रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसमें अभिक्रिया का वेग तथा इसकी क्रियाविधि का अध्ययन किया जाता है, रासायनिक बलगतिकी कहलाती है।
किसी अभिक्रिया की गति अथवा वेग
"इकाई समय में क्रियाकारकों अथवा उत्पादों की सांद्रता में परिवर्तन को अभिक्रिया की गति अथवा वेग कहते हैं।" अर्थात
अभिक्रिया की दर या वेग = सांद्रता में परिवर्तन / लगने वाला समय
(i) किसी एक क्रियाकारक की सांद्रता में
कमी की दर अथवा
(ii) किसी एक उत्पाद की सांद्रता में
वृद्धि की दर के द्वारा व्यक्त करते हैं।
R → P
| R में कमी होने की दर = R की सांद्रता में कमी / समय = − Δ[R] / Δt = − ([R]2 − [R]1) / (t2 − t1) |
| P में वृद्धि की दर = P की सांद्रता में वृद्धि / समय = + Δ[P] / Δt = + ([P]2 − [P]1) / (t2 − t1) |
Note: क्योंकि क्रियाकारक की सांद्रता घटती है अतः Δ[R] एक ऋणात्मक मात्रा है। अभिक्रिया वेग को धनात्मक मात्रा में प्राप्त करने के लिए इसे −1 से गुणा करते हैं।
सामान्य अभिक्रिया: क्रियाकारकों की सांद्रता में कमी होने की दर तथा उत्पादों के बनने की दर को निम्न रूप से व्यक्त करते हैं।
aA + bB → cC + dD
| अभिक्रिया की दर/वेग = − 1/a Δ[A]/Δt = − 1/b Δ[B]/Δt = + 1/c Δ[C]/Δt = + 1/d Δ[D]/Δt |
उदाहरण:
2HI → H2 + I2
उदाहरण में HI की सांद्रता में कमी की दर, H2 अथवा I2 की सांद्रताओं में वृद्धि की दर से दुगुनी है अतः इन्हें समान बनाने के लिए Δ[HI] को 2 से भाग देते हैं।
| अभिक्रिया की वेग = − 1/2 Δ[HI]/Δt = + Δ[H2]/Δt = + Δ[I2]/Δt |
N2(g) + 3H2(g) → 2NH3(g)
| अभिक्रिया की वेग = − Δ[N2]/Δt = − 1/3 Δ[H2]/Δt = + 1/2 Δ[NH3]/Δt |
अभिक्रिया वेग की इकाई
[A] की सांद्रता = mole / Liter or Molarity (M)
| Δ[A] / Δt = mole / Liter.time or M(time)−1 |
➢ सभी अभिक्रियाओं में, सांद्रता को आगे एक दाब में व्यक्त करते हैं, इसलिए अभिक्रिया वेग की इकाई atm.Sec.−1 होगी।
Q: औसत अभिक्रिया वेग और तथा तात्कालिक अभिक्रिया वेग क्या होते हैं। समझाइए?
हल— औसत वेग: लम्बे समय अन्तराल के बाद परिवर्तन की औसत अभिक्रिया दर कहते हैं।
| ravg = − Δ[R] / Δt = + Δ[P] / Δt |
➢ तात्कालिक वेग rinst.: समय के किसी क्षण पर वेग तात्कालिक वेग कहलाता है।
| Δt → 0, rinst. = − d[R] / dt = + d[P] / dt |
अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कारक
निम्नलिखित कारक अभिक्रिया वेग को प्रभावित करते हैं:
| (i) सान्द्रता |
| (ii) ताप |
| (iii) उत्प्रेरक |
| (iv) पृष्ठीय क्षेत्रफल |
(i) अभिक्रिया वेग पर सांद्रता का प्रभाव
किसी दिए गए ताप पर अभिक्रिया वेग एक अथवा अनेक क्रियाकारकों तथा उत्पादों की सांद्रताओं पर निर्भर हो सकता है। इसे वेग नियम के आधार पर समझाया जा सकता है।
वेग नियम —
- प्रयोगिक मान
- अभिक्रिया का वेग क्रियाकारकों की किसी सांद्रता पर निर्भर करता है। जो कि अभिक्रिया के धीमे पद या वेग निर्धारक पद द्वारा ज्ञात किया जाता है।
- अभिक्रिया का वेग = K[A]p[B]q[C]r (p, q, r = अभिक्रिया की कोटि)
उदाहरण — नाइट्रोजन पेन्टॉक्साइड का अपघटन
2N2O5 ⟶ 4NO2 + O2
क्रियाविधि —
N2O5 Slow or RDS ⟶ NO2 + [NO3]
N2O5 + [NO3] Fast ⟶ 3NO2 + O2
कुल अभिक्रिया : 2N2O5 ⟶ 4NO2 + O2
अभिक्रिया का वेग ∝ [N2O5]1 (p = 1)
अभिक्रिया का वेग = K [N2O5] (p = 1)
अभिक्रिया की कोटि
अभिक्रिया की कोटि किसी अभिक्रिया के वेग नियम व्यंजक में प्रयुक्त सान्द्रताओं के घातांकों का योग होती है।
अभिक्रिया की कोटि 0, 1, 2, 3 अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है।
अभिक्रिया की कोटि के शून्य होने का अर्थ है कि अभिक्रिया वेग क्रियाकारकों की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता।
A + B + C → उत्पाद
अभिक्रिया का वेग
∝
[A]p [B]q [C]r
(p + q + r = अभिक्रिया की कोटि का योग)
अभिक्रिया की दर या वेग = K [A]p [B]q [C]r
K = अभिक्रिया वेग नियतांक या वेग स्थिरांक
वेग स्थिरांक (K) की इकाई
अभिक्रिया की दर या वेग = K [A]p [B]q [C]r
mol / (L × time) = K [ mol / L ](p+q+r)
K = mol / (L × time) × 1 / [ mol / L ](p+q+r)
K = [ mol / (L × time) ] × [ mol / L ]−(p+q+r) ∵ (p + q + r = Δn, अभिक्रिया की कोटि)
अथवा
वेग स्थिरांक K = [ mol / liter ]1−Δn × time−1
वेग स्थिरांक K = M1−Δn × time−1
सान्द्रता एवं समय की SI इकाई में mol L−1 एवं s लेने पर अभिक्रियाओं के लिए K की इकाइयाँ निम्न होंगी:
| अभिक्रिया | अभिक्रिया की कोटि Δn | वेग स्थिरांक (K) की इकाई |
|---|---|---|
| शून्य कोटि अभिक्रिया | Δn = 0 | K = [mol / L]1−0 × s−1 = mol L−1 s−1 |
| प्रथम कोटि अभिक्रिया | Δn = 1 | K = [mol / L]1−1 × s−1 = s−1 |
| द्वितीय कोटि अभिक्रिया | Δn = 2 | K = mol−1 L s−1 |
| तृतीय कोटि अभिक्रिया | Δn = 3 | K = mol−2 L2 s−1 |
Note : गैसीय अभिक्रियाओं के लिए वेग स्थिरांक (K) की इकाई गैसीय क्रियाकारकों के लिए सान्द्रता या दाब के पदों में व्यक्त की जाती है। दाब की इकाई atm या bar होती है। अतः n कोटि की गैसीय अभिक्रियाओं के लिए वेग स्थिरांक की इकाई:
K = (atm)1−Δn × s−1 या (bar)1−Δn × s−1
विशिष्ट अभिक्रिया वेग
विशिष्ट अभिक्रिया वेग या वेग नियतांक उस अभिक्रिया वेग के बराबर होता है, जिसमें प्रत्येक क्रियाकारक का सक्रिय द्रव्यमान (मोलर सान्द्रता) 1 मोल प्रति लीटर हो।
अभिक्रिया की दर या वेग
=
K [A]p [B]q [C]r
[A] = [B] = [C] = 1 mole/liter
अतः विशिष्ट अभिक्रिया वेग या वेग नियतांक = K
विभिन्न कोटि की अभिक्रिया के उदाहरण:
|
शून्य कोटि की अभिक्रिया (P = 0) CH4 + 2Cl2 Sun light → CCl4 + 4HCl अभिक्रिया का वेग = K [CH4]p [Cl2]q (p + q = 0) अभिक्रिया के दर या वेग = K |
प्रथम कोटि की अभिक्रिया (P = 1) 2N2O5 → 4NO2 + O2 अभिक्रिया के दर या वेग = K[N2O5]1 |
|
द्वितीय कोटि की अभिक्रिया (P = 2) 2HI → I2 + H2 अभिक्रिया के दर या वेग = K[HI]2 |
तृतीय कोटि की अभिक्रिया (P = 3) 2NO + O2 → 2NO2 अभिक्रिया का वेग = K [NO]2 [O2]1 (2 + 1 = 3) |
छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया
- वे अभिक्रियाएँ जिनमें क्रियाकारक दो या दो से अधिक होते हैं, परन्तु अभिक्रिया की कोटि केवल एक क्रियाकारक की सान्द्रता पर निर्भर करती है।
- जब कोई एक क्रियाकारक अत्यधिक मात्रा में उपस्थित होता है, तो उस अभिक्रिया के वेग पर उसकी सान्द्रता का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस प्रकार के क्रियाकारक को छद्म क्रियाकारक कहते हैं।
- ये ऐसी क्रियाकारकों की अभिक्रियाएँ हैं तो द्वितीय लेकिन वेग नियम में अनुपस्थित होती हैं। अर्थात इन छद्म क्रियाकारकों की मुख्य कोटि की अभिक्रियाएँ होती हैं।
A + B ⟶ उत्पाद
(अधिक मात्रा में)
अभिक्रिया की दर या वेग = K[A]p[B]q (∵ q = 0)
अभिक्रिया की दर या वेग = K[A]p (∵ p = 1)
उदाहरण:
(1) एस्टर का अम्लीय जल अपघटन
CH3COOC2H5 + H2O ⟶ CH3COOH + C2H5OH
अभिक्रिया की दर या वेग = k [CH3COOC2H5]
(2) केन का अम्लीय जल अपघटन
C12H22O11 + H2O H+ ⟶ C6H12O6 + C6H12O6
अभिक्रिया का वेग = k [C12H22O11]
इन अभिक्रियाओं में वेग केवल शर्करा या एस्टर पर निर्भर करता है। तथा जल की मात्रा में परिवर्तन करने पर अभिक्रियाओं का वेग परिवर्तित नहीं होता है। एवं अभिक्रिया एकपदी होती है, परन्तु इन्हें छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।
अभिक्रिया की आण्विकता अथवा अणुसंख्यता
प्राथमिक अथवा सरल अभिक्रियाएँ : वे अभिक्रियाएँ जो एक पद में होने वाली अभिक्रियाएँ होती हैं, उन्हें प्राथमिक अभिक्रियाएँ कहते हैं।
जटिल अथवा बहुपदी अभिक्रियाएँ : जब प्राथमिक अभिक्रियाएँ एक पद में न होकर बल्कि कई पदों में सम्पन्न होकर उत्पाद बनाती हों, तब ऐसी अभिक्रियाओं को जटिल अभिक्रियाएँ कहते हैं।
अभिक्रिया की आण्विकता
प्राथमिक अभिक्रिया में भाग लेने वाली स्पीशीज (परमाणु, आयन अथवा अणु) जो कि एक साथ टक्कर करके अभिक्रिया करती हैं, उनकी संख्या को अभिक्रिया की आण्विकता कहते हैं।
वेग निर्धारक पद या धीमे पद में उपस्थित स्पीशीज (परमाणु, आयन अथवा अणु) की संख्या ही उस अभिक्रिया की आण्विकता कहलाती है।
जटिल अभिक्रियाओं में कोटि सबसे मंद पद की दी जाती है तथा सबसे मंद पद की आण्विकता तथा कोटि समान होती है।
अभिक्रिया की आण्विकता शून्य, ऋणात्मक या भिन्नात्मक नहीं हो सकती।
एक-अणुक : जब प्राथमिक अभिक्रिया में एक स्पीशीज भाग लेता है, तो अभिक्रिया एक-अणुक कहलाती है।
उदाहरण: अमोनियम नाइट्राइट का अपघटन
NH4NO2 → N2 + 2H2O
द्वि-अणुक : जब प्राथमिक अभिक्रिया में एक साथ दो स्पीशीज की टक्कर होती है।
उदाहरण: हाइड्रोजन आयोडाइड का वियोजन
2HI → H2 + I2
त्रि-अणुक : जब प्राथमिक अभिक्रिया में एक साथ तीन स्पीशीज की टक्कर होती है।
उदाहरण:
2NO + O2 → 2NO2
उचित विन्यास के साथ तीन से अधिक क्रियाकारक अणुओं के एक साथ संघट्टित होने की संभावना अत्यन्त कम होती है। अतः त्रि-अणुक आण्विकता की अभिक्रियाएँ बहुत कम होती हैं और धीमी गति से बढ़ती हैं।
अभिक्रिया की कोटि का निर्धारण
अभिक्रिया की कोटि का निर्धारण निम्न विधियों द्वारा किया जाता है:
- प्रारम्भिक वेग विधि
- समाकलित वेग नियम
1. प्रारम्भिक वेग विधि
उदाहरण – 1
A → उत्पाद
| [A] (M) | वेग (M/min) |
|---|---|
| 2 M | 6 × 10−3 |
| 4 M | 2.4 × 10−2 |
माना कि:
अभिक्रिया की दर या वेग = K[A]p
अभिक्रिया की कोटि:
6 × 10−3 = K(2)p ...(i)
24 × 10−3 = K(4)p ...(ii)
अब (ii) / (i) करने पर,
(24 × 10−3) / (6 × 10−3) = K(4)p / K(2)p
4 = (2)p or p = 2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 2
K का मान:
6 × 10−3 (M/min) = K(2 M)2
∴ K = 1.5 × 10−3 M−1 min−1
वेग समीकरण:
वेग = K[A]p
वेग = 1.5 × 10−3 M−1 min−1 (A M)2
उदाहरण – 2
A → उत्पाद
| A (M) | Rate (M/sec.) |
|---|---|
| 3.2 | 6 × 10−3 |
| 6.4 | 8.4 × 10−3 |
माना कि:
अभिक्रिया की दर या वेग = K[A]p
अभिक्रिया की कोटि:
6 × 10−3 = K(3.2)p ...(i)
8.4 × 10−3 = K(6.4)p ...(ii)
अब (ii)/(i) करने पर,
(8.4 × 10−3) / (6 × 10−3) = K(6.4)p / K(3.2)p
1.4 = (2)p or √2 = (2)p
(2)1/2 = (2)p or p = 1/2
अतः अभिक्रिया की कोटि = 1/2
K का मान:
6 × 10−3 M/sec. = K(3.2M)1/2
∴ K = (6 × 10−3 M/sec.) / (3.2M)1/2
K = (6 × 10−3 M1/2) / (√3.2 sec.)
वेग समीकरण:
वेग = K[A]p
वेग = ((6 × 10−3 M1/2) / (√3.2 sec.)) (A)1/2
समाकलित वेग समीकरण
शून्य कोटि की अभिक्रिया
"शून्य कोटि" की अभिक्रिया का अर्थ होता है ऐसी अभिक्रिया जिसका वेग क्रियाकारक की सान्द्रता के शून्य घातांक के समानुपाती हो।
R ⟶ उत्पाद
वेग = − d[R] / dt = K[R]p (∵ p = 0)
− d[R] / dt = K[R]0 (∵ x0 = 1)
d[R] = −K dt
समाकलन करने पर
[R] = −Kt + I (I = समाकलन स्थिरांक) ...(i)
t = 0 पर क्रियाकारक की सान्द्रता का मान [R]0 माना जाता है, जहाँ [R]0 क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता है।
[R]0 = K×0 + I
[R]0 = I
I का मान समीकरण (i) में रखने पर
[R] = −Kt + [R]0 या [R] = [R]0 − Kt
K = ([R]0 − [R]) / t
जहाँ
K = वेग स्थिरांक
[R]0 = क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता, t = 0 पर
[R] = क्रियाकारक की किसी समय t पर सान्द्रता
उत्पाद के लिए —
[R]0 − [R] = x (उत्पाद की सान्द्रता)
K = x / t or x = Kt
शून्य कोटि की अर्ध आयु t1/2
किसी अभिक्रिया में क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता के आधे (Half) होने में जितना समय लगता है, उसे अर्धायु कहते हैं। इसे t1/2 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
हम जानते हैं कि
K = [R]0 − [R] / t
t = t1/2 पर, [R] = [R]0 / 2
t1/2 पर वेग स्थिरांक होगा —
K = ([R]0 − [R]0/2) / t1/2 अथवा t1/2 = [R]0 / 2K
शून्य कोटि की अभिक्रिया में t1/2 क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता के समानुपाती तथा वेग स्थिरांक के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
शून्य कोटि की अभिक्रिया के उदाहरण:
- H2 व Cl2 के बीच प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया — H2(g) + Cl2(g) hν → 2HCl(g)
- N2O का गर्म Pt की सतह पर अपघटन — 2N2O Hot Pt → 2N2 + O2
- मोलिब्डेनम या टंगस्टन की उपस्थिति में NH3 का अपघटन — 2NH3 [Mo] → N2 + 3H2
प्रथम कोटि की अभिक्रिया
"प्रथम कोटि" की अभिक्रिया का अर्थ है, ऐसी अभिक्रिया जिसका वेग क्रियाकारक की सान्द्रता के प्रथम घातांक के समानुपाती होता है।
उदाहरण —
R ⟶ उत्पाद
वेग = − d[R] / dt = K[R]p (∵ p = 1)
− d[R] / dt = K[R]1
− d[R] / [R] = K dt
समाकलन करने पर
− ln[R] = Kt + I (I = समाकलन स्थिरांक) ...(i)
t = 0 पर क्रियाकारक [R] की सान्द्रता [R]0 है, जहाँ [R]0 क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता है।
− ln[R]0 = K × 0 + I
− ln[R]0 = I
I का मान समीकरण (i) में रखने पर
− ln[R] = Kt − ln[R]0 या ln[R] = ln[R]0 − Kt
ln[R]0 − ln[R] = Kt
ln([R]0 / [R]) = Kt अथवा K = (1 / t) ln([R]0 / [R])
K = (2.303 / t) log([R]0 / [R]) अथवा t = (2.303 / K) log([R]0 / [R])
जहाँ
K = वेग स्थिरांक
[R]0 = क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता, t = 0 पर
[R] = क्रियाकारक की किसी समय t पर बची हुई सान्द्रता
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्ध-आयु (t1/2)
किसी अभिक्रिया में क्रियाकारक की प्रारम्भिक सान्द्रता के आधे (Half) होने में जितना समय लगता है, उसे अर्धायु कहते हैं। इसे t1/2 द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
हम जानते हैं कि
K = (2.303 / t) log ([R]0 / [R])
t = t1/2 पर, [R] = [R]0 / 2
t1/2 पर वेग स्थिरांक होगा —
K = (2.303 / t1/2) log ([R]0 / ([R]0/2))
अथवा K = (2.303 / t1/2) log 2 (∵ log 2 = 0.3010)
K = (2.303 / t1/2) × 0.3010
K = 0.693 / t1/2 अथवा t1/2 = 0.693 / K
प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए अर्धायु स्थिरांक होती है, अर्थात यह क्रियाकारकों की प्रारम्भिक सान्द्रताओं पर निर्भर नहीं होती।
उदाहरण —
- NH4NO2(s) → N2(g) + H2O(l) r = K[NH4NO2]
- 2N2O5 → 4NO2 + O2 r = K[N2O5]
- एस्टर का अम्लीय जल अपघटन
- रेडियो एक्टिव तत्वों का विघटन
रेडियो एक्टिव तत्वों का विघटन
रेडियो एक्टिव तत्वों का विघटन एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया होती है।
A → उत्पाद A = रेडियो एक्टिव तत्व
यदि t = 0 समय पर A की परमाणुओं की संख्या N0 तथा किसी समय t पर Nt हो, तो
λ = (2.303 / t) log (N0 / Nt) (λ = क्षयांक)
अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता
ताप बढ़ने पर अभिक्रिया का वेग बढ़ता है। अतः प्रयोगों द्वारा यह पाया गया कि किसी रासायनिक अभिक्रिया में 10°C ताप में वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगुनी वृद्धि होती है।
α = r(t+10) / r(t)
"ताप गुणांक" (α): किसी अभिक्रिया के 10°C ताप के अन्तर पर वेग नियतांकों का अनुपात "ताप गुणांक" (α) कहलाता है।
r(t+10) / r(t) = αΔt/10
प्रत्येक 10°C तापमान में वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया का वेग दुगुना हो जाता है। यदि तापमान में 50°C की वृद्धि हो, तो वेग में लगभग वृद्धि होगी।
r(t+10) / r(t) = 2, ताप को 50°C तक बढ़ाने के लिये अर्थात् 5 गुना, 25 = 32
अर्थात् वेग 32 गुना बढ़ जाता है।
ताप गुणांक को परिभाषित करो। एक अभिक्रिया का ताप गुणांक 4 है, तो इससे क्या निष्कर्ष निकलता है?
हल — ताप गुणांक (α): किसी अभिक्रिया के 10°C ताप के अन्तर पर वेग नियतांकों का अनुपात ताप गुणांक कहलाता है।
r(t+10) / r(t) = αΔt/10
यदि किसी अभिक्रिया का ताप गुणांक 4 है, तो इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि अभिक्रिया का ताप 10°C बढ़ाने पर अभिक्रिया का वेग 4 गुना हो जाता है।
अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता (आरेनियस समीकरण): रासायनिक अभिक्रिया का संघट्ट सिद्धांत
Q: संघट्ट आवृत्ति क्या होती है? रासायनिक अभिक्रियाओं के संघट्ट सिद्धांत को समझाइए।
हल — अभिक्रिया मिश्रण के प्रति इकाई आयतन में प्रति सेकण्ड टक्करों की संख्या को संघट्ट या टक्कर आवृत्ति (A) कहते हैं।
प्रभावी संघट्ट या टक्कर सिद्धांत: वे संघट्ट जिनमें अणुओं की पर्याप्त गतिज ऊर्जा (देहली ऊर्जा) तथा सही अभिविन्यास होता है, जिससे क्रियाकारक स्पीशीज के बंधों के टूटने तथा उत्पादों में नए बंधों के बनने से उत्पादों का बनना आसान हो जाता है, उन्हें प्रभावी टक्कर या प्रभावी संघट्ट कहते हैं।
इस प्रक्रिया में दो प्रकार के अवरोध होते हैं:
- अभिविन्यास अवरोध (Orientation barriers)
- ऊर्जा अवरोध (Energy barriers)
अभिविन्यास अवरोध
यह अवरोध इस पर आधारित है कि क्रियाकारकों के मध्य टक्कर किस प्रकार हो रही है।
क्रियाकारकों के सही अभिविन्यास होने के कारण, जब क्रियाकारक आपस में टकराते हैं, तो टक्कर के परिणामस्वरूप पुराने बंध टूट जाते हैं और नए बंध बन जाते हैं।
उदाहरण के लिए —
ऊर्जा अवरोध (Energy barriers)
क्रियाकारक सीधे ही उत्पाद में नहीं बदलते हैं।
सर्वप्रथम वे सक्रियण ऊर्जा के बराबर ऊर्जा का अवशोषण करते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा देहली ऊर्जा के बराबर आ जाती है और वे सक्रिय संकुल का निर्माण करते हैं।
सक्रिय संकुल अस्थायी होने के कारण जल्द ही उत्पाद में बदल जाता है। और जब उत्पाद बनता है, तो एन्थैल्पी में परिवर्तन ऊष्माक्षेपी अथवा ऊष्माशोषी हो सकता है।
देहली ऊर्जा (ET) : ऊर्जा की वह न्यूनतम मात्रा जो क्रियाकारक अणुओं के पास होनी चाहिए, जिससे वे उत्पाद में बदल सकें, देहली ऊर्जा कहलाती है।
सक्रियण ऊर्जा (Ea) : ऊर्जा की वह अतिरिक्त मात्रा (अणुओं की औसत ऊर्जा से अधिक) जो क्रियाकारक अणुओं के पास अभिक्रिया करने के लिए आवश्यक होती है।
Q: रासायनिक अभिक्रिया में 10℃ ताप में वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दोगुनी वृद्धि होती है। नामांकित वितरण वक्र से समझाइए?
हल —
क्रियाकारक के सारे अणुओं की गतिज ऊर्जा समान नहीं होती। इसे निम्न वक्र द्वारा समझाया जाता है।
वक्र का शीर्ष, अति संभाव्य गतिज ऊर्जा अर्थात् अणुओं के सर्वाधिक अंश की गतिज ऊर्जा को बताता है। इस गतिज ऊर्जा से कम अथवा अधिक ऊर्जा वाले अणुओं की संख्या कम होती जाती है।
जब ताप बढ़ाया जाता है, तो अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त अणुओं का अनुपात बढ़ जाने से वक्र का शीर्ष अधिक ऊर्जा मान की ओर विस्थापित हो जाता है तथा वक्र का फैलाव दाहिनी ओर बढ़ जाता है।
अतः किसी पदार्थ के तापमान में वृद्धि करने से टक्कर करने वाले अणुओं की संख्या में वृद्धि होती है।
अतः (t + 10) तापमान पर सक्रियण ऊर्जा या इससे अधिक ऊर्जा प्राप्त अणुओं को प्रदर्शित करने वाला क्षेत्रफल लगभग दो गुना हो जाता है। इसलिए अभिक्रिया वेग भी दोगुना हो जाता है।
आरेनियस समीकरण
आरेनियस ने वेग स्थिरांक और ताप के बीच निम्न मात्रात्मक सम्बन्ध दिया —
k = A e−Ea/RT ...(i)
जहाँ
A = आरेनियस कारक / टक्कर आवृत्ति
Ea = सक्रियण ऊर्जा
T = परम ताप
R = गैस स्थिरांक
समीकरण (i) का प्राकृतिक लघुगणक लेने पर —
ln k = ln(Ae−Ea/RT)
ln k = ln A + ln e−Ea/RT
ln k = ln A − (Ea/RT) ln e (∵ ln e = 1)
ln K = ln A − Ea / RT
(∵ ln x = 2.303 log10 x)
2.303 log K = 2.303 log A − Ea / RT
log K = log A − Ea / 2.303 RT
K1 तथा K2 क्रमशः तापमान T1 तथा T2 पर वेग स्थिरांक हैं।
ताप T1 पर lnK1 = ln A − Ea / RT1 ...(i)
ताप T2 पर lnK2 = ln A − Ea / RT2 ...(ii)
समीकरण (2) − (1) करने पर —
lnK2 − lnK1 = (ln A − Ea/RT2) − (ln A − Ea/RT1)
lnK2 − lnK1 = − Ea/RT2 + Ea/RT1
lnK2 − lnK1 = Ea/R (1/T1 − 1/T2)
ln(K2/K1) = Ea/R (T2 − T1) / (T1T2)
2.303 log(K2/K1) = Ea/R (T2 − T1) / (T1T2)
log(K2/K1) = Ea / 2.303R (T2 − T1) / (T1T2)
Note: ईंधनों को दहन अभिक्रियाओं के लिए करने पर ताप पर सक्रियण ऊर्जा काफी कम हो जाती है। अतः ईंधन स्वयं नहीं जलते।
उत्प्रेरक का प्रभाव
उत्प्रेरक वह पदार्थ है जिसमें स्वयं स्थायी रासायनिक परिवर्तन हुए बिना, यह अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है।
उत्प्रेरक एक वैकल्पिक पथ अथवा क्रियाविधि से क्रियाकारकों व उत्पादों के मध्य सक्रियण ऊर्जा को कम करता है।
सक्रियण ऊर्जा का मान जितना कम होगा, अभिक्रिया का वेग उतना अधिक होगा।
उत्प्रेरक की लघु मात्रा क्रियाकारकों की दीर्घ मात्रा को उत्प्रेरित कर सकती है।
उत्प्रेरक, अभिक्रिया की गिब्स ऊर्जा, ∆G में बदलाव नहीं करता। यह स्वतः प्रवर्तित अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करता है, परन्तु स्वतः अप्रवर्तित अभिक्रिया को उत्प्रेरित नहीं करता।
उत्प्रेरक सक्रिय अणुओं के भाग या अंश को बढ़ाता है, जिससे K बढ़ता है।
उत्प्रेरक किसी अभिक्रिया के साम्य स्थिरांक में परिवर्तन नहीं करता, किन्तु यह साम्य को शीघ्र स्थापित करने में सहायता करता है।
पृष्ठीय क्षेत्रफल
पृष्ठीय क्षेत्रफल ∝ A तथा अभिक्रिया वेग ∝ K
किरण प्रभाव : अभिक्रिया जो UV rays या प्रकाश द्वारा प्रभावित होती है, उसे प्रकाश रासायनिक अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण:
CH4 + Cl2 Dark → No reaction
CH4 + Cl2 Sun light → CCl4 + 4HCl
