रेडॉक्स अभिक्रियाएँ (Redox reactions)
वे अभिक्रियाएँ जिनमें ऑक्सीकरण तथा अपचयन साथ-साथ होते हैं, रेडॉक्स या ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इन अभिक्रियाओं में एक पदार्थ e− त्यागकर ऑक्सीकरण करता है तथा दूसरा पदार्थ e− ग्रहण कर अपचयन करता है।
| ऑक्सीकरण (Oxidation) | अपचयन (Reduction) |
|---|---|
|
(1) ऑक्सीजन का योग : 2Mg + O2 → 2MgO |
(1) ऑक्सीजन का निष्कासन : CuO + C → Cu + CO |
|
(2) हाइड्रोजन का निष्कासन : H2S + Cl2 → 2HCl + S |
(2) हाइड्रोजन का योग : H2 + Cl2 → 2HCl |
|
(3) इलेक्ट्रॉनों की हानि : Mg → Mg2+ + 2e− |
(3) इलेक्ट्रॉनों का जुड़ना : Zn2+ + 2e− → Zn(s) |
|
(4) धनावेश में वृद्धि : Fe → Fe2+ → Fe3+ |
(4) धनावेश में कमी : Sn4+ + 2e− → Sn2+ |
|
(5) ऋणावेश में कमी : 2Cl− → Cl2 + 2e− |
(5) ऋणावेश में वृद्धि : Cl2 + 2e− → 2Cl− |
|
(6) ऑक्सीकरण अवस्था में वृद्धि : Mg → Mg2+ (0 से +2) |
(6) ऑक्सीकरण अवस्था में कमी : Mg2+ → Mg (+2 से 0) |
ऑक्सीकारक तथा अपचायक (Oxidising and Reducing Agents)
| ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) | अपचायक (Reducing Agent) |
|---|---|
| वे पदार्थ (परमाणु, आयन तथा अणु) जो सामने वाले पदार्थ का ऑक्सीकरण करते हैं तथा स्वयं अपचयित हो जाते हैं, ऑक्सीकारक (Oxidising Agent) कहलाते हैं। | वे पदार्थ (परमाणु, आयन तथा अणु) जो सामने वाले पदार्थ का अपचयन करते हैं तथा स्वयं ऑक्सीकारित हो जाते हैं, अपचायक (Reducing Agent) कहलाते हैं। |
निम्न अभिक्रिया में –
Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
यहाँ Fe इलेक्ट्रॉन त्यागकर Fe2+ बनाता है, इसलिए Fe का ऑक्सीकरण होता है और यह अपचायक पदार्थ है।
जबकि Cu2+ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cu बनाता है, इसलिए Cu2+ का अपचयन होता है और यह ऑक्सीकारक पदार्थ है।
ऑक्सीकरण संख्या या ऑक्सीकरण अवस्था
ऑक्सीकरण संख्या किसी अणु या परमाणु पर उपस्थित आवेश (वास्तविक अथवा आभासी) होता है जो बंध निर्माण के समय इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण उत्पन्न होता है।
ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करने के नियम
-
तत्वों की स्वतंत्र अवस्था में
प्रत्येक परमाणु की ऑक्सीकरण संख्या 0 होती है।
जैसे — H2, O2, Cl2, O3, P4, S8, Na, Mg तथा Al आदि। -
किसी एक परमाणुक आयन की
ऑक्सीकरण संख्या उसके आवेश के बराबर होती है।
उदाहरण — Na+, Mg2+, Al3+ की ऑक्सीकरण संख्याएँ क्रमशः +1, +2 तथा +3 हैं जबकि Cl−, S2− तथा N3− की ऑक्सीकरण संख्याएँ −1, −2 तथा −3 हैं। -
जब हाइड्रोजन किसी अधातु से जुड़ा होता है
तो उसकी ऑक्सीकरण संख्या +1 होती है,
जबकि किसी धातु से जुड़ा होने पर
उसकी ऑक्सीकरण संख्या −1 होती है।
उदाहरण — LiH, KH, MgH2, CaH2 में H की ऑक्सीकरण संख्या −1 है। - सामान्यतः ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या −2 होती है।
| यौगिक | O का O.N. | F का O.N. |
|---|---|---|
| परऑक्साइड — H2O2, BaO2 | −1 | — |
| सुपर ऑक्साइड — KO2, RbO2 | Avg. O.N. = −1/2 | — |
| ऑक्सीजन डाइफ्लोराइड — OF2 | +2 | −1 |
| डाइऑक्सीजन डाइफ्लोराइड — O2F2 | +1 | −1 |
Note : इन सभी को TRICK से भी याद किया जा सकता है।
-
हैलोजन (F, Cl, Br, I) की धातुओं के साथ बने यौगिकों में
ऑक्सीकरण संख्या सामान्यतः −1 होती है।
उदाहरण — KF, AlCl3, MgBr2, CdI2। - जिस तत्व की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करनी हो उसे X मान लेते हैं तथा अन्य तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या लिख देते हैं।
उदाहरण : ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करना
| K₂Cr₂O₇ में Cr का O.N. | K₂MnO₄ में Mn का O.N. | ClO₂⁻ में Cl का O.N. |
|---|---|---|
|
K₂Cr₂O₇ 2(+1) + 2x + 7(−2) = 0 ∴ x = +6 Cr = +6 |
K₂MnO₄ 2(+1) + x + 4(−2) = 0 ∴ x = +6 Mn = +6 |
ClO₂⁻ x + 2(−2) = −1 ∴ x = +3 Cl = +3 |
कुछ अपवाद (Oxidation Number Exceptions)
कुछ यौगिक ऐसे होते हैं जिनमें तत्व का ऑक्सीकरण संख्या सामान्य विधि से सही रूप में ज्ञात नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में हमें संरचना के आधार पर O.N. निर्धारित करना पड़ता है।
| यौगिक | सामान्य विधि से | संरचना के आधार पर |
|---|---|---|
| H2SO5 (पेरॉक्सीमोनोसल्फ्यूरिक अम्ल / कैरो अम्ल) में 'S' का O.N. | S = +8 | S = +6 |
| H2S2O8 (पेरॉक्सीडाइसल्फ्यूरिक अम्ल / मार्शल अम्ल) में 'S' का O.N. | S = +7 | S = +6 |
| CrO5 (बटर फ्लाई यौगिक) में 'Cr' का O.N. | Cr = +10 | Cr = +6 |
| Na2S2O3 में 'S' का O.N. | S = +2 | S = −2 तथा +6 |
| Na2S4O6 (सोडियम टेट्राथायोनेट) में 'S' की ऑक्सीकरण संख्या | S = +5/2 | S = +5 |
| Br3O8 (ट्राई ब्रोमो ऑक्टाऑक्साइड) में 'Br' की ऑक्सीकरण संख्या | Br = +16/3 | Br = +16/3 |
संयोजकता तथा ऑक्सीकरण संख्या में अन्तर
| संयोजकता | ऑक्सीकरण संख्या |
|---|---|
| यह तत्व की संयोजन क्षमता को दर्शाती है। | परमाणु की संयोजी अवस्था में उपस्थित आभासी आवेश को ऑक्सीकरण संख्या कहते हैं। इसका धन (+) या ऋण (−) चिन्ह होता है। |
| तत्व की संयोजकता निश्चित होती है। | तत्व की ऑक्सीकरण संख्या के अलग-अलग मान हो सकते हैं। यह यौगिक की प्रकृति पर निर्भर करती है। |
| संयोजकता हमेशा पूर्णांक होती है। | तत्व की ऑक्सीकरण संख्या पूर्णांक या भिन्न दोनों हो सकती है। |
| तत्व की संयोजकता कभी भी शून्य नहीं होती, केवल आदर्श गैसों को छोड़कर। | तत्व की ऑक्सीकरण संख्या शून्य भी हो सकती है। |
स्टॉक संकेत (Stock Notation)
यौगिकों में धातु की ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन संख्या में कोष्ठक में लिखा जाता है। इसे स्टॉक संकेत कहते हैं।
जब कोई तत्व एक से अधिक संयोजकता प्रदर्शित करता है, तब दोनों आयनों को अलग पहचानने के लिए यह विधि उपयोगी होती है।
उदाहरण : क्यूप्रस आयन → Cu+ (ऑक्सीकरण संख्या +1) क्यूप्रिक आयन → Cu2+ (ऑक्सीकरण संख्या +2)
उदाहरण :
ऑरस क्लोराइड → Au(I)Cl
ऑरिक क्लोराइड → Au(III)Cl3
स्टैनस क्लोराइड → Sn(II)Cl2
स्टैनिक क्लोराइड → Sn(IV)Cl4
निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए
- मरक्यूरस (II) क्लोराइड → HgCl2
- निकेल (II) सल्फेट → NiSO4
- टिन (IV) ऑक्साइड → SnO2
- थैलियम (I) सल्फेट → Tl2SO4
- आयरन (III) सल्फेट → Fe2(SO4)3
- क्रोमियम (III) ऑक्साइड → Cr2O3
रेडॉक्स अभिक्रियाओं के प्रकार
- योग अभिक्रियाएँ
- अपघटन अभिक्रियाएँ
- विस्थापन अभिक्रियाएँ
- असमानुपातन अभिक्रियाएँ
1. योग अभिक्रियाएँ
C(s) + O2(g) → CO2(g)
C : 0 → +4 (ऑक्सीकरण) O : 0 → −2 (अपचयन)
3Mg(s) + N2(g) → Mg3N2(s)
Mg : 0 → +2 (ऑक्सीकरण) N : 0 → −3 (अपचयन)
2. अपघटन अभिक्रियाएँ
2H2O(l) → 2H2(g) + O2(g)
H : +1 → 0 (अपचयन) O : −2 → 0 (ऑक्सीकरण)
2NaH(s) → 2Na(s) + H2(g)
Na : +1 → 0 (अपचयन) H : −1 → 0 (ऑक्सीकरण)
उदाहरण :
CaCO3(s) → CaO(s) + CO2(g)
Ca = +2, C = +4, O = −2 (कोई परिवर्तन नहीं)
3. विस्थापन अभिक्रियाएँ
(i) धातु विस्थापन
यौगिक में एक धातु दूसरी धातु को उसके जलीय विलयन से विस्थापित कर देती है।
Zn(s) + CuSO4(aq) → Cu(s) + ZnSO4(aq)
Zn : 0 → +2 (ऑक्सीकरण)
Cu : +2 → 0 (अपचयन)
(ii) अधातु विस्थापन
इस प्रकार की अभिक्रियाओं में अधातु के रूप में H₂ गैस बाहर निकलती है।
2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g)
Na : 0 → +1 (ऑक्सीकरण)
H : +1 → 0 (अपचयन)
Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)
Ca : 0 → +2 (ऑक्सीकरण)
H : +1 → 0 (अपचयन)
4. असमानुपातन अभिक्रिया
जब एक ही पदार्थ एक ही अभिक्रिया में ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों करता है, तो उसे असमानुपातन अभिक्रिया कहते हैं।
2H2O2(aq) → 2H2O(l) + O2(g)
O : −1 → −2 (अपचयन)
O : −1 → 0 (ऑक्सीकरण)
यहाँ पेरॉक्साइड की ऑक्सीजन −1 अवस्था से H₂O में −2 तथा O₂ में 0 अवस्था में बदल जाती है।
अन्य उदाहरण
H3PO2 Heat → PH3 + H3PO4
P : +1 → −3 (अपचयन)
P : +1 → +5 (ऑक्सीकरण)
यहाँ P की O.N. में कमी तथा वृद्धि दोनों हो रही हैं, इसलिए यह असमानुपातन अभिक्रिया है।
रेडॉक्स अभिक्रियाओं का संतुलन करने की विधियाँ
रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करने की मुख्य दो विधियाँ होती हैं —
- अर्ध-अभिक्रिया विधि
- ऑक्सीकरण संख्या विधि
1. अर्ध-अभिक्रिया विधि
पद – 1 : पूर्ण अभिक्रिया को दो अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करते हैं — ऑक्सीकरण तथा अपचयन।
पद – 2 : प्रत्येक अर्ध-अभिक्रिया को अलग-अलग संतुलित करते हैं।
- O तथा H के अतिरिक्त अन्य सभी परमाणुओं की संख्या संतुलित करते हैं।
- ऑक्सीजन को संतुलित करने के लिए H2O जोड़ा जाता है।
- हाइड्रोजन को संतुलित करने के लिए H+ जोड़ा जाता है।
- दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर करने के लिए उपयुक्त संख्या से गुणा करते हैं।
- अंत में दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ देते हैं।
पद – 3 : माध्यम के अनुसार संतुलन —
- अम्लीय माध्यम में विपरीत ओर H+ जोड़ा जाता है।
- क्षारीय माध्यम में जिस ओर H+ अधिक होते हैं, उस ओर उतने ही H2O के अणु जोड़ते हैं और विपरीत ओर OH− जोड़ देते हैं।
Verification
LHS = RHS
2. ऑक्सीकरण संख्या विधि
पद – 1 : सर्वप्रथम दी गयी रासायनिक अभिक्रिया को लिखते हैं।
पद – 2 : तत्वों की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करके ऑक्सीकरण तथा अपचयन वाले तत्व पहचानते हैं।
पद – 3 : O तथा H को छोड़कर अन्य परमाणुओं को संतुलित करते हैं।
पद – 4 : ऑक्सीकरण संख्या में हुए परिवर्तन के आधार पर दोनों समीकरणों को उचित संख्या से गुणा करके जोड़ देते हैं।
पद – 5 : O को संतुलित करने के लिए H2O जोड़ा जाता है।
पद – 6 : H को संतुलित करने के लिए —
- अम्लीय माध्यम में H+ जोड़ा जाता है।
- क्षारीय माध्यम में जिस ओर H+ अधिक होते हैं, उस ओर उतने ही H2O के अणु जोड़ते हैं और विपरीत ओर OH− जोड़ देते हैं।
Verification
LHS = RHS
निम्न अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए
-
Cr2O72− + SO32− (H+) → Cr3+ + SO42−
संतुलित अभिक्रिया :
Cr2O72− + 3SO32− + 8H+ → 2Cr3+ + 3SO42− + 4H2O
-
MnO4− + Br− (OH−) → MnO2 + BrO3−
संतुलित अभिक्रिया :
2MnO4− + Br− + H2O → 2MnO2 + BrO3− + 2OH−
-
MnO4− + I− (OH−) → MnO2 + I2
संतुलित अभिक्रिया :
2MnO4− + 6I− + 4H2O → 2MnO2 + 3I2 + 8OH−
-
ClO2 + H2O2 (OH−) → ClO2− + O2
संतुलित अभिक्रिया :
ClO2 + H2O2 + OH− → ClO2− + O2 + H2O
प्रश्न
H2SO5 तथा CrO5 में क्रमशः सल्फर तथा क्रोमियम की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा इसमें होने वाली fallacy को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
(i) H2SO5 में S की ऑक्सीकरण संख्या
यदि S की ऑक्सीकरण संख्या x मानें —
2(+1) + x + 5(−2) = 0
x = +8 (Wrong)
लेकिन सल्फर की अधिकतम O.N. +6 से अधिक नहीं होती। अतः यह परिणाम गलत (fallacy) है।
संरचना से सही O.N.
H2SO5 की संरचना में परॉक्साइड बंध (−O−O−) उपस्थित होता है।
परॉक्साइड बंध में जुड़े प्रत्येक O का O.N. = −1 होता है।
2(+1) + x + 3(−2) + 2(−1) = 0
x = +6 (Correct)
(ii) CrO5 में Cr की ऑक्सीकरण संख्या
यदि Cr की ऑक्सीकरण संख्या x मानें —
x + 5(−2) = 0
x = +10 (Wrong)
लेकिन Cr की अधिकतम O.N. +6 होती है, अतः यह भी fallacy है।
संरचना से सही O.N.
CrO5 की संरचना में दो परॉक्साइड बंध उपस्थित होते हैं।
अतः 4 O का O.N. = −1 तथा एक O का O.N. = −2 होगा।
x + 4(−1) + (−2) = 0
x = +6 (Correct)
विद्युत रासायनिक सेल (गैल्वेनिक सेल)
विद्युत रासायनिक सेल एक ऐसी युक्ति है जिसमें स्वतः होने वाली ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया के द्वारा रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। इसे गैल्वेनिक सेल भी कहते हैं।
बनावट (Construction)
इस सेल को बनाने के लिए —
- Zn धातु की छड़ को ZnSO4 विलयन में डुबोया जाता है।
- Cu धातु की छड़ को CuSO4 विलयन में डुबोया जाता है।
- दोनों विलयनों को लवण सेतु (Salt Bridge) द्वारा जोड़ दिया जाता है।
सेल में होने वाली अर्ध-अभिक्रियाएँ
एनोड (ऑक्सीकरण) :
Zn(s) → Zn2+(aq) + 2e−
कैथोड (अपचयन) :
Cu2+(aq) + 2e− → Cu(s)
कुल अभिक्रिया (Overall Reaction)
Zn(s) + Cu2+(aq) → Zn2+(aq) + Cu(s)
अर्ध-सेल
सेल में ऑक्सीकरण तथा अपचयन अलग-अलग स्थानों पर होते हैं, इसलिए सेल के दो भाग होते हैं जिन्हें अर्ध-सेल कहते हैं।
- Zn इलेक्ट्रोड → एनोड
- Cu इलेक्ट्रोड → कैथोड
इलेक्ट्रॉन तथा धारा का प्रवाह
- इलेक्ट्रॉन का प्रवाह एनोड से कैथोड की ओर होता है।
- विद्युत धारा का प्रवाह कैथोड से एनोड की ओर होता है।
लवण सेतु (Salt Bridge) का कार्य
- दोनों अर्ध-सेलों के विलयनों को जोड़कर परिपथ पूर्ण करता है।
- विलयनों में विद्युत उदासीनता बनाए रखता है।
- जैसे KCl लवण सेतु में Cl⁻ आयन एनोड की ओर तथा K⁺ आयन कैथोड की ओर जाते हैं।
सेल का संकेत (Cell Notation)
Zn(s) | Zn2+(1M) || Cu2+(1M) | Cu(s)
A L O N E
A → Anode L → Loss of electrons O → Oxidation N → Negative electrode E → Electrons leave
इलेक्ट्रोड विभव (Electrode Potential)
जब किसी धातु (M) को उसके आयन (Mn+) युक्त विलयन में डुबोया जाता है, तो धातु के कुछ परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागकर विलयन में चले जाते हैं।
M(s) → Mn+(aq) + ne−
कभी-कभी विलयन के आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके धातु पर जम जाते हैं।
Mn+(aq) + ne− → M(s)
इस प्रकार धातु तथा उसके आयनों के बीच जो विभव उत्पन्न होता है उसे इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।
इलेक्ट्रोड विभव के प्रकार
धातु द्वारा इलेक्ट्रॉन त्यागने या इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति के आधार पर इलेक्ट्रोड विभव दो प्रकार का होता है —
(i) ऑक्सीकरण विभव
जब इलेक्ट्रोड विलयन के सापेक्ष ऋणावेशित हो जाता है, तो वह एनोड की तरह कार्य करता है। इसे ऑक्सीकरण विभव कहते हैं।
M(s) → Mn+(aq) + ne−
(ii) अपचयन विभव
जब इलेक्ट्रोड विलयन के सापेक्ष धनावेशित हो जाता है, तो वह कैथोड की तरह कार्य करता है। इसे अपचयन विभव कहते हैं।
Mn+(aq) + ne− → M(s)
मानक इलेक्ट्रोड विभव
यदि अर्ध-सेल में विलयन की सान्द्रता 1 M, तापमान 298 K तथा गैसीय अवस्था में दाब 1 bar हो, तो उस इलेक्ट्रोड विभव को मानक इलेक्ट्रोड विभव कहते हैं।
महत्वपूर्ण संबंध
मानक ऑक्सीकरण विभव = − मानक अपचयन विभव
उदाहरण
Cu इलेक्ट्रोड का मानक अपचयन विभव +0.34 V है।
अतः उसका मानक ऑक्सीकरण विभव −0.34 V होगा।
मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का मानक इलेक्ट्रोड विभव 0.00 V माना जाता है।
अन्य सभी तत्वों के मानक इलेक्ट्रोड विभव SHE की तुलना में मापे जाते हैं।
विद्युत रासायनिक श्रेणी के अनुप्रयोग
- धातुओं की सक्रियता
- विस्थापन अभिक्रियाएँ
- धातुओं की अपचयन क्षमता
(i) धातुओं की सक्रियता
- यदि मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) अधिक हो, तो तत्व में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक होती है और वह प्रबल ऑक्सीकारक होता है।
- यदि मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) कम हो, तो तत्व में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति अधिक होती है और वह प्रबल अपचायक होता है।
Example : F (+2.87 V) → प्रबल ऑक्सीकारक
Example : Li (−3.05 V) → प्रबल अपचायक
(ii) विस्थापन अभिक्रियाएँ
- ऐसी धातुएँ जिनका E° कम होता है, वे उन धातुओं को उनके लवण विलयन से विस्थापित कर देती हैं जिनका E° अधिक होता है।
- धातुएँ जो श्रृंखला में ऊपर होती हैं, वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्याग देती हैं।
- जो तत्व श्रृंखला में नीचे होते हैं, वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं।
(iii) धातुओं की अपचयन क्षमता
जिन धातुओं का मानक अपचयन विभव अधिक ऋणात्मक होता है, वे प्रबल अपचायक होती हैं।
ऐसी धातुएँ H+ को अपचयित करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं।
हाइड्रोजन से नीचे आने वाली धातुएँ जैसे Cu, Hg, Ag, Au, Pt अम्ल से हाइड्रोजन नहीं निकालती।
Electrode Potential Series
| अर्ध अभिक्रिया | मानक अपचयन विभव E° (V) |
|---|---|
| Li⁺ + e⁻ → Li | -3.05 |
| K⁺ + e⁻ → K | -2.93 |
| Ca²⁺ + 2e⁻ → Ca | -2.87 |
| Na⁺ + e⁻ → Na | -2.71 |
| Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg | -2.37 |
| Al³⁺ + 3e⁻ → Al | -1.66 |
| Zn²⁺ + 2e⁻ → Zn | -0.76 |
| Fe²⁺ + 2e⁻ → Fe | -0.44 |
| H⁺ + e⁻ → ½H₂ | 0.00 |
| Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu | +0.34 |
| Ag⁺ + e⁻ → Ag | +0.80 |
| Au³⁺ + 3e⁻ → Au | +1.50 |
| F₂ + 2e⁻ → 2F⁻ | +2.87 |
ऊपर की धातुएँ → प्रबल अपचायक
नीचे के तत्व → प्रबल ऑक्सीकारक
Electrochemistry Practice Questions
प्रश्न 1
निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए — Al, Cu, Fe, Mg, Zn
Step-2 : ऐसी धातु अन्य धातुओं को उनके लवण विलयन से आसानी से विस्थापित कर देती है।
Electrochemical series से मान :
- Mg = −2.37 V
- Al = −1.66 V
- Zn = −0.76 V
- Fe = −0.44 V
- Cu = +0.34 V
Step-3 : सबसे अधिक ऋणात्मक E° वाली धातु पहले आएगी।
Mg > Al > Zn > Fe > Cu
(विस्थापन क्षमता का क्रम)
प्रश्न 2
निम्न मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती अपचायक क्षमता के क्रम में लिखिए —
K⁺/K = −2.93 V Ag⁺/Ag = +0.80 V Hg²⁺/Hg = +0.79 V Mg²⁺/Mg = −2.37 V
जिन तत्वों का E° अधिक ऋणात्मक होता है, वे अधिक प्रबल अपचायक होते हैं।
Values compare करें :
- Ag = +0.80 V
- Hg = +0.79 V
- Mg = −2.37 V
- K = −2.93 V
बढ़ती अपचायक क्षमता :
Ag < Hg < Mg < K
E° value जितना negative होगा Reducing power उतनी strong होगी।
रेडॉक्स अभिक्रिया का संतुलन (Oxidation Number Method)
Cr2O72− + SO32− + H+ → Cr3+ + SO42−
Step 1 : Oxidation Number ज्ञात करें
- Cr : +6 → +3 (अपचयन)
- S : +4 → +6 (ऑक्सीकरण)
अतः Cr का reduction और S का oxidation हो रहा है।
Step 2 : Reduction half reaction
Cr2O72− → 2Cr3+
Cr : +6 → +3 2 Cr atoms के लिए total electron gain = 6e⁻
Cr2O72− + 6e− → 2Cr3+
Step 3 : Oxidation half reaction
SO32− → SO42−
S : +4 → +6 अर्थात 2e⁻ का त्याग
SO32− → SO42− + 2e−
Step 4 : Electrons बराबर करें
LCM = 6 इसलिए oxidation reaction को 3 से गुणा करते हैं।
3SO32− → 3SO42− + 6e−
Step 5 : दोनों half reactions जोड़ें
Cr2O72− + 3SO32− → 2Cr3+ + 3SO42−
Step 6 : O और H संतुलित करें
O atoms check करें
- LHS : 7 + (3×3) = 16
- RHS : (3×4) = 12
Difference = 4 O इसलिए 4H₂O RHS में जोड़ते हैं।
Cr2O72− + 3SO32− → 2Cr3+ + 3SO42− + 4H2O
अब H atoms संतुलित करें।
RHS में H = 8 इसलिए LHS में 8H⁺ जोड़ते हैं।
Final Balanced Reaction
Cr2O72− + 3SO32− + 8H+ → 2Cr3+ + 3SO42− + 4H2O
Verification
Total ionic charge (LHS) = (-2) + (-6) + (+8) = 0
Total ionic charge (RHS) = (+6) + (-6) = 0
LHS = RHS
