जब अमोनिया (NH3) के एक, दो या तीन H-परमाणुओं को किसी ऐल्किल समूह अथवा ऐरिल समूह द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है, तो प्राप्त यौगिक एमीन कहलाते हैं।
वर्गीकरण : अमोनिया के हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल अथवा ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित करने के आधार पर ये तीन प्रकार के होते हैं —
प्राथमिक (1°) द्वितीयक (2°) तृतीयक (3°)
एमीनों का वर्गीकरण प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) तथा तृतीयक (3°) के रूप में किया जाता है।
नामकरण
सामान्य → ऐल्केनऐमीन
IUPAC → ऐल्केनैमीन
| संरचना | सामान्य नाम | IUPAC |
|---|---|---|
| CH3CH2NH2 | एथिलऐमीन | एथेनैमीन |
| CH3CH2CH2NH2 | n-प्रोपिलऐमीन | प्रोपेन-1-ऐमीन |
| CH3CHNH2CH3 | iso-प्रोपिलऐमीन | प्रोपेन-2-ऐमीन |
| CH3–NH–CH2CH3 | एथिलमेथिलऐमीन | N-मेथिलएथेनैमीन |
| CH3–N(CH3)–CH3 | ट्राइमिथिलऐमीन | N,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन |
| C2H5–N(C2H5)–CH2CH2CH2CH3 | N,N-डाइएथिल-n-ब्यूटिलऐमीन | N,N-डाइएथिलब्यूटेन-1-ऐमीन |
| NH2–CH2–CH=CH2 | ऐलिलऐमीन | प्रोप-2-ईन-1-ऐमीन |
| NH2–(CH2)6–NH2 | हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन | हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन |
| C6H5N(CH3)2 | N,N-डाइमेथिलऐनिलीन | N,N-डाइमेथिलबेंजेनैमीन |
एमीनों को बनाने की विधि
- नाइट्रो यौगिकों का अपचयन
- ऐल्किल हैलाइडों का अमोनीअपघटन
- नाइट्राइलों का अपचयन
- ऐमाइडों का अपचयन
- ग्रीनार्ड अभिकर्मक संश्लेषण
- हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया
1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन
नाइट्रो यौगिक सह अपचयित निकेल, पैलेडियम अथवा प्लैटिनम की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस से अपचयित करने पर ऐमीनों में अपचयित हो जाते हैं।
वैकल्पिक माध्यमों में अम्लीय माध्यम द्वारा इनके अपचयन से ऐल्केनैमीन प्राप्त होते हैं।
Ethylamine
aniline
Note: उपरोक्त अभिक्रियाओं में टिन एवं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा हुआ अपचयन को बेचैम्प भी कहते हैं, क्योंकि अभिक्रिया में बना FeCl2 जलअपघटित होकर हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) दे देता है। अतः केवल अभिक्रिया प्रारम्भ करने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है।
2. ऐल्किल हैलाइडों का अमोनीअपघटन
अमोनीअपघटन — ऐल्किल अथवा बेंजिल हैलाइड में C–X बंध को अमोनिया द्वारा तोड़ने की क्रिया को अमोनीअपघटन कहते हैं।
अमोनिया ऐल्किल हैलाइड ऐल्किल अमोनियम हैलाइड
(1° ऐमीन) (2° ऐमीन) (3° ऐमीन) (4° ऐमीन)
हैलाइडों की ऐमीनों से अभिक्रियाशीलता का क्रम — RI > RBr > RCl
3. नाइट्राइलों का अपचयन
मेथिल सायनाइड एथिल ऐमीन (1° ऐमीन)
ऐल्किल आइसोसायनाइड के अपचयन से 2° ऐमीन प्राप्त होते हैं, जैसे —
इस अभिक्रिया का प्रयोग एमीनों की श्रेणी को बढ़ाने में, अर्थात् प्राथमिक ऐमीन से एक अधिक कार्बन संख्या वाले ऐमीनों को बनाने में किया जाता है।
4. ऐमाइडों का अपचयन
Na/C2H5OH या LiAlH4 के साथ जल में ऐमाइड का अपचयन करते हैं, तो ऐमीन प्राप्त होते हैं।
(ii) H3O+ → R–CH2–NH2
5. गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण
- इस विधि का उपयोग प्राथमिक ऐल्किल ऐमीन को बनाने में किया जाता है। इस विधि से 2°, 3° ऐमीन नहीं प्राप्त किये जा सकते हैं।
- सर्वप्रथम थैलिमाइड, Alc. KOH से अभिक्रिया द्वारा पोटैशियम थैलिमाइड में बदलते हैं, जो ऐल्किल हैलाइड के साथ क्रिया कर तथा जलअपघटन द्वारा प्राथमिक ऐमीन तथा थैलिक अम्ल देता है।
1° ऐमीन
Note: ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन (Ar–NH2) इस विधि से नहीं बनाये जा सकते, क्योंकि ऐरिल हैलाइड में C–X बंध अनुनाद के कारण आंशिक द्विबन्ध होता है, जो सामान्यतः आसानी से नहीं टूटता। इस गुण का नामकरणरीति ऐनिलीन अभिक्रिया में हम देख सकते हैं।
6. हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया
- यह एक कार्बन परमाणु कम संख्या प्राथमिक ऐमीन बनाने की विधि है।
- इस अभिक्रिया में प्राप्त उत्पाद प्राथमिक ऐमीन में बदलता है। प्राप्त ऐमीन में ऐमाइड से एक कार्बन कम होता है।
- ऐमाइड को KOH के जलीय अथवा एथेनॉलिक विलयन में ब्रोमीन से अभिक्रिया करते हैं।
मेथिलऐमीन
ऐनिलीन
भौतिक गुणधर्म
निम्नतर ऐलिफेटिक ऐमीन मछली सदृश गंध वाली गैसें हैं। वे तीन अथवा अधिक कार्बन परमाणु वाली प्राथमिक ऐमीनें तथा तथा इससे उच्चतर ऐमीनें ठोस हैं।
ऐनिलीन तथा अन्य एरिलऐमीनें प्रायः रंगहीन होती हैं, परंतु भंडारण के दौरान वातावरण द्वारा ऑक्सीकरण होने से रंगेन हो जाती हैं।
जल में विलेयता
ऐमीनें जल में विलेय होती हैं, क्योंकि यह जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाती हैं। तथा अणुभार में वृद्धि के साथ जलविरोधी ऐल्किल भाग बढ़ जाता है और जल में विलेयता घटती है।
विलेयता का क्रम — 1° > 2° > 3°
जैसे — CH3NH2 > CH3CH2NH2 > (CH3)2NH
1° ऐमीन तथा जल के अणुओं के बीच H-बन्ध बनता है।
क्वथनांक
क्वथनांक ∝ अणुभार
क्वथनांक ∝ पृष्ठीय क्षेत्रफल की संख्या
रासायनिक अभिक्रियाएँ
1. ऐमीनों का क्षारकीय गुण
ऐमीनों में N परमाणु पर एक असाझित e− युग्म उपस्थित होने के कारण वे लुईस क्षारक की भाँति व्यवहार करती हैं।
(लवण)
ऐनिलीन → ऐनिलीनियम क्लोराइड
प्रश्न — ऐलिफेटिक ऐमीन, अमोनिया से प्रबल क्षारक होते हैं। कारण दीजिए?
हल — ऐलिफेटिक ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु पर ऐल्किल समूहों के +I प्रभाव के कारण N परमाणु की e− युग्म देने की प्रवृत्ति में वृद्धि होती है। अतः ऐलिफेटिक ऐमीन, अमोनिया से प्रबल क्षारक होते हैं।
ऐमीनों के क्षारकीय गुण की जाँच Kb तथा pKb के मान पर निर्भर करती है।
या pKb ↓ , Kb ↑
जहाँ Kb = क्षार का वियोजन स्थिरांक
अतः किसी ऐमीन के लिए Kb का मान जितना अधिक होता है अथवा pKb का मान जितना कम होता है, क्षार उतना ही प्रबल होता है।
ऐरोमैटिक ऐमीन ऐरिल समूह (बेंजीन) की इलेक्ट्रॉन खींचने (−I प्रभाव) की प्रकृति के कारण अमोनिया से दुर्बल क्षारक होते हैं।
ऐलिफेटिक ऐमीन V/S अमोनिया
ऐल्किल-ऐमीन, अमोनिया से प्रबल क्षारक होते हैं। क्योंकि — ऐल्किल-ऐमीन में ऐल्किल समूह (+I) प्रभाव के कारण e− घनत्व को नाइट्रोजन की ओर धकेलते हैं, जिससे N पर e− घनत्व बढ़ता है एवं ऐमीन की क्षारकीय प्रकृति बढ़ती है।
गैसीय प्रावस्था में ऐमीनों की क्षारकता का क्रम — (CH3)3N > (CH3)2NH > CH3NH2 > NH3 (321)
जलीय विलयन में मेथिल और एथिल प्रतिस्थापित ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता का क्रम —
(213)
(231)
प्रश्न — जलीय विलयन में मिश्र प्रभाव के कारण प्रबलता का क्रम बदलता है?
जलीय विलयन में 3° ऐमीन, 2° ऐमीन से कम क्षारीय होते हैं। क्योंकि —
- रिक्तिक बाधा — 3° ऐमीन में N पर जुड़े तीन ऐल्किल समूहों की उपस्थिति होने के कारण N परमाणु के e− युग्म देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है।
- विलयन जलयोजन के कारण — ऐमीन जलीय माध्यम में H+ आयन ग्रहण कर अमोनियम आयन बनाते हैं। अमोनियम धनायनों का स्थायित्व जल के अणुओं द्वारा हाइड्रोजन बन्ध बनाने पर निर्भर करता है। धनायन का आकार जितना बड़ा होता है उसका विलयन जलयोजन उतना ही कम होता है।
H-बन्ध का निर्माण तीन स्थानों से H-बन्ध का निर्माण केवल एक स्थान से
ऐनिलीन V/S अमोनिया
ऐनिलीन की क्षारकीय प्रबलता ऐलिफेटिक ऐमीनों से कम होती है, क्योंकि नाइट्रोजन परमाणु पर इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है, जो बेंजीन वलय में अनुनाद द्वारा विस्थानीकृत हो जाता है। इस तरह N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है, जिसके कारण ऐनिलीन अथवा एरोमैटिक ऐमीनें, अमोनिया तथा ऐलिफेटिक ऐमीनों की तुलना में कम क्षारीय होती हैं।
प्रतिस्थापित ऐनिलीनों में वृद्धि
- इलेक्ट्रॉन-दान करने वाले समूह जैसे –OCH3, –CH3, क्षारकीय प्रबलता में वृद्धि करते हैं।
- इलेक्ट्रॉन-खींचने वाले समूह जैसे –NO2, –SO3H, –COOH, –X, क्षारकीय प्रबलता में कमी करते हैं।
प्रश्न — ऐनिलीन के pKb का मान CH3NH2 के pKb मान से अधिक है।
हल —
ऐनिलीन में अनुनाद के कारण N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाने से e− युग्म देने की प्रवृत्ति कम हो जाती है। अतः यह दुर्बल क्षार होता है। इसलिए इसका Kb कम होगा तथा pKb अधिक होगा।
परन्तु CH3NH2 में CH3 के +I प्रभाव के कारण N परमाणु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है एवं e− युग्म देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। अतः यह प्रबल क्षार होगा। इसलिए Kb अधिक तथा pKb कम होगा।
प्रश्न — निम्नलिखित को क्षारकीय प्रबलता के घटते क्रम में लिखिए?
हल —
ऐल्किल हैलाइड के साथ क्रिया (ऐल्किलीकरण)
जब प्राथमिक ऐमीन ऐल्किल हैलाइड से क्रिया करते हैं, तो N परमाणु से जुड़े H-परमाणु, ऐल्किल समूह द्वारा प्रतिस्थापित होकर क्रमशः 2°, 3° तथा 4° यौगिक बनाते हैं।
−HX → R–NH–R′ RX
−HX → R–NR′2 RX → (R–N+R′3)X−
1° ऐमीन 2° ऐमीन 3° ऐमीन 4° चतुर्ध अमोनियम लवण
ऐसिटिल क्लोराइड के साथ क्रिया (ऐसिटिलन)
प्राथमिक एवं द्वितीयक ऐमीन ऐसिटिल क्लोराइड, ऐसिटिक ऐनहाइड्राइड और एस्टर से नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया दर्शाते हैं।
एथेनामीन → N-एथिलएथेनामाइड
N-एथिलएथेनामीन → N,N-डाइएथिलएथेनामाइड
NOTE: 3° ऐमीन यह अभिक्रिया नहीं देते हैं, क्योंकि इनमें N परमाणु के पास H-परमाणु नहीं होता है।
ऐमीन की ऐसिटिक ऐनहाइड्राइड के साथ अभिक्रिया
बेंज़ीनऐमीन → N-फेनिलएथेनामाइड अथवा ऐसिटेनिलाइड
बेंज़ोइलीकरण
ऐमीन बेंज़ोइल क्लोराइड (C6H5COCl) से भी अभिक्रिया करती हैं। इस अभिक्रिया को बेंज़ोइलीकरण (शॉटेन बॉमैन अभिक्रिया) कहते हैं।
मेथिल ऐमीन → N-मेथिलबेंजामाइड
4. कार्बिलऐमीन अभिक्रिया अथवा आइसोसायनाइड परीक्षण
- यह परीक्षण प्राथमिक ऐलिफेटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों द्वारा देते हैं।
- आइसोसायनाइड परीक्षण या केवल प्राथमिक ऐमीन ही देते हैं, तथा इस परीक्षण का उपयोग प्राथमिक ऐमीनों का द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों से विभेद करने में किया जाता है।
ऐल्किल आइसोसायनाइड
दुर्गन्धयुक्त पदार्थ
NOTE : यह परीक्षण द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन नहीं देते हैं।
5. नाइट्रस अम्ल (HNO2) से अभिक्रिया
- प्राथमिक ऐलिफेटिक ऐमीन
- ऐरोमैटिक ऐमीन
प्राथमिक ऐलिफेटिक ऐमीन
- प्राथमिक ऐलिफेटिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया द्वारा ऐलिफेटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती हैं, जो अस्थायी होने के कारण नाइट्रोजन मुक्त करके ऐल्कोहॉल बनाती हैं।
- नाइट्रस अम्ल का वर्ग अमीन अम्लों एवं फिनॉलों से आयतन में किया जाता है।
प्राथमिक ऐलिफेटिक ऐमीन → नाइट्रस अम्ल → अस्थायी डाइऐजोनियम लवण
ऐरोमैटिक ऐमीन
ऐरोमैटिक ऐमीन नाइट्रस अम्ल से कम ताप (273–278 K) पर अभिक्रिया कर डाइऐजोनियम लवण बनाती हैं।
ऐनिलीन
→
बेंज़ीन डाइऐजोनियम क्लोराइड
(अनुनाद के कारण स्थायी)
6.ऐरिलसल्फोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया (हिन्सबर्ग परीक्षण)
प्रश्न — हिन्सबर्ग अभिकर्मक का रासायनिक नाम क्या होता है? लिखो।
- हिन्सबर्ग अभिकर्मक = C6H5SO2Cl (बेंजीन सल्फोनिल क्लोराइड)
- हिन्सबर्ग परीक्षण प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीनों में विभेद करने में उपयोगी है।
Case – 1. प्राथमिक ऐमीन की अभिक्रिया
बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड और प्राथमिक ऐमीन की अभिक्रिया से N-ऐल्किलबेंजीन सल्फोनामाइड प्राप्त होते हैं।
N-ऐल्किल बेंजीन सल्फोनामाइड
(क्षार में घुलनशील)
सल्फोनामाइड की नाइट्रोजन से जुड़ी हाइड्रोजन, प्रबल इलेक्ट्रॉन खींचने वाले सल्फोनिल समूह की उपस्थिति के कारण प्रबल अम्लीय होती है। अतः यह प्रबल क्षार में विलेय होते हैं।
Case – 2. द्वितीयक ऐमीन की अभिक्रिया
द्वितीयक ऐमीनों की अभिक्रिया से N,N-डाइऐल्किलबेंजीनसल्फोनामाइड बनता है। N,N-डाइऐल्किल बेंजीन सल्फोनामाइड में कोई भी हाइड्रोजन परमाणु नाइट्रोजन परमाणु से नहीं जुड़ा है। अतः यह उदासीन होता है तथा क्षार में अविलेय होता है।
Case – 3. तृतीयक ऐमीन
तृतीयक ऐमीन बेंजीनसल्फोनिल क्लोराइड से अभिक्रिया नहीं करते।
(3° ऐमीन)
7. इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन
ऐनिलीन में –NH2 समूह के (+I) प्रभाव के कारण ऑर्थो तथा पैरा स्थानों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाते हैं। अतः –NH2 समूह ऑर्थो तथा पैरा निर्देशकारी समूह है।
- ब्रोमिनीकरण
- नाइट्रीकरण
- सल्फोनेशन
(1) ब्रोमिनीकरण
ऐनिलीन कमरे के ताप पर ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का सफेद अवक्षेप देती है।
प्रश्न — ऐनिलीन का एकल प्रतिस्थापी उत्पाद किस प्रकार से बनाया जा सकता है?
हल —
यदि हमें ऐनिलीन का एकल प्रतिस्थापी उत्पाद बनाना हो तो –NH2 समूह के सक्रियण प्रभाव को कम करना होगा। इसके लिए सबसे पहले ऐनिलीन की अभिक्रिया ऐसिटिक ऐनहाइड्राइड से कराते हैं, जिससे हमें ऐसिटेनिलाइड (N-फेनिल एथेनामाइड) प्राप्त होता है।
इस प्रक्रिया में ऐसिटेनिलाइड के N पर उपस्थित e− lp, O परमाणु से अनुनाद के द्वारा व्यस्त क्रिया करता है, जिससे N पर उपस्थित e− lp, बेंजीन के अनुनाद के लिए कम उपलब्ध होती है। –NHCOCH3 समूह का सक्रियण प्रभाव फीनो समूह से कम होता है। अतः –NH2 समूह का सक्रियण प्रभाव कम हो जाता है।
जब हम –NH2 समूह को ऐसिटिक ऐनहाइड्राइड द्वारा संरक्षित करने के बाद एकल प्रतिस्थापन कराते हैं और फिर तेज़ जल अपघटन द्वारा ऐसिटेनिलाइड से ऐनिलीन प्राप्त करते हैं।
P-उत्पाद (अधिक मात्रा में) O-उत्पाद (कम मात्रा में)
(2) नाइट्रीकरण
- ऐनिलीन का नाइट्रीकरण से तीन प्रकार के उत्पाद प्राप्त होते हैं।
- o-उत्पाद एवं p-उत्पाद = –NH2 समूह के ऑर्थो तथा पैरा निर्देशकारी समूह के कारण।
- m-उत्पाद = प्रबल अम्लीय माध्यम में ऐनिलीन प्रोटॉन ग्रहण कर ऐनिलीनियम आयन बनाती है, जो m-निर्देशकारी है।
o-उत्पाद (51%) p-उत्पाद (47%) m-उत्पाद (2%)
–NH2 समूह को ऐसिटिक ऐनहाइड्राइड द्वारा सुरक्षित करके हम पैरा-नाइट्रो उत्पाद शुद्ध रूप से प्राप्त कर सकते हैं।
(3) फ्रिडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया (ऐल्किलन एवं ऐसिलन)
ऐनिलीन फ्रिडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया नहीं देती क्योंकि फ्रिडेल-क्राफ्ट अभिक्रिया के रूप में प्रयुक्त AlCl3, एक लुईस अम्ल होता है, जो ऐनिलीन के असाझित e− युग्म के साथ क्रिया कर ऐनिलीनियम आयन बना लेता है। अतः N परमाणु पर धनावेश आ जाता है, जिससे बेंजीन रिंग को o- तथा p-स्थिति पर अधिकृत कर देता है, जिससे e− रिच प्रतिस्थापन अभिक्रिया नहीं होती है।
(4) सल्फोनीकरण
ऐनिलीन सान्द्र H2SO4 से अभिक्रिया द्वारा ऐनिलीनियम हाइड्रोजन सल्फेट बनाती है, जो H2SO4 के साथ 453–473 K तक गरम करने पर p-ऐमीनोबेंजीन सल्फोनिक अम्ल (सल्फेनिलिक अम्ल) बनाता है।
ज्विटर आयन (ध्रुवीय आयन)
डाइएजोनियम लवण
सामान्य सूत्र —
X− आयन = Cl−, Br−, I−, HSO4−, BF4−
N2 = डाइएजोनियम समूह
नामकरण
जनक हाइड्रोकार्बन + डाइएजोनियम + हैलाइड
जैसे —
जब ऐनिलीन की अभिक्रिया नाइट्रस अम्ल (HNO2) तथा HCl से 273–278 K पर करवाने पर एक अस्थायी लवण बनता है, जिसे बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड कहते हैं।
ऐनिलीन → बेंजीन डाइएजोनियम क्लोराइड
प्रश्न — ऐनिलीन के डाइएजोटीकरण की अभिक्रिया लिखिए?
बेंजीन डाइएजोनियम की अनुनादी संरचनाएँ
बेंजीन डाइएजोनियम लवण में अनुनाद के कारण इसकी कुछ अनुनादी संरचनाएँ लिखी जाती हैं।
डाइएजोनियम लवण की रासायनिक अभिक्रियाएँ
- नाइट्रोजन प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ — डाइएजो समूह हटता है।
- अभिक्रियाएँ जिनमें डाइएजो समूह नहीं हटता — युग्मन अभिक्रियाएँ
नाइट्रोजन प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
बेंज़ीन डाइएज़ोनियम क्लोराइड विभिन्न अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया करके नाइट्रोजन गैस के उत्सर्जन के साथ अलग-अलग प्रतिस्थापित बेंजीन देता है।
| अभिकर्मक / दशाएँ | उत्पाद | अभिक्रिया / टिप्पणी |
|---|---|---|
| H3PO2 या Na2SnO2 / C2H5OH |
C6H6 + N2 | हाइड्रोजन से प्रतिस्थापन |
| H2O / 160°C | C6H5OH + N2 | फिनॉल का निर्माण |
| CuCl / HCl | C6H5Cl + N2 | सैंडमेयर अभिक्रिया |
| CuBr / HBr | C6H5Br + N2 | सैंडमेयर अभिक्रिया |
| Cu powder / HCl | C6H5Cl + N2 | गैटरमैन अभिक्रिया |
| Cu powder / HBr | C6H5Br + N2 | गैटरमैन अभिक्रिया |
| KI | C6H5I + N2 | आयोडोबेंजीन का निर्माण |
| HBF4 / Heat | C6H5F + BF3 + N2 | बाल्ज़-शिमैन अभिक्रिया |
| aq. KCN / boil या KCN / Cu powder |
C6H5CN + N2 | बेंज़ोनाइट्राइल का निर्माण |
| बेंज़ोनाइट्राइल पर H3O+ | C6H5COOH | बेंजोइक अम्ल का निर्माण |
| C6H6 / NaOH | C6H5–C6H5 + N2 + HCl | बाइफिनाइल का निर्माण |
| HBF4 | फ्लुओरोबोरेट आयन | मध्यवर्ती |
| NaNO2, Cu, Δ | C6H5NO2 + N2 + NaBF4 | नाइट्रोबेंजीन का निर्माण |
Note : H3PO2 = हाइपो फॉस्फोरस अम्ल
अभिक्रियाएँ जिनमें डाइएजो समूह नहीं हटता
युग्मन अभिक्रियाएँ
सामान्य अभिक्रियाएँ
Z = –OH or –NH2
उदाहरण
फिनॉल → p-हाइड्रॉक्सी एजोबेंजीन
ऐनिलीन → p-एमीनोएजोबेंजीन
ऐरोमैटिक यौगिकों के संश्लेषण में डाइएजोनियम लवणों का महत्त्व
- उपरोक्त अभिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि डाइएजोनियम लवण बेंजीन वलय में –F, –Cl, –Br, –I, –CN, –OH, –NO2 आदि समूहों को प्रविष्ट कराने में उपयोगी है।
- R-F एवं R-Cl को सीधे हैलोजन द्वारा नहीं बनाया जा सकता। Ar-Cl में क्लोरीन के नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन द्वारा सायनाइड समूह का प्रवेश नहीं कराया जा सकता, किन्तु डाइएजोनियम लवण से सायनोबेंजीन को सरलता से बनाया जा सकता है।
- अतः डाइएजो समूह का अन्य समूहों द्वारा प्रतिस्थापन ऐसे ऐरोमैटिक प्रतिस्थापित यौगिकों को बनाने में सहायक है, जो सीधे बेंजीन अथवा प्रतिस्थापित बेंजीन से नहीं बनते।
