथ्वी पर बनने वाले कार्बनिक पदार्थ का बड़ा हिस्सा प्रकाश संश्लेषण द्वारा बने कार्बोहाइड्रेट से जुड़ा होता है।

✅ लकड़ी और रेशा (fibres) में सेलुलोज अधिक होने से उनका उपयोग कागज़, कपड़ा और कई जैव-आधारित उत्पादों में किया जाता है।

✅ एग्ज़ाम में लिखने की आसान ट्रिक:
कार्बोहाइड्रेट = Cell wall का material + Energy का fuel.
Q.4: निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए: राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, माल्टोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस तथा लैक्टोस।
Answer (उत्तर)
मोनोसैकेराइड (Monosaccharides) :
राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस, फ्रक्टोस

डाइसैकेराइड (Disaccharides) :
माल्टोस, लैक्टोस
Explanation (व्याख्या)
👉 मोनोसैकेराइड वे शर्कराएँ हैं जो आगे जल-अपघटन से छोटे कार्बोहाइड्रेट में नहीं टूटतीं।
इसलिए राइबोस, 2-डीऑक्सीराइबोस, गैलेक्टोस और फ्रक्टोस इस वर्ग में आते हैं।

👉 डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड इकाइयों से मिलकर बनते हैं।
इसलिए माल्टोस और लैक्टोस डाइसैकेराइड हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
राइबोस RNA का हिस्सा है, जबकि 2-डीऑक्सीराइबोस DNA का हिस्सा होता है।

लैक्टोस को milk sugar भी कहा जाता है।

फ्रक्टोस फलों में मिलने वाली प्रमुख शर्करा है, इसलिए इसे fruit sugar भी कहते हैं।
Q.5: ग्लाइकोसाइडिक बंध से आप क्या समझते हैं?
Answer (उत्तर)
✅ जब दो मोनोसैकेराइड अणु आपस में ऑक्सीजन परमाणु के माध्यम से जुड़ते हैं, तो उनके बीच बनने वाला बंध ग्लाइकोसाइडिक बंध (Glycosidic bond) कहलाता है।

✅ यह बंध सामान्यतः जल के एक अणु (H2O) के निकलने से बनता है।

✅ सरल भाषा में:
Sugar unit – O - Sugar unit —> ग्लाइकोसाइडिक बंध
Explanation (व्याख्या)
👉 दो मोनोसैकेराइड पास आते हैं और अभिक्रिया के दौरान एक H2O निकलता है।

👉 इसके बाद दोनों इकाइयाँ एक –O– से जुड़ जाती हैं।

👉 यही –O– के माध्यम वाला जुड़ाव डाइसैकेराइड/पॉलीसैकेराइड की मूल कड़ी बनता है।

👉 उदाहरण: माल्टोस में दो ग्लूकोज़ इकाइयाँ ग्लाइकोसाइडिक बंध से जुड़ी रहती हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ ग्लाइकोसाइडिक बंध का प्रकार (जैसे α या β; 1→4, 1→6 ) बदलने से कार्बोहाइड्रेट के गुण काफी बदल जाते हैं।

स्टार्च और सेलुलोज दोनों ग्लूकोज़ से बने हैं, लेकिन ग्लाइकोसाइडिक बंध अलग होने से उनके गुण और पाचन व्यवहार अलग होते हैं।

✅ एग्ज़ाम टिप:
“दो मोनोसैकेराइड + जल की हानि + O के माध्यम से जुड़ाव = ग्लाइकोसाइडिक बंध”
यह लाइन लिखने से उत्तर सटीक और पूरे अंक वाला बनता है।
Q.6: ग्लाइकोजन क्या होता है तथा यह स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
Answer (उत्तर)
✅ ग्लाइकोजन जन्तुओं के शरीर में कार्बोहाइड्रेट का संचित (storage) रूप है।
इसे जन्तु स्टार्च (animal starch) भी कहते हैं।

✅ यह मुख्यतः यकृत (liver) और पेशियों (muscles) में जमा रहता है।
जब शरीर को ग्लूकोज़ चाहिए होता है, एन्जाइम ग्लाइकोजन को तोड़कर ग्लूकोज़ उपलब्ध करा देते हैं।

स्टार्च पौधों का प्रमुख संचित पॉलीसैकेराइड है, जबकि ग्लाइकोजन जन्तुओं का।
Explanation (व्याख्या)
👉 ग्लाइकोजन और स्टार्च दोनों α-D-ग्लूकोज़ के बहुलक हैं, लेकिन उनकी संरचना और संग्रह-स्थान अलग हैं।

👉 ग्लाइकोजन की संरचना बहुत अधिक शाखित (highly branched) होती है।
इस कारण यह जल्दी टूटकर ऊर्जा दे सकता है।

👉 स्टार्च दो भागों का मिश्रण है:
ऐमाइलोस (15–20%) : अपेक्षाकृत रेखीय, जल में विलेय
ऐमाइलोपेक्टिन (80–85%) : शाखित, जल में अविलेय

👉 ऐमाइलोपेक्टिन शाखित होता है, लेकिन ग्लाइकोजन उससे भी अधिक शाखित होता है।
यही प्रमुख संरचनात्मक अंतर है।

ग्लाइकोजन vs स्टार्च (तुलनात्मक साणी)
आधार ग्लाइकोजन स्टार्च
👉 स्रोत जन्तु पौधे
👉 संग्रह-स्थान यकृत और पेशियाँ बीज, कंद, पौध ऊतक
👉 संरचना अत्यधिक शाखित ऐमाइलोस + ऐमाइलोपेक्टिन का मिश्रण
👉 कार्य त्वरित ऊर्जा के लिए पशु शरीर का रिज़र्व पौधों में ऊर्जा भंडारण
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ भूख या उपवास की स्थिति में शरीर पहले यकृत में संचित ग्लाइकोजन का उपयोग करके रक्त ग्लूकोज़ बनाए रखता है।

✅ खेल-कूद के दौरान मांसपेशियों का ग्लाइकोजन तेज ऊर्जा का बड़ा स्रोत होता है।
Q.7: (a) सुक्रोज तथा (b) लैक्टोज के जल-अपघटन से कौन-से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
Answer (उत्तर)
✅ (a) सुक्रोज (Sucrose) के जल-अपघटन से D-ग्लूकोज़ + D-फ्रक्टोज़ प्राप्त होते हैं।

✅ (b) लैक्टोज (Lactose) के जल-अपघटन से D-ग्लूकोज़ + D-गैलेक्टोज़ प्राप्त होते हैं।
Explanation (व्याख्या)
👉 जल-अपघटन में पानी ( H2O ) जुड़ने पर डाइसैकेराइड टूटकर दो मोनोसैकेराइड देता है।

👉 सुक्रोज एक डाइसैकेराइड है, इसलिए टूटने पर ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ देता है।

👉 लैक्टोज भी डाइसैकेराइड है, इसलिए टूटने पर ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ देता है。

रासायनिक समीकरण (Chemical Equations)
सुक्रोज का जल-अपघटन:
C12H22O11 + H2O ⟶ C6H12O6 + C6H12O6
(ग्लूकोज़) + (फ्रक्टोज़)

लैक्टोज का जल-अपघटन:
C12H22O11 + H2O ⟶ C6H12O6 + C6H12O6
(ग्लूकोज़) + (गैलेक्टोज़)
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ सुक्रोज का जल-अपघटन उत्पाद ( ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़ ) अक्सर अपवृत शर्करा कहलाता है।

लैक्टोज को milk sugar भी कहते हैं, क्योंकि यह दूध में पाया जाता है।

✅ एग्ज़ाम ट्रिक:
सुक्रोज → ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़
लैक्टोज → ग्लूकोज़ + गैलैक्टोस
Q.10: ग्लूकोस की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला (open chain) संरचना द्वारा नहीं समझाई जा सकतीं।
Answer (उत्तर)
✅ ग्लूकोस में ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होने पर कुछ अभिक्रियाएँ देनी चाहिए, लेकिन वास्तविक परिणाम अलग मिलते हैं।
इसीलिए ये अभिक्रियाएँ बताती हैं कि ग्लूकोस केवल सरल विवृत-श्रृंखला (open chain) रूप में नहीं रहता।

✅ मुख्य अभिक्रियाएँ/प्रेक्षण जो open chain संरचना से नहीं समझाए जा सकते:

1) 2,4-DNP और Schiff’s test न देना
ऐल्डिहाइड समूह उपस्थित होने पर भी ग्लूकोस 2,4-DNP तथा शिफ़-परीक्षण नहीं देता।
साथ ही NaHSO3 के साथ अपेक्षित योगज (adduct) भी नहीं बनाता।

2) ग्लूकोस पेन्टाऐसीटेट का हाइड्रॉक्सिलऐमीन से अभिक्रिया न करना
यदि मुक्त –CHO समूह होता, तो ऑक्साइम बनने जैसी अभिक्रिया होनी चाहिए थी।
लेकिन पेन्टाऐसीटेट यह अभिक्रिया नहीं करता, यानी मुक्त –CHO उपलब्ध नहीं है।

3) मेथेनॉल + शुष्क HCl से दो ग्लूकोसाइड बनना
D-ग्लूकोस, मेथेनॉल (dry HCl की उपस्थिति) के साथ दो समावयवी मोनोमेथिल व्युत्पन्न देता है:
मेथिल-α-D-ग्लूकोसाइड
मेथिल-β-D-ग्लूकोसाइड
ये दोनों फेहलिंग विलयन को अपचयित नहीं करते, न ही HCN/हाइड्रॉक्सिलऐमीन से सामान्य ऐल्डिहाइड जैसी अभिक्रिया देते हैं।
यह भी मुक्त –CHO समूह की अनुपस्थिति का प्रमाण है।
Explanation (व्याख्या)
👉 यदि ग्लूकोस पूरी तरह खुली श्रृंखला वाले ऐल्डिहाइड रूप में रहता, तो उसे सामान्य ऐल्डिहाइड परीक्षण स्पष्ट रूप से देने चाहिए थे।

👉 लेकिन प्रयोगों में ऐसा नहीं दिखता।

👉 इससे निष्कर्ष निकलता है कि ग्लूकोस का प्रमुख रूप चक्रीय (hemiacetal) संरचना है, जिसमें मुक्त –CHO समूह लगातार उपलब्ध नहीं रहता।

👉 इसी कारण α और β रूप (anomers) तथा ग्लूकोसाइड बनना समझ में आता है, जबकि open-chain मॉडल अकेले पर्याप्त नहीं है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ ग्लूकोस विलयन में open-chain और cyclic रूपों के बीच संतुलन रहता है, पर चक्रीय रूप की मात्रा अधिक होती है।

α-D-ग्लूकोस और β-D-ग्लूकोस एक-दूसरे में बदलते रहते हैं, इसे म्यूटारोटेशन (mutarotation) कहते हैं।

✅ एग्ज़ाम टिप:
इस प्रश्न में सिर्फ “तथ्य” नहीं, हर बिंदु के बाद यह जरूर लिखें:
“यह मुक्त –CHO समूह की अनुपस्थिति/चक्रीय संरचना की ओर संकेत करता है।”
Q.11: आवश्यक तथा अनावश्यक ऐमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
Answer (उत्तर)
✅ (i) आवश्यक ऐमीनो अम्ल (Essential amino acids) :
वे ऐमीनो अम्ल जो शरीर की वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन मानव शरीर उन्हें स्वयं पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाता, आवश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं।
इसलिए इन्हें भोजन से प्राप्त करना पड़ता है।
उदाहरण (कोई दो):
वेलिन (Valine)
ल्यूसीन (Leucine)
(अन्य: फेनिलऐलानीन आदि)

✅ (ii) अनावश्यक ऐमीनो अम्ल (Non-essential amino acids) :
वे ऐमीनो अम्ल जो शरीर के लिए आवश्यक तो होते हैं, पर उनका संश्लेषण शरीर में हो जाता है, अनावश्यक ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं।
उदाहरण (कोई दो):
ग्लाइसीन (Glycine)
ऐलानीन (Alanine)
(अन्य: ऐस्पार्टिक अम्ल आदि)
Explanation (व्याख्या)
👉 “आवश्यक” का मतलब है: शरीर की जरूरत है, पर शरीर खुद नहीं बना पाता।

👉 “अनावश्यक” का मतलब यह नहीं कि वे जरूरी नहीं हैं;
मतलब सिर्फ इतना है कि शरीर उन्हें स्वयं बना सकता है।

👉 इसलिए आहार योजना में आवश्यक ऐमीनो अम्लों का पर्याप्त स्रोत होना बहुत जरूरी है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ प्रोटीन की गुणवत्ता का आकलन अक्सर इस बात से किया जाता है कि उसमें आवश्यक ऐमीनो अम्ल कितनी अच्छी मात्रा में मौजूद हैं।

दाल + अनाज जैसे भोजन से ऐमीनो की आवश्यकता पूर्ति हो सकती है।
Q.12: प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए: (i) पेप्टाइड बन्ध (ii) प्राथमिक संरचना (iii) विकृतीकरण
Answer (उत्तर)
✅ (i) पेप्टाइड बन्ध (Peptide bond) :
दो ऐमीनो अम्लों के बीच एक के –COOH समूह और दूसरे के –NH2 समूह के संयोग से, जल ( H2O) निकलने पर जो –CO–NH– बन्ध बनता है, उसे पेप्टाइड बन्ध कहते हैं।

✅ (ii) प्राथमिक संरचना (Primary structure) :
प्रोटीन की पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला में ऐमीनो अम्लों का विशिष्ट क्रम (sequence) उसकी प्राथमिक संरचना कहलाता है।

✅ (iii) विकृतीकरण (Denaturation) :
ताप, pH या अन्य भौतिक/रासायनिक परिवर्तनों के कारण प्रोटीन की प्राकृतिक त्रिविम (3D) संरचना बिगड़कर उसकी जैविक सक्रियता समाप्त हो जाए, तो इसे विकृतीकरण कहते हैं।
Explanation (व्याख्या)
👉 पेप्टाइड बन्ध कैसे बनता है?
जब दो ऐमीनो अम्ल जुड़ते हैं, तो संघनन अभिक्रिया होती है।
एक अणु के –COOH और दूसरे के –NH2 से H2O निकलता है और –CO–NH– लिंक बनता है।
इसी लिंक से पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला बनती है।

👉 प्राथमिक संरचना क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रोटीन में ऐमीनो अम्ल का क्रम बदलते ही प्रोटीन की प्रकृति और कार्य बदल सकता है।

👉 विकृतीकरण में क्या होता है?
प्रोटीन की 2° और 3° संरचनाएँ (और कभी 4°) बिगड़ जाती हैं।
लेकिन सामान्यतः 1° संरचना बनी रहती है।
इसीलिए प्रोटीन अपनी जैविक क्रियाशीलता खो देती है।

उदाहरण (Examples)
पेप्टाइड बन्ध:
ग्लाइसीन + ऐलानीन ⟶ ग्लाइसिल-ऐलानीन (डाइपेप्टाइड) + H2O
विकृतीकरण के सामान्य उदाहरण:
• अण्डे की सफेदी उबालने पर जमना (coagulation)
• दूध का दही में बदलना (pH परिवर्तन/लैक्टिक अम्ल के कारण)
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
“प्राथमिक संरचना” को प्रोटीन की भाषा (protein code) भी कहा जा सकता है, क्योंकि यही तय करती है कि प्रोटीन कैसे fold होगी।

✅ कई enzymes हल्का ताप बढ़ने पर भी denature हो जाते हैं, इसलिए शरीर का तापमान नियंत्रित रहना जरूरी है।

✅ एग्ज़ाम टिप:
विकृतीकरण लिखते समय यह पंक्ति जरूर जोड़ें:
“2°/3° संरचनाएँ नष्ट होती हैं, 1° संरचना सामान्यतः अप्रभावित रहती है।”
Q.13: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
Answer (उत्तर)
✅ प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के दो सामान्य प्रकार होते हैं:
1. α-हेलिक्स (Alpha-helix)
2. β-प्लीटेड शीट (Beta-pleated sheet)
Explanation (व्याख्या)
👉 द्वितीयक संरचना का संबंध पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला के कुंडलित रूप से होता है।

👉 यह कुंडलित रूप मुख्यतः पेप्टाइड बन्ध के C=O (कार्बोनिल ऑक्सीजन) और N–H समूहों के बीच बनने वाले हाइड्रोजन बन्धों से स्थिर होती है।

👉 जब श्रृंखला कुंडलित रूप लेती है, तो α-हेलिक्स बनती है।

👉 जब श्रृंखला मोड़दार/चादर जैसी व्यवस्थित हो जाती है, तो β-प्लीटेड शीट बनती है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ बाल और ऊन में मिलने वाला प्रोटीन ( केराटिन ) α-हेलिक्स संरचना का अच्छा उदाहरण है।

✅ रेशम ( silk fibroin ) में β-प्लीटेड शीट संरचना प्रमुख होती है, इसलिए वह मजबूत और कम लचीला होता है।
Q.14: प्रोटीन की α-हेलिक्स संरचना के स्थायीकरण में कौन-से आबन्ध सहायक होते हैं?
Answer (उत्तर)
✅ प्रोटीन की α-हेलिक्स संरचना को मुख्य रूप से हाइड्रोजन आबन्ध (H-bonds) स्थिर करते हैं।

✅ ये H-बन्ध एक ऐमीनो अम्ल के शेष भाग के C=O समूह और उसी श्रृंखला के चौथे अगले शेष भाग के N–H समूह के बीच बनते हैं ( i → i+4 प्रकार)।
Explanation (व्याख्या)
👉 α-हेलिक्स में पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला कुंडलित (coiled) रहती है।

👉 इस कुंडलन को स्थिर रखने के लिए बैकबोन के कार्बोनिल ऑक्सीजन (C=O) और अमाइड हाइड्रोजन (N–H) के बीच नियमित H-बॉन्ड बनते हैं।

👉 यही नियमित, एक ही श्रृंखला के भीतर बनने वाले हाइड्रोजन बंध α-हेलिक्स को मजबूती और स्थिरता प्रदान करते हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ α-हेलिक्स में हर एक घुमाव (turn) पर लगभग 3.6 अमीनो अम्ल अवशेष होते हैं, इसलिए इसकी बनावट बहुत नियमित, संतुलित और स्थिर रहती है।

✅ तापमान या pH में बड़ा परिवर्तन होने पर ये H-बॉन्ड प्रभावित हो सकते हैं, जिससे हेलिक्स ढीली/विकृत हो सकती है।
Q.15: रेशेदार तथा गोलिकाकार (Globular) प्रोटीन में विभेद कीजिए।
Answer (उत्तर)
रेशेदार प्रोटीन (Fibrous proteins) :
👉 इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएँ लंबी/समानान्तर व्यवस्थित होकर रेशे जैसी संरचना बनाती हैं।
👉 ये सामान्यतः जल में अविलेय होते हैं और शरीर में मुख्यतः संरचनात्मक कार्य करते हैं।
👉 कुछ सामान्य उदाहरण किरेटिन (बाल, ऊन तथा रेशम में उपस्थित) तथा मायोसिन (मांसपेशियों में उपस्थित) आदि हैं।

गोलिकाकार प्रोटीन (Globular proteins) :
👉 इनमें पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला मुड़कर (fold होकर) सघन गोलाकार/गोलिकीय आकृति बनाती है।
👉 ये सामान्यतः जल में विलेय होते हैं और अधिकतर कार्यात्मक (functional) भूमिका निभाते हैं।
कुछ सामान्य उदाहरण : इन्सुलिन, ऐल्बुमिन
Explanation (व्याख्या)
रेशेदार vs गोलिकाकार प्रोटीन (मुख्य अंतर)
आधार रेशेदार प्रोटीन गोलिकाकार प्रोटीन
आकृति लंबी, धागेनुमा/रेशेनुमा कॉम्पैक्ट, गोल/गोलिकीय
विलेयता जल में प्रायः अविलेय जल में प्रायः विलेय
मुख्य भूमिका संरचनात्मक (support/protection) जैव-कार्यात्मक (enzymes, hormones, transport)
उदाहरण केराटिन, मायोसिन इन्सुलिन, ऐल्बुमिन
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ बाल और नाखून की मजबूती का बड़ा कारण केराटिन जैसा रेशेदार प्रोटीन है।

✅ रक्त प्लाज्मा में पाया जाने वाला ऐल्बुमिन एक गोलिकाकार प्रोटीन है, जो कई पदार्थों के परिवहन में मदद करता है।
Q.17: एन्जाइम क्या होते हैं?
Answer (उत्तर)
एन्जाइम (Enzymes) जैव-उत्प्रेरक (biocatalysts) होते हैं, जो जीवधारियों में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाते हैं।

✅ ये अभिक्रिया की गति बढ़ाते हैं, लेकिन स्वयं खत्म नहीं होते।

✅ रासायनिक रूप से अधिकांश एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन (globular proteins) होते हैं।

✅ एन्जाइम बहुत विशिष्ट (specific) होते हैं, यानी हर एन्जाइम किसी खास अभिक्रिया/क्रियाधार (substrate) पर ही प्रभावी होता है।
Explanation (व्याख्या)
👉 हमारे शरीर में भोजन का पाचन, अवशोषण और ऊर्जा उत्पादन जैसी प्रक्रियाएँ क्रमबद्ध (stepwise) रासायनिक अभिक्रियाओं से चलती हैं।

👉 ये अभिक्रियाएँ शरीर की सामान्य दशाओं (मध्यम ताप, सामान्य pH) में भी तेज़ी से हो पाती हैं, क्योंकि एन्जाइम उनकी सक्रियण ऊर्जा (activation energy) कम कर देते हैं।

👉 इसी कारण जीवन-प्रक्रियाएँ सुचारु रूप से चलती रहती हैं।

👉 एन्जाइम की बहुत कम मात्रा भी पर्याप्त होती है, फिर भी वे अत्यंत प्रभावी होते हैं।

एन्जाइम की मुख्य विशेषताएँ (Table)
विशेषता संक्षिप्त विवरण
प्रकृति जैव-उत्प्रेरक; अधिकांशतः गोलिकाकार प्रोटीन
कार्य रासायनिक अभिक्रियाओं की गति बढ़ाना (activation energy कम करके)
विशिष्टता एक एन्जाइम सामान्यतः एक खास substrate/अभिक्रिया के लिए विशिष्ट
आवश्यक मात्रा अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में भी प्रभावी
कार्य की अनुकूल दशाएँ लगभग 310 K, pH ~7.4, 1 atm (शारीरिक दशाएँ)
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ बिना एन्जाइम के शरीर की कई अभिक्रियाएँ इतनी धीमी होतीं कि जीवन-प्रक्रियाएँ ठीक से चल ही नहीं पातीं।

✅ अलग-अलग एन्जाइम अलग काम करते हैं, जैसे पाचन में अलग, DNA प्रतिकृति में अलग, ऊर्जा चक्र में अलग।
Q.18: प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण (Denaturation) का क्या प्रभाव होता है?
Answer (उत्तर)
✅ विकृतीकरण के दौरान प्रोटीन की द्वितीयक (2°) और तृतीयक (3°) संरचनाएँ नष्ट/बदल जाती हैं।

प्राथमिक (1°) संरचना सामान्यतः परिवर्तित नहीं होती, यानी पेप्टाइड बन्धों का क्रम बना रहता है।

✅ इसके कारण प्रोटीन अपनी मूल गोलिकामय आकृति और जैव सक्रियता (biological activity) समाप्त हो जाती है।

✅ विलेय गोलिकाकार प्रोटीन अक्सर स्कन्दित/अवक्षेपित होकर अपेक्षाकृत तन्तुमय, जल में अविलेय रूप दिखाने लगते हैं।
Explanation (व्याख्या)
👉 प्रोटीन गर्मी, अम्ल और क्षार आदि की क्रिया के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।

👉 इन चीज़ों से प्रोटीन की मुड़ी हुई 3D बनावट बिगड़ जाती है।

👉 बनावट बिगड़ने पर एन्जाइम का active site बदल जाता है।

👉 इसलिए प्रोटीन/एन्जाइम अपना काम ठीक से नहीं कर पाते।

👉 ध्यान दें:
प्राथमिक (1°) संरचना सामान्यतः परिवर्तित नहीं होती , यानी पेप्टाइड बन्धों का क्रम बना रहता है।
लेकिन द्वितीयक (2°) और तृतीयक (3°) संरचनाएँ नष्ट/बदल जाती हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ अंडे की सफेदी को गर्म करने पर उसका जमना प्रोटीन विकृतीकरण का क्लासिक उदाहरण है।

✅ कई एन्जाइम हल्के pH परिवर्तन से भी निष्क्रिय हो सकते हैं, इसलिए जैव तंत्र में pH नियंत्रण बहुत जरूरी है।
Q.19: विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए।
Answer (उत्तर)
✅ विटामिनों का वर्गीकरण उनकी विलेयता (solubility) के आधार पर किया जाता है।
इन्हें दो वर्गों में बाँटा जाता है:

👉 1) जल में विलेय विटामिन (Water-soluble vitamins) :
विटामिन B-समूह (B-complex) और विटामिन C

👉 2) वसा में विलेय विटामिन (Fat-soluble vitamins) :
विटामिन A, D, E, K

✅ रक्त के थक्के (blood clotting) जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन: विटामिन K
Explanation (व्याख्या)
👉 जो विटामिन पानी में घुलते हैं, वे जल में विलेय कहलाते हैं (जैसे B और C)।

👉 जो विटामिन वसा/तेल में घुलते हैं, वे वसा में विलेय कहलाते हैं (जैसे A, D, E, K)।

👉 रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया में विटामिन K की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए इसकी कमी में bleeding tendency (छोटी चोट पर भी जल्दी या ज़्यादा खून निकलने की स्थिति।) बढ़ सकती है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
वसा में विलेय विटामिन शरीर में कुछ मात्रा में संग्रहित हो सकते हैं, जबकि जल में विलेय विटामिन का नियमित सेवन अधिक जरूरी होता है।

✅ विटामिन K का नाम याद रखने की ट्रिक:
K = Koagulation (clotting) (स्पेलिंग अलग है, याद रखने की ट्रिक है)।
Q.20: विटामिन A व C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्वपूर्ण स्रोत दीजिए।
Answer (उत्तर)
विटामिन A आँखों की रोशनी, त्वचा और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है।
इसकी कमी से रतौंधी (night blindness) और जेरोफ्थैल्मिया (xerophthalmia) हो सकते हैं।

विटामिन C प्रतिरक्षा, घाव भरने, मसूड़ों के स्वास्थ्य और कोलेजन निर्माण के लिए आवश्यक है।
इसकी कमी से स्कर्वी (scurvy) , मसूड़ों से खून आना और कमजोरी हो सकती है।

महत्वपूर्ण स्रोत (Sources):
👉 विटामिन A : गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध, मक्खन, अंडे की जर्दी, मछली का तेल
👉 विटामिन C : आंवला, नींबू, संतरा, अमरूद, टमाटर, हरी मिर्च
Explanation (व्याख्या)
👉 विटामिन A मुख्यतः दृष्टि (विशेषकर कम रोशनी में देखने) के लिए महत्वपूर्ण है।

👉 विटामिन C शरीर के ऊतकों की मरम्मत और संक्रमण से बचाव में मदद करता है।

👉 इसलिए दोनों विटामिन रोज़ के संतुलित आहार में होना बहुत जरूरी है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
आंवला विटामिन C का बहुत समृद्ध स्रोत माना जाता है।

गाजर में बीटा-कैरोटीन होता है, जिसे शरीर विटामिन A में बदल देता है।
Q.21: न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्वपूर्ण कार्य लिखिए।
Answer (उत्तर)
न्यूक्लिक अम्ल (Nucleic acids) ऐसे जैव-अणु हैं जो न्यूक्लियोटाइड इकाइयों से बने होते हैं और अनुवांशिक जानकारी को संग्रहीत व संचरित करते हैं।
मुख्य प्रकार: DNA और RNA

✅ दो महत्वपूर्ण कार्य:
👉 (1) अनुवांशिक सूचना का संग्रह और संचरण
DNA में वंशानुगत (genetic) जानकारी सुरक्षित रहती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरित होती है।

👉 (2) प्रोटीन संश्लेषण का नियंत्रण
RNA (mRNA, tRNA, rRNA) की सहायता से कोशिका में प्रोटीन बनते हैं, जिससे शरीर की संरचना और क्रियाएँ नियंत्रित होती हैं।
Explanation (व्याख्या)
👉 DNA को आप कोशिका का “सूचना बैंक” मान सकते हैं।

👉 जब कोशिका को कोई प्रोटीन बनाना होता है, तो DNA की सूचना RNA तक जाती है और फिर राइबोसोम पर प्रोटीन बनता है।

👉 इसी कारण न्यूक्लिक अम्ल जीवन की मूल प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य हैं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ DNA में शुगर डीऑक्सीराइबोज होती है, जबकि RNA में राइबोज होती है।

✅ RNA सिर्फ संदेशवाहक नहीं, कुछ स्थितियों में catalytic भूमिका भी निभा सकता है (जैसे ribozymes)।
Q.22: न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अंतर होता है?
Answer (उत्तर)
✅ मुख्य अंतर:
न्यूक्लियोसाइड = नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोज शर्करा
न्यूक्लियोटाइड = नाइट्रोजनी क्षारक + पेन्टोज शर्करा + फॉस्फेट समूह
Explanation (व्याख्या)
न्यूक्लियोसाइड बनाम न्यूक्लियोटाइड
आधार न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside) न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide)
संरचना नाइट्रोजनी क्षारक + शर्करा नाइट्रोजनी क्षारक + शर्करा + फॉस्फेट
फॉस्फेट समूह अनुपस्थित उपस्थित (एक/अधिक)
प्रकृति अपेक्षाकृत सरल इकाई अधिक क्रियाशील, न्यूक्लिक अम्ल की वास्तविक मोनोमर इकाई
न्यूक्लिक अम्ल में भूमिका अकेले DNA/RNA की श्रृंखला नहीं बनाता DNA/RNA की श्रृंखला बनाने वाली मूल इकाई
उदाहरण एडेनोसिन, ग्वानोसिन AMP, ADP, ATP, GMP आदि

👉 पहले क्षारक (Base) और शर्करा (Sugar) जुड़ते हैं, तो न्यूक्लियोसाइड बनता है।

👉 जब इसी न्यूक्लियोसाइड से फॉस्फेट समूह जुड़ जाता है, तो न्यूक्लियोटाइड बनता है।

👉 DNA/RNA की लंबी शृंखला न्यूक्लियोटाइड्स के जुड़ने से बनती है, न्यूक्लियोसाइड्स के नहीं।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
ATP एक न्यूक्लियोटाइड है और कोशिका की “energy currency” माना जाता है।

✅ एग्ज़ाम ट्रिक:
“Nucleoside + Phosphate = Nucleotide”
यह एक लाइन याद रहे, तो अंतर कभी नहीं भूलेंगे।
Q.23: DNA के दो रज्जुक समान नहीं होते, अपितु एक-दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए।
Answer (उत्तर)
✅ DNA के दोनों रज्जुक (strands) एक जैसे नहीं, बल्कि पूरक (complementary) होते हैं।

✅ इसका कारण यह है कि क्षारक (bases) यादृच्छिक रूप से नहीं जुड़ते, बल्कि निश्चित नियम से युग्मन करते हैं:
A (एडेनिन) ↔ T (थायमिन) : 2 हाइड्रोजन बन्ध
G (ग्वानिन) ↔ C (साइटोसीन) : 3 हाइड्रोजन बन्ध

✅ इसलिए यदि एक रज्जुक का क्रम पता हो, तो दूसरे रज्जुक का क्रम स्वतः निर्धारित हो जाता है।
यही DNA की पूरकता (complementarity) है।
Explanation (व्याख्या)
👉 DNA में एक रज्जुक के प्यूरीन क्षारक , दूसरे रज्जुक के पिरिमिडीन क्षारकों से जुड़ते हैं।

👉 आकार और ज्यामिति के कारण केवल निश्चित base-pairing स्थिर रहती है:
A से T और G से C जुड़ते हैं।

👉 इसी विशिष्ट युग्मन के कारण दोनों strands की सूचना एक-दूसरे की पूरक होती है, समान नहीं।

👉 यह पूरकता DNA प्रतिकृति (replication) और अनुवांशिक सूचना के सही संचरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
G≡C युग्म में 3 H-bonds होने से यह A=T (2 H-bonds) की तुलना में अधिक मजबूत होता है।

✅ जिस DNA क्षेत्र में GC-content अधिक होता है, वहाँ DNA अपेक्षाकृत अधिक स्थिर पाया जाता है।
Q.24: DNA तथा RNA में महत्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अंतर लिखिए।
Answer (उत्तर)
(A) संरचनात्मक अंतर
क्र. DNA RNA
1 शर्करा: 2-डिऑक्सी-D-राइबोज शर्करा: D-राइबोज
2 पिरिमिडीन क्षारक: साइटोसीन (C) और थाइमीन (T) पिरिमिडीन क्षारक: साइटोसीन (C) और यूरैसिल (U)
3 सामान्यतः द्वि-रज्जुक, द्विकुण्डलित (double helix) सामान्यतः एकल-रज्जुक (single strand)
4 अणु आकार बड़ा, आणविक द्रव्यमान अधिक अणु आकार अपेक्षाकृत छोटा, आणविक द्रव्यमान कम

(B) क्रियात्मक अंतर
क्र. DNA RNA
1 सामान्यतः आत्म-प्रतिकरण (replication) करता है सामान्यतः स्वयं replication नहीं करता
2 अनुवांशिक सूचना का दीर्घकालिक भंडारण/संचरण प्रोटीन संश्लेषण में मुख्य भूमिका (mRNA, tRNA, rRNA)
3 कोशिकीय नियंत्रण का आधारभूत आनुवंशिक ब्लूप्रिंट DNA की सूचना को अभिव्यक्त करके कार्यान्वयन कराता है
Explanation (व्याख्या)
👉 DNA को आप “genetic blueprint” मान सकते हैं, जो स्थिर रूप से जानकारी सुरक्षित रखता है।

👉 RNA उस जानकारी को “काम में” लाने वाला अणु है, खासकर प्रोटीन बनाने की प्रक्रिया में।

👉 DNA में T (Thymine) होता है, जबकि RNA में उसकी जगह U (Uracil) होता है।
यही एक बहुत पूछा जाने वाला exam point है।

👉 DNA का double helix रूप उसे अधिक स्थिर बनाता है; RNA single-stranded होने से अपेक्षाकृत कम स्थिर होता है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ कुछ विषाणुओं (viruses) में आनुवंशिक पदार्थ DNA की जगह RNA होता है।

✅ RNA के कुछ रूप ( ribozymes ) उत्प्रेरक की तरह भी काम कर सकते हैं।

✅ एग्ज़ाम ट्रिक:
DNA = Deoxyribose + Thymine + Double strand
RNA = Ribose + Uracil + Single strand

यह 3-point trick बहुत उपयोगी है।
Q.25: कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन-से हैं?
Answer (उत्तर)
✅ कोशिका में मुख्यतः तीन प्रकार के RNA पाए जाते हैं:

👉 1) राइबोसोमल RNA (rRNA)
👉 2) सन्देशवाहक RNA (mRNA)
👉 3) स्थानान्तरण RNA (tRNA)
Explanation (व्याख्या)
👉 mRNA (messenger RNA) : DNA से आनुवंशिक संदेश लेकर राइबोसोम तक पहुँचाता है।

👉 tRNA (transfer RNA) : उपयुक्त अमीनो अम्ल को राइबोसोम तक लाता है और codon के अनुसार जोड़ने में मदद करता है।

👉 rRNA (ribosomal RNA) : राइबोसोम का प्रमुख संरचनात्मक और क्रियात्मक घटक है, जहाँ प्रोटीन संश्लेषण होता है।
Did you know? (क्या आप जानते हैं?)
✅ कोशिका में कुल RNA का सबसे बड़ा हिस्सा सामान्यतः rRNA होता है।
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